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भोपाल में एमबीबीएस छात्रा की संदिग्ध मौत, मोबाइल से मिला कथित सुसाइड नोट
भोपाल (म.प्र.)
पढ़ाई के दबाव का जिक्र; एफएसएल जांच में नोट की टाइमिंग और प्रामाणिकता पर फोकस
राजधानी भोपाल में एमबीबीएस प्रथम वर्ष की छात्रा रोशनी कलैश की संदिग्ध मौत के मामले में जांच को नई दिशा मिली है। पुलिस को छात्रा के मोबाइल फोन से एक कथित सुसाइड नोट मिलने की जानकारी सामने आई है। प्रारंभिक जांच में नोट में पढ़ाई के बढ़ते दबाव का उल्लेख बताया जा रहा है। हालांकि पुलिस ने स्पष्ट किया है कि दस्तावेज की प्रामाणिकता और समय-सीमा की पुष्टि फोरेंसिक जांच के बाद ही होगी।
यह मामला 10 फरवरी का है, जब छात्रा का शव कोहेफिजा थाना क्षेत्र स्थित एक निजी पीजी के बाथरूम में मिला था। दरवाजा अंदर से बंद था। सूचना मिलने पर पुलिस ने दरवाजा तोड़ा और छात्रा को अचेत अवस्था में पाया। पास में एक खाली एसिड की बोतल भी बरामद हुई थी। छात्रा को तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
रोशनी कलैश मूलतः आलीराजपुर की रहने वाली थीं और उन्होंने पिछले वर्ष अक्टूबर में गांधी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस प्रथम वर्ष में प्रवेश लिया था। कॉलेज सूत्रों के अनुसार, मोबाइल फोन से डिलीट डेटा रिकवर करने पर एक संदेश मिला है, जिसे कथित तौर पर छात्रा ने घटना से कुछ घंटे पहले स्वयं को व्हाट्सएप किया था। संदेश में माता-पिता को संबोधित करते हुए मेडिकल पढ़ाई को अत्यधिक दबावपूर्ण बताया गया है।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक मोबाइल को फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) भेज दिया गया है। जांच एजेंसियां यह पता लगा रही हैं कि नोट कब लिखा गया, क्या उसमें किसी प्रकार की एडिटिंग हुई और क्या किसी बाहरी हस्तक्षेप की संभावना है। डिजिटल साक्ष्यों की टाइमिंग इस जांच का अहम हिस्सा है।
इधर, घटना के बाद परिजन और मेडिकल कॉलेज के छात्रों ने कार्रवाई की मांग को लेकर कोहेफिजा थाने के बाहर प्रदर्शन किया। उनका आरोप है कि मामले में प्रारंभिक स्तर पर अपेक्षित तत्परता नहीं दिखाई गई। पुलिस ने निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया है।
जांच अधिकारी यह भी पड़ताल कर रहे हैं कि क्या छात्रा पर अकादमिक दबाव के अलावा किसी अन्य प्रकार का मानसिक तनाव, उत्पीड़न या व्यक्तिगत कारण प्रभावी थे। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और एफएसएल की तकनीकी जांच के निष्कर्ष आने के बाद ही मृत्यु के कारणों को लेकर स्पष्ट स्थिति सामने आएगी।
यह मामला मेडिकल शिक्षा में बढ़ते दबाव और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर एक बार फिर सवाल खड़ा करता है। फिलहाल पुलिस सभी पहलुओं की गहन जांच कर रही है।
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भोपाल में एमबीबीएस छात्रा की संदिग्ध मौत, मोबाइल से मिला कथित सुसाइड नोट
भोपाल (म.प्र.)
राजधानी भोपाल में एमबीबीएस प्रथम वर्ष की छात्रा रोशनी कलैश की संदिग्ध मौत के मामले में जांच को नई दिशा मिली है। पुलिस को छात्रा के मोबाइल फोन से एक कथित सुसाइड नोट मिलने की जानकारी सामने आई है। प्रारंभिक जांच में नोट में पढ़ाई के बढ़ते दबाव का उल्लेख बताया जा रहा है। हालांकि पुलिस ने स्पष्ट किया है कि दस्तावेज की प्रामाणिकता और समय-सीमा की पुष्टि फोरेंसिक जांच के बाद ही होगी।
यह मामला 10 फरवरी का है, जब छात्रा का शव कोहेफिजा थाना क्षेत्र स्थित एक निजी पीजी के बाथरूम में मिला था। दरवाजा अंदर से बंद था। सूचना मिलने पर पुलिस ने दरवाजा तोड़ा और छात्रा को अचेत अवस्था में पाया। पास में एक खाली एसिड की बोतल भी बरामद हुई थी। छात्रा को तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
रोशनी कलैश मूलतः आलीराजपुर की रहने वाली थीं और उन्होंने पिछले वर्ष अक्टूबर में गांधी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस प्रथम वर्ष में प्रवेश लिया था। कॉलेज सूत्रों के अनुसार, मोबाइल फोन से डिलीट डेटा रिकवर करने पर एक संदेश मिला है, जिसे कथित तौर पर छात्रा ने घटना से कुछ घंटे पहले स्वयं को व्हाट्सएप किया था। संदेश में माता-पिता को संबोधित करते हुए मेडिकल पढ़ाई को अत्यधिक दबावपूर्ण बताया गया है।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक मोबाइल को फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) भेज दिया गया है। जांच एजेंसियां यह पता लगा रही हैं कि नोट कब लिखा गया, क्या उसमें किसी प्रकार की एडिटिंग हुई और क्या किसी बाहरी हस्तक्षेप की संभावना है। डिजिटल साक्ष्यों की टाइमिंग इस जांच का अहम हिस्सा है।
इधर, घटना के बाद परिजन और मेडिकल कॉलेज के छात्रों ने कार्रवाई की मांग को लेकर कोहेफिजा थाने के बाहर प्रदर्शन किया। उनका आरोप है कि मामले में प्रारंभिक स्तर पर अपेक्षित तत्परता नहीं दिखाई गई। पुलिस ने निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया है।
जांच अधिकारी यह भी पड़ताल कर रहे हैं कि क्या छात्रा पर अकादमिक दबाव के अलावा किसी अन्य प्रकार का मानसिक तनाव, उत्पीड़न या व्यक्तिगत कारण प्रभावी थे। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और एफएसएल की तकनीकी जांच के निष्कर्ष आने के बाद ही मृत्यु के कारणों को लेकर स्पष्ट स्थिति सामने आएगी।
यह मामला मेडिकल शिक्षा में बढ़ते दबाव और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर एक बार फिर सवाल खड़ा करता है। फिलहाल पुलिस सभी पहलुओं की गहन जांच कर रही है।
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