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सिंगरौली में जमीन अधिग्रहण को लेकर झड़प, पुलिस-ग्रामीणों के बीच बढ़ा तनाव
Singrauli, MP
जिले के तेंदुहा गांव में मंगलवार को कोल ब्लॉक के लिए जमीन अधिग्रहण को लेकर प्रशासन और ग्रामीणों के बीच जोरदार टकराव देखने को मिला।
प्रशासन की टीम जब दो हेक्टेयर सरकारी जमीन पर कब्जा लेने भारी पुलिस बल के साथ पहुंची, तो ग्रामीणों ने इसका विरोध करते हुए मोर्चा संभाल लिया। देखते ही देखते बहस झड़प में बदल गई और इलाके में तनाव फैल गया।
यह जमीन बांधा कोल ब्लॉक के लिए अधिग्रहित की जा रही है, जिसे बिरला समूह की ईएमआईएल कंपनी को आवंटित किया गया है। इस परियोजना में तेंदुहा सहित पांच गांवों की कुल 776 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित की जानी है।
ग्रामीणों का आरोप है कि उन्हें बिना मुआवजा दिए जबरन उजाड़ा जा रहा है। स्थानीय निवासी दशाराम वैश्य ने भावुक होकर कहा, "हमारा सब कुछ यही जंगल है। यही जीवन है और यही मृत्यु भी। सरकार हमें जबरन हटा रही है।" वहीं विस्थापित कौशल सिंह तेंकाम ने बताया कि “हमने बार-बार आवेदन दिए, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही। पुलिस बल के जरिए जबरन हमें हटाया जा रहा है।”
घटनास्थल पर ग्रामीणों और पुलिस के बीच कई बार नारेबाजी और धक्का-मुक्की की स्थिति बनी। ग्रामीण जब जमीन पर लगे सीमेंट के खंभे हटाने पहुंचे, तो पुलिस ने उन्हें बलपूर्वक वहां से हटा दिया।
प्रशासन ने क्या कहा?
मौके पर मौजूद देवसर एसडीएम अखिलेश सिंह ने स्पष्ट किया कि विवादित जमीन सरकारी है और उसे कंपनी को सुपुर्द किया जाना है। हालांकि, उन्होंने इससे अधिक जानकारी देने से इनकार कर दिया।
गौरतलब है कि इससे पहले इसी कोल ब्लॉक क्षेत्र में 3362 मकानों को अवैध घोषित कर दिया गया था, जो मुआवजा प्राप्त करने के उद्देश्य से बनाए गए थे। यह मामला तब भी सुर्खियों में रहा था।
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सिंगरौली में जमीन अधिग्रहण को लेकर झड़प, पुलिस-ग्रामीणों के बीच बढ़ा तनाव
Singrauli, MP
प्रशासन की टीम जब दो हेक्टेयर सरकारी जमीन पर कब्जा लेने भारी पुलिस बल के साथ पहुंची, तो ग्रामीणों ने इसका विरोध करते हुए मोर्चा संभाल लिया। देखते ही देखते बहस झड़प में बदल गई और इलाके में तनाव फैल गया।
यह जमीन बांधा कोल ब्लॉक के लिए अधिग्रहित की जा रही है, जिसे बिरला समूह की ईएमआईएल कंपनी को आवंटित किया गया है। इस परियोजना में तेंदुहा सहित पांच गांवों की कुल 776 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित की जानी है।
ग्रामीणों का आरोप है कि उन्हें बिना मुआवजा दिए जबरन उजाड़ा जा रहा है। स्थानीय निवासी दशाराम वैश्य ने भावुक होकर कहा, "हमारा सब कुछ यही जंगल है। यही जीवन है और यही मृत्यु भी। सरकार हमें जबरन हटा रही है।" वहीं विस्थापित कौशल सिंह तेंकाम ने बताया कि “हमने बार-बार आवेदन दिए, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही। पुलिस बल के जरिए जबरन हमें हटाया जा रहा है।”
घटनास्थल पर ग्रामीणों और पुलिस के बीच कई बार नारेबाजी और धक्का-मुक्की की स्थिति बनी। ग्रामीण जब जमीन पर लगे सीमेंट के खंभे हटाने पहुंचे, तो पुलिस ने उन्हें बलपूर्वक वहां से हटा दिया।
प्रशासन ने क्या कहा?
मौके पर मौजूद देवसर एसडीएम अखिलेश सिंह ने स्पष्ट किया कि विवादित जमीन सरकारी है और उसे कंपनी को सुपुर्द किया जाना है। हालांकि, उन्होंने इससे अधिक जानकारी देने से इनकार कर दिया।
गौरतलब है कि इससे पहले इसी कोल ब्लॉक क्षेत्र में 3362 मकानों को अवैध घोषित कर दिया गया था, जो मुआवजा प्राप्त करने के उद्देश्य से बनाए गए थे। यह मामला तब भी सुर्खियों में रहा था।
