इंदौर में आवारा कुत्ते का आतंक

इंदौर,(म.प्र.)

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बाणगंगा और सांवेर रोड क्षेत्र में एक खूंखार आवारा कुत्ते ने मचाया आतंक, अस्पताल से लेकर गांव और कॉलेज तक लोगों पर हमला, नगर निगम की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल।

इंदौर शहर में शुक्रवार को एक ऐसी घटना सामने आई जिसने लोगों को दहशत में डाल दिया। शहर के बाणगंगा क्षेत्र और सांवेर रोड इलाके में एक आवारा कुत्ते ने महज 10 घंटे के भीतर 42 लोगों को काटकर घायल कर दिया। घायलों में दो महिला डॉक्टर, नर्स, अस्पताल कर्मचारी, सुरक्षा गार्ड, छात्र और ग्रामीण शामिल बताए जा रहे हैं। घटना के बाद पूरे इलाके में भय का माहौल बन गया और लोग अपने घरों से निकलने में भी सतर्कता बरतते नजर आए। सबसे अधिक चिंता की बात यह रही कि कुत्ते का आतंक अस्पताल परिसर से शुरू होकर गांवों और शैक्षणिक संस्थानों तक पहुंच गया। लगभग आठ किलोमीटर के दायरे में हुए हमलों ने प्रशासन और नगर निगम की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार यह सिलसिला शुक्रवार सुबह करीब 9 बजे शुरू हुआ। बताया जा रहा है कि आवारा कुत्ता सबसे पहले अरबिंदो अस्पताल परिसर में पहुंचा। यहां उसने अचानक लोगों पर हमला करना शुरू कर दिया। अस्पताल परिसर में मौजूद मरीज, उनके परिजन, नर्सिंग स्टाफ, डॉक्टर और सुरक्षा कर्मी उसके निशाने पर आ गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कुत्ता बेहद आक्रामक व्यवहार कर रहा था और सामने आने वाले हर व्यक्ति पर झपट रहा था। कुछ ही देर में अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी मच गई। लोग खुद को बचाने के लिए इधर-उधर भागते दिखाई दिए। कई लोग कमरों और भवनों के भीतर छिप गए जबकि कुछ ने डंडों और अन्य वस्तुओं की मदद से खुद का बचाव करने की कोशिश की।

अस्पताल में हमला करने के बाद कुत्ता कैंसर अस्पताल की दिशा में पहुंचा और वहां भी कई लोगों को घायल कर दिया। हमले में दो महिला डॉक्टरों के साथ नर्सें, मरीज, मेडिकल छात्र और अटेंडर्स भी शामिल बताए जा रहे हैं। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि अस्पताल प्रशासन को तत्काल चिकित्सा सहायता की व्यवस्था बढ़ानी पड़ी। घायल लोगों को तुरंत एंटी-रेबीज इंजेक्शन लगाए गए और जिन मरीजों के घाव गंभीर श्रेणी के पाए गए, उन्हें विशेष जीवन रक्षक सीरम भी दिया गया। अस्पताल सूत्रों के अनुसार कई घायलों की स्थिति स्थिर है, लेकिन उन्हें निगरानी में रखा गया है।

अस्पताल क्षेत्र से निकलने के बाद यह कुत्ता ग्राम बरदरी और रेवती रेंज की ओर पहुंच गया। यहां उसने ग्रामीणों पर हमला किया और कई लोगों को घायल कर दिया। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार नगर निगम और संबंधित विभागों को आवारा कुत्तों की समस्या के बारे में सूचना दी थी, लेकिन समय रहते कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। हालात ऐसे बन गए कि लोगों को खुद ही लाठियां लेकर कुत्ते से बचाव करना पड़ा। कई जगह ग्रामीण समूह बनाकर निगरानी करते रहे ताकि बच्चों और बुजुर्गों को सुरक्षित रखा जा सके।

घटना यहीं नहीं रुकी। बताया जा रहा है कि कुत्ता करीब आठ किलोमीटर दूर स्थित रेनेसां कॉलेज परिसर तक पहुंच गया, जहां उसने तीन अन्य लोगों को घायल कर दिया। कॉलेज परिसर में अचानक हुए हमले के बाद छात्रों के बीच भी दहशत फैल गई। कुछ समय के लिए परिसर में सामान्य गतिविधियां प्रभावित हुईं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार किसी को समझ नहीं आ रहा था कि कुत्ता किस दिशा से आएगा और किस पर हमला करेगा।

घटना के बाद नगर निगम की भूमिका को लेकर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों और पीड़ितों का आरोप है कि समय पर कार्रवाई होती तो इतने लोग घायल नहीं होते। देर शाम नगर निगम की डॉग स्क्वाड टीम सक्रिय हुई और अरबिंदो अस्पताल तथा आसपास के क्षेत्रों में अभियान चलाया गया। अधिकारियों के अनुसार कुल 23 आवारा कुत्तों को पकड़कर सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया है ताकि आगे किसी प्रकार की घटना न हो। हालांकि यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि हमला करने वाला वही कुत्ता इनमें शामिल है या नहीं।

इस घटना के बीच हाल ही में सुप्रीम कोर्ट द्वारा आवारा कुत्तों को लेकर की गई टिप्पणी भी चर्चा में है। सर्वोच्च न्यायालय ने कुछ सप्ताह पहले कहा था कि देशभर में बढ़ रही डॉग बाइट की घटनाओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अदालत ने स्थानीय निकायों को नसबंदी, टीकाकरण और शेल्टर होम की व्यवस्था मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया था। न्यायालय ने यह भी कहा था कि रेबीज संक्रमित कुत्तों को खुले में वापस नहीं छोड़ा जाना चाहिए। बावजूद इसके कई शहरों में इन निर्देशों के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर सवाल उठते रहे हैं।

इंदौर की यह घटना एक बार फिर शहरी क्षेत्रों में बढ़ती आवारा कुत्तों की समस्या को सामने लेकर आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल रेस्क्यू अभियान चलाना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि दीर्घकालिक समाधान के लिए नसबंदी, टीकाकरण और निगरानी व्यवस्था को मजबूत करना होगा। शहर में घायल लोगों का इलाज जारी है और प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है। वहीं स्थानीय लोग उम्मीद कर रहे हैं कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।

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06 Jun 2026 By Vaishnavi.J

इंदौर में आवारा कुत्ते का आतंक

इंदौर,(म.प्र.)

इंदौर शहर में शुक्रवार को एक ऐसी घटना सामने आई जिसने लोगों को दहशत में डाल दिया। शहर के बाणगंगा क्षेत्र और सांवेर रोड इलाके में एक आवारा कुत्ते ने महज 10 घंटे के भीतर 42 लोगों को काटकर घायल कर दिया। घायलों में दो महिला डॉक्टर, नर्स, अस्पताल कर्मचारी, सुरक्षा गार्ड, छात्र और ग्रामीण शामिल बताए जा रहे हैं। घटना के बाद पूरे इलाके में भय का माहौल बन गया और लोग अपने घरों से निकलने में भी सतर्कता बरतते नजर आए। सबसे अधिक चिंता की बात यह रही कि कुत्ते का आतंक अस्पताल परिसर से शुरू होकर गांवों और शैक्षणिक संस्थानों तक पहुंच गया। लगभग आठ किलोमीटर के दायरे में हुए हमलों ने प्रशासन और नगर निगम की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार यह सिलसिला शुक्रवार सुबह करीब 9 बजे शुरू हुआ। बताया जा रहा है कि आवारा कुत्ता सबसे पहले अरबिंदो अस्पताल परिसर में पहुंचा। यहां उसने अचानक लोगों पर हमला करना शुरू कर दिया। अस्पताल परिसर में मौजूद मरीज, उनके परिजन, नर्सिंग स्टाफ, डॉक्टर और सुरक्षा कर्मी उसके निशाने पर आ गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कुत्ता बेहद आक्रामक व्यवहार कर रहा था और सामने आने वाले हर व्यक्ति पर झपट रहा था। कुछ ही देर में अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी मच गई। लोग खुद को बचाने के लिए इधर-उधर भागते दिखाई दिए। कई लोग कमरों और भवनों के भीतर छिप गए जबकि कुछ ने डंडों और अन्य वस्तुओं की मदद से खुद का बचाव करने की कोशिश की।

अस्पताल में हमला करने के बाद कुत्ता कैंसर अस्पताल की दिशा में पहुंचा और वहां भी कई लोगों को घायल कर दिया। हमले में दो महिला डॉक्टरों के साथ नर्सें, मरीज, मेडिकल छात्र और अटेंडर्स भी शामिल बताए जा रहे हैं। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि अस्पताल प्रशासन को तत्काल चिकित्सा सहायता की व्यवस्था बढ़ानी पड़ी। घायल लोगों को तुरंत एंटी-रेबीज इंजेक्शन लगाए गए और जिन मरीजों के घाव गंभीर श्रेणी के पाए गए, उन्हें विशेष जीवन रक्षक सीरम भी दिया गया। अस्पताल सूत्रों के अनुसार कई घायलों की स्थिति स्थिर है, लेकिन उन्हें निगरानी में रखा गया है।

अस्पताल क्षेत्र से निकलने के बाद यह कुत्ता ग्राम बरदरी और रेवती रेंज की ओर पहुंच गया। यहां उसने ग्रामीणों पर हमला किया और कई लोगों को घायल कर दिया। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार नगर निगम और संबंधित विभागों को आवारा कुत्तों की समस्या के बारे में सूचना दी थी, लेकिन समय रहते कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। हालात ऐसे बन गए कि लोगों को खुद ही लाठियां लेकर कुत्ते से बचाव करना पड़ा। कई जगह ग्रामीण समूह बनाकर निगरानी करते रहे ताकि बच्चों और बुजुर्गों को सुरक्षित रखा जा सके।

घटना यहीं नहीं रुकी। बताया जा रहा है कि कुत्ता करीब आठ किलोमीटर दूर स्थित रेनेसां कॉलेज परिसर तक पहुंच गया, जहां उसने तीन अन्य लोगों को घायल कर दिया। कॉलेज परिसर में अचानक हुए हमले के बाद छात्रों के बीच भी दहशत फैल गई। कुछ समय के लिए परिसर में सामान्य गतिविधियां प्रभावित हुईं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार किसी को समझ नहीं आ रहा था कि कुत्ता किस दिशा से आएगा और किस पर हमला करेगा।

घटना के बाद नगर निगम की भूमिका को लेकर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों और पीड़ितों का आरोप है कि समय पर कार्रवाई होती तो इतने लोग घायल नहीं होते। देर शाम नगर निगम की डॉग स्क्वाड टीम सक्रिय हुई और अरबिंदो अस्पताल तथा आसपास के क्षेत्रों में अभियान चलाया गया। अधिकारियों के अनुसार कुल 23 आवारा कुत्तों को पकड़कर सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया है ताकि आगे किसी प्रकार की घटना न हो। हालांकि यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि हमला करने वाला वही कुत्ता इनमें शामिल है या नहीं।

इस घटना के बीच हाल ही में सुप्रीम कोर्ट द्वारा आवारा कुत्तों को लेकर की गई टिप्पणी भी चर्चा में है। सर्वोच्च न्यायालय ने कुछ सप्ताह पहले कहा था कि देशभर में बढ़ रही डॉग बाइट की घटनाओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अदालत ने स्थानीय निकायों को नसबंदी, टीकाकरण और शेल्टर होम की व्यवस्था मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया था। न्यायालय ने यह भी कहा था कि रेबीज संक्रमित कुत्तों को खुले में वापस नहीं छोड़ा जाना चाहिए। बावजूद इसके कई शहरों में इन निर्देशों के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर सवाल उठते रहे हैं।

इंदौर की यह घटना एक बार फिर शहरी क्षेत्रों में बढ़ती आवारा कुत्तों की समस्या को सामने लेकर आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल रेस्क्यू अभियान चलाना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि दीर्घकालिक समाधान के लिए नसबंदी, टीकाकरण और निगरानी व्यवस्था को मजबूत करना होगा। शहर में घायल लोगों का इलाज जारी है और प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है। वहीं स्थानीय लोग उम्मीद कर रहे हैं कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।

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