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खुला बोरवेल बना काल, 3 साल के बच्चे की दर्दनाक मौत
उज्जैन (म.प्र.)
झलारिया गांव में खुले बोरवेल ने ली 3 साल के बच्चे की जान, NDRF-SDRF के लंबे रेस्क्यू के बाद भी नहीं बच पाई जिंदगी
मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले के झलारिया गांव में हुए बोरवेल हादसे ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है। 22 घंटे तक चले लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन के बावजूद 3 वर्षीय मासूम भागीरथ को बचाया नहीं जा सका। बच्चा 200 फीट गहरे बोरवेल में गिर गया था, जहां फंसने के कारण उसकी मौत हो गई।
यह हादसा गुरुवार शाम करीब 6:30 बजे हुआ, जब राजस्थान के पाली जिले से आए परिवार का बच्चा खेलते-खेलते खुले बोरवेल के पास पहुंच गया और अचानक उसमें गिर गया। घटना के बाद परिजनों में चीख-पुकार मच गई और तत्काल पुलिस-प्रशासन को सूचना दी गई।
सूचना मिलते ही प्रशासन हरकत में आया और मौके पर NDRF तथा SDRF की टीमों को बुलाया गया। रेस्क्यू ऑपरेशन रात 8 बजे से शुरू हुआ, जिसमें बच्चे को निकालने के लिए बोरवेल के समानांतर गड्ढा खोदने के साथ-साथ आधुनिक उपकरणों की मदद ली गई। ऑपरेशन के दौरान बच्चे की लोकेशन ट्रेस करने के लिए कैमरे भी अंदर भेजे गए।
लगातार प्रयासों के बाद बुधवार शाम करीब 6:30 बजे रेस्क्यू टीम ने लोहे की छड़, रस्सी और मोटर निकालने वाली मशीन की मदद से बच्चे को बाहर निकाला, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इसके बाद शव को पोस्टमॉर्टम के लिए अस्पताल भेजा गया।
घटना के दौरान जिला कलेक्टर रोशन कुमार सिंह और पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा मौके पर मौजूद रहे और रेस्क्यू ऑपरेशन की निगरानी करते रहे। इंदौर और हरदा से भी SDRF की अतिरिक्त टीमें बुलाई गई थीं, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद मासूम की जान नहीं बचाई जा सकी।
इस हादसे ने एक बार फिर खुले बोरवेलों की समस्या और सुरक्षा में लापरवाही को उजागर कर दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि गांवों में कई बोरवेल बिना ढंके पड़े हैं, जो बच्चों के लिए जानलेवा साबित हो सकते हैं।
भागीरथ की मौत के बाद गांव में शोक का माहौल है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। प्रशासन ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कदम उठाने की बात कही है।
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खुला बोरवेल बना काल, 3 साल के बच्चे की दर्दनाक मौत
उज्जैन (म.प्र.)
मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले के झलारिया गांव में हुए बोरवेल हादसे ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है। 22 घंटे तक चले लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन के बावजूद 3 वर्षीय मासूम भागीरथ को बचाया नहीं जा सका। बच्चा 200 फीट गहरे बोरवेल में गिर गया था, जहां फंसने के कारण उसकी मौत हो गई।
यह हादसा गुरुवार शाम करीब 6:30 बजे हुआ, जब राजस्थान के पाली जिले से आए परिवार का बच्चा खेलते-खेलते खुले बोरवेल के पास पहुंच गया और अचानक उसमें गिर गया। घटना के बाद परिजनों में चीख-पुकार मच गई और तत्काल पुलिस-प्रशासन को सूचना दी गई।
सूचना मिलते ही प्रशासन हरकत में आया और मौके पर NDRF तथा SDRF की टीमों को बुलाया गया। रेस्क्यू ऑपरेशन रात 8 बजे से शुरू हुआ, जिसमें बच्चे को निकालने के लिए बोरवेल के समानांतर गड्ढा खोदने के साथ-साथ आधुनिक उपकरणों की मदद ली गई। ऑपरेशन के दौरान बच्चे की लोकेशन ट्रेस करने के लिए कैमरे भी अंदर भेजे गए।
लगातार प्रयासों के बाद बुधवार शाम करीब 6:30 बजे रेस्क्यू टीम ने लोहे की छड़, रस्सी और मोटर निकालने वाली मशीन की मदद से बच्चे को बाहर निकाला, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इसके बाद शव को पोस्टमॉर्टम के लिए अस्पताल भेजा गया।
घटना के दौरान जिला कलेक्टर रोशन कुमार सिंह और पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा मौके पर मौजूद रहे और रेस्क्यू ऑपरेशन की निगरानी करते रहे। इंदौर और हरदा से भी SDRF की अतिरिक्त टीमें बुलाई गई थीं, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद मासूम की जान नहीं बचाई जा सकी।
इस हादसे ने एक बार फिर खुले बोरवेलों की समस्या और सुरक्षा में लापरवाही को उजागर कर दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि गांवों में कई बोरवेल बिना ढंके पड़े हैं, जो बच्चों के लिए जानलेवा साबित हो सकते हैं।
भागीरथ की मौत के बाद गांव में शोक का माहौल है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। प्रशासन ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कदम उठाने की बात कही है।
