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हंगामे की भेंट चढ़ा नगर निगम का विशेष सम्मेलन, चूड़ियां लहराने के बीच बिना चर्चा खत्म हुई बैठक
रीवा,(म.प्र.)
विशेष मांग पर बुलाई गई परिषद में एजेंडे पर नहीं हो सकी चर्चा, पार्षदों ने अधिकारियों के सामने किया विरोध; बढ़ते विवाद के बाद अध्यक्ष ने बैठक स्थगित की।
नगर निगम के विशेष सम्मेलन में मंगलवार को उस समय हंगामे की स्थिति बन गई, जब एजेंडे पर चर्चा शुरू होने से पहले ही सत्ता और विपक्ष के पार्षद आमने-सामने आ गए। विशेष मांग पर बुलाई गई इस बैठक से शहर के कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर निर्णय होने की उम्मीद थी, लेकिन परिषद की कार्यवाही कुछ ही देर में विरोध और नारेबाजी की भेंट चढ़ गई। बढ़ते शोर-शराबे और लगातार जारी हंगामे के बीच नगर निगम अध्यक्ष वेंकटेश पांडे ने बैठक समाप्त करने की घोषणा कर दी। परिणाम यह रहा कि तय एजेंडों पर कोई चर्चा नहीं हो सकी और विशेष सम्मेलन बिना किसी ठोस निर्णय के समाप्त हो गया। परिषद की बैठक दोपहर करीब 12 बजे शुरू हुई। शुरुआत में सामान्य कार्यवाही पूरी होने के बाद जैसे ही एजेंडे पर चर्चा की तैयारी हुई, कुछ भाजपा पार्षदों ने नगर निगम आयुक्त की कार्यशैली पर सवाल उठाने शुरू कर दिए। पार्षदों का आरोप था कि आयुक्त जनप्रतिनिधियों के फोन नहीं उठाते, उनसे मिलने के लिए समय नहीं देते और वार्डों से जुड़े विकास कार्यों पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जा रहा है। उनका कहना था कि कई बार शिकायतों और प्रस्तावों के बावजूद समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा है, जिससे नागरिकों के बीच जनप्रतिनिधियों को जवाब देना मुश्किल हो रहा है। इसी मुद्दे को लेकर परिषद में माहौल अचानक गरमा गया। आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हुआ तो सत्ता और विपक्ष के पार्षदों के बीच तीखी बहस होने लगी। कुछ ही मिनटों में स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि कई पार्षद अपनी सीट छोड़कर अधिकारियों की ओर बढ़ गए। विरोध जताने के लिए उन्होंने अधिकारियों के सामने चूड़ियां लहराईं और प्रशासनिक कार्यप्रणाली के खिलाफ नाराजगी व्यक्त की। परिषद कक्ष में लगातार नारेबाजी होती रही और कुछ समय तक कार्यवाही पूरी तरह बाधित रही। हंगामा बढ़ता देख अध्यक्ष वेंकटेश पांडे ने पहले पार्षदों से शांत होकर अपनी बात रखने की अपील की। उन्होंने सभी पक्षों से अनुरोध किया कि परिषद की गरिमा बनाए रखें और एजेंडे के अनुसार चर्चा होने दें। हालांकि उनकी अपील का तत्काल कोई असर नहीं हुआ। दोनों पक्षों के बीच बहस और तेज होती गई, जिससे बैठक का संचालन मुश्किल हो गया। लगातार बिगड़ते हालात को देखते हुए अध्यक्ष ने अंततः परिषद की कार्यवाही समाप्त करने का फैसला लिया और विशेष सम्मेलन स्थगित कर दिया।
बैठक समाप्त होने के बाद परिषद परिसर में भी राजनीतिक बयानबाजी जारी रही। विरोध करने वाले पार्षदों का कहना था कि नगर निगम प्रशासन जनप्रतिनिधियों की बातों को गंभीरता से नहीं ले रहा है। उनका आरोप था कि विकास कार्यों से जुड़े कई प्रस्ताव लंबे समय से लंबित हैं और आम नागरिकों की समस्याओं का समाधान समय पर नहीं हो रहा। उनका कहना था कि कई बार आयुक्त से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन अपेक्षित संवाद नहीं हो सका। इसी नाराजगी के कारण उन्हें परिषद में विरोध दर्ज कराना पड़ा। दूसरी ओर कुछ पार्षदों ने हंगामे के तरीके पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि परिषद लोकतांत्रिक चर्चा का मंच है और यदि किसी मुद्दे पर असहमति है तो उसे नियमों के तहत उठाया जाना चाहिए। उनका मानना था कि हंगामे के कारण शहर के महत्वपूर्ण विकास कार्यों से जुड़े एजेंडे पर चर्चा नहीं हो सकी, जिसका नुकसान अंततः शहर और नागरिकों को ही उठाना पड़ेगा। विशेष सम्मेलन में शहर की विभिन्न विकास योजनाओं, अधोसंरचना कार्यों, सफाई व्यवस्था, निर्माण कार्यों और अन्य प्रशासनिक प्रस्तावों पर चर्चा होने की संभावना थी। कई पार्षद अपने-अपने वार्डों से जुड़े मुद्दे भी परिषद के सामने रखने की तैयारी के साथ पहुंचे थे। लेकिन बैठक समय से पहले समाप्त होने के कारण इन विषयों पर विचार नहीं हो सका। अब इन प्रस्तावों पर चर्चा के लिए नई बैठक बुलाए जाने की संभावना जताई जा रही है। नगर निगम की बैठकों में पिछले कुछ समय से राजनीतिक टकराव के मामले लगातार सामने आते रहे हैं। कई बार सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक के कारण कार्यवाही प्रभावित हुई है। हालांकि इस बार विशेष सम्मेलन से विकास कार्यों को गति मिलने की उम्मीद थी, लेकिन शुरुआती हंगामे ने पूरी बैठक को प्रभावित कर दिया।
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हंगामे की भेंट चढ़ा नगर निगम का विशेष सम्मेलन, चूड़ियां लहराने के बीच बिना चर्चा खत्म हुई बैठक
रीवा,(म.प्र.)
नगर निगम के विशेष सम्मेलन में मंगलवार को उस समय हंगामे की स्थिति बन गई, जब एजेंडे पर चर्चा शुरू होने से पहले ही सत्ता और विपक्ष के पार्षद आमने-सामने आ गए। विशेष मांग पर बुलाई गई इस बैठक से शहर के कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर निर्णय होने की उम्मीद थी, लेकिन परिषद की कार्यवाही कुछ ही देर में विरोध और नारेबाजी की भेंट चढ़ गई। बढ़ते शोर-शराबे और लगातार जारी हंगामे के बीच नगर निगम अध्यक्ष वेंकटेश पांडे ने बैठक समाप्त करने की घोषणा कर दी। परिणाम यह रहा कि तय एजेंडों पर कोई चर्चा नहीं हो सकी और विशेष सम्मेलन बिना किसी ठोस निर्णय के समाप्त हो गया। परिषद की बैठक दोपहर करीब 12 बजे शुरू हुई। शुरुआत में सामान्य कार्यवाही पूरी होने के बाद जैसे ही एजेंडे पर चर्चा की तैयारी हुई, कुछ भाजपा पार्षदों ने नगर निगम आयुक्त की कार्यशैली पर सवाल उठाने शुरू कर दिए। पार्षदों का आरोप था कि आयुक्त जनप्रतिनिधियों के फोन नहीं उठाते, उनसे मिलने के लिए समय नहीं देते और वार्डों से जुड़े विकास कार्यों पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जा रहा है। उनका कहना था कि कई बार शिकायतों और प्रस्तावों के बावजूद समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा है, जिससे नागरिकों के बीच जनप्रतिनिधियों को जवाब देना मुश्किल हो रहा है। इसी मुद्दे को लेकर परिषद में माहौल अचानक गरमा गया। आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हुआ तो सत्ता और विपक्ष के पार्षदों के बीच तीखी बहस होने लगी। कुछ ही मिनटों में स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि कई पार्षद अपनी सीट छोड़कर अधिकारियों की ओर बढ़ गए। विरोध जताने के लिए उन्होंने अधिकारियों के सामने चूड़ियां लहराईं और प्रशासनिक कार्यप्रणाली के खिलाफ नाराजगी व्यक्त की। परिषद कक्ष में लगातार नारेबाजी होती रही और कुछ समय तक कार्यवाही पूरी तरह बाधित रही। हंगामा बढ़ता देख अध्यक्ष वेंकटेश पांडे ने पहले पार्षदों से शांत होकर अपनी बात रखने की अपील की। उन्होंने सभी पक्षों से अनुरोध किया कि परिषद की गरिमा बनाए रखें और एजेंडे के अनुसार चर्चा होने दें। हालांकि उनकी अपील का तत्काल कोई असर नहीं हुआ। दोनों पक्षों के बीच बहस और तेज होती गई, जिससे बैठक का संचालन मुश्किल हो गया। लगातार बिगड़ते हालात को देखते हुए अध्यक्ष ने अंततः परिषद की कार्यवाही समाप्त करने का फैसला लिया और विशेष सम्मेलन स्थगित कर दिया।
बैठक समाप्त होने के बाद परिषद परिसर में भी राजनीतिक बयानबाजी जारी रही। विरोध करने वाले पार्षदों का कहना था कि नगर निगम प्रशासन जनप्रतिनिधियों की बातों को गंभीरता से नहीं ले रहा है। उनका आरोप था कि विकास कार्यों से जुड़े कई प्रस्ताव लंबे समय से लंबित हैं और आम नागरिकों की समस्याओं का समाधान समय पर नहीं हो रहा। उनका कहना था कि कई बार आयुक्त से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन अपेक्षित संवाद नहीं हो सका। इसी नाराजगी के कारण उन्हें परिषद में विरोध दर्ज कराना पड़ा। दूसरी ओर कुछ पार्षदों ने हंगामे के तरीके पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि परिषद लोकतांत्रिक चर्चा का मंच है और यदि किसी मुद्दे पर असहमति है तो उसे नियमों के तहत उठाया जाना चाहिए। उनका मानना था कि हंगामे के कारण शहर के महत्वपूर्ण विकास कार्यों से जुड़े एजेंडे पर चर्चा नहीं हो सकी, जिसका नुकसान अंततः शहर और नागरिकों को ही उठाना पड़ेगा। विशेष सम्मेलन में शहर की विभिन्न विकास योजनाओं, अधोसंरचना कार्यों, सफाई व्यवस्था, निर्माण कार्यों और अन्य प्रशासनिक प्रस्तावों पर चर्चा होने की संभावना थी। कई पार्षद अपने-अपने वार्डों से जुड़े मुद्दे भी परिषद के सामने रखने की तैयारी के साथ पहुंचे थे। लेकिन बैठक समय से पहले समाप्त होने के कारण इन विषयों पर विचार नहीं हो सका। अब इन प्रस्तावों पर चर्चा के लिए नई बैठक बुलाए जाने की संभावना जताई जा रही है। नगर निगम की बैठकों में पिछले कुछ समय से राजनीतिक टकराव के मामले लगातार सामने आते रहे हैं। कई बार सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक के कारण कार्यवाही प्रभावित हुई है। हालांकि इस बार विशेष सम्मेलन से विकास कार्यों को गति मिलने की उम्मीद थी, लेकिन शुरुआती हंगामे ने पूरी बैठक को प्रभावित कर दिया।
