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अपनी ही कार्रवाई में उलझी सरकार, कांग्रेस ने हंगामे के बाद सदन से किया वॉकआउट
BHOPAL, MP
मध्य प्रदेश विधानसभा सत्र में मंगलवार को मंडला अदिवासी एनकाउंटर पर बहस चल रही थी. जहां सरकार के जवाब से नाखुश कांग्रेस ने वॉकआउट किया.
मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के छठे दिन सदन में विपक्ष ने मंडला में नक्सली एनकाउंटर को फर्जी बताते हुए वॉकआउट कर दिया. कांग्रेस ने ध्यानाकर्षण में इस मुद्दे को उठाते हुए आरोप लगाया कि पुलिस ने अपना टारगेट पूरा करने के लिए आदिवासी की हत्या की है. कांग्रेस ने इस मामले की रिटायर्ड जज से जांच कराने और मृतक के परिजनों को 1 करोड़ रुपए की राहत राशि और सरकारी नौकरी दिए जाने की मांग की.
नेता प्रतिपक्ष बोले-यदि नक्सली तो फिर 10 लाख क्यों दिए ?
कांग्रेस विधायक डॉ. विक्रांत भूरिया ने सदन में कहा कि "मृतक हीरन परते बैगा आदिवासी है और वह अपने 5 बच्चों और वृद्ध माता-पिता का भरण पोषण मजदूरी करके कर रहा था. पुलिस ने अपना टारगेट पूरा करने के लिए आदिवासी की हत्या की है. सरकार एक तरफ नक्सलवाद को समाप्त करने का दावा कर रही है, वहीं नक्सलियों के नाम पर आदिवासियों का फर्जी एनकाउंटर किया जा रहा है. कांग्रेस ने सरकार से मृतक आदिवासी परिवार को 1 करोड़ की राहत राशि दिए जाने की मांग की है."
मंत्री बोले जांच चल रही है
उधर मंत्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल ने कहा कि "इस मामले की मजिस्ट्रेरियल जांच चल रही है. इसके लिए 11 बिंदु तय किए गए हैं. उन्होंने बताया कि घटना के दिन जवानों ने पहले सरेंडर करने के लिए कहा था, लेकिन उन्होंने पुलिस पर फायरिंग कर दी. इसके बाद पुलिस की जवाबी कार्रवाई में नक्सली मारे गए. हालांकि एनकाउंटर की जांच चल रही है. कांग्रेस की मांग पर मंत्री ने कहा कि जांच में यदि मृतक आदिवासी नक्सली नहीं निकला तो सरकार मृतक के परिजनों को 1 करोड़ की राशि और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देगी."
हालांकि नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि आदिवासी की मौत के बाद सरकार मृतक के परिजनों को 10 लाख की राहत राशि देने का ऐलान कर चुकी है. उन्होंने सवाल किया कि यदि मृतक को सरकार नक्सली मान रही है, तो क्या सरकार नक्सलियों के एनकाउंटर के बाद परिजनों को राहत राशि दे रही है." सरकार के जवाब से असंतुष्ट होकर कांग्रेस ने सदन से बर्हिगमन कर दिया.
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BHOPAL, MP
मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के छठे दिन सदन में विपक्ष ने मंडला में नक्सली एनकाउंटर को फर्जी बताते हुए वॉकआउट कर दिया. कांग्रेस ने ध्यानाकर्षण में इस मुद्दे को उठाते हुए आरोप लगाया कि पुलिस ने अपना टारगेट पूरा करने के लिए आदिवासी की हत्या की है. कांग्रेस ने इस मामले की रिटायर्ड जज से जांच कराने और मृतक के परिजनों को 1 करोड़ रुपए की राहत राशि और सरकारी नौकरी दिए जाने की मांग की.
नेता प्रतिपक्ष बोले-यदि नक्सली तो फिर 10 लाख क्यों दिए ?
कांग्रेस विधायक डॉ. विक्रांत भूरिया ने सदन में कहा कि "मृतक हीरन परते बैगा आदिवासी है और वह अपने 5 बच्चों और वृद्ध माता-पिता का भरण पोषण मजदूरी करके कर रहा था. पुलिस ने अपना टारगेट पूरा करने के लिए आदिवासी की हत्या की है. सरकार एक तरफ नक्सलवाद को समाप्त करने का दावा कर रही है, वहीं नक्सलियों के नाम पर आदिवासियों का फर्जी एनकाउंटर किया जा रहा है. कांग्रेस ने सरकार से मृतक आदिवासी परिवार को 1 करोड़ की राहत राशि दिए जाने की मांग की है."
मंत्री बोले जांच चल रही है
उधर मंत्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल ने कहा कि "इस मामले की मजिस्ट्रेरियल जांच चल रही है. इसके लिए 11 बिंदु तय किए गए हैं. उन्होंने बताया कि घटना के दिन जवानों ने पहले सरेंडर करने के लिए कहा था, लेकिन उन्होंने पुलिस पर फायरिंग कर दी. इसके बाद पुलिस की जवाबी कार्रवाई में नक्सली मारे गए. हालांकि एनकाउंटर की जांच चल रही है. कांग्रेस की मांग पर मंत्री ने कहा कि जांच में यदि मृतक आदिवासी नक्सली नहीं निकला तो सरकार मृतक के परिजनों को 1 करोड़ की राशि और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देगी."
हालांकि नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि आदिवासी की मौत के बाद सरकार मृतक के परिजनों को 10 लाख की राहत राशि देने का ऐलान कर चुकी है. उन्होंने सवाल किया कि यदि मृतक को सरकार नक्सली मान रही है, तो क्या सरकार नक्सलियों के एनकाउंटर के बाद परिजनों को राहत राशि दे रही है." सरकार के जवाब से असंतुष्ट होकर कांग्रेस ने सदन से बर्हिगमन कर दिया.
