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दिखाते थे असली सोने की गिन्नियां और थमा देते थे नकली, सुनसान जगह में होती थी सौदेबाजी
Betul, MP
नकली सोने की गिन्नियों को असली बताकर देश भर में करोड़ों की ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गैंग का पर्दाफाश, बैतूल में दो गिरफ्तार.
नकली सोने की गिन्नी को असली बताकर देशभर में करोड़ों की ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गैंग का पुलिस ने पर्दाफाश किया है. बैतूल की बीजादेही पुलिस ने रविवार को इस मामले में 2 आरोपियों को गिरफ्तार किया. ये गैंग अब तक देश के विभिन्न राज्यों में लोगों को निशाना बनाकर करोड़ों रुपए की ठगी कर चुका है. पुलिस गैंग के दूसरे सदस्योंं की तलाश में जुटी है.
सूचना मिलने के बाद 2 आरोपी गिरफ्तार
एडिशनल एएसपी कमला जोशी ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि "5 अप्रैल 2025 को थाना बीजादेही को इस गैंग की सूचना मिली थी. झिरियाडोह गांव के जंगल में ग्रामीणों को नकली सोने की गिन्नियां असली बताकर भारी कीमत पर बेचे जाने की जानकारी के बाद पुलिस एक्टिव हुई. सूचना के बाद पुलिस ने 6 अप्रैल को दो आरोपियों को गिरफ्तार किया."
नकली सोने की 240 गिन्नियां बरामद
एडिशनल एएसपी कमला जोशी ने बताया कि "दोनों आरोपी रूप सिंह और अजीत पारधी नर्मदापुरम के रहने वाले हैं. गिरफ्तारी के समय आरोपियों के कब्जे से नकली सोने की 240 गिन्नियां, नकली सोने के आभूषण और 02 मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं."
पूछताछ में हुआ बड़ा खुलासा
एडिशनल एएसपी कमला जोशी ने बताया कि "प्रारंभिक पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे एक संगठित ठग गिरोह के सक्रिय सदस्य हैं. ये गिरोह मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, राजस्थान, उत्तर प्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों में भोले-भाले, ग्रामीण और नागरिकों को ठगने का कार्य करते हैं.
यह गिरोह सुनियोजित रणनीति के तहत बस स्टैंड, मंदिर परिसर, ट्रेन यात्रा जैसे स्थानों पर संपर्क बनाते हैं. इन लोगों के सामने ये गिरोह दावा करता है कि उनके खेत में या रास्ते में उन्हें सोने की गिन्नियां मिली हैं, जिन्हें वे पुलिस तथा शासन की नजर से चोरी-छिपे बाजार मूल्य से आधे दाम में बेचना चाहते हैं."
सुनसान जगह ऐसे तय करते थे सौदा
ये गिरोह भरोसा जीतने के लिए शुरुआत में लोगों को एक असली सोने की गिन्नी देकर उसे जांच कराने के लिए प्रेरित करते थे. जांच के बाद गिन्नी असली पाए जाने पर लोग भरोस में आकर आसानी से सौदा तय कर लेते थे और उसके बाद उन्हें नकली गिन्नियां सौंपकर गिरोह रफूचक्कर हो जाता था. पुलिस का डर दिखाकर गिरोह सौदे के लिए बैतूल, हरदा और नर्मदापुरम जिलों के सीमावर्ती जंगलों या सुनसान स्थलों पर लोगों को बुलाते थे जहां मोबाइल नेटवर्क और दूसरी सुविधाएं उपलब्ध नहीं होती थीं. लोगों को ठगे जाने का अहसास होने तक गिरोह के सदस्य दूसरे शहर में डेरा डाल लेते थे.
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दिखाते थे असली सोने की गिन्नियां और थमा देते थे नकली, सुनसान जगह में होती थी सौदेबाजी
Betul, MP
नकली सोने की गिन्नी को असली बताकर देशभर में करोड़ों की ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गैंग का पुलिस ने पर्दाफाश किया है. बैतूल की बीजादेही पुलिस ने रविवार को इस मामले में 2 आरोपियों को गिरफ्तार किया. ये गैंग अब तक देश के विभिन्न राज्यों में लोगों को निशाना बनाकर करोड़ों रुपए की ठगी कर चुका है. पुलिस गैंग के दूसरे सदस्योंं की तलाश में जुटी है.
सूचना मिलने के बाद 2 आरोपी गिरफ्तार
एडिशनल एएसपी कमला जोशी ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि "5 अप्रैल 2025 को थाना बीजादेही को इस गैंग की सूचना मिली थी. झिरियाडोह गांव के जंगल में ग्रामीणों को नकली सोने की गिन्नियां असली बताकर भारी कीमत पर बेचे जाने की जानकारी के बाद पुलिस एक्टिव हुई. सूचना के बाद पुलिस ने 6 अप्रैल को दो आरोपियों को गिरफ्तार किया."
नकली सोने की 240 गिन्नियां बरामद
एडिशनल एएसपी कमला जोशी ने बताया कि "दोनों आरोपी रूप सिंह और अजीत पारधी नर्मदापुरम के रहने वाले हैं. गिरफ्तारी के समय आरोपियों के कब्जे से नकली सोने की 240 गिन्नियां, नकली सोने के आभूषण और 02 मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं."
पूछताछ में हुआ बड़ा खुलासा
एडिशनल एएसपी कमला जोशी ने बताया कि "प्रारंभिक पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे एक संगठित ठग गिरोह के सक्रिय सदस्य हैं. ये गिरोह मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, राजस्थान, उत्तर प्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों में भोले-भाले, ग्रामीण और नागरिकों को ठगने का कार्य करते हैं.
यह गिरोह सुनियोजित रणनीति के तहत बस स्टैंड, मंदिर परिसर, ट्रेन यात्रा जैसे स्थानों पर संपर्क बनाते हैं. इन लोगों के सामने ये गिरोह दावा करता है कि उनके खेत में या रास्ते में उन्हें सोने की गिन्नियां मिली हैं, जिन्हें वे पुलिस तथा शासन की नजर से चोरी-छिपे बाजार मूल्य से आधे दाम में बेचना चाहते हैं."
सुनसान जगह ऐसे तय करते थे सौदा
ये गिरोह भरोसा जीतने के लिए शुरुआत में लोगों को एक असली सोने की गिन्नी देकर उसे जांच कराने के लिए प्रेरित करते थे. जांच के बाद गिन्नी असली पाए जाने पर लोग भरोस में आकर आसानी से सौदा तय कर लेते थे और उसके बाद उन्हें नकली गिन्नियां सौंपकर गिरोह रफूचक्कर हो जाता था. पुलिस का डर दिखाकर गिरोह सौदे के लिए बैतूल, हरदा और नर्मदापुरम जिलों के सीमावर्ती जंगलों या सुनसान स्थलों पर लोगों को बुलाते थे जहां मोबाइल नेटवर्क और दूसरी सुविधाएं उपलब्ध नहीं होती थीं. लोगों को ठगे जाने का अहसास होने तक गिरोह के सदस्य दूसरे शहर में डेरा डाल लेते थे.
