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पचमढ़ी में आदिवासी संस्कृति संपदा समारोह, कई राज्यों के कलाकार हुए शामिल
Pachmarhi, MP
मध्य प्रदेश के हिल स्टेशन पचमढ़ी में संपदा समारोह में कई राज्यों के आदिवासी कलाकारों ने शामिल होकर नृत्य और गीत की शानदार प्रस्तुतियां दीं.
मध्य प्रदेश के हिल स्टेशन पचमढ़ी में संपदा समारोह का आयोजन किया गया. इसका मुख्य उद्देश्य देश के विभिन्न आदिवासी समुदायों तक पर्यटकों के पहुंच को स्थापित करने के लिए था. कार्यक्रम का रविवार को समापन हुआ. जिसमें देश के विभिन्न आदिवासी समुदायों द्वारा लोक नृत्य एवं संस्कृति को प्रदर्शित किया गया. इसमें कार्यक्रम में प्रदेश के अलावा अन्य राज्यों के आदिवासियों ने हिस्सा लिया. इस प्रस्तुति में लोक नृत्य एवं आदिवासी परंपराओं संस्कृति का देखने को मिली. इस दौरान आदिवासी समुदाय से पर्यटकों को अवगत कराने के लिए प्रदर्शनी का आयोजन किया.
मध्य प्रदेश समेत अन्य राज्यों के आदीवासी हुए शामिल
दरअसल, सरकार आदिवासियों को बढ़ावा देने के लिए लगातार कई आयोजन कर रही है. जिसके चलते मध्य प्रदेश के एकमात्र हिल स्टेशन पचमढ़ी में संपदा समारोह आयोजित हुआ, जिसमे विशेष रूप से देश भर के आदिवासी शामिल हुए और अपनी प्रस्तुति पेश की. जिसमें प्रमुख रूप से मध्य प्रदेश के गोंड जनजातीय का गुदुमबाजा नृत्य, तेलंगाना की गोण्डकोया का कोम काया और उड़ीसा की कंध जनजातियों ढप नृत्य, वीरांगना रानी दुर्गावती नृत्य नाटिका, समारोह में भक्ति मति शबरी और दुर्गावती के जीवन सहित अवदान केंद्रित प्रदर्शनी का आयोजन किया गया.
गांव के मुख्याि कंधे पर कुल्हाड़ी रख करते हैं नृत्य
उड़ीसा के पारंपरिक लोक और आदिवासी नृत्यों के साथ ढप नृत्य की परम्परा बहुत पुरानी है. उड़ीसा के पश्चिमी भाग की यह सांस्कृतिक विरासत एक बहुत ही अनोखी कला है. इस नृत्य के माध्यम से अपने देवताओं की पूजा करते हैं. गांव का मुखिया अपने कंधे पर कुल्हाड़ी रखकर नृत्य करता है, जो इस बात का प्रतीक है कि पुरुष अपने गांव की महिलाओं की अखंडता की रक्षा करते है.
भील जनजाति का भगोरिया नृत्य, भगोरिया हाट
मध्यप्रदेश के झाबुआ और अलीराजपुर क्षेत्र में निवास करने वाली भील जनजाति का भगोरिया नृत्य, भगोरिया हाट में होली और अन्य अवसरों पर भील युवक-युवतियों द्वारा किया जाता है. फागुन के मौसम में होली से पूर्व भगोरिया हाटों का आयोजन होता है. भगोरिया नृत्य में विविध पदचाप समूहन पाली, चक्रीपाली तथा पिरामिड नृत्य मुद्राएं आकर्षण का केन्द्र होता है. रंग-बिरंगी वेशभूषा में सजी-धजी युवतियों का श्रृंगार और हाथ में तीर कमान लिए नाचना ठेठ पारंपरिक और अलौकिक संरचना है.
बैगा समुदाय के द्वारा विभिन्न नृत्य
बैगा समुदाय के द्वारा विभिन्न अवसरों पर करमा, दशहरा, बिलमा, परघौनी, घोड़ी पैठाई जैसे नृत्य किये जाते हैं. दशहरे के अवसर पर विशेष रूप से घोड़ी पैठाई नृत्य किया जाता है. ‘परघौनी नृत्य’ विवाह के अवसर पर बारात की अगवानी के समय किया जाता है. इसी अवसर पर वर पक्ष की ओर से आंगन में हाथी बनाकर नचाया जाता है. यह संकेत करता है कि इसमें प्रसन्नता की अभिव्यक्ति ही मुख्य ध्येय है, लालित्य की चेष्टा गौण.
मध्यप्रदेश की सीमा से लगे गुजरात क्षेत्र में राठवा जनजाति बहुतायत के निवास करते हैं. राठवा मुख्यतः मध्यप्रदेश में भील जनजाति की उपजाति है. गुजरात में भी भील और राठवा जनजाति निवास करती हैं. राठवा जनजाति में विभिन्न पर्व-त्योहारों, अनुष्ठानों सहित अन्य खुशियों के अवसरों पर नृत्य की समृद्ध परम्परा है. राठवा जनजाति का नृत्य भील जनजाति नृत्य से ज्यादा पृथक तो नहीं है, परन्तु राठवा जनजाति के नृत्य में गति अधिक है
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पचमढ़ी में आदिवासी संस्कृति संपदा समारोह, कई राज्यों के कलाकार हुए शामिल
Pachmarhi, MP
मध्य प्रदेश के हिल स्टेशन पचमढ़ी में संपदा समारोह का आयोजन किया गया. इसका मुख्य उद्देश्य देश के विभिन्न आदिवासी समुदायों तक पर्यटकों के पहुंच को स्थापित करने के लिए था. कार्यक्रम का रविवार को समापन हुआ. जिसमें देश के विभिन्न आदिवासी समुदायों द्वारा लोक नृत्य एवं संस्कृति को प्रदर्शित किया गया. इसमें कार्यक्रम में प्रदेश के अलावा अन्य राज्यों के आदिवासियों ने हिस्सा लिया. इस प्रस्तुति में लोक नृत्य एवं आदिवासी परंपराओं संस्कृति का देखने को मिली. इस दौरान आदिवासी समुदाय से पर्यटकों को अवगत कराने के लिए प्रदर्शनी का आयोजन किया.
मध्य प्रदेश समेत अन्य राज्यों के आदीवासी हुए शामिल
दरअसल, सरकार आदिवासियों को बढ़ावा देने के लिए लगातार कई आयोजन कर रही है. जिसके चलते मध्य प्रदेश के एकमात्र हिल स्टेशन पचमढ़ी में संपदा समारोह आयोजित हुआ, जिसमे विशेष रूप से देश भर के आदिवासी शामिल हुए और अपनी प्रस्तुति पेश की. जिसमें प्रमुख रूप से मध्य प्रदेश के गोंड जनजातीय का गुदुमबाजा नृत्य, तेलंगाना की गोण्डकोया का कोम काया और उड़ीसा की कंध जनजातियों ढप नृत्य, वीरांगना रानी दुर्गावती नृत्य नाटिका, समारोह में भक्ति मति शबरी और दुर्गावती के जीवन सहित अवदान केंद्रित प्रदर्शनी का आयोजन किया गया.
गांव के मुख्याि कंधे पर कुल्हाड़ी रख करते हैं नृत्य
उड़ीसा के पारंपरिक लोक और आदिवासी नृत्यों के साथ ढप नृत्य की परम्परा बहुत पुरानी है. उड़ीसा के पश्चिमी भाग की यह सांस्कृतिक विरासत एक बहुत ही अनोखी कला है. इस नृत्य के माध्यम से अपने देवताओं की पूजा करते हैं. गांव का मुखिया अपने कंधे पर कुल्हाड़ी रखकर नृत्य करता है, जो इस बात का प्रतीक है कि पुरुष अपने गांव की महिलाओं की अखंडता की रक्षा करते है.
भील जनजाति का भगोरिया नृत्य, भगोरिया हाट
मध्यप्रदेश के झाबुआ और अलीराजपुर क्षेत्र में निवास करने वाली भील जनजाति का भगोरिया नृत्य, भगोरिया हाट में होली और अन्य अवसरों पर भील युवक-युवतियों द्वारा किया जाता है. फागुन के मौसम में होली से पूर्व भगोरिया हाटों का आयोजन होता है. भगोरिया नृत्य में विविध पदचाप समूहन पाली, चक्रीपाली तथा पिरामिड नृत्य मुद्राएं आकर्षण का केन्द्र होता है. रंग-बिरंगी वेशभूषा में सजी-धजी युवतियों का श्रृंगार और हाथ में तीर कमान लिए नाचना ठेठ पारंपरिक और अलौकिक संरचना है.
बैगा समुदाय के द्वारा विभिन्न नृत्य
बैगा समुदाय के द्वारा विभिन्न अवसरों पर करमा, दशहरा, बिलमा, परघौनी, घोड़ी पैठाई जैसे नृत्य किये जाते हैं. दशहरे के अवसर पर विशेष रूप से घोड़ी पैठाई नृत्य किया जाता है. ‘परघौनी नृत्य’ विवाह के अवसर पर बारात की अगवानी के समय किया जाता है. इसी अवसर पर वर पक्ष की ओर से आंगन में हाथी बनाकर नचाया जाता है. यह संकेत करता है कि इसमें प्रसन्नता की अभिव्यक्ति ही मुख्य ध्येय है, लालित्य की चेष्टा गौण.
मध्यप्रदेश की सीमा से लगे गुजरात क्षेत्र में राठवा जनजाति बहुतायत के निवास करते हैं. राठवा मुख्यतः मध्यप्रदेश में भील जनजाति की उपजाति है. गुजरात में भी भील और राठवा जनजाति निवास करती हैं. राठवा जनजाति में विभिन्न पर्व-त्योहारों, अनुष्ठानों सहित अन्य खुशियों के अवसरों पर नृत्य की समृद्ध परम्परा है. राठवा जनजाति का नृत्य भील जनजाति नृत्य से ज्यादा पृथक तो नहीं है, परन्तु राठवा जनजाति के नृत्य में गति अधिक है
