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मध्य प्रदेश विधानसभा में पेश हुआ UCC बिल, कैबिनेट की मंजूरी के बाद सदन में पहुंचा विधेयक
मध्य प्रदेश
मंत्री गौतम टेटवाल ने समान नागरिक संहिता से जुड़ा विधेयक किया पेश, एक साथ कई बिल लाने पर कांग्रेस ने जताई आपत्ति, हंगामे के बाद सदन की कार्यवाही स्थगित
मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता यानी यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) को लेकर विधायी प्रक्रिया आगे बढ़ गई है। राज्य सरकार ने विधानसभा में इससे जुड़ा विधेयक पेश कर दिया है। मंत्री गौतम टेटवाल ने सदन की कार्यवाही के दौरान बिल को पटल पर रखा। इससे एक दिन पहले राज्य मंत्रिमंडल ने विधेयक को मंजूरी दी थी। अब विधानसभा में इस पर चर्चा की जाएगी और इसके बाद इसे पारित कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।
विधानसभा में UCC विधेयक पेश होने के बाद अब इसके प्रावधानों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच विस्तृत चर्चा होगी। चर्चा के लिए विधानसभा अध्यक्ष की ओर से समय निर्धारित किया जाएगा। इस दौरान विधायक विधेयक के अलग-अलग पहलुओं पर अपनी राय रख सकेंगे और सरकार प्रस्तावित कानून के उद्देश्य तथा प्रावधानों को सदन के सामने स्पष्ट करेगी। आवश्यकता पड़ने पर विधेयक में संशोधन से जुड़े प्रस्ताव भी सामने आ सकते हैं।
समान नागरिक संहिता का सामान्य अर्थ नागरिकों के व्यक्तिगत और पारिवारिक मामलों के लिए एक समान कानूनी व्यवस्था से है। विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, विरासत और गोद लेने जैसे विषय इसके दायरे में चर्चा का प्रमुख हिस्सा होते हैं। वर्तमान में इनसे जुड़े कई मामलों में अलग-अलग समुदायों के पर्सनल लॉ और अन्य कानून लागू होते हैं। हालांकि मध्य प्रदेश में प्रस्तावित व्यवस्था का वास्तविक स्वरूप और दायरा विधेयक के अंतिम प्रावधानों से ही स्पष्ट होगा।
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 में भी समान नागरिक संहिता का उल्लेख किया गया है। यह संविधान के राज्य के नीति निदेशक तत्वों का हिस्सा है। इसमें राज्य से नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता की दिशा में प्रयास करने की अपेक्षा की गई है। UCC को लेकर लंबे समय से देश में कानूनी, सामाजिक और राजनीतिक बहस होती रही है। मध्य प्रदेश विधानसभा में विधेयक पहुंचने के बाद अब प्रदेश स्तर पर भी इस मुद्दे पर राजनीतिक चर्चा तेज होने के आसार हैं।
UCC से जुड़े विधेयक के साथ राज्य सरकार ने कई अन्य महत्वपूर्ण विधेयक भी विधानसभा में प्रस्तुत किए। इनमें कारोबार, अग्निशमन और आपातकालीन सेवाओं, राजमार्ग, निजी विश्वविद्यालय, चिकित्सा शिक्षा, स्वास्थ्य विश्वविद्यालय, नागरिक सुरक्षा और श्रम व्यवस्था से जुड़े प्रस्ताव शामिल हैं। बड़ी संख्या में विधेयकों को एक साथ सदन के पटल पर रखे जाने के कारण विपक्ष ने प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए।
सरकार की ओर से मध्य प्रदेश ईज ऑफ डूइंग बिजनेस विधेयक 2026 भी पेश किया गया है। इसके अलावा मध्य प्रदेश अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाएं विधेयक 2026 और मध्य प्रदेश राजमार्ग संशोधन विधेयक 2026 को भी सदन में रखा गया। इन प्रस्तावों के जरिए राज्य में कारोबारी प्रक्रियाओं, आपातकालीन सेवाओं और सड़क संबंधी प्रशासनिक व्यवस्था में बदलाव से जुड़े विषयों को विधायी एजेंडे में शामिल किया गया है।
उच्च और चिकित्सा शिक्षा से जुड़े कई विधेयक भी सदन में पहुंचे हैं। इनमें मध्य प्रदेश निजी विश्वविद्यालय स्थापना एवं संचालन संशोधन विधेयक 2026, मध्य प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय से संबंधित संशोधन और मध्य प्रदेश धन्वंतरी स्वास्थ्य विश्वविद्यालय विधेयक 2026 शामिल हैं। इनके अलावा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता से संबंधित राज्य स्तरीय प्रस्ताव और निरसन विधेयक भी विधानसभा में प्रस्तुत किए गए हैं।
श्रम और कार्यस्थल से जुड़े प्रस्तावों को भी सरकार ने विधायी एजेंडे में जगह दी है। मध्य प्रदेश कोड ऑन एम्पावरिंग वर्कस्पेसेज 2026 और मध्य प्रदेश श्रम शक्ति संहिता 2026 समेत अन्य विधेयक सदन के सामने रखे गए। इन सभी विधेयकों के विस्तृत प्रावधानों पर संबंधित चर्चा के दौरान स्थिति अधिक स्पष्ट होगी।
एक साथ कई विधेयक पेश किए जाने पर कांग्रेस विधायक बाला बच्चन ने विधानसभा में आपत्ति दर्ज कराई। विपक्ष ने इस प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि महत्वपूर्ण विधेयकों पर विधायकों को पर्याप्त अध्ययन और चर्चा का अवसर मिलना चाहिए। इस मुद्दे को लेकर सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बहस की स्थिति बन गई।
विपक्ष की आपत्ति पर विधानसभा अध्यक्ष की ओर से स्पष्ट किया गया कि इन विधेयकों को लेकर कार्य मंत्रणा समिति की बैठक में पहले ही चर्चा की गई थी। समिति की सहमति के बाद अनुपूरक कार्यसूची जारी की गई और निर्धारित संसदीय प्रक्रिया के अनुसार विधेयकों को सदन में प्रस्तुत किया गया। अध्यक्ष ने विधेयकों को पेश किए जाने की प्रक्रिया को नियमों के अनुरूप बताया।
मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने भी कांग्रेस की आपत्ति का जवाब देते हुए सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि विधेयकों से जुड़े विषय कार्य मंत्रणा समिति के सामने रखे गए थे और पूरी प्रक्रिया विधानसभा के नियमों तथा स्थापित परंपराओं के अनुसार अपनाई गई। सरकार की ओर से विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा गया कि सदन में विधेयक रखने से पहले आवश्यक प्रक्रिया पूरी की गई थी।
विधेयकों के पेश होने के बाद विधानसभा में विपक्षी सदस्यों का विरोध तेज हो गया। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच नोकझोंक के कारण सदन में हंगामे की स्थिति बन गई। शोर-शराबे के बीच कार्यवाही को सामान्य रूप से आगे बढ़ाना मुश्किल हुआ, जिसके बाद सदन की कार्यवाही दोपहर 3 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।
अब सबसे अधिक नजर UCC विधेयक पर होने वाली चर्चा पर रहेगी। सत्ता पक्ष विधेयक के समर्थन में समान नागरिक कानून की आवश्यकता और उसके प्रस्तावित लाभों को सदन में रख सकता है। वहीं विपक्ष विधेयक के कानूनी, संवैधानिक और सामाजिक प्रभावों को लेकर सवाल उठा सकता है। विधेयक में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और अन्य नागरिक मामलों को लेकर क्या व्यवस्था प्रस्तावित की गई है, इस पर चर्चा के दौरान स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।
विधानसभा में पेश किए जाने के बाद विधेयक को निर्धारित विधायी प्रक्रिया से गुजरना होगा। सदन में चर्चा के दौरान इसके प्रावधानों पर बहस होगी और जरूरत पड़ने पर संशोधन प्रस्ताव रखे जा सकते हैं। इसके बाद मतदान की प्रक्रिया के जरिए विधेयक को पारित कराने का प्रयास किया जाएगा। विधानसभा की मंजूरी मिलने के बाद कानून के स्वरूप के अनुसार आगे की संवैधानिक औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी।
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मध्य प्रदेश विधानसभा में पेश हुआ UCC बिल, कैबिनेट की मंजूरी के बाद सदन में पहुंचा विधेयक
मध्य प्रदेश
मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता यानी यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) को लेकर विधायी प्रक्रिया आगे बढ़ गई है। राज्य सरकार ने विधानसभा में इससे जुड़ा विधेयक पेश कर दिया है। मंत्री गौतम टेटवाल ने सदन की कार्यवाही के दौरान बिल को पटल पर रखा। इससे एक दिन पहले राज्य मंत्रिमंडल ने विधेयक को मंजूरी दी थी। अब विधानसभा में इस पर चर्चा की जाएगी और इसके बाद इसे पारित कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।
विधानसभा में UCC विधेयक पेश होने के बाद अब इसके प्रावधानों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच विस्तृत चर्चा होगी। चर्चा के लिए विधानसभा अध्यक्ष की ओर से समय निर्धारित किया जाएगा। इस दौरान विधायक विधेयक के अलग-अलग पहलुओं पर अपनी राय रख सकेंगे और सरकार प्रस्तावित कानून के उद्देश्य तथा प्रावधानों को सदन के सामने स्पष्ट करेगी। आवश्यकता पड़ने पर विधेयक में संशोधन से जुड़े प्रस्ताव भी सामने आ सकते हैं।
समान नागरिक संहिता का सामान्य अर्थ नागरिकों के व्यक्तिगत और पारिवारिक मामलों के लिए एक समान कानूनी व्यवस्था से है। विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, विरासत और गोद लेने जैसे विषय इसके दायरे में चर्चा का प्रमुख हिस्सा होते हैं। वर्तमान में इनसे जुड़े कई मामलों में अलग-अलग समुदायों के पर्सनल लॉ और अन्य कानून लागू होते हैं। हालांकि मध्य प्रदेश में प्रस्तावित व्यवस्था का वास्तविक स्वरूप और दायरा विधेयक के अंतिम प्रावधानों से ही स्पष्ट होगा।
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 में भी समान नागरिक संहिता का उल्लेख किया गया है। यह संविधान के राज्य के नीति निदेशक तत्वों का हिस्सा है। इसमें राज्य से नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता की दिशा में प्रयास करने की अपेक्षा की गई है। UCC को लेकर लंबे समय से देश में कानूनी, सामाजिक और राजनीतिक बहस होती रही है। मध्य प्रदेश विधानसभा में विधेयक पहुंचने के बाद अब प्रदेश स्तर पर भी इस मुद्दे पर राजनीतिक चर्चा तेज होने के आसार हैं।
UCC से जुड़े विधेयक के साथ राज्य सरकार ने कई अन्य महत्वपूर्ण विधेयक भी विधानसभा में प्रस्तुत किए। इनमें कारोबार, अग्निशमन और आपातकालीन सेवाओं, राजमार्ग, निजी विश्वविद्यालय, चिकित्सा शिक्षा, स्वास्थ्य विश्वविद्यालय, नागरिक सुरक्षा और श्रम व्यवस्था से जुड़े प्रस्ताव शामिल हैं। बड़ी संख्या में विधेयकों को एक साथ सदन के पटल पर रखे जाने के कारण विपक्ष ने प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए।
सरकार की ओर से मध्य प्रदेश ईज ऑफ डूइंग बिजनेस विधेयक 2026 भी पेश किया गया है। इसके अलावा मध्य प्रदेश अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाएं विधेयक 2026 और मध्य प्रदेश राजमार्ग संशोधन विधेयक 2026 को भी सदन में रखा गया। इन प्रस्तावों के जरिए राज्य में कारोबारी प्रक्रियाओं, आपातकालीन सेवाओं और सड़क संबंधी प्रशासनिक व्यवस्था में बदलाव से जुड़े विषयों को विधायी एजेंडे में शामिल किया गया है।
उच्च और चिकित्सा शिक्षा से जुड़े कई विधेयक भी सदन में पहुंचे हैं। इनमें मध्य प्रदेश निजी विश्वविद्यालय स्थापना एवं संचालन संशोधन विधेयक 2026, मध्य प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय से संबंधित संशोधन और मध्य प्रदेश धन्वंतरी स्वास्थ्य विश्वविद्यालय विधेयक 2026 शामिल हैं। इनके अलावा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता से संबंधित राज्य स्तरीय प्रस्ताव और निरसन विधेयक भी विधानसभा में प्रस्तुत किए गए हैं।
श्रम और कार्यस्थल से जुड़े प्रस्तावों को भी सरकार ने विधायी एजेंडे में जगह दी है। मध्य प्रदेश कोड ऑन एम्पावरिंग वर्कस्पेसेज 2026 और मध्य प्रदेश श्रम शक्ति संहिता 2026 समेत अन्य विधेयक सदन के सामने रखे गए। इन सभी विधेयकों के विस्तृत प्रावधानों पर संबंधित चर्चा के दौरान स्थिति अधिक स्पष्ट होगी।
एक साथ कई विधेयक पेश किए जाने पर कांग्रेस विधायक बाला बच्चन ने विधानसभा में आपत्ति दर्ज कराई। विपक्ष ने इस प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि महत्वपूर्ण विधेयकों पर विधायकों को पर्याप्त अध्ययन और चर्चा का अवसर मिलना चाहिए। इस मुद्दे को लेकर सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बहस की स्थिति बन गई।
विपक्ष की आपत्ति पर विधानसभा अध्यक्ष की ओर से स्पष्ट किया गया कि इन विधेयकों को लेकर कार्य मंत्रणा समिति की बैठक में पहले ही चर्चा की गई थी। समिति की सहमति के बाद अनुपूरक कार्यसूची जारी की गई और निर्धारित संसदीय प्रक्रिया के अनुसार विधेयकों को सदन में प्रस्तुत किया गया। अध्यक्ष ने विधेयकों को पेश किए जाने की प्रक्रिया को नियमों के अनुरूप बताया।
मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने भी कांग्रेस की आपत्ति का जवाब देते हुए सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि विधेयकों से जुड़े विषय कार्य मंत्रणा समिति के सामने रखे गए थे और पूरी प्रक्रिया विधानसभा के नियमों तथा स्थापित परंपराओं के अनुसार अपनाई गई। सरकार की ओर से विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा गया कि सदन में विधेयक रखने से पहले आवश्यक प्रक्रिया पूरी की गई थी।
विधेयकों के पेश होने के बाद विधानसभा में विपक्षी सदस्यों का विरोध तेज हो गया। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच नोकझोंक के कारण सदन में हंगामे की स्थिति बन गई। शोर-शराबे के बीच कार्यवाही को सामान्य रूप से आगे बढ़ाना मुश्किल हुआ, जिसके बाद सदन की कार्यवाही दोपहर 3 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।
अब सबसे अधिक नजर UCC विधेयक पर होने वाली चर्चा पर रहेगी। सत्ता पक्ष विधेयक के समर्थन में समान नागरिक कानून की आवश्यकता और उसके प्रस्तावित लाभों को सदन में रख सकता है। वहीं विपक्ष विधेयक के कानूनी, संवैधानिक और सामाजिक प्रभावों को लेकर सवाल उठा सकता है। विधेयक में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और अन्य नागरिक मामलों को लेकर क्या व्यवस्था प्रस्तावित की गई है, इस पर चर्चा के दौरान स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।
विधानसभा में पेश किए जाने के बाद विधेयक को निर्धारित विधायी प्रक्रिया से गुजरना होगा। सदन में चर्चा के दौरान इसके प्रावधानों पर बहस होगी और जरूरत पड़ने पर संशोधन प्रस्ताव रखे जा सकते हैं। इसके बाद मतदान की प्रक्रिया के जरिए विधेयक को पारित कराने का प्रयास किया जाएगा। विधानसभा की मंजूरी मिलने के बाद कानून के स्वरूप के अनुसार आगे की संवैधानिक औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी।
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