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बुरहानपुर में भगोरिया महोत्सव की धूम, सीहोर में पारंपरिक वेशभूषा में निकले आदिवासी
Burhanpur, MP
भगोरिया महोत्सव में निमाड़-मालवा के विभिन्न जिलों के आदिवासी पारंपरिक वेशभूषा में पहुंचे. सीहोर में भी भगोरिया हाट की शुरूआत हुई.
नेपानगर स्थित नेहरू स्टेडियम ग्राउंड परिसर में रविवार को जागृति कला केंद्र, जिला पुरातत्व पर्यटन एवं संस्कृति परिषद के संयुक्त तत्वावधान में भगोरिया मोहत्सव मनाया गया. जनजातीय लोक कलाकार अपनी पारंपरिक वेशभूषा, ढोल मांदल की थाप और बांसुरी की धुन पर जमकर झूमे. इस दौरान कलेक्टर हर्ष सिंह ने मांदल बजाया तो एसपी देवेन्द्र कुमार पाटीदार ने थाली बजाई. ढोल और थाली की थाप पर अपर कलेक्टर जमकर थिरकते नजर आए.
निमाड़-मालवा से पहुंचे आदिवासी
भगोरिया महोत्सव में निमाड़-मालवा के विभिन्न जिलों के आदिवासी लोगों ने हिस्सा लिया. यहां आदिवासी लोक नृत्यों की प्रस्तुतियां दी गई. युवक-युवतियां पारंपरिक वेशभूषा पहनकर पहुंचे. आदिवासियों की पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुन सुनकर लोग मंत्र मुग्ध हो गए. इस महोत्सव में बड़ी संख्या में आदिवासी लोगों ने शिरकत की. बच्चों ने झूलों का आनंद उठाया. युवाओं ने अबीर-गुलाल लगाकर होली का उत्साह मनाया. खास बात यह है कि आदिवासी अपनी परंपरा को अभी भी जिंदा रखें हैं. यह नजारा देखने के लिए अन्य समाज के लोग भी पहुंचे. उन्होंने करीब से भगोरिया हाट महोत्सव को जाना.
आयोजक व जनजातीय कलाकार मुकेश दरबार ने बताया कि "हमारे प्रदेश और खास तौर से निमाड़ की लोक संस्कृति को विश्व पटल पर पहचान दिलाना हमारा उद्देश्य है. हाल ही में जनजाति कलाकारों ने लगातार 24 घंटे तक लोक नृत्य किया. इससे हमने वर्ल्ड रिकार्ड बनाया है."


सीहोर में भी भगोरिया हाट की शुरूआत
सीहोर में भी जनजातीय पर्व भगोरिया हाट की शुरुआत हो चुकी है. आदिवासी बाहुल्य अंचलो में भगोरिया की धूम है. भगोरिया मेलों में आदिवासी संस्कृति और परम्पराओं की झलक दिखाई दे रही है. जहाँ आकर्षक पारंपरिक वेशभूषा में जनजाति वर्ग के लोग बड़ी संख्या में शामिल हो रहे हैं. लाड़कुई, कोलार डेम क्षेत्र में भगोरिया उत्सव आयोजित किये गए. होली से पहले जनजातीय वर्ग के लोग पारम्परिक वेशभूषा में सजधज कर भगोरिया हाट में सामान खरीदने निकले. इस दौरान आदिवासी युवक- युवतियां ढोल, मांदल, थाली, बांसुरी बजाते हुए और डीजे की धुन पर नाचते गाते बाजारों में अपनी खुशी का इजहार करते दिखाई दिए.

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नेपानगर स्थित नेहरू स्टेडियम ग्राउंड परिसर में रविवार को जागृति कला केंद्र, जिला पुरातत्व पर्यटन एवं संस्कृति परिषद के संयुक्त तत्वावधान में भगोरिया मोहत्सव मनाया गया. जनजातीय लोक कलाकार अपनी पारंपरिक वेशभूषा, ढोल मांदल की थाप और बांसुरी की धुन पर जमकर झूमे. इस दौरान कलेक्टर हर्ष सिंह ने मांदल बजाया तो एसपी देवेन्द्र कुमार पाटीदार ने थाली बजाई. ढोल और थाली की थाप पर अपर कलेक्टर जमकर थिरकते नजर आए.
निमाड़-मालवा से पहुंचे आदिवासी
भगोरिया महोत्सव में निमाड़-मालवा के विभिन्न जिलों के आदिवासी लोगों ने हिस्सा लिया. यहां आदिवासी लोक नृत्यों की प्रस्तुतियां दी गई. युवक-युवतियां पारंपरिक वेशभूषा पहनकर पहुंचे. आदिवासियों की पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुन सुनकर लोग मंत्र मुग्ध हो गए. इस महोत्सव में बड़ी संख्या में आदिवासी लोगों ने शिरकत की. बच्चों ने झूलों का आनंद उठाया. युवाओं ने अबीर-गुलाल लगाकर होली का उत्साह मनाया. खास बात यह है कि आदिवासी अपनी परंपरा को अभी भी जिंदा रखें हैं. यह नजारा देखने के लिए अन्य समाज के लोग भी पहुंचे. उन्होंने करीब से भगोरिया हाट महोत्सव को जाना.
आयोजक व जनजातीय कलाकार मुकेश दरबार ने बताया कि "हमारे प्रदेश और खास तौर से निमाड़ की लोक संस्कृति को विश्व पटल पर पहचान दिलाना हमारा उद्देश्य है. हाल ही में जनजाति कलाकारों ने लगातार 24 घंटे तक लोक नृत्य किया. इससे हमने वर्ल्ड रिकार्ड बनाया है."


सीहोर में भी भगोरिया हाट की शुरूआत
सीहोर में भी जनजातीय पर्व भगोरिया हाट की शुरुआत हो चुकी है. आदिवासी बाहुल्य अंचलो में भगोरिया की धूम है. भगोरिया मेलों में आदिवासी संस्कृति और परम्पराओं की झलक दिखाई दे रही है. जहाँ आकर्षक पारंपरिक वेशभूषा में जनजाति वर्ग के लोग बड़ी संख्या में शामिल हो रहे हैं. लाड़कुई, कोलार डेम क्षेत्र में भगोरिया उत्सव आयोजित किये गए. होली से पहले जनजातीय वर्ग के लोग पारम्परिक वेशभूषा में सजधज कर भगोरिया हाट में सामान खरीदने निकले. इस दौरान आदिवासी युवक- युवतियां ढोल, मांदल, थाली, बांसुरी बजाते हुए और डीजे की धुन पर नाचते गाते बाजारों में अपनी खुशी का इजहार करते दिखाई दिए.

