मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में गैस सिलेंडर के बढ़ते दामों पर प्रधानमंत्री की मिमिक्री करते हुए वीडियो बनाना एक सरकारी शिक्षक को भारी पड़ गया। शिकायत मिलने के बाद शिक्षा विभाग ने प्राथमिक शिक्षक साकेत पुरोहित को निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई वीडियो के सोशल मीडिया पर वायरल होने और जनप्रतिनिधि की शिकायत के बाद की गई।
मामला शिवपुरी जिले के पोहरी विकासखंड के सेमरखेड़ी गांव स्थित शासकीय प्राथमिक विद्यालय आदिवासी मोहल्ला से जुड़ा है। यहां पदस्थ प्राथमिक शिक्षक साकेत पुरोहित ने हाल ही में एक वीडियो बनाया था, जिसमें उन्होंने गैस सिलेंडर की बढ़ती कीमतों पर टिप्पणी करते हुए प्रधानमंत्री की शैली में मिमिक्री की थी। वीडियो कुछ ही समय में सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गया और स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया।
विवाद बढ़ने के बाद पिछोर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक प्रीतम लोधी ने इस मामले की शिकायत जिला शिक्षा अधिकारी से की। अपने शिकायत पत्र में उन्होंने कहा कि एक शासकीय शिक्षक द्वारा जनप्रतिनिधि की मिमिक्री करते हुए इस तरह की टिप्पणी करना अनुचित है और इससे समाज में गलत संदेश जाता है। उन्होंने इसे सरकारी सेवा आचरण नियमों के खिलाफ बताया और कार्रवाई की मांग की।
शिकायत के आधार पर शिक्षा विभाग ने मामले की जांच की। प्रारंभिक जांच में शिक्षक का आचरण मध्यप्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के नियम 3 के उपनियम (1), (2) और (3) के उल्लंघन की श्रेणी में पाया गया। इसके बाद जिला शिक्षा अधिकारी ने मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम 1966 के नियम 9 के तहत तत्काल प्रभाव से शिक्षक को निलंबित करने का आदेश जारी कर दिया।
निलंबन आदेश के अनुसार साकेत पुरोहित का मुख्यालय फिलहाल बदरवास स्थित विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय निर्धारित किया गया है। निलंबन अवधि के दौरान उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा। साथ ही संबंधित अधिकारियों को आदेश के पालन के निर्देश भी जारी किए गए हैं।
इस घटना के बाद जिले में सरकारी कर्मचारियों द्वारा सोशल मीडिया के उपयोग को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सरकारी सेवा में रहते हुए सार्वजनिक मंचों पर किसी भी तरह की टिप्पणी या गतिविधि करते समय सेवा आचरण नियमों का पालन अनिवार्य है।
वहीं, यह मामला सोशल मीडिया पर भी बहस का विषय बन गया है। कुछ लोग इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि अन्य इसे सरकारी कर्मचारी की जिम्मेदारी और आचार संहिता से जुड़ा मामला बता रहे हैं। फिलहाल विभागीय स्तर पर आगे की जांच जारी है और आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त कार्रवाई भी की जा सकती है।
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