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एमपी में फिर बदला मौसम, दो हफ़्ते बाद मानसून सक्रिय; कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट
Digital Desk
प्रदेश में अब तक सामान्य से 17 फीसदी कम बारिश, जुलाई के अंतिम सप्ताह में मजबूत मानसूनी सिस्टम बनने की उम्मीद; किसानों की बढ़ी चिंता
मध्य प्रदेश में पिछले कई दिनों से धीमी पड़ी मानसूनी गतिविधियों के बीच अब मौसम ने एक बार फिर करवट लेनी शुरू कर दी है। करीब दस दिनों की सुस्ती के बाद मानसून दोबारा सक्रिय होने के संकेत मिले हैं। मौसम विभाग ने मंगलवार को प्रदेश के कुछ जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है, जबकि कई अन्य हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना जताई गई है। लगातार कम बारिश के कारण खेती-किसानी पर असर दिखाई देने लगा है और खरीफ फसलों की बुवाई कर चुके किसान अब अच्छी वर्षा का इंतजार कर रहे हैं। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि जुलाई के अंतिम सप्ताह में बनने वाला नया मानसूनी तंत्र प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में अच्छी बारिश लेकर आ सकता है।
मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में इस मानसून सीजन में अब तक सामान्य से लगभग 17 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है। वर्तमान समय तक जहां औसतन 323.2 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए थी, वहीं केवल 268.1 मिलीमीटर वर्षा रिकॉर्ड की गई है। पिछले करीब 13 दिनों से प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में व्यापक बारिश नहीं होने के कारण वर्षा का आंकड़ा लगातार सामान्य से नीचे बना हुआ है। इसका असर सबसे अधिक कृषि क्षेत्र में देखने को मिल रहा है। खेतों में नमी कम होने लगी है और जिन किसानों ने खरीफ फसलों की बुवाई पूरी कर ली है, उनकी चिंता लगातार बढ़ रही है। कई इलाकों में सिंचाई पर निर्भरता भी बढ़ने लगी है।
प्रदेश के 39 जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है। मौसम विभाग ने मंगलवार के लिए मुरैना, भिंड, दमोह और कटनी जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। इन क्षेत्रों में कुछ स्थानों पर तेज वर्षा के साथ गरज-चमक की भी संभावना व्यक्त की गई है। वहीं राजधानी भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, रीवा, शहडोल, नर्मदापुरम, सागर और आसपास के जिलों में हल्की से मध्यम बारिश होने के आसार हैं। मौसम विभाग का कहना है कि अगले 24 घंटों में कई क्षेत्रों में बादल छाए रहेंगे और रुक-रुक कर बारिश का दौर जारी रह सकता है।
लगातार कम बारिश का असर ग्रामीण क्षेत्रों में साफ दिखाई देने लगा है। कई जगह खेतों की ऊपरी सतह सूखने लगी है, जिससे नई फसलों की बढ़वार प्रभावित होने की आशंका है। कृषि विशेषज्ञ किसानों को सलाह दे रहे हैं कि मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रखें और आवश्यकता पड़ने पर सिंचाई की व्यवस्था करें। यदि आने वाले दिनों में अच्छी बारिश होती है तो फसलों को राहत मिल सकती है और वर्तमान स्थिति में सुधार की संभावना बनेगी।
बारिश के आंकड़ों पर नजर डालें तो प्रदेश के अलग-अलग जिलों में वर्षा का अंतर भी काफी अधिक है। देवास जिले में इस सीजन में सामान्य से 102 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई है, जिससे वहां जलस्तर और कृषि गतिविधियों को फायदा मिला है। दूसरी ओर आलीराजपुर जिले में सबसे कम वर्षा रिकॉर्ड की गई है, जहां सामान्य से करीब 74 प्रतिशत कम बारिश हुई है। इसके अलावा कई अन्य जिलों में भी सामान्य से कम वर्षा दर्ज होने के कारण स्थानीय स्तर पर कृषि कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
मौसम विभाग के अनुसार फिलहाल मानसून की गतिविधियां धीरे-धीरे सक्रिय हो रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बंगाल की खाड़ी और आसपास के क्षेत्रों में नए मौसम तंत्र के बनने की संभावना है। यदि यह सिस्टम मजबूत होता है और मध्य भारत की ओर बढ़ता है, तो जुलाई के अंतिम सप्ताह में प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में अच्छी बारिश हो सकती है। इससे वर्षा की कमी काफी हद तक पूरी होने की उम्मीद जताई जा रही है।
मौसम विभाग अगले कुछ दिनों में मौसम का रुख बदल सकता है। यदि अनुमान के अनुसार मानसूनी गतिविधियां तेज होती हैं, तो न केवल किसानों को राहत मिलेगी बल्कि जलाशयों और बांधों में भी जल स्तर बढ़ेगा। इससे पेयजल और सिंचाई दोनों क्षेत्रों को फायदा होगा। प्रशासन भी मौसम की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और जिन जिलों में भारी बारिश की संभावना जताई गई है, वहां संबंधित अधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।
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एमपी में फिर बदला मौसम, दो हफ़्ते बाद मानसून सक्रिय; कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट
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मध्य प्रदेश में पिछले कई दिनों से धीमी पड़ी मानसूनी गतिविधियों के बीच अब मौसम ने एक बार फिर करवट लेनी शुरू कर दी है। करीब दस दिनों की सुस्ती के बाद मानसून दोबारा सक्रिय होने के संकेत मिले हैं। मौसम विभाग ने मंगलवार को प्रदेश के कुछ जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है, जबकि कई अन्य हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना जताई गई है। लगातार कम बारिश के कारण खेती-किसानी पर असर दिखाई देने लगा है और खरीफ फसलों की बुवाई कर चुके किसान अब अच्छी वर्षा का इंतजार कर रहे हैं। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि जुलाई के अंतिम सप्ताह में बनने वाला नया मानसूनी तंत्र प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में अच्छी बारिश लेकर आ सकता है।
मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में इस मानसून सीजन में अब तक सामान्य से लगभग 17 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है। वर्तमान समय तक जहां औसतन 323.2 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए थी, वहीं केवल 268.1 मिलीमीटर वर्षा रिकॉर्ड की गई है। पिछले करीब 13 दिनों से प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में व्यापक बारिश नहीं होने के कारण वर्षा का आंकड़ा लगातार सामान्य से नीचे बना हुआ है। इसका असर सबसे अधिक कृषि क्षेत्र में देखने को मिल रहा है। खेतों में नमी कम होने लगी है और जिन किसानों ने खरीफ फसलों की बुवाई पूरी कर ली है, उनकी चिंता लगातार बढ़ रही है। कई इलाकों में सिंचाई पर निर्भरता भी बढ़ने लगी है।
प्रदेश के 39 जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है। मौसम विभाग ने मंगलवार के लिए मुरैना, भिंड, दमोह और कटनी जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। इन क्षेत्रों में कुछ स्थानों पर तेज वर्षा के साथ गरज-चमक की भी संभावना व्यक्त की गई है। वहीं राजधानी भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, रीवा, शहडोल, नर्मदापुरम, सागर और आसपास के जिलों में हल्की से मध्यम बारिश होने के आसार हैं। मौसम विभाग का कहना है कि अगले 24 घंटों में कई क्षेत्रों में बादल छाए रहेंगे और रुक-रुक कर बारिश का दौर जारी रह सकता है।
लगातार कम बारिश का असर ग्रामीण क्षेत्रों में साफ दिखाई देने लगा है। कई जगह खेतों की ऊपरी सतह सूखने लगी है, जिससे नई फसलों की बढ़वार प्रभावित होने की आशंका है। कृषि विशेषज्ञ किसानों को सलाह दे रहे हैं कि मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रखें और आवश्यकता पड़ने पर सिंचाई की व्यवस्था करें। यदि आने वाले दिनों में अच्छी बारिश होती है तो फसलों को राहत मिल सकती है और वर्तमान स्थिति में सुधार की संभावना बनेगी।
बारिश के आंकड़ों पर नजर डालें तो प्रदेश के अलग-अलग जिलों में वर्षा का अंतर भी काफी अधिक है। देवास जिले में इस सीजन में सामान्य से 102 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई है, जिससे वहां जलस्तर और कृषि गतिविधियों को फायदा मिला है। दूसरी ओर आलीराजपुर जिले में सबसे कम वर्षा रिकॉर्ड की गई है, जहां सामान्य से करीब 74 प्रतिशत कम बारिश हुई है। इसके अलावा कई अन्य जिलों में भी सामान्य से कम वर्षा दर्ज होने के कारण स्थानीय स्तर पर कृषि कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
मौसम विभाग के अनुसार फिलहाल मानसून की गतिविधियां धीरे-धीरे सक्रिय हो रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बंगाल की खाड़ी और आसपास के क्षेत्रों में नए मौसम तंत्र के बनने की संभावना है। यदि यह सिस्टम मजबूत होता है और मध्य भारत की ओर बढ़ता है, तो जुलाई के अंतिम सप्ताह में प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में अच्छी बारिश हो सकती है। इससे वर्षा की कमी काफी हद तक पूरी होने की उम्मीद जताई जा रही है।
मौसम विभाग अगले कुछ दिनों में मौसम का रुख बदल सकता है। यदि अनुमान के अनुसार मानसूनी गतिविधियां तेज होती हैं, तो न केवल किसानों को राहत मिलेगी बल्कि जलाशयों और बांधों में भी जल स्तर बढ़ेगा। इससे पेयजल और सिंचाई दोनों क्षेत्रों को फायदा होगा। प्रशासन भी मौसम की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और जिन जिलों में भारी बारिश की संभावना जताई गई है, वहां संबंधित अधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।
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