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मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में आज से नियमित सुनवाई शुरू, सभी बेंचें करेंगी काम
जबलपुर,(म.प्र.)
समर वेकेशन समाप्त होने के बाद जबलपुर, इंदौर और ग्वालियर खंडपीठ में फिर शुरू होगा नियमित न्यायिक कार्य, प्रशासनिक बदलावों की भी चर्चा
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में एक महीने के ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद सोमवार से नियमित न्यायिक कार्य फिर शुरू हो गया है। जबलपुर स्थित मुख्यपीठ के साथ-साथ इंदौर और ग्वालियर खंडपीठ में भी सभी नियमित बेंचें अब पूर्व की तरह मामलों की सुनवाई करेंगी। लंबे अवकाश के बाद अदालतों में एक बार फिर सामान्य गतिविधियां लौटने से वकीलों, पक्षकारों और न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है। पिछले एक महीने के दौरान केवल जरूरी और अत्यावश्यक मामलों की ही सुनवाई हो रही थी, जबकि बड़ी संख्या में नियमित मामलों की सुनवाई अवकाश समाप्त होने का इंतजार कर रही थी।
इस वर्ष हाईकोर्ट का समर वेकेशन 16 मई से शुरू होकर 14 जून तक चला। इस दौरान अदालत पूरी तरह बंद नहीं रही बल्कि विशेष व्यवस्था के तहत वेकेशन बेंचों का गठन किया गया था। इन बेंचों ने आवश्यक मामलों पर सुनवाई जारी रखी। हालांकि नियमित मामलों की संख्या काफी अधिक होने के कारण बड़ी संख्या में प्रकरण लंबित रहे, जिनकी सुनवाई अब शुरू होगी। न्यायिक हलकों में माना जा रहा है कि अवकाश के बाद शुरुआती दिनों में अदालतों में मामलों की संख्या सामान्य से अधिक रह सकती है क्योंकि बड़ी संख्या में लंबित याचिकाएं और अपीलें सूचीबद्ध की जाएंगी।
इस बार समर वेकेशन के दौरान सुनवाई की व्यवस्था भी कुछ अलग रही। आमतौर पर ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान वेकेशन बेंच सप्ताह में केवल दो दिन बैठती थी, लेकिन न्यायिक कार्यों की निरंतरता बनाए रखने के उद्देश्य से इस बार नई व्यवस्था लागू की गई। विशेष बेंचों ने सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को सुनवाई की। अधिकारियों के अनुसार इस व्यवस्था का सकारात्मक प्रभाव देखने को मिला और कई अर्जेंट मामलों का समय पर निराकरण हो सका। साथ ही लंबित मामलों के दबाव को भी कुछ हद तक नियंत्रित करने में मदद मिली।
हाईकोर्ट में नियमित सुनवाई की शुरुआत ऐसे समय हो रही है जब न्यायिक प्रशासन में भी महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल रहे हैं। पूर्व मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा के सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नत होने के बाद हाईकोर्ट की जिम्मेदारी फिलहाल एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया संभाल रहे हैं। उनके नेतृत्व में अब नियमित बेंचों का संचालन किया जाएगा। न्यायिक समुदाय की नजरें इस बात पर भी टिकी हुई हैं कि आने वाले दिनों में प्रशासनिक स्तर पर क्या बदलाव किए जाते हैं और न्यायिक व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए कौन से कदम उठाए जाते हैं।
इंदौर खंडपीठ में भी जल्द प्रशासनिक फेरबदल देखने को मिल सकता है। इंदौर खंडपीठ के प्रशासनिक न्यायाधीश जस्टिस विजय कुमार शुक्ला इस महीने के अंत में सेवानिवृत्त होने जा रहे हैं। उनकी सेवानिवृत्ति से पहले और उसके बाद न्यायिक जिम्मेदारियों के पुनर्वितरण को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। न्यायिक सूत्रों का कहना है कि मुख्यपीठ से किसी वरिष्ठ न्यायाधीश को इंदौर भेजा जा सकता है ताकि प्रशासनिक कार्यों में निरंतरता बनी रहे। हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
बताया जा रहा है कि जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस सुबोध अभ्यंकर के नाम संभावित प्रशासनिक जिम्मेदारियों के लिए चर्चा में हैं। यदि ऐसा होता है तो इंदौर खंडपीठ के प्रशासनिक ढांचे में बदलाव देखने को मिल सकता है। न्यायिक हलकों का मानना है कि प्रशासनिक पदों पर अनुभवी न्यायाधीशों की नियुक्ति से मामलों के प्रबंधन और न्यायिक कार्यों के संचालन में गति आएगी।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के सामने एक बड़ी चुनौती न्यायाधीशों के रिक्त पदों की भी है। वर्तमान में हाईकोर्ट में कुल 53 न्यायाधीशों के पद स्वीकृत हैं, लेकिन सभी पद भरे नहीं हैं। जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की सेवानिवृत्ति के बाद कार्यरत न्यायाधीशों की संख्या और कम होकर 37 रह जाएगी। इसका मतलब है कि कुल 16 पद रिक्त हो जाएंगे। न्यायिक विशेषज्ञों का कहना है कि न्यायाधीशों की कमी का सीधा असर मामलों के निपटारे की गति पर पड़ता है।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में पहले से ही बड़ी संख्या में मामले लंबित हैं। ऐसे में रिक्त पदों को जल्द भरना आवश्यक माना जा रहा है। यदि समय रहते नियुक्तियां नहीं हुईं तो लंबित मामलों का बोझ और बढ़ सकता है। वहीं दूसरी ओर अदालतों में तकनीकी सुधार, ई-कोर्ट व्यवस्था और बेहतर केस मैनेजमेंट सिस्टम के जरिए भी लंबित मामलों को कम करने की कोशिशें जारी हैं। समर वेकेशन समाप्त होने के साथ ही हाईकोर्ट की सभी नियमित बेंचों में कामकाज सामान्य हो गया है। पक्षकारों को अब अपने मामलों की सुनवाई के लिए नई तारीखों का इंतजार नहीं करना पड़ेगा और नियमित न्यायिक प्रक्रिया फिर से गति पकड़ती दिखाई दे रही है।
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मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में आज से नियमित सुनवाई शुरू, सभी बेंचें करेंगी काम
जबलपुर,(म.प्र.)
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में एक महीने के ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद सोमवार से नियमित न्यायिक कार्य फिर शुरू हो गया है। जबलपुर स्थित मुख्यपीठ के साथ-साथ इंदौर और ग्वालियर खंडपीठ में भी सभी नियमित बेंचें अब पूर्व की तरह मामलों की सुनवाई करेंगी। लंबे अवकाश के बाद अदालतों में एक बार फिर सामान्य गतिविधियां लौटने से वकीलों, पक्षकारों और न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है। पिछले एक महीने के दौरान केवल जरूरी और अत्यावश्यक मामलों की ही सुनवाई हो रही थी, जबकि बड़ी संख्या में नियमित मामलों की सुनवाई अवकाश समाप्त होने का इंतजार कर रही थी।
इस वर्ष हाईकोर्ट का समर वेकेशन 16 मई से शुरू होकर 14 जून तक चला। इस दौरान अदालत पूरी तरह बंद नहीं रही बल्कि विशेष व्यवस्था के तहत वेकेशन बेंचों का गठन किया गया था। इन बेंचों ने आवश्यक मामलों पर सुनवाई जारी रखी। हालांकि नियमित मामलों की संख्या काफी अधिक होने के कारण बड़ी संख्या में प्रकरण लंबित रहे, जिनकी सुनवाई अब शुरू होगी। न्यायिक हलकों में माना जा रहा है कि अवकाश के बाद शुरुआती दिनों में अदालतों में मामलों की संख्या सामान्य से अधिक रह सकती है क्योंकि बड़ी संख्या में लंबित याचिकाएं और अपीलें सूचीबद्ध की जाएंगी।
इस बार समर वेकेशन के दौरान सुनवाई की व्यवस्था भी कुछ अलग रही। आमतौर पर ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान वेकेशन बेंच सप्ताह में केवल दो दिन बैठती थी, लेकिन न्यायिक कार्यों की निरंतरता बनाए रखने के उद्देश्य से इस बार नई व्यवस्था लागू की गई। विशेष बेंचों ने सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को सुनवाई की। अधिकारियों के अनुसार इस व्यवस्था का सकारात्मक प्रभाव देखने को मिला और कई अर्जेंट मामलों का समय पर निराकरण हो सका। साथ ही लंबित मामलों के दबाव को भी कुछ हद तक नियंत्रित करने में मदद मिली।
हाईकोर्ट में नियमित सुनवाई की शुरुआत ऐसे समय हो रही है जब न्यायिक प्रशासन में भी महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल रहे हैं। पूर्व मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा के सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नत होने के बाद हाईकोर्ट की जिम्मेदारी फिलहाल एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया संभाल रहे हैं। उनके नेतृत्व में अब नियमित बेंचों का संचालन किया जाएगा। न्यायिक समुदाय की नजरें इस बात पर भी टिकी हुई हैं कि आने वाले दिनों में प्रशासनिक स्तर पर क्या बदलाव किए जाते हैं और न्यायिक व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए कौन से कदम उठाए जाते हैं।
इंदौर खंडपीठ में भी जल्द प्रशासनिक फेरबदल देखने को मिल सकता है। इंदौर खंडपीठ के प्रशासनिक न्यायाधीश जस्टिस विजय कुमार शुक्ला इस महीने के अंत में सेवानिवृत्त होने जा रहे हैं। उनकी सेवानिवृत्ति से पहले और उसके बाद न्यायिक जिम्मेदारियों के पुनर्वितरण को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। न्यायिक सूत्रों का कहना है कि मुख्यपीठ से किसी वरिष्ठ न्यायाधीश को इंदौर भेजा जा सकता है ताकि प्रशासनिक कार्यों में निरंतरता बनी रहे। हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
बताया जा रहा है कि जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस सुबोध अभ्यंकर के नाम संभावित प्रशासनिक जिम्मेदारियों के लिए चर्चा में हैं। यदि ऐसा होता है तो इंदौर खंडपीठ के प्रशासनिक ढांचे में बदलाव देखने को मिल सकता है। न्यायिक हलकों का मानना है कि प्रशासनिक पदों पर अनुभवी न्यायाधीशों की नियुक्ति से मामलों के प्रबंधन और न्यायिक कार्यों के संचालन में गति आएगी।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के सामने एक बड़ी चुनौती न्यायाधीशों के रिक्त पदों की भी है। वर्तमान में हाईकोर्ट में कुल 53 न्यायाधीशों के पद स्वीकृत हैं, लेकिन सभी पद भरे नहीं हैं। जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की सेवानिवृत्ति के बाद कार्यरत न्यायाधीशों की संख्या और कम होकर 37 रह जाएगी। इसका मतलब है कि कुल 16 पद रिक्त हो जाएंगे। न्यायिक विशेषज्ञों का कहना है कि न्यायाधीशों की कमी का सीधा असर मामलों के निपटारे की गति पर पड़ता है।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में पहले से ही बड़ी संख्या में मामले लंबित हैं। ऐसे में रिक्त पदों को जल्द भरना आवश्यक माना जा रहा है। यदि समय रहते नियुक्तियां नहीं हुईं तो लंबित मामलों का बोझ और बढ़ सकता है। वहीं दूसरी ओर अदालतों में तकनीकी सुधार, ई-कोर्ट व्यवस्था और बेहतर केस मैनेजमेंट सिस्टम के जरिए भी लंबित मामलों को कम करने की कोशिशें जारी हैं। समर वेकेशन समाप्त होने के साथ ही हाईकोर्ट की सभी नियमित बेंचों में कामकाज सामान्य हो गया है। पक्षकारों को अब अपने मामलों की सुनवाई के लिए नई तारीखों का इंतजार नहीं करना पड़ेगा और नियमित न्यायिक प्रक्रिया फिर से गति पकड़ती दिखाई दे रही है।
