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एमपी में फिलहाल नहीं होगा भारी बारिश का दौर
BHOPAL, MP
मध्यप्रदेश में मानसून का असर अभी भी जारी है, हालांकि फिलहाल अगले चार दिनों तक तेज बारिश का कोई अलर्ट नहीं है। गुरुवार को प्रदेश के भोपाल, राजगढ़, श्योपुर समेत कई जिलों में हल्की से मध्यम वर्षा दर्ज की गई। अब तक इस मानसून सीजन में औसतन 43.2 इंच बारिश हो चुकी है, जो सामान्य से 7.4 इंच ज्यादा है।
उज्जैन में शिप्रा का पानी रामघाट तक पहुंचा
उज्जैन में शिप्रा नदी उफान पर है। रामघाट स्थित कई मंदिरों में पानी घुस गया। बैतूल के मुलताई में घरों में पानी भर गया, जबकि पांढुर्णा में जाम नदी में बाढ़ आ गई।
टीकमगढ़ में दर्दनाक हादसा
टीकमगढ़ जिले की खरगापुर तहसील के हीरापुर पंचायत में बिजली गिरने से 12 वर्षीय आशीष यादव की मौत हो गई, जबकि शिमला रैकवार (15) गंभीर रूप से घायल है। घटना में 36 बकरियों की भी मौत हो गई।
मौसम का हाल
मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, मानसून की विदाई के दौरान भी एक और बार तेज बारिश की संभावना है। अभी फिलहाल 4 दिन तक केवल हल्की बरसात का दौर रहेगा। गुरुवार को प्रदेश में दो टर्फ और एक साइक्लोनिक सर्कुलेशन सक्रिय रहा, जिससे कई जिलों में पानी गिरा।
मानसून की वापसी शुरू
राजस्थान और गुजरात से मानसून लौट चुका है। पंजाब-हरियाणा के कई जिलों से भी वापसी हो चुकी है। अगर यही रफ्तार रही तो जल्द ही मध्यप्रदेश के भी कई जिलों से मानसून लौट जाएगा।
16 जून को मानसून ने एमपी में दस्तक दी थी और अब तक सामान्य से ज्यादा बारिश हो चुकी है।
इंदौर-उज्जैन संभाग में बारिश कम
इंदौर और उज्जैन संभाग में इस बार पानी कम गिरा है। सबसे कम बारिश वाले जिलों में बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन और शाजापुर शामिल हैं।
ग्वालियर-चंबल-सागर संभाग में रिकॉर्ड बारिश
जबलपुर, रीवा, सागर, शहडोल और ग्वालियर-चंबल संभाग में जमकर बारिश हुई है। यहां के सभी जिलों में सामान्य से ज्यादा पानी गिरा है।
बड़े शहरों में बारिश का रिकॉर्ड
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भोपाल: सितंबर में औसत 7 इंच, इस बार लगातार 4 साल से ज्यादा बारिश।
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इंदौर: 1954 में सितंबर का रिकॉर्ड 30 इंच, इस बार 15+ दिन बरसात के आसार।
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ग्वालियर: 1990 में 25 इंच का रिकॉर्ड, इस बार अगस्त में ही कोटा पूरा।
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जबलपुर: 1926 में 24 घंटे में 8.5 इंच बारिश का रिकॉर्ड।
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उज्जैन: 1961 में सितंबर की ही बारिश से सीजन का कोटा पूरा (43 इंच)।
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एमपी में फिलहाल नहीं होगा भारी बारिश का दौर
BHOPAL, MP
मध्यप्रदेश में मानसून का असर अभी भी जारी है, हालांकि फिलहाल अगले चार दिनों तक तेज बारिश का कोई अलर्ट नहीं है। गुरुवार को प्रदेश के भोपाल, राजगढ़, श्योपुर समेत कई जिलों में हल्की से मध्यम वर्षा दर्ज की गई। अब तक इस मानसून सीजन में औसतन 43.2 इंच बारिश हो चुकी है, जो सामान्य से 7.4 इंच ज्यादा है।
उज्जैन में शिप्रा का पानी रामघाट तक पहुंचा
उज्जैन में शिप्रा नदी उफान पर है। रामघाट स्थित कई मंदिरों में पानी घुस गया। बैतूल के मुलताई में घरों में पानी भर गया, जबकि पांढुर्णा में जाम नदी में बाढ़ आ गई।
टीकमगढ़ में दर्दनाक हादसा
टीकमगढ़ जिले की खरगापुर तहसील के हीरापुर पंचायत में बिजली गिरने से 12 वर्षीय आशीष यादव की मौत हो गई, जबकि शिमला रैकवार (15) गंभीर रूप से घायल है। घटना में 36 बकरियों की भी मौत हो गई।
मौसम का हाल
मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, मानसून की विदाई के दौरान भी एक और बार तेज बारिश की संभावना है। अभी फिलहाल 4 दिन तक केवल हल्की बरसात का दौर रहेगा। गुरुवार को प्रदेश में दो टर्फ और एक साइक्लोनिक सर्कुलेशन सक्रिय रहा, जिससे कई जिलों में पानी गिरा।
मानसून की वापसी शुरू
राजस्थान और गुजरात से मानसून लौट चुका है। पंजाब-हरियाणा के कई जिलों से भी वापसी हो चुकी है। अगर यही रफ्तार रही तो जल्द ही मध्यप्रदेश के भी कई जिलों से मानसून लौट जाएगा।
16 जून को मानसून ने एमपी में दस्तक दी थी और अब तक सामान्य से ज्यादा बारिश हो चुकी है।
इंदौर-उज्जैन संभाग में बारिश कम
इंदौर और उज्जैन संभाग में इस बार पानी कम गिरा है। सबसे कम बारिश वाले जिलों में बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन और शाजापुर शामिल हैं।
ग्वालियर-चंबल-सागर संभाग में रिकॉर्ड बारिश
जबलपुर, रीवा, सागर, शहडोल और ग्वालियर-चंबल संभाग में जमकर बारिश हुई है। यहां के सभी जिलों में सामान्य से ज्यादा पानी गिरा है।
बड़े शहरों में बारिश का रिकॉर्ड
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भोपाल: सितंबर में औसत 7 इंच, इस बार लगातार 4 साल से ज्यादा बारिश।
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इंदौर: 1954 में सितंबर का रिकॉर्ड 30 इंच, इस बार 15+ दिन बरसात के आसार।
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ग्वालियर: 1990 में 25 इंच का रिकॉर्ड, इस बार अगस्त में ही कोटा पूरा।
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जबलपुर: 1926 में 24 घंटे में 8.5 इंच बारिश का रिकॉर्ड।
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उज्जैन: 1961 में सितंबर की ही बारिश से सीजन का कोटा पूरा (43 इंच)।
