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शेयर बाजार की सपाट शुरुआत, सेंसेक्स-निफ्टी पर वैश्विक तनाव का असर; कच्चे तेल और बिटकॉइन पर भी नजर
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अमेरिका-ईरान तनाव के बीच बाजार में सतर्क कारोबार, ब्रेंट क्रूड में नरमी; बिटकॉइन 65 हजार डॉलर के ऊपर पहुंचा
भारतीय शेयर बाजार ने मंगलवार को लगभग सपाट शुरुआत की। कारोबार के शुरुआती मिनटों में निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया, जिसका असर प्रमुख सूचकांकों पर भी देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स करीब 90 अंक की गिरावट के साथ खुला, जबकि एनएसई निफ्टी लगभग 20 अंक नीचे कारोबार करता दिखाई दिया। वैश्विक बाजारों से मिले मिले-जुले संकेत, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ा भू-राजनीतिक तनाव तथा अंतरराष्ट्रीय आर्थिक घटनाक्रम निवेशकों की धारणा को प्रभावित कर रहे हैं।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े तनाव का असर केवल शेयर बाजार तक सीमित नहीं है, बल्कि ऊर्जा बाजार भी इससे प्रभावित हुआ है। हालांकि पिछले सत्र में कच्चे तेल की कीमतें एक महीने के उच्च स्तर तक पहुंचने के बाद मंगलवार को कुछ नरम होती दिखाई दीं। ब्रेंट क्रूड करीब 83 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता नजर आया। विश्लेषकों का मानना है कि भू-राजनीतिक तनाव के कारण तेल बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है। यदि पश्चिम एशिया की स्थिति और गंभीर होती है तो कच्चे तेल की कीमतों में फिर तेजी देखने को मिल सकती है, जिसका असर वैश्विक महंगाई और विभिन्न देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
भारतीय बाजार में शुरुआती कारोबार के दौरान बैंकिंग, आईटी और ऑटो शेयरों में सीमित उतार-चढ़ाव देखा गया। अधिकांश निवेशक फिलहाल वैश्विक संकेतों, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और कंपनियों के तिमाही नतीजों का इंतजार कर रहे हैं। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक कोई बड़ा सकारात्मक या नकारात्मक संकेत नहीं मिलता, तब तक बाजार सीमित दायरे में कारोबार कर सकता है। हाल के दिनों में विदेशी संस्थागत निवेशकों की रणनीति और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां भी भारतीय शेयर बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
दूसरी ओर क्रिप्टोकरेंसी बाजार में बिटकॉइन ने मजबूती दिखाई है। दुनिया की सबसे बड़ी डिजिटल मुद्रा बिटकॉइन फिर से 65 हजार डॉलर के स्तर के ऊपर पहुंच गई है। बाजार विश्लेषकों के अनुसार स्पॉट बिटकॉइन ईटीएफ (ETF) में निवेश बढ़ने और डेरिवेटिव बाजार में गतिविधियां तेज होने से निवेशकों का भरोसा कुछ मजबूत हुआ है। अमेरिकी स्पॉट बिटकॉइन ईटीएफ में लगातार निवेश आने के संकेत यह बताते हैं कि संस्थागत निवेशकों की रुचि धीरे-धीरे स्थिर हो रही है। इससे क्रिप्टो बाजार में सकारात्मक माहौल बना है।
डेरिवेटिव बाजार के आंकड़ों के अनुसार बिटकॉइन फ्यूचर्स में ओपन इंटरेस्ट बढ़कर लगभग 32 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। वहीं ऑप्शंस बाजार में भी गिरावट से बचाव के लिए किए जाने वाले सौदों की मांग पहले की तुलना में कुछ कम हुई है। इसे निवेशकों के भरोसे में सुधार का संकेत माना जा रहा है। हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि स्पॉट मार्केट में ट्रेडिंग वॉल्यूम अभी भी सीमित है। इसका मतलब यह है कि निवेशकों में पूरी तरह मजबूत खरीदारी का माहौल अभी नहीं बना है और बाजार कुछ समय तक सीमित दायरे में ही रह सकता है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर अपनाई जा रही सख्त नीति भी वित्तीय बाजारों पर असर डाल रही है। ऊंची ब्याज दरों की संभावना के कारण वैश्विक निवेशक जोखिम वाले निवेश में फिलहाल सावधानी बरत रहे हैं। यही वजह है कि शेयर बाजार और क्रिप्टोकरेंसी दोनों में तेज तेजी देखने को नहीं मिल रही। फेडरल रिजर्व के अगले कदम और वैश्विक आर्थिक आंकड़े आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।
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शेयर बाजार की सपाट शुरुआत, सेंसेक्स-निफ्टी पर वैश्विक तनाव का असर; कच्चे तेल और बिटकॉइन पर भी नजर
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भारतीय शेयर बाजार ने मंगलवार को लगभग सपाट शुरुआत की। कारोबार के शुरुआती मिनटों में निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया, जिसका असर प्रमुख सूचकांकों पर भी देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स करीब 90 अंक की गिरावट के साथ खुला, जबकि एनएसई निफ्टी लगभग 20 अंक नीचे कारोबार करता दिखाई दिया। वैश्विक बाजारों से मिले मिले-जुले संकेत, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ा भू-राजनीतिक तनाव तथा अंतरराष्ट्रीय आर्थिक घटनाक्रम निवेशकों की धारणा को प्रभावित कर रहे हैं।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े तनाव का असर केवल शेयर बाजार तक सीमित नहीं है, बल्कि ऊर्जा बाजार भी इससे प्रभावित हुआ है। हालांकि पिछले सत्र में कच्चे तेल की कीमतें एक महीने के उच्च स्तर तक पहुंचने के बाद मंगलवार को कुछ नरम होती दिखाई दीं। ब्रेंट क्रूड करीब 83 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता नजर आया। विश्लेषकों का मानना है कि भू-राजनीतिक तनाव के कारण तेल बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है। यदि पश्चिम एशिया की स्थिति और गंभीर होती है तो कच्चे तेल की कीमतों में फिर तेजी देखने को मिल सकती है, जिसका असर वैश्विक महंगाई और विभिन्न देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
भारतीय बाजार में शुरुआती कारोबार के दौरान बैंकिंग, आईटी और ऑटो शेयरों में सीमित उतार-चढ़ाव देखा गया। अधिकांश निवेशक फिलहाल वैश्विक संकेतों, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और कंपनियों के तिमाही नतीजों का इंतजार कर रहे हैं। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक कोई बड़ा सकारात्मक या नकारात्मक संकेत नहीं मिलता, तब तक बाजार सीमित दायरे में कारोबार कर सकता है। हाल के दिनों में विदेशी संस्थागत निवेशकों की रणनीति और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां भी भारतीय शेयर बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
दूसरी ओर क्रिप्टोकरेंसी बाजार में बिटकॉइन ने मजबूती दिखाई है। दुनिया की सबसे बड़ी डिजिटल मुद्रा बिटकॉइन फिर से 65 हजार डॉलर के स्तर के ऊपर पहुंच गई है। बाजार विश्लेषकों के अनुसार स्पॉट बिटकॉइन ईटीएफ (ETF) में निवेश बढ़ने और डेरिवेटिव बाजार में गतिविधियां तेज होने से निवेशकों का भरोसा कुछ मजबूत हुआ है। अमेरिकी स्पॉट बिटकॉइन ईटीएफ में लगातार निवेश आने के संकेत यह बताते हैं कि संस्थागत निवेशकों की रुचि धीरे-धीरे स्थिर हो रही है। इससे क्रिप्टो बाजार में सकारात्मक माहौल बना है।
डेरिवेटिव बाजार के आंकड़ों के अनुसार बिटकॉइन फ्यूचर्स में ओपन इंटरेस्ट बढ़कर लगभग 32 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। वहीं ऑप्शंस बाजार में भी गिरावट से बचाव के लिए किए जाने वाले सौदों की मांग पहले की तुलना में कुछ कम हुई है। इसे निवेशकों के भरोसे में सुधार का संकेत माना जा रहा है। हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि स्पॉट मार्केट में ट्रेडिंग वॉल्यूम अभी भी सीमित है। इसका मतलब यह है कि निवेशकों में पूरी तरह मजबूत खरीदारी का माहौल अभी नहीं बना है और बाजार कुछ समय तक सीमित दायरे में ही रह सकता है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर अपनाई जा रही सख्त नीति भी वित्तीय बाजारों पर असर डाल रही है। ऊंची ब्याज दरों की संभावना के कारण वैश्विक निवेशक जोखिम वाले निवेश में फिलहाल सावधानी बरत रहे हैं। यही वजह है कि शेयर बाजार और क्रिप्टोकरेंसी दोनों में तेज तेजी देखने को नहीं मिल रही। फेडरल रिजर्व के अगले कदम और वैश्विक आर्थिक आंकड़े आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।
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