उमंग सिंघार का सनसनीखेज आरोप, 'गोविंद सिंह राजपूत के पास पहुंचे हर माह 150 करोड़

BHOPAL, MP

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने प्रेसवार्ता में तत्कालीन परिवहन मंत्री गोविंद सिंह राजपूत पर लगाए अनुपातहीन संपत्ति खरीदने के गंभीर आरोप.

रिवहन घोटाले के आरोपी सौरभ शर्मा को लेकर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने शनिवार को नया खुलासा किया. सिंघार ने एक प्रेसवार्ता में बताया कि सरकार परिवहन घोटाले के महत्वपूर्ण किरदारों को बचाने का प्रयास कर रही है. उन्होंने खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री और तत्कालीन परिवहन मंत्री रहे गोविंद सिंह राजपूत पर हर महीने 150 करोड़ रुपये वसूलने का गंभीर आरोप लगाया है.

उमग सिंघार का गोविंद सिंह राजपूत पर गंभीर आरोप

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने प्रेसवार्ता में जमीनों के दस्तावेज दिखाते हुए कहा कि "मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने स्वयं, पत्नी सविता सिंह, पुत्र आकाश सिंह, पुत्र आदित्य सिंह के नाम पर सागर शहर में तिलीमाफी, बशियाभान्सा, कनेरादेव, भोपाल, किर्रावदा, मारा इमलिया, पथरिया जाट तथा मेनपानी में जमीन खरीदी. इसके साथ ही सागर से लगे हुए जैसीनगर, झिला, नरयावली, खुरई, मिलैया एवं जेरई में 150 एकड़ से भी अधिक भूमि स्वयं, पत्नी एवं पुत्रों के नाम पर क्रय की गई. जो कि रिकार्ड में दर्ज है. इन जमीनों का वास्तविक बाजार मूल्य 400 करोड़ से अधिक है. नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि ये संयोग है कि ये सारी जमीनें उस दौरान खरीदी गई, जब मंत्री राजपूत के पास परिवहन विभाग की जिम्मेदारी थी."

'फरारी के दौरान सीएम आवास के पास कराई रहने की व्यवस्था'

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार का आरोप है कि "परिवहन घोटाले के मुख्य किरदारों को सरकार बचाने का प्रयास कर रही है. 19 दिसम्बर 2024 को सौरभ शर्मा के निवास पर लोकायुक्त छापे के 41 दिनों के बाद 28 जनवरी 2025 को उसकी कथित गिरफ्तारी हुई. इन 41 दिनों में सौरभ शर्मा कहां रहा. देश या प्रदेश में कौन-कौन उसे शरण दे रहा था. उसके रहने खाने की व्यवस्था कौन कर रहा था. आज तक जांच एजेन्सी को नहीं पता."

सिंघार ने आरोप लगाया कि "फरारी के दौरान सौरभ शर्मा के रहने की व्यवस्था एक मंत्री ने मुख्यमंत्री निवास के आसपास श्यामला हिल्स में कराई गई थी. लेकिन इस मंत्री से सौरभ शर्मा का क्या संबंध था, अब तक जांच एजेंसियों को जानकारी नहीं लगी. यदि सौरभ शर्मा के मोबाइल की काल डिटेल निकाली जाती, तो उससे जुड़े पूरे नेटवर्क का खुलासा हो जाता, लेकिन सरकार ने ऐसा नहीं किया."

4 से 6 पन्ने में दर्ज 1500 करोड़ रुपये का लेखा-जोखा

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि "परिवहन विभाग में इस अवधि में एक रैकेट कार्य कर रहा था, जिसमें सभी के काम बटे हुये थे. इनमें संजय श्रीवास्तव (एडवोकेट), दशरथ पटेल (परिवहन अधिकारी, 2022 में रिटायर), अलीम खान (परिवहन अधिकारी, 2023 में व्हीआरएस ले लिया), बीरेश तुमराम (परिवहन अधिकारी) मुख्य थे. ये लोग चेकपोस्टों को ठेके पर देने तथा ठेकेदार की मांग अनुसार विभाग के अधिकारी की पोस्टिंग करने एवं ठेका वसूली से प्राप्त राशि को डिस्ट्रीब्यशन का कार्य करते थे."

आरोप है कि "जांच एजेंसियों को मिली एक डायरी में माह सितम्बर-2020, अगस्त-2021, जुलाई-अगस्त-सितम्बर-2021, जून-2021 में दर्ज मध्यप्रदेश के समस्त चेक पोस्टों एवं उड़न दस्ता तथा आरटीओ कार्यालयों से अवैध रूप से वसूल की जाने वाली राशि का उल्लेख है. इस डायरी के पन्नों में टीसी और टीएम कोडवर्ड या शॉर्टफॉर्म में उल्लेखित है. जिसका स्पष्ट अर्थ ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर और ट्रांसपोर्ट कमिश्नर है. सिर्फ चार-छह पन्नों की सूची में ही लगभग 1500 करोड़ की काली कमाई का ब्यौरा दर्ज है."

'गोविंद राजपूत के पास 1250 करोड़ रुपये की अनुपातहीन संपत्ति'

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने बताया कि "यह भी एक संयोग है कि वर्ष 2019 से 2024 के बीच सौरभ शर्मा ने स्वयं, पत्नी, मां, रिश्तेदार, परिचितों एवं अन्य के नाम से बेनामी सम्पत्तियों की खरीद-फरोख्त की. उसी पीरियड (2019 से 2024) के बीच मंत्री गोविन्द राजपूत ने स्वयं, पत्नी, पुत्रों, परिजनों, रिश्तेदारों एवं अन्य लोगों के नाम से सम्पत्तियां क्रय की हैं. इस दौरान गोविंद राजपूत के पास 1250 करोड़ रुपये की अनुपातहीन संपत्ति पहुंची."

'दिल्ली की पॉश कॉलोनी में खरीदे फ्लैट'

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार का आरोप है कि "मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने दिल्ली की सबसे पॉश कॉलोनियों में से एक डिफेन्स कॉलोनी में ए-177 बिल्डिंग का थर्ड फ्लोर और टैरिस संजय श्रीवास्तव स्वयं एवं अपनी पत्नी श्वेता श्रीवास्तव के नाम से दिनांक 1 अप्रैल 2024 को दो करोड़ में खरीदा, जिसका बाजार मूल्य रूपये 12 करोड़ है. इसी बिल्डिंग के ग्राउंड एवं बेसमेंट 26 मार्च 2024 को सुनोता तुमराम पत्नी वीरेश कुमार तुमराम (परिवहन अधिकारी) ने 2 करोड़ रुपये में खरीदा जिसका बाजार मूल्य 12 करोड़ है. इसी बिल्डिंग में संजय डांडे, जो कि संजय श्रीवास्तव का बिजनेस पार्टनर है, उसने 7 मार्च 2024 को फर्स्ट फ्लोर 3 करोड़ रुपये में खरीदा, जिसका बाजार मूल्य 15 करोड़ रुपये है. इससे स्पष्ट होता है कि मंत्री गोविन्द राजपूत, संजय श्रीवास्तव, वीरेश तुमराम, संजय डांडे के आपसी संबंध कैसे थे."

'उच्च न्यायालय के वर्तमान न्यायधीश से घोटाले की जांच की मांग'

नेता प्रतिपक्ष ने इस घोटाले की जांच उच्च न्यायालय के वर्तमान न्यायधीश से कराये जाने की मांग की है. उन्होंने कहा कि सौरभ शर्मा के व्हीआरएस लेने के पहले उसके खिलाफ आर्थिक अपराध एवं आय से अधिक संपत्ति की 70 से अधिक शिकायतें थीं. इसके बाद भी उसका व्हीआरएस किसके दबाव में स्वीकृत किया गया. सौरभ शर्मा और उसके परिवार, रिश्तेदार से जुड़ी सम्पत्तियों की खरीद-बिक्री रोकने के लिए लोकायुक्त ने ग्वालियर रजिस्ट्रार को 1 फरवरी 2025 को नोटिस दिया. इसमें 38 दिन क्यों लग गए.

'परिवहन और राजस्व मंत्रालय देने के लिए सिंधिया का दबाव'

"तत्कालीन केन्द्रीय भूतल परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने स्वयं अपने पत्र दिनांक 16/07/2022 के माध्यम से तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, तत्कालीन परिवहन मंत्री गोविंद सिंह राजपूत, तत्कालीन चीफ सेक्रेटरी को लिखे गए पत्र में मध्यप्रदेश के परिवहन चेक पोस्टों पर बड़े पैमाने पर हो रहे भ्रष्टाचार को रोकने के लिए सूचित किया था. इसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई. उमंग सिंघार ने कहा कि दिग्विजय सिंह पहले ही कह चुके हैं कि ज्योतिरादित्य सिंधिया की ओर से दोनों सरकारों के दौरान यह दबाव रहता था कि परिवहन एवं राजस्व मंत्रालय गोविंद सिंह राजपूत को ही दिया जाए."

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www.dainikjagranmpcg.com
15 Feb 2025 By दैनिक जागरण

उमंग सिंघार का सनसनीखेज आरोप, 'गोविंद सिंह राजपूत के पास पहुंचे हर माह 150 करोड़

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रिवहन घोटाले के आरोपी सौरभ शर्मा को लेकर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने शनिवार को नया खुलासा किया. सिंघार ने एक प्रेसवार्ता में बताया कि सरकार परिवहन घोटाले के महत्वपूर्ण किरदारों को बचाने का प्रयास कर रही है. उन्होंने खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री और तत्कालीन परिवहन मंत्री रहे गोविंद सिंह राजपूत पर हर महीने 150 करोड़ रुपये वसूलने का गंभीर आरोप लगाया है.

उमग सिंघार का गोविंद सिंह राजपूत पर गंभीर आरोप

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने प्रेसवार्ता में जमीनों के दस्तावेज दिखाते हुए कहा कि "मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने स्वयं, पत्नी सविता सिंह, पुत्र आकाश सिंह, पुत्र आदित्य सिंह के नाम पर सागर शहर में तिलीमाफी, बशियाभान्सा, कनेरादेव, भोपाल, किर्रावदा, मारा इमलिया, पथरिया जाट तथा मेनपानी में जमीन खरीदी. इसके साथ ही सागर से लगे हुए जैसीनगर, झिला, नरयावली, खुरई, मिलैया एवं जेरई में 150 एकड़ से भी अधिक भूमि स्वयं, पत्नी एवं पुत्रों के नाम पर क्रय की गई. जो कि रिकार्ड में दर्ज है. इन जमीनों का वास्तविक बाजार मूल्य 400 करोड़ से अधिक है. नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि ये संयोग है कि ये सारी जमीनें उस दौरान खरीदी गई, जब मंत्री राजपूत के पास परिवहन विभाग की जिम्मेदारी थी."

'फरारी के दौरान सीएम आवास के पास कराई रहने की व्यवस्था'

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार का आरोप है कि "परिवहन घोटाले के मुख्य किरदारों को सरकार बचाने का प्रयास कर रही है. 19 दिसम्बर 2024 को सौरभ शर्मा के निवास पर लोकायुक्त छापे के 41 दिनों के बाद 28 जनवरी 2025 को उसकी कथित गिरफ्तारी हुई. इन 41 दिनों में सौरभ शर्मा कहां रहा. देश या प्रदेश में कौन-कौन उसे शरण दे रहा था. उसके रहने खाने की व्यवस्था कौन कर रहा था. आज तक जांच एजेन्सी को नहीं पता."

सिंघार ने आरोप लगाया कि "फरारी के दौरान सौरभ शर्मा के रहने की व्यवस्था एक मंत्री ने मुख्यमंत्री निवास के आसपास श्यामला हिल्स में कराई गई थी. लेकिन इस मंत्री से सौरभ शर्मा का क्या संबंध था, अब तक जांच एजेंसियों को जानकारी नहीं लगी. यदि सौरभ शर्मा के मोबाइल की काल डिटेल निकाली जाती, तो उससे जुड़े पूरे नेटवर्क का खुलासा हो जाता, लेकिन सरकार ने ऐसा नहीं किया."

4 से 6 पन्ने में दर्ज 1500 करोड़ रुपये का लेखा-जोखा

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि "परिवहन विभाग में इस अवधि में एक रैकेट कार्य कर रहा था, जिसमें सभी के काम बटे हुये थे. इनमें संजय श्रीवास्तव (एडवोकेट), दशरथ पटेल (परिवहन अधिकारी, 2022 में रिटायर), अलीम खान (परिवहन अधिकारी, 2023 में व्हीआरएस ले लिया), बीरेश तुमराम (परिवहन अधिकारी) मुख्य थे. ये लोग चेकपोस्टों को ठेके पर देने तथा ठेकेदार की मांग अनुसार विभाग के अधिकारी की पोस्टिंग करने एवं ठेका वसूली से प्राप्त राशि को डिस्ट्रीब्यशन का कार्य करते थे."

आरोप है कि "जांच एजेंसियों को मिली एक डायरी में माह सितम्बर-2020, अगस्त-2021, जुलाई-अगस्त-सितम्बर-2021, जून-2021 में दर्ज मध्यप्रदेश के समस्त चेक पोस्टों एवं उड़न दस्ता तथा आरटीओ कार्यालयों से अवैध रूप से वसूल की जाने वाली राशि का उल्लेख है. इस डायरी के पन्नों में टीसी और टीएम कोडवर्ड या शॉर्टफॉर्म में उल्लेखित है. जिसका स्पष्ट अर्थ ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर और ट्रांसपोर्ट कमिश्नर है. सिर्फ चार-छह पन्नों की सूची में ही लगभग 1500 करोड़ की काली कमाई का ब्यौरा दर्ज है."

'गोविंद राजपूत के पास 1250 करोड़ रुपये की अनुपातहीन संपत्ति'

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने बताया कि "यह भी एक संयोग है कि वर्ष 2019 से 2024 के बीच सौरभ शर्मा ने स्वयं, पत्नी, मां, रिश्तेदार, परिचितों एवं अन्य के नाम से बेनामी सम्पत्तियों की खरीद-फरोख्त की. उसी पीरियड (2019 से 2024) के बीच मंत्री गोविन्द राजपूत ने स्वयं, पत्नी, पुत्रों, परिजनों, रिश्तेदारों एवं अन्य लोगों के नाम से सम्पत्तियां क्रय की हैं. इस दौरान गोविंद राजपूत के पास 1250 करोड़ रुपये की अनुपातहीन संपत्ति पहुंची."

'दिल्ली की पॉश कॉलोनी में खरीदे फ्लैट'

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार का आरोप है कि "मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने दिल्ली की सबसे पॉश कॉलोनियों में से एक डिफेन्स कॉलोनी में ए-177 बिल्डिंग का थर्ड फ्लोर और टैरिस संजय श्रीवास्तव स्वयं एवं अपनी पत्नी श्वेता श्रीवास्तव के नाम से दिनांक 1 अप्रैल 2024 को दो करोड़ में खरीदा, जिसका बाजार मूल्य रूपये 12 करोड़ है. इसी बिल्डिंग के ग्राउंड एवं बेसमेंट 26 मार्च 2024 को सुनोता तुमराम पत्नी वीरेश कुमार तुमराम (परिवहन अधिकारी) ने 2 करोड़ रुपये में खरीदा जिसका बाजार मूल्य 12 करोड़ है. इसी बिल्डिंग में संजय डांडे, जो कि संजय श्रीवास्तव का बिजनेस पार्टनर है, उसने 7 मार्च 2024 को फर्स्ट फ्लोर 3 करोड़ रुपये में खरीदा, जिसका बाजार मूल्य 15 करोड़ रुपये है. इससे स्पष्ट होता है कि मंत्री गोविन्द राजपूत, संजय श्रीवास्तव, वीरेश तुमराम, संजय डांडे के आपसी संबंध कैसे थे."

'उच्च न्यायालय के वर्तमान न्यायधीश से घोटाले की जांच की मांग'

नेता प्रतिपक्ष ने इस घोटाले की जांच उच्च न्यायालय के वर्तमान न्यायधीश से कराये जाने की मांग की है. उन्होंने कहा कि सौरभ शर्मा के व्हीआरएस लेने के पहले उसके खिलाफ आर्थिक अपराध एवं आय से अधिक संपत्ति की 70 से अधिक शिकायतें थीं. इसके बाद भी उसका व्हीआरएस किसके दबाव में स्वीकृत किया गया. सौरभ शर्मा और उसके परिवार, रिश्तेदार से जुड़ी सम्पत्तियों की खरीद-बिक्री रोकने के लिए लोकायुक्त ने ग्वालियर रजिस्ट्रार को 1 फरवरी 2025 को नोटिस दिया. इसमें 38 दिन क्यों लग गए.

'परिवहन और राजस्व मंत्रालय देने के लिए सिंधिया का दबाव'

"तत्कालीन केन्द्रीय भूतल परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने स्वयं अपने पत्र दिनांक 16/07/2022 के माध्यम से तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, तत्कालीन परिवहन मंत्री गोविंद सिंह राजपूत, तत्कालीन चीफ सेक्रेटरी को लिखे गए पत्र में मध्यप्रदेश के परिवहन चेक पोस्टों पर बड़े पैमाने पर हो रहे भ्रष्टाचार को रोकने के लिए सूचित किया था. इसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई. उमंग सिंघार ने कहा कि दिग्विजय सिंह पहले ही कह चुके हैं कि ज्योतिरादित्य सिंधिया की ओर से दोनों सरकारों के दौरान यह दबाव रहता था कि परिवहन एवं राजस्व मंत्रालय गोविंद सिंह राजपूत को ही दिया जाए."

https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/umang-singhars-sensational-allegation-reached-govind-singh-rajput-150-crores/article-10288

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