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उज्जैन में जल सत्याग्रह, किसानों ने किया चक्काजाम – सिंहस्थ के लिए जमीन अधिग्रहण का विरोध तेज
Ujjain, MP
सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के लिए स्थायी कुंभ नगरी बसाने की योजना के खिलाफ रविवार को उज्जैन में किसानों का विरोध उग्र हो गया।
किसानों ने शिप्रा नदी के चक्रतीर्थ श्मशान घाट पर पानी में खड़े होकर जल सत्याग्रह किया और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। वहीं, आगर रोड पर किसानों ने चक्काजाम कर वाहनों की लंबी कतारें लगा दीं।
किसानों की आपत्ति
किसानों का कहना है कि वे सिंहस्थ महापर्व के लिए जमीन देने को तैयार हैं, लेकिन स्थायी रूप से अधिग्रहण नहीं होने देंगे।
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छोटे किसानों के पास पहले से ही सीमित ज़मीन है, अधिग्रहण होने पर वे पूरी तरह बर्बाद हो जाएंगे।
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लैंड पुलिंग स्कीम से किसानों की आधी ज़मीन छिन रही है।
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सिंहस्थ क्षेत्र में किसानों को मकान, बाड़े और गोदाम बनाने की अनुमति तक नहीं है, तो अब स्थायी निर्माण क्यों?
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उज्जैन को "कांक्रीट की नगरी" बनाने की बजाय आध्यात्मिक पहचान को बनाए रखना चाहिए।
पुलिस की सख्ती से गुस्साए किसान
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प्रशासन ने किसानों के ऐलान के बाद शनिवार रात ही आंदोलन का नेतृत्व करने वाले कई किसानों को हिरासत में ले लिया था।
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रविवार को रामघाट पर प्रस्तावित जल सत्याग्रह रोकने के लिए पुलिस ने सभी घाटों पर बैरिकेडिंग कर दी।
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इसके बावजूद किसान चकमा देकर चक्रतीर्थ श्मशान घाट तक पहुंचे और शिप्रा में खड़े होकर प्रदर्शन किया।
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दूसरी ओर किसानों के एक गुट ने अनाज मंडी के सामने चक्काजाम कर दिया।
2378 हेक्टेयर में बसाई जाएगी स्थायी नगरी
सरकार 2028 सिंहस्थ के लिए उज्जैन में 2378 हेक्टेयर जमीन पर स्थायी कुंभ नगरी बसाने की योजना बना रही है। इसे लेकर उज्जैन डेवलपमेंट अथॉरिटी (UDA) द्वारा भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया जारी है। लेकिन किसानों का कहना है कि उन्हें असली योजना से अंधेरे में रखा गया है।
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उज्जैन में जल सत्याग्रह, किसानों ने किया चक्काजाम – सिंहस्थ के लिए जमीन अधिग्रहण का विरोध तेज
Ujjain, MP
किसानों ने शिप्रा नदी के चक्रतीर्थ श्मशान घाट पर पानी में खड़े होकर जल सत्याग्रह किया और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। वहीं, आगर रोड पर किसानों ने चक्काजाम कर वाहनों की लंबी कतारें लगा दीं।
किसानों की आपत्ति
किसानों का कहना है कि वे सिंहस्थ महापर्व के लिए जमीन देने को तैयार हैं, लेकिन स्थायी रूप से अधिग्रहण नहीं होने देंगे।
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छोटे किसानों के पास पहले से ही सीमित ज़मीन है, अधिग्रहण होने पर वे पूरी तरह बर्बाद हो जाएंगे।
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लैंड पुलिंग स्कीम से किसानों की आधी ज़मीन छिन रही है।
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सिंहस्थ क्षेत्र में किसानों को मकान, बाड़े और गोदाम बनाने की अनुमति तक नहीं है, तो अब स्थायी निर्माण क्यों?
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उज्जैन को "कांक्रीट की नगरी" बनाने की बजाय आध्यात्मिक पहचान को बनाए रखना चाहिए।
पुलिस की सख्ती से गुस्साए किसान
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प्रशासन ने किसानों के ऐलान के बाद शनिवार रात ही आंदोलन का नेतृत्व करने वाले कई किसानों को हिरासत में ले लिया था।
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रविवार को रामघाट पर प्रस्तावित जल सत्याग्रह रोकने के लिए पुलिस ने सभी घाटों पर बैरिकेडिंग कर दी।
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इसके बावजूद किसान चकमा देकर चक्रतीर्थ श्मशान घाट तक पहुंचे और शिप्रा में खड़े होकर प्रदर्शन किया।
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दूसरी ओर किसानों के एक गुट ने अनाज मंडी के सामने चक्काजाम कर दिया।
2378 हेक्टेयर में बसाई जाएगी स्थायी नगरी
सरकार 2028 सिंहस्थ के लिए उज्जैन में 2378 हेक्टेयर जमीन पर स्थायी कुंभ नगरी बसाने की योजना बना रही है। इसे लेकर उज्जैन डेवलपमेंट अथॉरिटी (UDA) द्वारा भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया जारी है। लेकिन किसानों का कहना है कि उन्हें असली योजना से अंधेरे में रखा गया है।
