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भोलेनाथ की भक्ति में लीन उज्जैन: 30 जून को भस्म आरती में बाबा महाकाल को अर्पित हुआ त्रिशूल
Ujjain, MP
उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में आज सुबह का दृश्य अलौकिक और भक्ति से सराबोर था। आषाढ़ शुक्ल पंचमी की सुबह जब घड़ी ने चार बजाए, तब भगवान शिव के इस ज्योतिर्लिंग के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खुले और आरंभ हुई भस्म आरती की दिव्य परंपरा।
त्रिशूल और त्रिपुंड से सजा भोलेनाथ का भव्य स्वरूप
मंदिर के पुजारियों ने परंपरागत विधि से सर्वप्रथम गंगाजल से अभिषेक, फिर पंचामृत — दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से महादेव का स्नान कराया।
इसके बाद बाबा महाकाल को त्रिपुंड, त्रिनेत्र और रजत त्रिशूल अर्पित किए गए। शिवलिंग पर भस्म अर्पण कर उन्हें शेषनाग का रजत मुकुट, चांदी की मुण्डमाल, रुद्राक्ष की माला, और फूलों की मनोहारी माला से श्रृंगारित किया गया।
ड्रायफ्रूट और फल-मिष्ठान्न से बना भोग अर्पित कर श्रृंगार को पूर्ण किया गया।

भस्म आरती: जहां मृत्यु भी मोक्ष का द्वार बनती है
महाकाल की यह भस्म आरती केवल पूजन नहीं, बल्कि जीवन की नश्वरता और शिव की अमरता का साक्षात अनुभव है। यह वही आरती है, जो मृत देह से आई भस्म से होती है — और यही शिव का रहस्य है।
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भोलेनाथ की भक्ति में लीन उज्जैन: 30 जून को भस्म आरती में बाबा महाकाल को अर्पित हुआ त्रिशूल
Ujjain, MP
त्रिशूल और त्रिपुंड से सजा भोलेनाथ का भव्य स्वरूप
मंदिर के पुजारियों ने परंपरागत विधि से सर्वप्रथम गंगाजल से अभिषेक, फिर पंचामृत — दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से महादेव का स्नान कराया।
इसके बाद बाबा महाकाल को त्रिपुंड, त्रिनेत्र और रजत त्रिशूल अर्पित किए गए। शिवलिंग पर भस्म अर्पण कर उन्हें शेषनाग का रजत मुकुट, चांदी की मुण्डमाल, रुद्राक्ष की माला, और फूलों की मनोहारी माला से श्रृंगारित किया गया।
ड्रायफ्रूट और फल-मिष्ठान्न से बना भोग अर्पित कर श्रृंगार को पूर्ण किया गया।

भस्म आरती: जहां मृत्यु भी मोक्ष का द्वार बनती है
महाकाल की यह भस्म आरती केवल पूजन नहीं, बल्कि जीवन की नश्वरता और शिव की अमरता का साक्षात अनुभव है। यह वही आरती है, जो मृत देह से आई भस्म से होती है — और यही शिव का रहस्य है।
