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ग्वालियर का ये कैसा बांध! 6 माह पहले लबालब भरा था, अब नाले में तब्दील
Gwalior, MP
ग्वालियर में 6 माह पहले जिस बांध में कई साल बाद ठीकठाक पानी आया था, अब वह फिर पहले जैसी हालत में पहुंच गया है. मामला ग्वालियर के पास स्थित वीरपुर बांध का है, जो 12 फीट भरने के बाद एकदम खाली हो चुका है. इसके पीछे मुख्य कारण यहां अतिक्रमण और पानी को जबरन निकालना है. हाई कोर्ट भले ही जल स्रोतों पर अतिक्रमण हटाकर पानी संग्रहित करने का निर्देश दे रहा हो लेकिन दबंग लोग इन बांधों का पानी निकाल कर वहां फिर से खेती करने में जुट गए हैं.
अगस्त में 12 फीट तक भर गया था वीरपुर बांध
ग्वालियर के लिए कभी जल स्रोतों की श्रृंखला में प्रमुख भूमिका निभाने वाला वीरपुर बांध इन दिनों फिर से नाला बनकर रह गया है. वीरपुर बांध का पानी देखते ही देखते कहां गायब हो गया, इस बारे में न तो जल संसाधन विभाग को पता है और न ही नगर निगम को. हालात ये हैं कि अगस्त में करीब 12 फीट तक भरने वाला वीरपुर बांध पूरी तरीके से वीरान हो चुका है. एक समय ये बांध ग्वालियर में जलापूर्ति करने के लिए सबसे बड़ा साधन हुआ करता था.
भविष्य में ग्वालियर में होगी बूंद-बूंद की किल्लत
बता दें कि ग्वालियर में रियासतकालीन समय से ही बांधों की एक विस्तृत श्रृंखला थी. राजा का ताल रमौआ, हनुमान बांध, वीरपुर बांध, स्वर्ण रेखा नदी आदि सभी आपस में मिले हुए थे. लेकिन धीरे-धीरे बांधों की जमीन सिकुड़ती चली गई और अब वहां लोग मकान बनाकर रह रहे हैं. बांध की जमीन में अब खेती की जा रही है. वहीं, जिला प्रशासन के साथ ही जल संसाधन विभाग इस ओर आंखें मूंदे हुए है. स्वर्ण रेखा नदी को पुनर्जीवित करने की याचिका दायर करने वाले अधिवक्ता विश्वजीत रतौनिया का कहना है 'ग्वालियर के जलस्रोत चिंतनीय स्थिति में पहुंच गए हैं. यदि जल्दी ही इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले समय में ग्वालियर को पानी की भारी किल्लत होने वाली है.
अन्य जलस्रोत भी अतिक्रमण की चपेट में
इस मामले में जल संसाधन विभाग के अधीक्षण यंत्री राजेश चतुर्वेदी का कहना है "बांध की जमीन में अतिक्रमण हटाने का काम नगर निगम का है." बता दें कि यह हाल अकेले वीरपुर बांध का ही नहीं है बल्कि हनुमान बांध और अन्य बांधों की भी यही स्थिति है. गर्मी के दिनों में बांधों को पुनर्जीवित करने लिए तमाम जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं लेकिन बांध में पानी आने के बाद अफसर बेखबर हो जाते हैं.
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ग्वालियर का ये कैसा बांध! 6 माह पहले लबालब भरा था, अब नाले में तब्दील
Gwalior, MP
ग्वालियर में 6 माह पहले जिस बांध में कई साल बाद ठीकठाक पानी आया था, अब वह फिर पहले जैसी हालत में पहुंच गया है. मामला ग्वालियर के पास स्थित वीरपुर बांध का है, जो 12 फीट भरने के बाद एकदम खाली हो चुका है. इसके पीछे मुख्य कारण यहां अतिक्रमण और पानी को जबरन निकालना है. हाई कोर्ट भले ही जल स्रोतों पर अतिक्रमण हटाकर पानी संग्रहित करने का निर्देश दे रहा हो लेकिन दबंग लोग इन बांधों का पानी निकाल कर वहां फिर से खेती करने में जुट गए हैं.
अगस्त में 12 फीट तक भर गया था वीरपुर बांध
ग्वालियर के लिए कभी जल स्रोतों की श्रृंखला में प्रमुख भूमिका निभाने वाला वीरपुर बांध इन दिनों फिर से नाला बनकर रह गया है. वीरपुर बांध का पानी देखते ही देखते कहां गायब हो गया, इस बारे में न तो जल संसाधन विभाग को पता है और न ही नगर निगम को. हालात ये हैं कि अगस्त में करीब 12 फीट तक भरने वाला वीरपुर बांध पूरी तरीके से वीरान हो चुका है. एक समय ये बांध ग्वालियर में जलापूर्ति करने के लिए सबसे बड़ा साधन हुआ करता था.
भविष्य में ग्वालियर में होगी बूंद-बूंद की किल्लत
बता दें कि ग्वालियर में रियासतकालीन समय से ही बांधों की एक विस्तृत श्रृंखला थी. राजा का ताल रमौआ, हनुमान बांध, वीरपुर बांध, स्वर्ण रेखा नदी आदि सभी आपस में मिले हुए थे. लेकिन धीरे-धीरे बांधों की जमीन सिकुड़ती चली गई और अब वहां लोग मकान बनाकर रह रहे हैं. बांध की जमीन में अब खेती की जा रही है. वहीं, जिला प्रशासन के साथ ही जल संसाधन विभाग इस ओर आंखें मूंदे हुए है. स्वर्ण रेखा नदी को पुनर्जीवित करने की याचिका दायर करने वाले अधिवक्ता विश्वजीत रतौनिया का कहना है 'ग्वालियर के जलस्रोत चिंतनीय स्थिति में पहुंच गए हैं. यदि जल्दी ही इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले समय में ग्वालियर को पानी की भारी किल्लत होने वाली है.
अन्य जलस्रोत भी अतिक्रमण की चपेट में
इस मामले में जल संसाधन विभाग के अधीक्षण यंत्री राजेश चतुर्वेदी का कहना है "बांध की जमीन में अतिक्रमण हटाने का काम नगर निगम का है." बता दें कि यह हाल अकेले वीरपुर बांध का ही नहीं है बल्कि हनुमान बांध और अन्य बांधों की भी यही स्थिति है. गर्मी के दिनों में बांधों को पुनर्जीवित करने लिए तमाम जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं लेकिन बांध में पानी आने के बाद अफसर बेखबर हो जाते हैं.
