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एक्सपर्ट की निगरानी में 337 टन जहरीले कचरे की पैकिंग, ऐसे भेजा जाएगा भोपाल से पीथमपुर
Bhopal, MP
दिसंबर 1984 को यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री से जहरीली गैस मिथाइल आइसोसाइनेट लीक हुई थी, जिससे 5479 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 5 लाख से अधिक लोग सेहत संबंधी समस्याओं से ग्रसित हो गए थे.
भोपाल की यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री के गोदाम में रखे 337 मीट्रिक टन जहरीले कचरे की पैकेजिंग हो गई है. पैकेजिंग एक्सपर्ट की निगरानी में की गई. इसे 250 किलोमीटर का ग्रीन कॉरिडोर बनाकर भोपाल से पीथमपुर ले जाया जाएगा. हालांकि इस बीच पीथमपुर में कचरे को जलाए जाने को लेकर प्रदर्शन हो रहा है. इस कचरे का नष्ट 40 साल बाद किया जा रहा है.
337 मीट्रिक टन जहरीले कचरे का होगा निपटारा
गैस राहत व पुनर्वास विभाग के डायरेक्टर स्वतंत्र कुमार सिंह ने कहा कि हमारी तैयारी लगभग पूरी हो चुकी है. पैकिंग भी हो चुकी है. हम कभी भी कचरे को रवाना कर सकते हैं. हाईकोर्ट के निर्देश पर सिर्फ 337 मीट्रिक टन जहरीले कचरे को नष्ट किया जा रहा है.
बनेगा ग्रीन कॉरिडोर
उन्होंने आगे बताया कि लगभग 250 किलोमीटर का ग्रीन कॉरिडोर बना रहे हैं. सुरक्षा के सभी उपाय किए गए हैं. किसी को कोई दिक्कत ना हो यह तय किया जा रहा है. कचरे के निष्पादन को लेकर लोग भ्रम में न पड़े, वैज्ञानिक तरीके से कचरे को नष्ट किया जाएगा. यह पूरी तरह सुरक्षित है. गैस राहत व पुनर्वास विभाग के डायरेक्टर ने आगे कहा कि यह जहरीले कचरा उतना खतरनाक नहीं है. 2015 में हमने 10 टन कचरे का ट्रायल रन भी किया है. हाईकोर्ट में इसका प्रतिवेदन भी दिया गया है.
कचरे को लोड करने के लिए लगाए गए 100 कर्मचारी
स्वतंत्र कुमार सिंह ने कहा कि जहरीले कचरे का जो हिस्सा हवा में जाएगा या चार बार फिल्टर होगा, सॉलिड फॉर्म में जो कचरा निष्पादित होगा या अभी दो हिस्से में होगा इसका लैंडफिल साइट बनाई जाएगी. सेंट्रल पॉल्यूशन बोर्ड और स्टेट पॉल्यूशन बोर्ड के अधिकारियों की निगरानी में पूरी प्रक्रिया होगी.
स्वतंत्र कुमार सिंह ने कहा कि भोपाल से जहरीले कचरे को लोड करने के लिए कुल 100 प्रशिक्षित कर्मचारी लगाए गए हैं. ये कर्मचारी PPE किट पहनकर जहरीले कचरे को लोड करेंगे. 3 से 9 महीने के भीतर कचरे को नष्ट करने की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी. यह फीड रेट पर निर्भर करता है.
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एक्सपर्ट की निगरानी में 337 टन जहरीले कचरे की पैकिंग, ऐसे भेजा जाएगा भोपाल से पीथमपुर
Bhopal, MP
भोपाल की यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री के गोदाम में रखे 337 मीट्रिक टन जहरीले कचरे की पैकेजिंग हो गई है. पैकेजिंग एक्सपर्ट की निगरानी में की गई. इसे 250 किलोमीटर का ग्रीन कॉरिडोर बनाकर भोपाल से पीथमपुर ले जाया जाएगा. हालांकि इस बीच पीथमपुर में कचरे को जलाए जाने को लेकर प्रदर्शन हो रहा है. इस कचरे का नष्ट 40 साल बाद किया जा रहा है.
337 मीट्रिक टन जहरीले कचरे का होगा निपटारा
गैस राहत व पुनर्वास विभाग के डायरेक्टर स्वतंत्र कुमार सिंह ने कहा कि हमारी तैयारी लगभग पूरी हो चुकी है. पैकिंग भी हो चुकी है. हम कभी भी कचरे को रवाना कर सकते हैं. हाईकोर्ट के निर्देश पर सिर्फ 337 मीट्रिक टन जहरीले कचरे को नष्ट किया जा रहा है.
बनेगा ग्रीन कॉरिडोर
उन्होंने आगे बताया कि लगभग 250 किलोमीटर का ग्रीन कॉरिडोर बना रहे हैं. सुरक्षा के सभी उपाय किए गए हैं. किसी को कोई दिक्कत ना हो यह तय किया जा रहा है. कचरे के निष्पादन को लेकर लोग भ्रम में न पड़े, वैज्ञानिक तरीके से कचरे को नष्ट किया जाएगा. यह पूरी तरह सुरक्षित है. गैस राहत व पुनर्वास विभाग के डायरेक्टर ने आगे कहा कि यह जहरीले कचरा उतना खतरनाक नहीं है. 2015 में हमने 10 टन कचरे का ट्रायल रन भी किया है. हाईकोर्ट में इसका प्रतिवेदन भी दिया गया है.
कचरे को लोड करने के लिए लगाए गए 100 कर्मचारी
स्वतंत्र कुमार सिंह ने कहा कि जहरीले कचरे का जो हिस्सा हवा में जाएगा या चार बार फिल्टर होगा, सॉलिड फॉर्म में जो कचरा निष्पादित होगा या अभी दो हिस्से में होगा इसका लैंडफिल साइट बनाई जाएगी. सेंट्रल पॉल्यूशन बोर्ड और स्टेट पॉल्यूशन बोर्ड के अधिकारियों की निगरानी में पूरी प्रक्रिया होगी.
स्वतंत्र कुमार सिंह ने कहा कि भोपाल से जहरीले कचरे को लोड करने के लिए कुल 100 प्रशिक्षित कर्मचारी लगाए गए हैं. ये कर्मचारी PPE किट पहनकर जहरीले कचरे को लोड करेंगे. 3 से 9 महीने के भीतर कचरे को नष्ट करने की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी. यह फीड रेट पर निर्भर करता है.
