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स्वामी रामभद्राचार्य को मिला ज्ञानपीठ सम्मान: सीएम डॉ. मोहन यादव ने दी बधाई, कहा – संत परंपरा की यह उपलब्धि प्रेरणादायक
Bhopal, MP
संस्कृत साहित्य के महान आचार्य और भारतीय संत परंपरा के प्रतिष्ठित स्वरूप, जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य को 58वां ज्ञानपीठ पुरस्कार प्रदान किया गया है। नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित गरिमामय समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें यह सम्मान उनके अद्वितीय साहित्यिक योगदान के लिए प्रदान किया।
इस सम्मान को लेकर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्वामी श्री रामभद्राचार्य को हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए उन्हें भारतीय आध्यात्मिक और साहित्यिक परंपरा का गौरव बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि दृष्टिबाधित होने के बावजूद स्वामी जी ने अपने अंतर्मन के आलोक से वेद, उपनिषद और रामकथा की गूढ़ व्याख्या की है, जो न केवल भारत बल्कि पूरे विश्व के साहित्य और आध्यात्मिक जगत के लिए एक अनुपम धरोहर है।
डॉ. मोहन यादव ने अपने संदेश में आगे कहा कि स्वामी रामभद्राचार्य की तपस्वी जीवनशैली, संस्कृत साधना और संत परंपरा के प्रति उनका समर्पण भावी पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणास्त्रोत बना रहेगा। उन्होंने उनके ज्ञान, साधना और साहित्यिक योगदान की सराहना करते हुए कहा कि यह सम्मान समस्त भारतीय सांस्कृतिक विरासत का सम्मान है।
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स्वामी रामभद्राचार्य को मिला ज्ञानपीठ सम्मान: सीएम डॉ. मोहन यादव ने दी बधाई, कहा – संत परंपरा की यह उपलब्धि प्रेरणादायक
Bhopal, MP
इस सम्मान को लेकर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्वामी श्री रामभद्राचार्य को हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए उन्हें भारतीय आध्यात्मिक और साहित्यिक परंपरा का गौरव बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि दृष्टिबाधित होने के बावजूद स्वामी जी ने अपने अंतर्मन के आलोक से वेद, उपनिषद और रामकथा की गूढ़ व्याख्या की है, जो न केवल भारत बल्कि पूरे विश्व के साहित्य और आध्यात्मिक जगत के लिए एक अनुपम धरोहर है।
डॉ. मोहन यादव ने अपने संदेश में आगे कहा कि स्वामी रामभद्राचार्य की तपस्वी जीवनशैली, संस्कृत साधना और संत परंपरा के प्रति उनका समर्पण भावी पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणास्त्रोत बना रहेगा। उन्होंने उनके ज्ञान, साधना और साहित्यिक योगदान की सराहना करते हुए कहा कि यह सम्मान समस्त भारतीय सांस्कृतिक विरासत का सम्मान है।
