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6 दिन बाद सिलपरा डैम से मिला सेना के जवान का शव
रीवा,(म.प्र.)
रीवा के सिलपरा डैम में नहाते समय डूबे जवान गौरव द्विवेदी का शव एनडीआरएफ और एसडीईआरएफ की संयुक्त कार्रवाई में बरामद, नहर का पानी रोककर चलाया गया विशेष अभियान
रीवा जिले के सिलपरा डैम में छह दिन पहले लापता हुए सेना के जवान गौरव द्विवेदी का शव आखिरकार मंगलवार सुबह बरामद कर लिया गया। पिछले कई दिनों से लगातार चल रहे सर्च ऑपरेशन के बाद एनडीआरएफ, एसडीईआरएफ और स्थानीय प्रशासन की टीमों को यह सफलता मिली। जवान के शव के मिलने के साथ ही परिवार और गांव के लोगों की उम्मीदें टूट गईं और पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल फैल गया। बताया जा रहा है कि 28 वर्षीय गौरव द्विवेदी पिछले सप्ताह अपने भाई-बहनों के साथ सिलपरा डैम घूमने गए थे, जहां नहाने के दौरान वह गहरे पानी में चले गए और देखते ही देखते लापता हो गए। घटना के बाद से लगातार उनकी तलाश की जा रही थी, लेकिन डैम की गहराई और पानी की स्थिति के कारण शुरुआती दिनों में सफलता नहीं मिल सकी।
गौरव द्विवेदी रीवा जिले के बघवार गांव के रहने वाले थे और भारतीय सेना में अपनी सेवाएं दे रहे थे। परिवार के लोगों ने बताया कि वह छुट्टी पर घर आए हुए थे। बुधवार सुबह वह अपने भाई-बहनों और कुछ परिचितों के साथ सिलपरा डैम पहुंचे थे। मौसम सामान्य था और सभी लोग डैम के किनारे समय बिता रहे थे। इसी दौरान गौरव पानी में उतर गए। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक शुरुआत में सब कुछ सामान्य लग रहा था, लेकिन अचानक उनका संतुलन बिगड़ गया और वह गहरे हिस्से की ओर चले गए। आसपास मौजूद लोगों ने उन्हें बचाने की कोशिश भी की, लेकिन कुछ ही पलों में वह पानी में ओझल हो गए।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और स्थानीय प्रशासन हरकत में आ गया। उसी दिन से जवान की तलाश के लिए रेस्क्यू अभियान शुरू कर दिया गया था। शुरुआती चरण में स्थानीय गोताखोरों और एसडीईआरएफ की टीम ने डैम में सर्च ऑपरेशन चलाया। कई घंटों तक पानी में खोजबीन की गई, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली। इसके बाद बड़े स्तर पर अभियान शुरू किया गया और एनडीआरएफ की टीम को भी बुलाया गया। पिछले छह दिनों तक लगातार बोट, गोताखोरों और आधुनिक उपकरणों की मदद से तलाश जारी रही। बावजूद इसके जवान का कोई पता नहीं चल सका।
अधिकारियों के अनुसार डैम में पानी की गहराई और तेज बहाव रेस्क्यू अभियान के सामने सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरे। कई बार गोताखोरों को प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। लगातार प्रयासों के बावजूद जब कोई सफलता नहीं मिली तो प्रशासन ने एक अलग रणनीति अपनाने का फैसला किया। मंगलवार को नहर का पानी पूरी तरह रोक दिया गया ताकि डैम में जलस्तर कम किया जा सके। बताया गया कि पानी की गहराई करीब 40 फीट तक कम होने के बाद खोज अभियान को नई दिशा मिली।
मंगलवार सुबह करीब छह बजे एनडीआरएफ की आगरा स्थित स्पेशल टास्क फोर्स और एसडीईआरएफ की संयुक्त टीम ने एक बार फिर अभियान शुरू किया। इस दौरान डैम के उन हिस्सों पर विशेष ध्यान दिया गया जहां जवान के होने की संभावना जताई जा रही थी। कई घंटे तक लगातार चली खोजबीन के बाद सुबह करीब नौ बजे जवान का शव पानी के भीतर से बरामद कर लिया गया। शव मिलने की खबर मिलते ही मौके पर मौजूद परिजन भावुक हो गए। कई दिनों से चल रही तलाश का अंत तो हुआ, लेकिन परिणाम बेहद दुखद रहा।
शव को बाहर निकालने के बाद पुलिस ने आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की और पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेज दिया। अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद आगे की औपचारिक कार्रवाई की जाएगी। वहीं प्रशासन ने पूरे अभियान में शामिल रेस्क्यू टीमों के प्रयासों की सराहना की है। अधिकारियों का कहना है कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद टीमों ने लगातार मेहनत की और आखिरकार जवान को खोज निकालने में सफलता प्राप्त की।
गौरव द्विवेदी की मौत की खबर से बघवार गांव में शोक की लहर दौड़ गई है। गांव के लोग उन्हें एक शांत स्वभाव और जिम्मेदार युवा के रूप में याद कर रहे हैं। सेना में उनकी सेवा को लेकर ग्रामीणों में गर्व था और उनके भविष्य को लेकर कई उम्मीदें थीं। परिवार के लोगों का रो-रोकर बुरा हाल है। आसपास के गांवों से भी लोग परिजनों को सांत्वना देने पहुंच रहे हैं। यह घटना एक बार फिर जलाशयों और डैम क्षेत्रों में सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े करती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बरसात के मौसम से पहले और बाद में ऐसे स्थानों पर लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। प्रशासन भी समय-समय पर लोगों को गहरे पानी में न जाने और सुरक्षा नियमों का पालन करने की सलाह देता रहा है।
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6 दिन बाद सिलपरा डैम से मिला सेना के जवान का शव
रीवा,(म.प्र.)
रीवा जिले के सिलपरा डैम में छह दिन पहले लापता हुए सेना के जवान गौरव द्विवेदी का शव आखिरकार मंगलवार सुबह बरामद कर लिया गया। पिछले कई दिनों से लगातार चल रहे सर्च ऑपरेशन के बाद एनडीआरएफ, एसडीईआरएफ और स्थानीय प्रशासन की टीमों को यह सफलता मिली। जवान के शव के मिलने के साथ ही परिवार और गांव के लोगों की उम्मीदें टूट गईं और पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल फैल गया। बताया जा रहा है कि 28 वर्षीय गौरव द्विवेदी पिछले सप्ताह अपने भाई-बहनों के साथ सिलपरा डैम घूमने गए थे, जहां नहाने के दौरान वह गहरे पानी में चले गए और देखते ही देखते लापता हो गए। घटना के बाद से लगातार उनकी तलाश की जा रही थी, लेकिन डैम की गहराई और पानी की स्थिति के कारण शुरुआती दिनों में सफलता नहीं मिल सकी।
गौरव द्विवेदी रीवा जिले के बघवार गांव के रहने वाले थे और भारतीय सेना में अपनी सेवाएं दे रहे थे। परिवार के लोगों ने बताया कि वह छुट्टी पर घर आए हुए थे। बुधवार सुबह वह अपने भाई-बहनों और कुछ परिचितों के साथ सिलपरा डैम पहुंचे थे। मौसम सामान्य था और सभी लोग डैम के किनारे समय बिता रहे थे। इसी दौरान गौरव पानी में उतर गए। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक शुरुआत में सब कुछ सामान्य लग रहा था, लेकिन अचानक उनका संतुलन बिगड़ गया और वह गहरे हिस्से की ओर चले गए। आसपास मौजूद लोगों ने उन्हें बचाने की कोशिश भी की, लेकिन कुछ ही पलों में वह पानी में ओझल हो गए।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और स्थानीय प्रशासन हरकत में आ गया। उसी दिन से जवान की तलाश के लिए रेस्क्यू अभियान शुरू कर दिया गया था। शुरुआती चरण में स्थानीय गोताखोरों और एसडीईआरएफ की टीम ने डैम में सर्च ऑपरेशन चलाया। कई घंटों तक पानी में खोजबीन की गई, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली। इसके बाद बड़े स्तर पर अभियान शुरू किया गया और एनडीआरएफ की टीम को भी बुलाया गया। पिछले छह दिनों तक लगातार बोट, गोताखोरों और आधुनिक उपकरणों की मदद से तलाश जारी रही। बावजूद इसके जवान का कोई पता नहीं चल सका।
अधिकारियों के अनुसार डैम में पानी की गहराई और तेज बहाव रेस्क्यू अभियान के सामने सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरे। कई बार गोताखोरों को प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। लगातार प्रयासों के बावजूद जब कोई सफलता नहीं मिली तो प्रशासन ने एक अलग रणनीति अपनाने का फैसला किया। मंगलवार को नहर का पानी पूरी तरह रोक दिया गया ताकि डैम में जलस्तर कम किया जा सके। बताया गया कि पानी की गहराई करीब 40 फीट तक कम होने के बाद खोज अभियान को नई दिशा मिली।
मंगलवार सुबह करीब छह बजे एनडीआरएफ की आगरा स्थित स्पेशल टास्क फोर्स और एसडीईआरएफ की संयुक्त टीम ने एक बार फिर अभियान शुरू किया। इस दौरान डैम के उन हिस्सों पर विशेष ध्यान दिया गया जहां जवान के होने की संभावना जताई जा रही थी। कई घंटे तक लगातार चली खोजबीन के बाद सुबह करीब नौ बजे जवान का शव पानी के भीतर से बरामद कर लिया गया। शव मिलने की खबर मिलते ही मौके पर मौजूद परिजन भावुक हो गए। कई दिनों से चल रही तलाश का अंत तो हुआ, लेकिन परिणाम बेहद दुखद रहा।
शव को बाहर निकालने के बाद पुलिस ने आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की और पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेज दिया। अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद आगे की औपचारिक कार्रवाई की जाएगी। वहीं प्रशासन ने पूरे अभियान में शामिल रेस्क्यू टीमों के प्रयासों की सराहना की है। अधिकारियों का कहना है कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद टीमों ने लगातार मेहनत की और आखिरकार जवान को खोज निकालने में सफलता प्राप्त की।
गौरव द्विवेदी की मौत की खबर से बघवार गांव में शोक की लहर दौड़ गई है। गांव के लोग उन्हें एक शांत स्वभाव और जिम्मेदार युवा के रूप में याद कर रहे हैं। सेना में उनकी सेवा को लेकर ग्रामीणों में गर्व था और उनके भविष्य को लेकर कई उम्मीदें थीं। परिवार के लोगों का रो-रोकर बुरा हाल है। आसपास के गांवों से भी लोग परिजनों को सांत्वना देने पहुंच रहे हैं। यह घटना एक बार फिर जलाशयों और डैम क्षेत्रों में सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े करती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बरसात के मौसम से पहले और बाद में ऐसे स्थानों पर लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। प्रशासन भी समय-समय पर लोगों को गहरे पानी में न जाने और सुरक्षा नियमों का पालन करने की सलाह देता रहा है।
