- Hindi News
- राज्य
- मध्य प्रदेश
- गुना में बाढ़ पीड़ितों से मिले मुख्यमंत्री और सिंधिया, अन्य कॉलोनियों की अनदेखी से भड़के लोग, किया चक...
गुना में बाढ़ पीड़ितों से मिले मुख्यमंत्री और सिंधिया, अन्य कॉलोनियों की अनदेखी से भड़के लोग, किया चक्काजाम
Guna, MP
गुना जिले में हाल ही में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने सोमवार को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया।
मुख्यमंत्री का यह पिछले 10 दिनों में जिले का दूसरा दौरा था। इस दौरान उन्होंने पवन कॉलोनी और पटेल नगर में प्रभावित परिवारों से मुलाकात की और पीड़ित महिलाओं से राखी बंधवाकर भावनात्मक जुड़ाव भी दर्शाया।
मुख्यमंत्री ने प्रशासन से संपूर्ण सर्वे और राहत वितरण की रिपोर्ट तलब की, साथ ही आश्वासन दिया कि प्रत्येक प्रभावित परिवार को नियमानुसार मुआवजा और पुनर्वास सहायता दी जाएगी।
अन्य कॉलोनियों की उपेक्षा पर भड़के लोग
हालांकि मुख्यमंत्री और सिंधिया केवल दो ही कॉलोनियों का दौरा कर लौट गए, जिससे न्यू सिटी कॉलोनी, नानाखेड़ी, भुल्लनपुरा और गोविंद गार्डन जैसे सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्रों के लोग आक्रोशित हो उठे। नाराज नागरिकों ने नानाखेड़ी इलाके में सड़क पर बैठकर चक्काजाम कर दिया। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि प्रशासन ने जानबूझकर उन्हें उन इलाकों में नहीं ले जाया जहाँ असंतोष था।
स्थानीय महिलाओं ने रास्ता रोककर प्रदर्शन किया और मांग की कि मुख्यमंत्री को असली हालात दिखाए जाएं, न कि केवल “फिक्स” किये गए दौरे करवाए जाएं।
सिंधिया बोले: “हर चार घंटे में सीएम से चर्चा हुई”
प्रेस से बातचीत करते हुए केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने बताया कि बाढ़ की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने 27 जुलाई की रात मुख्यमंत्री को फोन किया था। इसके बाद रातोंरात तीनों जिलों के कलेक्टरों को अलर्ट किया गया और SDERF तथा NDRF की टीमें मौके पर रवाना की गईं।
सिंधिया ने दावा किया कि राज्य और केंद्र सरकार ने मिलकर इस आपदा में तत्काल राहत पहुंचाने का कार्य किया और सीएम खुद हर चार घंटे में उनसे अपडेट लेते रहे।
बाढ़ के कहर की कहानी
इस मानसून सीज़न में गुना में सबसे भयंकर बारिश 29 जुलाई को हुई थी, जब 10 घंटे में 9 इंच से अधिक पानी बरस गया। शहर की निचली बस्तियाँ पूरी तरह जलमग्न हो गईं। कई इलाकों में पानी 5 फीट तक भर गया, जिससे घरों की पहली मंजिल तक डूब गई।
स्थिति इतनी विकट हो गई कि गोपालपुरा डैम से पानी खतरे के स्तर से ऊपर बहने लगा। प्रशासन ने तत्काल निर्णय लेते हुए JCB से डैम की पार तोड़ी, ताकि पानी नियंत्रित रूप से बाहर निकले। लेकिन इससे भगत सिंह कॉलोनी, न्यू सिटी कॉलोनी और नानाखेड़ी जैसी कॉलोनियों में जलप्रलय जैसी स्थिति बन गई।
हालात संभले, लेकिन नाराज़गी बाकी
हालांकि अब बारिश थम चुकी है और जलस्तर घट रहा है, लेकिन घरों में कीचड़ और खराब हो चुका सामान पीड़ितों की तकलीफों को बयान कर रहा है। एबी रोड जैसी प्रमुख सड़कों पर ट्रैफिक रुक चुका था और कई वाहन तेज बहाव में बह गए थे।
सरकार से उम्मीदें और सवाल
सीएम के दौरे और आश्वासनों के बावजूद सवाल यह है कि क्या प्रशासन वास्तव में हर पीड़ित तक मदद पहुंचा पाया है? और क्यों कुछ कॉलोनियों को भ्रमण से वंचित रखा गया?
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक सभी कॉलोनियों को समान रूप से राहत और मुआवजा नहीं मिलेगा, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
-----------------
हमारे आधिकारिक प्लेटफॉर्म्स से जुड़ें –
🔴 व्हाट्सएप चैनल: https://whatsapp.com/channel/0029VbATlF0KQuJB6tvUrN3V
🔴 फेसबुक: Dainik Jagran MP/CG Official
🟣 इंस्टाग्राम: @dainikjagranmp.cg
🔴 यूट्यूब: Dainik Jagran MPCG Digital
📲 सोशल मीडिया पर जुड़ें और बने जागरूक पाठक।
👉 आज ही जुड़िए
गुना में बाढ़ पीड़ितों से मिले मुख्यमंत्री और सिंधिया, अन्य कॉलोनियों की अनदेखी से भड़के लोग, किया चक्काजाम
Guna, MP
मुख्यमंत्री का यह पिछले 10 दिनों में जिले का दूसरा दौरा था। इस दौरान उन्होंने पवन कॉलोनी और पटेल नगर में प्रभावित परिवारों से मुलाकात की और पीड़ित महिलाओं से राखी बंधवाकर भावनात्मक जुड़ाव भी दर्शाया।
मुख्यमंत्री ने प्रशासन से संपूर्ण सर्वे और राहत वितरण की रिपोर्ट तलब की, साथ ही आश्वासन दिया कि प्रत्येक प्रभावित परिवार को नियमानुसार मुआवजा और पुनर्वास सहायता दी जाएगी।
अन्य कॉलोनियों की उपेक्षा पर भड़के लोग
हालांकि मुख्यमंत्री और सिंधिया केवल दो ही कॉलोनियों का दौरा कर लौट गए, जिससे न्यू सिटी कॉलोनी, नानाखेड़ी, भुल्लनपुरा और गोविंद गार्डन जैसे सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्रों के लोग आक्रोशित हो उठे। नाराज नागरिकों ने नानाखेड़ी इलाके में सड़क पर बैठकर चक्काजाम कर दिया। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि प्रशासन ने जानबूझकर उन्हें उन इलाकों में नहीं ले जाया जहाँ असंतोष था।
स्थानीय महिलाओं ने रास्ता रोककर प्रदर्शन किया और मांग की कि मुख्यमंत्री को असली हालात दिखाए जाएं, न कि केवल “फिक्स” किये गए दौरे करवाए जाएं।
सिंधिया बोले: “हर चार घंटे में सीएम से चर्चा हुई”
प्रेस से बातचीत करते हुए केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने बताया कि बाढ़ की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने 27 जुलाई की रात मुख्यमंत्री को फोन किया था। इसके बाद रातोंरात तीनों जिलों के कलेक्टरों को अलर्ट किया गया और SDERF तथा NDRF की टीमें मौके पर रवाना की गईं।
सिंधिया ने दावा किया कि राज्य और केंद्र सरकार ने मिलकर इस आपदा में तत्काल राहत पहुंचाने का कार्य किया और सीएम खुद हर चार घंटे में उनसे अपडेट लेते रहे।
बाढ़ के कहर की कहानी
इस मानसून सीज़न में गुना में सबसे भयंकर बारिश 29 जुलाई को हुई थी, जब 10 घंटे में 9 इंच से अधिक पानी बरस गया। शहर की निचली बस्तियाँ पूरी तरह जलमग्न हो गईं। कई इलाकों में पानी 5 फीट तक भर गया, जिससे घरों की पहली मंजिल तक डूब गई।
स्थिति इतनी विकट हो गई कि गोपालपुरा डैम से पानी खतरे के स्तर से ऊपर बहने लगा। प्रशासन ने तत्काल निर्णय लेते हुए JCB से डैम की पार तोड़ी, ताकि पानी नियंत्रित रूप से बाहर निकले। लेकिन इससे भगत सिंह कॉलोनी, न्यू सिटी कॉलोनी और नानाखेड़ी जैसी कॉलोनियों में जलप्रलय जैसी स्थिति बन गई।
हालात संभले, लेकिन नाराज़गी बाकी
हालांकि अब बारिश थम चुकी है और जलस्तर घट रहा है, लेकिन घरों में कीचड़ और खराब हो चुका सामान पीड़ितों की तकलीफों को बयान कर रहा है। एबी रोड जैसी प्रमुख सड़कों पर ट्रैफिक रुक चुका था और कई वाहन तेज बहाव में बह गए थे।
सरकार से उम्मीदें और सवाल
सीएम के दौरे और आश्वासनों के बावजूद सवाल यह है कि क्या प्रशासन वास्तव में हर पीड़ित तक मदद पहुंचा पाया है? और क्यों कुछ कॉलोनियों को भ्रमण से वंचित रखा गया?
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक सभी कॉलोनियों को समान रूप से राहत और मुआवजा नहीं मिलेगा, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
