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बिल्व पत्रों से सजा भगवान महाकालेश्वर का दिव्य श्रृंगार, भस्म आरती में उमड़ा आस्था का सागर
Ujjain, MP
विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में शनिवार, 3 जनवरी 2026 को पौष माह की शुक्ल पक्ष पूर्णिमा तिथि पर तड़के भोर में भस्म आरती का भव्य आयोजन किया गया। सुबह करीब 4 बजे मंदिर के कपाट खोले गए, जिसके बाद भगवान महाकालेश्वर का विशेष वैदिक विधि-विधान से पूजन और दिव्य श्रृंगार संपन्न हुआ।
पंचामृत अभिषेक के साथ हुई पूजा
कपाट खुलते ही मंदिर के पुजारियों ने गर्भगृह में विराजित सभी देवी-देवताओं का विधिवत पूजन किया। इसके पश्चात भगवान महाकाल का
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जलाभिषेक
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दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक
किया गया। अभिषेक के बाद भगवान के मस्तक पर चंद्र अर्पित कर अलौकिक श्रृंगार किया गया।
बिल्व पत्रों और पुष्पों से विशेष अलंकरण
भस्म अर्पण से पूर्व प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम के जल से भगवान का पूजन हुआ। मंत्रोच्चार के बीच ध्यान आराधना की गई।
इसके बाद कपूर आरती संपन्न हुई और ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढांककर भस्म रमाई गई।
भस्म आरती के पश्चात भगवान महाकाल को
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शेषनाग का रजत मुकुट
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रजत की मुण्डमाल
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रुद्राक्ष की माला
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सुगंधित पुष्पों और बिल्व पत्रों की मालाएं
अर्पित कर भव्य श्रृंगार किया गया। पूरे गर्भगृह में भक्ति और श्रद्धा का वातावरण बना रहा।
घर बैठे श्रद्धालुओं ने किए दर्शन
भस्म आरती के दिव्य दर्शन के लिए देश-विदेश से श्रद्धालु उज्जैन पहुंचे, वहीं बड़ी संख्या में भक्तों ने ऑनलाइन माध्यम से घर बैठे बाबा महाकाल के दर्शन किए। पूर्णिमा तिथि के कारण आरती का धार्मिक महत्व और भी बढ़ गया।
पूर्णिमा पर भस्म आरती का विशेष महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पौष पूर्णिमा पर भगवान महाकाल की भस्म आरती के दर्शन करने से
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भय से मुक्ति
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मानसिक शांति
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सुख-समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति
होती है। यही कारण है कि इस दिन मंदिर में विशेष श्रद्धा और भक्ति का सैलाब उमड़ता है।

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बिल्व पत्रों से सजा भगवान महाकालेश्वर का दिव्य श्रृंगार, भस्म आरती में उमड़ा आस्था का सागर
Ujjain, MP
विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में शनिवार, 3 जनवरी 2026 को पौष माह की शुक्ल पक्ष पूर्णिमा तिथि पर तड़के भोर में भस्म आरती का भव्य आयोजन किया गया। सुबह करीब 4 बजे मंदिर के कपाट खोले गए, जिसके बाद भगवान महाकालेश्वर का विशेष वैदिक विधि-विधान से पूजन और दिव्य श्रृंगार संपन्न हुआ।
पंचामृत अभिषेक के साथ हुई पूजा
कपाट खुलते ही मंदिर के पुजारियों ने गर्भगृह में विराजित सभी देवी-देवताओं का विधिवत पूजन किया। इसके पश्चात भगवान महाकाल का
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जलाभिषेक
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दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक
किया गया। अभिषेक के बाद भगवान के मस्तक पर चंद्र अर्पित कर अलौकिक श्रृंगार किया गया।
बिल्व पत्रों और पुष्पों से विशेष अलंकरण
भस्म अर्पण से पूर्व प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम के जल से भगवान का पूजन हुआ। मंत्रोच्चार के बीच ध्यान आराधना की गई।
इसके बाद कपूर आरती संपन्न हुई और ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढांककर भस्म रमाई गई।
भस्म आरती के पश्चात भगवान महाकाल को
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शेषनाग का रजत मुकुट
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रजत की मुण्डमाल
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रुद्राक्ष की माला
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सुगंधित पुष्पों और बिल्व पत्रों की मालाएं
अर्पित कर भव्य श्रृंगार किया गया। पूरे गर्भगृह में भक्ति और श्रद्धा का वातावरण बना रहा।
घर बैठे श्रद्धालुओं ने किए दर्शन
भस्म आरती के दिव्य दर्शन के लिए देश-विदेश से श्रद्धालु उज्जैन पहुंचे, वहीं बड़ी संख्या में भक्तों ने ऑनलाइन माध्यम से घर बैठे बाबा महाकाल के दर्शन किए। पूर्णिमा तिथि के कारण आरती का धार्मिक महत्व और भी बढ़ गया।
पूर्णिमा पर भस्म आरती का विशेष महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पौष पूर्णिमा पर भगवान महाकाल की भस्म आरती के दर्शन करने से
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भय से मुक्ति
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मानसिक शांति
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सुख-समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति
होती है। यही कारण है कि इस दिन मंदिर में विशेष श्रद्धा और भक्ति का सैलाब उमड़ता है।

