शहडोल में 5 हजार की रिश्वत लेते मेडिकल ऑफिसर लोकायुक्त के हत्थे चढ़े, रंगे हाथों ट्रैप कार्रवाई

रीवा,(म.प्र.)

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पत्नी के सलग्नीकरण आदेश निरस्त कराने और रवानगी रोकने के नाम पर मांगी थी 10 हजार रुपए की रिश्वत, लोकायुक्त रीवा की टीम ने जयसिंहनगर बस स्टैंड पर की कार्रवाई।

शहडोल जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकायुक्त संगठन ने एक और बड़ी कार्रवाई करते हुए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र उफरी में पदस्थ मेडिकल ऑफिसर को 5 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई लोकायुक्त पुलिस संभाग रीवा की टीम ने जयसिंहनगर बस स्टैंड पर की। आरोपी डॉक्टर पर शिकायतकर्ता की पत्नी के सलग्नीकरण आदेश को निरस्त कराने और उनकी रवानगी नहीं होने देने के बदले रिश्वत मांगने का आरोप है। लोकायुक्त की ट्रैप कार्रवाई के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया। अधिकारियों के अनुसार आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। शिकायतकर्ता वीरेंद्र सिंह, निवासी ग्राम पटनार खुर्द, थाना पाली, जिला उमरिया ने 18 मई 2026 को लोकायुक्त कार्यालय रीवा में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि उनकी पत्नी पार्वती सिंह का सलग्नीकरण आदेश निरस्त कराने और उन्हें कार्यस्थल से रवाना नहीं करने के बदले प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र उफरी में पदस्थ मेडिकल ऑफिसर डॉ. महेश चंद्र शर्मा 10 हजार रुपए की रिश्वत मांग रहे हैं। शिकायत मिलने के बाद लोकायुक्त पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रारंभिक जांच शुरू की। अधिकारियों के निर्देश पर शिकायत का सत्यापन कराया गया, जिसमें रिश्वत मांगने के आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए।

लोकायुक्त टीम की जांच के दौरान यह भी सामने आया कि आरोपी डॉक्टर पहले ही शिकायतकर्ता से 5 हजार रुपए ले चुका था और बाकी 5 हजार रुपए की मांग लगातार कर रहा था। सत्यापन के बाद लोकायुक्त अधिकारियों ने ट्रैप कार्रवाई की योजना तैयार की। महानिदेशक लोकायुक्त योगेश देशमुख के भ्रष्टाचार के विरुद्ध सख्त कार्रवाई के निर्देश, उप पुलिस महानिरीक्षक मनोज सिंह के मार्गदर्शन और पुलिस अधीक्षक लोकायुक्त योगेश्वर शर्मा के निर्देशन में विशेष टीम गठित की गई। पूरी योजना के अनुसार शिकायतकर्ता को निर्धारित रकम के साथ आरोपी के पास भेजा गया। शुक्रवार 3 जुलाई 2026 को जयसिंहनगर बस स्टैंड पर जैसे ही शिकायतकर्ता ने आरोपी डॉक्टर को 5 हजार रुपए दिए, पहले से निगरानी कर रही लोकायुक्त टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए उसे रंगे हाथों पकड़ लिया। आरोपी के पास से रिश्वत की रकम बरामद की गई। कार्रवाई के दौरान लोकायुक्त अधिकारियों ने आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए मौके पर ही पंचनामा तैयार किया। इसके बाद आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की संशोधित धारा 7 के तहत अपराध दर्ज किया गया।

इस पूरी ट्रैप कार्रवाई का नेतृत्व लोकायुक्त निरीक्षक संदीप सिंह भदौरिया और निरीक्षक एस. राम मरावी ने किया। दोनों अधिकारियों के साथ लोकायुक्त रीवा की विशेष टीम भी मौजूद रही। कार्रवाई के दौरान सभी कानूनी औपचारिकताओं का पालन किया गया। लोकायुक्त अधिकारियों ने आरोपी से पूछताछ भी शुरू कर दी है और मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि यदि जांच में अन्य तथ्य सामने आते हैं तो उनके आधार पर आगे की कार्रवाई भी की जाएगी।

लोकायुक्त संगठन का कहना है कि प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। सरकारी कार्यालयों में रिश्वतखोरी की शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई की जा रही है ताकि आम नागरिकों को राहत मिल सके। अधिकारियों के अनुसार किसी भी सरकारी कर्मचारी या अधिकारी द्वारा अवैध रूप से रिश्वत मांगने की शिकायत मिलने पर पहले उसका सत्यापन कराया जाता है और पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर ट्रैप कार्रवाई की जाती है। इसी प्रक्रिया के तहत इस मामले में भी शिकायत की पुष्टि होने के बाद पूरी योजना बनाकर आरोपी को रंगे हाथों पकड़ा गया।

स्वास्थ्य विभाग से जुड़े मामलों में रिश्वत की शिकायत सामने आने के बाद एक बार फिर सरकारी सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्वास्थ्य जैसी संवेदनशील सेवा में कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों से ईमानदार कार्यप्रणाली की अपेक्षा की जाती है। ऐसे मामलों में होने वाली कार्रवाई न केवल दोषियों के खिलाफ कानूनी संदेश देती है, बल्कि अन्य कर्मचारियों के लिए भी चेतावनी का काम करती है।

लोकायुक्त संगठन ने इस कार्रवाई के बाद आम नागरिकों से भी अपील की है कि यदि कोई सरकारी अधिकारी या कर्मचारी किसी काम के बदले रिश्वत की मांग करता है तो उसकी सूचना तुरंत लोकायुक्त कार्यालय को दें। अधिकारियों ने बताया कि शिकायतकर्ता की पहचान और सूचना को पूरी तरह गोपनीय रखा जाता है तथा जांच के बाद आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाती है। संगठन ने नागरिकों की सुविधा के लिए हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया है, जहां भ्रष्टाचार संबंधी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। प्रदेश में हाल के समय में लोकायुक्त द्वारा अलग-अलग जिलों में कई ट्रैप कार्रवाई की गई हैं। इन कार्रवाइयों का उद्देश्य सरकारी व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाना और भ्रष्टाचार पर प्रभावी अंकुश लगाना है। शहडोल में हुई यह कार्रवाई भी उसी अभियान का हिस्सा मानी जा रही है। 

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04 Jul 2026 By Vaishnavi.J

शहडोल में 5 हजार की रिश्वत लेते मेडिकल ऑफिसर लोकायुक्त के हत्थे चढ़े, रंगे हाथों ट्रैप कार्रवाई

रीवा,(म.प्र.)

शहडोल जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकायुक्त संगठन ने एक और बड़ी कार्रवाई करते हुए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र उफरी में पदस्थ मेडिकल ऑफिसर को 5 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई लोकायुक्त पुलिस संभाग रीवा की टीम ने जयसिंहनगर बस स्टैंड पर की। आरोपी डॉक्टर पर शिकायतकर्ता की पत्नी के सलग्नीकरण आदेश को निरस्त कराने और उनकी रवानगी नहीं होने देने के बदले रिश्वत मांगने का आरोप है। लोकायुक्त की ट्रैप कार्रवाई के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया। अधिकारियों के अनुसार आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। शिकायतकर्ता वीरेंद्र सिंह, निवासी ग्राम पटनार खुर्द, थाना पाली, जिला उमरिया ने 18 मई 2026 को लोकायुक्त कार्यालय रीवा में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि उनकी पत्नी पार्वती सिंह का सलग्नीकरण आदेश निरस्त कराने और उन्हें कार्यस्थल से रवाना नहीं करने के बदले प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र उफरी में पदस्थ मेडिकल ऑफिसर डॉ. महेश चंद्र शर्मा 10 हजार रुपए की रिश्वत मांग रहे हैं। शिकायत मिलने के बाद लोकायुक्त पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रारंभिक जांच शुरू की। अधिकारियों के निर्देश पर शिकायत का सत्यापन कराया गया, जिसमें रिश्वत मांगने के आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए।

लोकायुक्त टीम की जांच के दौरान यह भी सामने आया कि आरोपी डॉक्टर पहले ही शिकायतकर्ता से 5 हजार रुपए ले चुका था और बाकी 5 हजार रुपए की मांग लगातार कर रहा था। सत्यापन के बाद लोकायुक्त अधिकारियों ने ट्रैप कार्रवाई की योजना तैयार की। महानिदेशक लोकायुक्त योगेश देशमुख के भ्रष्टाचार के विरुद्ध सख्त कार्रवाई के निर्देश, उप पुलिस महानिरीक्षक मनोज सिंह के मार्गदर्शन और पुलिस अधीक्षक लोकायुक्त योगेश्वर शर्मा के निर्देशन में विशेष टीम गठित की गई। पूरी योजना के अनुसार शिकायतकर्ता को निर्धारित रकम के साथ आरोपी के पास भेजा गया। शुक्रवार 3 जुलाई 2026 को जयसिंहनगर बस स्टैंड पर जैसे ही शिकायतकर्ता ने आरोपी डॉक्टर को 5 हजार रुपए दिए, पहले से निगरानी कर रही लोकायुक्त टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए उसे रंगे हाथों पकड़ लिया। आरोपी के पास से रिश्वत की रकम बरामद की गई। कार्रवाई के दौरान लोकायुक्त अधिकारियों ने आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए मौके पर ही पंचनामा तैयार किया। इसके बाद आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की संशोधित धारा 7 के तहत अपराध दर्ज किया गया।

इस पूरी ट्रैप कार्रवाई का नेतृत्व लोकायुक्त निरीक्षक संदीप सिंह भदौरिया और निरीक्षक एस. राम मरावी ने किया। दोनों अधिकारियों के साथ लोकायुक्त रीवा की विशेष टीम भी मौजूद रही। कार्रवाई के दौरान सभी कानूनी औपचारिकताओं का पालन किया गया। लोकायुक्त अधिकारियों ने आरोपी से पूछताछ भी शुरू कर दी है और मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि यदि जांच में अन्य तथ्य सामने आते हैं तो उनके आधार पर आगे की कार्रवाई भी की जाएगी।

लोकायुक्त संगठन का कहना है कि प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। सरकारी कार्यालयों में रिश्वतखोरी की शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई की जा रही है ताकि आम नागरिकों को राहत मिल सके। अधिकारियों के अनुसार किसी भी सरकारी कर्मचारी या अधिकारी द्वारा अवैध रूप से रिश्वत मांगने की शिकायत मिलने पर पहले उसका सत्यापन कराया जाता है और पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर ट्रैप कार्रवाई की जाती है। इसी प्रक्रिया के तहत इस मामले में भी शिकायत की पुष्टि होने के बाद पूरी योजना बनाकर आरोपी को रंगे हाथों पकड़ा गया।

स्वास्थ्य विभाग से जुड़े मामलों में रिश्वत की शिकायत सामने आने के बाद एक बार फिर सरकारी सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्वास्थ्य जैसी संवेदनशील सेवा में कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों से ईमानदार कार्यप्रणाली की अपेक्षा की जाती है। ऐसे मामलों में होने वाली कार्रवाई न केवल दोषियों के खिलाफ कानूनी संदेश देती है, बल्कि अन्य कर्मचारियों के लिए भी चेतावनी का काम करती है।

लोकायुक्त संगठन ने इस कार्रवाई के बाद आम नागरिकों से भी अपील की है कि यदि कोई सरकारी अधिकारी या कर्मचारी किसी काम के बदले रिश्वत की मांग करता है तो उसकी सूचना तुरंत लोकायुक्त कार्यालय को दें। अधिकारियों ने बताया कि शिकायतकर्ता की पहचान और सूचना को पूरी तरह गोपनीय रखा जाता है तथा जांच के बाद आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाती है। संगठन ने नागरिकों की सुविधा के लिए हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया है, जहां भ्रष्टाचार संबंधी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। प्रदेश में हाल के समय में लोकायुक्त द्वारा अलग-अलग जिलों में कई ट्रैप कार्रवाई की गई हैं। इन कार्रवाइयों का उद्देश्य सरकारी व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाना और भ्रष्टाचार पर प्रभावी अंकुश लगाना है। शहडोल में हुई यह कार्रवाई भी उसी अभियान का हिस्सा मानी जा रही है। 

https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/vindhya-rewa/medical-officer-taking-bribe-of-rs-5000-in-shahdol-caught/article-57843

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