मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र का दूसरा दिन, UCC और अनुपूरक बजट पर नजर

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UCC समेत अहम विधेयकों पर चर्चा का एजेंडा, किसान और जनहित के मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी में विपक्ष

भोपाल में मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र का मंगलवार को दूसरा दिन है। सत्र की शुरुआत से ही समान नागरिक संहिता यानी UCC सबसे बड़ा मुद्दा बनकर सामने आया है। पहले दिन सरकार ने इससे जुड़ा विधेयक सदन में पेश किया था, जिसके बाद विपक्ष ने कई सवाल उठाए। कांग्रेस विधायकों ने विधेयक के प्रावधानों के साथ इसे सदन में लाने की प्रक्रिया पर भी आपत्ति जताई। अब दूसरे दिन UCC पर होने वाली चर्चा और विपक्ष के रुख पर सबसे ज्यादा नजर है।

विधानसभा का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू हुआ है और 24 जुलाई तक चलेगा। सिर्फ पांच दिन के इस सत्र में सरकार को कई महत्वपूर्ण विधायी और वित्तीय काम पूरे करने हैं। यही बात विपक्ष के विरोध की एक बड़ी वजह भी है। कांग्रेस का कहना है कि इतने कम समय में कई महत्वपूर्ण विधेयक लाने से उन पर विस्तार से चर्चा मुश्किल होगी। सरकार का पक्ष है कि सभी विधायी काम तय प्रक्रिया के तहत किए जा रहे हैं और सदन में चर्चा के लिए पर्याप्त व्यवस्था है।

सत्र के पहले दिन सोमवार को सदन का माहौल शुरुआत से ही गर्म रहा। समान नागरिक संहिता से जुड़ा विधेयक पेश होते ही कांग्रेस विधायकों ने विरोध दर्ज कराया। एक साथ कई विधेयक सदन में लाए जाने को लेकर भी विपक्ष ने सवाल उठाए। हंगामा बढ़ने के कारण विधानसभा की कार्यवाही प्रभावित हुई और सत्ता पक्ष तथा विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। पहले दिन के घटनाक्रम के बाद मंगलवार की कार्यवाही भी हंगामेदार रहने के आसार हैं।

UCC इस मानसून सत्र का सबसे चर्चित विधेयक है। विधानसभा सत्र शुरू होने से ठीक पहले जगदीशपुर में आयोजित विशेष कैबिनेट बैठक में इसके मसौदे को मंजूरी दी गई थी। कैबिनेट से हरी झंडी मिलने के बाद विधेयक विधानसभा पहुंचा और सत्र के पहले दिन इसे सदन में पेश किया गया। सरकार इसे नागरिक कानूनों में समान व्यवस्था की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बता रही है। विपक्ष का कहना है कि इतने व्यापक असर वाले कानून पर जल्दबाजी के बजाय हर प्रावधान पर विस्तार से चर्चा होनी चाहिए।

प्रस्तावित समान नागरिक संहिता विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और पारिवारिक मामलों से जुड़े नागरिक कानूनों में समान व्यवस्था बनाने से संबंधित है। सामने आई जानकारी के अनुसार इसमें एक विवाह की व्यवस्था को प्रमुखता दी गई है और बहुविवाह पर रोक से जुड़े प्रावधान भी प्रस्तावित हैं। अनुसूचित जनजातियों और संविधान के तहत विशेष संरक्षण वाले कुछ समुदायों को इसके दायरे से बाहर रखने की व्यवस्था बताई गई है। इन्हीं प्रावधानों के सामाजिक और कानूनी असर को लेकर सदन के अंदर और बाहर बहस तेज है।

भाजपा UCC को समानता और खासकर महिलाओं के अधिकारों से जोड़कर देख रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी इस मुद्दे पर सरकार का रुख स्पष्ट कर चुके हैं। सरकार का कहना है कि अलग-अलग नागरिक व्यवस्थाओं के बजाय समान व्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ना जरूरी है। भाजपा विधायकों को भी सदन में विधेयक से जुड़े पक्ष को मजबूती से रखने के लिए कहा गया है। सोमवार रात मुख्यमंत्री निवास पर हुई भाजपा विधायक दल की बैठक में विधानसभा सत्र की रणनीति और UCC पर चर्चा की गई।

दूसरी तरफ कांग्रेस ने साफ संकेत दिए हैं कि वह विधेयक को बिना विस्तृत चर्चा के आसानी से आगे नहीं बढ़ने देगी। कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद की ओर से UCC विधेयक में संशोधन प्रस्ताव दिए जाने की बात भी सामने आई है। विपक्ष का जोर इस बात पर है कि विवाह, तलाक और उत्तराधिकार जैसे मामले सीधे आम लोगों की सामाजिक और पारिवारिक व्यवस्था से जुड़े हैं। इसलिए कानून के हर पहलू पर सदन में पर्याप्त समय देकर बहस होनी चाहिए।

दूसरे दिन UCC के अलावा अन्य महत्वपूर्ण विधेयक भी सदन के एजेंडे में हैं। सरकार की कोशिश पांच दिन के छोटे सत्र में ज्यादा से ज्यादा विधायी काम पूरा करने की है। हालांकि विपक्ष इसी बात को लेकर सरकार पर सवाल उठा रहा है। कांग्रेस का आरोप है कि एक साथ ज्यादा विधेयक लाने से विधायकों को उनका अध्ययन करने और चर्चा की तैयारी के लिए पर्याप्त समय नहीं मिलता। ऐसे में विधेयकों पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच फिर टकराव देखने को मिल सकता है।

विधानसभा के दूसरे दिन वित्तीय वर्ष 2026-27 का पहला अनुपूरक बजट भी महत्वपूर्ण मुद्दा है। उपमुख्यमंत्री और वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा की ओर से इसे सदन में पेश किए जाने का कार्यक्रम है। अनुपूरक बजट के जरिए सरकार उन विभागों और योजनाओं के लिए अतिरिक्त वित्तीय प्रावधान करती है, जहां मूल बजट के बाद अतिरिक्त राशि की जरूरत सामने आती है। बजट में किन विभागों और योजनाओं के लिए अतिरिक्त राशि रखी जाती है, इस पर विपक्ष की खास नजर रहेगी।

शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास, सड़क, सिंचाई और सामाजिक कल्याण से जुड़ी योजनाओं के लिए होने वाले वित्तीय प्रावधान चर्चा में रह सकते हैं। सरकार की कई पुरानी घोषणाओं और विकास परियोजनाओं के लिए राशि के इंतजाम को लेकर भी सवाल उठ सकते हैं। विपक्ष बजट पर चर्चा के दौरान सरकार से खर्च और योजनाओं की प्रगति का हिसाब मांग सकता है। कम अवधि के सत्र के कारण अनुपूरक बजट पर चर्चा के लिए मिलने वाला समय भी राजनीतिक मुद्दा बन सकता है।

किसानों से जुड़े सवाल भी मानसून सत्र में सरकार के लिए चुनौती बन सकते हैं। प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से फसल, भुगतान, खाद-बीज की उपलब्धता, सिंचाई और बारिश से नुकसान से जुड़े मामले सामने आते रहे हैं। विपक्ष इन मुद्दों को विधानसभा में उठाने की तैयारी में है। किसानों के भुगतान और कृषि से जुड़ी योजनाओं को लेकर भी सरकार से जवाब मांगा जा सकता है। कांग्रेस की रणनीति UCC के साथ किसानों के सवालों पर भी सरकार को घेरने की है।

मानसून का समय होने के कारण बारिश से जुड़ी स्थानीय समस्याएं भी विधानसभा तक पहुंच सकती हैं। कई इलाकों में जलभराव, खराब सड़कें, ग्रामीण संपर्क मार्ग, बिजली व्यवस्था और नालों की सफाई जैसे मुद्दे विधायकों ने उठाने की तैयारी की है। अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों से आए जनहित के मामलों को प्रश्नकाल, ध्यानाकर्षण और अन्य संसदीय प्रक्रियाओं के जरिए सदन के सामने रखा जा सकता है। स्थानीय समस्याओं को लेकर सत्ता पक्ष के विधायक भी अपने विभागों से जवाब मांग सकते हैं।

विधानसभा में प्रश्नकाल सरकार के लिए खास तौर पर महत्वपूर्ण रहेगा। विधायक अपने क्षेत्रों से जुड़े सवालों पर मंत्रियों से जवाब मांगेंगे। विभागीय योजनाओं की स्थिति, स्वीकृत राशि, अधूरे विकास कार्य और प्रशासनिक मामलों पर सवाल उठ सकते हैं। जनहित से जुड़ी कई याचिकाएं और सूचनाएं भी विधानसभा सचिवालय को दी गई हैं। हालांकि इनमें से कितने विषय मंगलवार की वास्तविक कार्यवाही में लिए जाते हैं, यह सदन के समय और कार्यवाही की स्थिति पर निर्भर करेगा।

पहले दिन हुए हंगामे के बाद दूसरे दिन सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चलाना भी चुनौती होगी। अगर UCC पर बहस लंबी होती है या विरोध के कारण सदन बार-बार बाधित होता है तो बाकी विधायी कामकाज के लिए समय कम पड़ सकता है। सरकार के पास 24 जुलाई तक ही समय है। इसी अवधि में महत्वपूर्ण विधेयकों, अनुपूरक बजट और दूसरे सरकारी कामों को पूरा करना है। विपक्ष भी चाहता है कि जनहित के मुद्दे विधायी कामकाज के बीच दबकर न रह जाएं।

राजनीतिक तौर पर देखें तो UCC का मुद्दा विधानसभा से बाहर भी गर्म है। भाजपा इसे समान नागरिक अधिकार और सामाजिक समानता की दिशा में बड़ा कदम बता रही है। कांग्रेस कानून के प्रावधानों, उसके असर और प्रक्रिया को लेकर सवाल उठा रही है। आने वाले दिनों में दोनों दल इस मुद्दे को जनता के बीच भी ले जा सकते हैं। ऐसे में सदन के भीतर होने वाली बहस का असर मध्य प्रदेश की आगे की राजनीति पर भी दिखाई देने की संभावना है।

मानसून सत्र के दूसरे दिन तीन बड़े मुद्दों पर सबसे ज्यादा नजर है। पहला UCC पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच होने वाली चर्चा, दूसरा अनुपूरक बजट और तीसरा किसानों समेत दूसरे जनहित के सवाल। सोमवार के घटनाक्रम से साफ है कि पांच दिन का यह सत्र अवधि में छोटा जरूर है, लेकिन राजनीतिक और विधायी लिहाज से काफी महत्वपूर्ण है। सरकार अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने में लगी है, जबकि विपक्ष हर बड़े मुद्दे पर जवाब मांगने की रणनीति के साथ सदन में उतरा है।

अब यह देखना अहम होगा कि दूसरे दिन UCC पर चर्चा किस दिशा में जाती है और विपक्ष की ओर से उठाए गए सवालों का सरकार क्या जवाब देती है। अनुपूरक बजट में किन योजनाओं और विभागों को अतिरिक्त राशि मिलती है, इस पर भी नजर रहेगी। 24 जुलाई तक चलने वाले मानसून सत्र में सरकार कितने महत्वपूर्ण विधायी काम पूरे कर पाती है और विपक्ष किन मुद्दों पर सरकार को घेरने में सफल होता है, आने वाले तीन दिनों में इसकी तस्वीर और साफ हो जाएगी।

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21 Jul 2026 By Priyanka

मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र का दूसरा दिन, UCC और अनुपूरक बजट पर नजर

मध्य प्रदेश

भोपाल में मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र का मंगलवार को दूसरा दिन है। सत्र की शुरुआत से ही समान नागरिक संहिता यानी UCC सबसे बड़ा मुद्दा बनकर सामने आया है। पहले दिन सरकार ने इससे जुड़ा विधेयक सदन में पेश किया था, जिसके बाद विपक्ष ने कई सवाल उठाए। कांग्रेस विधायकों ने विधेयक के प्रावधानों के साथ इसे सदन में लाने की प्रक्रिया पर भी आपत्ति जताई। अब दूसरे दिन UCC पर होने वाली चर्चा और विपक्ष के रुख पर सबसे ज्यादा नजर है।

विधानसभा का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू हुआ है और 24 जुलाई तक चलेगा। सिर्फ पांच दिन के इस सत्र में सरकार को कई महत्वपूर्ण विधायी और वित्तीय काम पूरे करने हैं। यही बात विपक्ष के विरोध की एक बड़ी वजह भी है। कांग्रेस का कहना है कि इतने कम समय में कई महत्वपूर्ण विधेयक लाने से उन पर विस्तार से चर्चा मुश्किल होगी। सरकार का पक्ष है कि सभी विधायी काम तय प्रक्रिया के तहत किए जा रहे हैं और सदन में चर्चा के लिए पर्याप्त व्यवस्था है।

सत्र के पहले दिन सोमवार को सदन का माहौल शुरुआत से ही गर्म रहा। समान नागरिक संहिता से जुड़ा विधेयक पेश होते ही कांग्रेस विधायकों ने विरोध दर्ज कराया। एक साथ कई विधेयक सदन में लाए जाने को लेकर भी विपक्ष ने सवाल उठाए। हंगामा बढ़ने के कारण विधानसभा की कार्यवाही प्रभावित हुई और सत्ता पक्ष तथा विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। पहले दिन के घटनाक्रम के बाद मंगलवार की कार्यवाही भी हंगामेदार रहने के आसार हैं।

UCC इस मानसून सत्र का सबसे चर्चित विधेयक है। विधानसभा सत्र शुरू होने से ठीक पहले जगदीशपुर में आयोजित विशेष कैबिनेट बैठक में इसके मसौदे को मंजूरी दी गई थी। कैबिनेट से हरी झंडी मिलने के बाद विधेयक विधानसभा पहुंचा और सत्र के पहले दिन इसे सदन में पेश किया गया। सरकार इसे नागरिक कानूनों में समान व्यवस्था की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बता रही है। विपक्ष का कहना है कि इतने व्यापक असर वाले कानून पर जल्दबाजी के बजाय हर प्रावधान पर विस्तार से चर्चा होनी चाहिए।

प्रस्तावित समान नागरिक संहिता विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और पारिवारिक मामलों से जुड़े नागरिक कानूनों में समान व्यवस्था बनाने से संबंधित है। सामने आई जानकारी के अनुसार इसमें एक विवाह की व्यवस्था को प्रमुखता दी गई है और बहुविवाह पर रोक से जुड़े प्रावधान भी प्रस्तावित हैं। अनुसूचित जनजातियों और संविधान के तहत विशेष संरक्षण वाले कुछ समुदायों को इसके दायरे से बाहर रखने की व्यवस्था बताई गई है। इन्हीं प्रावधानों के सामाजिक और कानूनी असर को लेकर सदन के अंदर और बाहर बहस तेज है।

भाजपा UCC को समानता और खासकर महिलाओं के अधिकारों से जोड़कर देख रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी इस मुद्दे पर सरकार का रुख स्पष्ट कर चुके हैं। सरकार का कहना है कि अलग-अलग नागरिक व्यवस्थाओं के बजाय समान व्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ना जरूरी है। भाजपा विधायकों को भी सदन में विधेयक से जुड़े पक्ष को मजबूती से रखने के लिए कहा गया है। सोमवार रात मुख्यमंत्री निवास पर हुई भाजपा विधायक दल की बैठक में विधानसभा सत्र की रणनीति और UCC पर चर्चा की गई।

दूसरी तरफ कांग्रेस ने साफ संकेत दिए हैं कि वह विधेयक को बिना विस्तृत चर्चा के आसानी से आगे नहीं बढ़ने देगी। कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद की ओर से UCC विधेयक में संशोधन प्रस्ताव दिए जाने की बात भी सामने आई है। विपक्ष का जोर इस बात पर है कि विवाह, तलाक और उत्तराधिकार जैसे मामले सीधे आम लोगों की सामाजिक और पारिवारिक व्यवस्था से जुड़े हैं। इसलिए कानून के हर पहलू पर सदन में पर्याप्त समय देकर बहस होनी चाहिए।

दूसरे दिन UCC के अलावा अन्य महत्वपूर्ण विधेयक भी सदन के एजेंडे में हैं। सरकार की कोशिश पांच दिन के छोटे सत्र में ज्यादा से ज्यादा विधायी काम पूरा करने की है। हालांकि विपक्ष इसी बात को लेकर सरकार पर सवाल उठा रहा है। कांग्रेस का आरोप है कि एक साथ ज्यादा विधेयक लाने से विधायकों को उनका अध्ययन करने और चर्चा की तैयारी के लिए पर्याप्त समय नहीं मिलता। ऐसे में विधेयकों पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच फिर टकराव देखने को मिल सकता है।

विधानसभा के दूसरे दिन वित्तीय वर्ष 2026-27 का पहला अनुपूरक बजट भी महत्वपूर्ण मुद्दा है। उपमुख्यमंत्री और वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा की ओर से इसे सदन में पेश किए जाने का कार्यक्रम है। अनुपूरक बजट के जरिए सरकार उन विभागों और योजनाओं के लिए अतिरिक्त वित्तीय प्रावधान करती है, जहां मूल बजट के बाद अतिरिक्त राशि की जरूरत सामने आती है। बजट में किन विभागों और योजनाओं के लिए अतिरिक्त राशि रखी जाती है, इस पर विपक्ष की खास नजर रहेगी।

शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास, सड़क, सिंचाई और सामाजिक कल्याण से जुड़ी योजनाओं के लिए होने वाले वित्तीय प्रावधान चर्चा में रह सकते हैं। सरकार की कई पुरानी घोषणाओं और विकास परियोजनाओं के लिए राशि के इंतजाम को लेकर भी सवाल उठ सकते हैं। विपक्ष बजट पर चर्चा के दौरान सरकार से खर्च और योजनाओं की प्रगति का हिसाब मांग सकता है। कम अवधि के सत्र के कारण अनुपूरक बजट पर चर्चा के लिए मिलने वाला समय भी राजनीतिक मुद्दा बन सकता है।

किसानों से जुड़े सवाल भी मानसून सत्र में सरकार के लिए चुनौती बन सकते हैं। प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से फसल, भुगतान, खाद-बीज की उपलब्धता, सिंचाई और बारिश से नुकसान से जुड़े मामले सामने आते रहे हैं। विपक्ष इन मुद्दों को विधानसभा में उठाने की तैयारी में है। किसानों के भुगतान और कृषि से जुड़ी योजनाओं को लेकर भी सरकार से जवाब मांगा जा सकता है। कांग्रेस की रणनीति UCC के साथ किसानों के सवालों पर भी सरकार को घेरने की है।

मानसून का समय होने के कारण बारिश से जुड़ी स्थानीय समस्याएं भी विधानसभा तक पहुंच सकती हैं। कई इलाकों में जलभराव, खराब सड़कें, ग्रामीण संपर्क मार्ग, बिजली व्यवस्था और नालों की सफाई जैसे मुद्दे विधायकों ने उठाने की तैयारी की है। अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों से आए जनहित के मामलों को प्रश्नकाल, ध्यानाकर्षण और अन्य संसदीय प्रक्रियाओं के जरिए सदन के सामने रखा जा सकता है। स्थानीय समस्याओं को लेकर सत्ता पक्ष के विधायक भी अपने विभागों से जवाब मांग सकते हैं।

विधानसभा में प्रश्नकाल सरकार के लिए खास तौर पर महत्वपूर्ण रहेगा। विधायक अपने क्षेत्रों से जुड़े सवालों पर मंत्रियों से जवाब मांगेंगे। विभागीय योजनाओं की स्थिति, स्वीकृत राशि, अधूरे विकास कार्य और प्रशासनिक मामलों पर सवाल उठ सकते हैं। जनहित से जुड़ी कई याचिकाएं और सूचनाएं भी विधानसभा सचिवालय को दी गई हैं। हालांकि इनमें से कितने विषय मंगलवार की वास्तविक कार्यवाही में लिए जाते हैं, यह सदन के समय और कार्यवाही की स्थिति पर निर्भर करेगा।

पहले दिन हुए हंगामे के बाद दूसरे दिन सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चलाना भी चुनौती होगी। अगर UCC पर बहस लंबी होती है या विरोध के कारण सदन बार-बार बाधित होता है तो बाकी विधायी कामकाज के लिए समय कम पड़ सकता है। सरकार के पास 24 जुलाई तक ही समय है। इसी अवधि में महत्वपूर्ण विधेयकों, अनुपूरक बजट और दूसरे सरकारी कामों को पूरा करना है। विपक्ष भी चाहता है कि जनहित के मुद्दे विधायी कामकाज के बीच दबकर न रह जाएं।

राजनीतिक तौर पर देखें तो UCC का मुद्दा विधानसभा से बाहर भी गर्म है। भाजपा इसे समान नागरिक अधिकार और सामाजिक समानता की दिशा में बड़ा कदम बता रही है। कांग्रेस कानून के प्रावधानों, उसके असर और प्रक्रिया को लेकर सवाल उठा रही है। आने वाले दिनों में दोनों दल इस मुद्दे को जनता के बीच भी ले जा सकते हैं। ऐसे में सदन के भीतर होने वाली बहस का असर मध्य प्रदेश की आगे की राजनीति पर भी दिखाई देने की संभावना है।

मानसून सत्र के दूसरे दिन तीन बड़े मुद्दों पर सबसे ज्यादा नजर है। पहला UCC पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच होने वाली चर्चा, दूसरा अनुपूरक बजट और तीसरा किसानों समेत दूसरे जनहित के सवाल। सोमवार के घटनाक्रम से साफ है कि पांच दिन का यह सत्र अवधि में छोटा जरूर है, लेकिन राजनीतिक और विधायी लिहाज से काफी महत्वपूर्ण है। सरकार अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने में लगी है, जबकि विपक्ष हर बड़े मुद्दे पर जवाब मांगने की रणनीति के साथ सदन में उतरा है।

अब यह देखना अहम होगा कि दूसरे दिन UCC पर चर्चा किस दिशा में जाती है और विपक्ष की ओर से उठाए गए सवालों का सरकार क्या जवाब देती है। अनुपूरक बजट में किन योजनाओं और विभागों को अतिरिक्त राशि मिलती है, इस पर भी नजर रहेगी। 24 जुलाई तक चलने वाले मानसून सत्र में सरकार कितने महत्वपूर्ण विधायी काम पूरे कर पाती है और विपक्ष किन मुद्दों पर सरकार को घेरने में सफल होता है, आने वाले तीन दिनों में इसकी तस्वीर और साफ हो जाएगी।

https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/eye-on-ucc-and-supplementary-budget-on-the-second-day/article-59339

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