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जब करंट लगने से तड़पता रहा बंदर का बच्चा, रेल कर्मचारियों ने मौत के मुंह से निकाला
SEHORE, MP
जिस बंदर को करंट लगा, वो देखने में काफी नाज़ुक सा है. हादसे के बाद वह बुरी तरह घायल हो गया. जिसके बाद रेलवे कर्मचारियों की मदद के बाद ही उसकी जान बच पाई.
मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में रेलवे कर्मचारियों ने इंसानियत की मिसाल पेश की. रेलवे कर्मचारियों के इस संवेदनशील कदम को लेकर हर जगह सराहना हो रही है. दरअसल, यहां बुधनी रेलवे स्टेशन के पास एक बंदर के बच्चे को करंट लग गया, जिससे वह बेहोश होकर गिर पड़ा. रेलवे कर्मचारियों ने बिना देर किए उसे उठाया और तुरंत अस्पताल पहुंचाया. मिली जानकारी के मुताबिक, रेलवे ट्रैक पर काम कर रहे ट्रैकमैन शिवम मेहरा और अनिल राजपूत की नजर उस घायल बंदर पर पड़ी, जो दर्द से तड़प रहा था.
अदा किया इंसानियत का फ़र्ज़
दोनों ने मानवीयता दिखाते हुए उसे उठाया और बुधनी ले गए. जिसके बाद वहां से उसे पशु चिकित्सालय ले जाया गया, जहां डॉक्टर ने तुरंत इलाज किया और उसकी पट्टी की. इलाज के बाद बंदर को वन विभाग के कर्मचारियों को सौंप दिया गया, ताकि वह पूरी तरह ठीक होकर जंगल में लौट सके.'
आनन-फानन में बच पाई जान
बता दें कि जिस बंदर को करंट लगा, वो देखने में काफी नाज़ुक सा है. हादसे के बाद वह बुरी तरह घायल हो गया. जिसके बाद रेलवे कर्मचारियों की मदद के बाद ही उसकी जान बच पाई. अगर सही समय पर उसे मदद और इलाज नहीं मिलता तो शायद वो प्राण त्याग देता.
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जब करंट लगने से तड़पता रहा बंदर का बच्चा, रेल कर्मचारियों ने मौत के मुंह से निकाला
SEHORE, MP
मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में रेलवे कर्मचारियों ने इंसानियत की मिसाल पेश की. रेलवे कर्मचारियों के इस संवेदनशील कदम को लेकर हर जगह सराहना हो रही है. दरअसल, यहां बुधनी रेलवे स्टेशन के पास एक बंदर के बच्चे को करंट लग गया, जिससे वह बेहोश होकर गिर पड़ा. रेलवे कर्मचारियों ने बिना देर किए उसे उठाया और तुरंत अस्पताल पहुंचाया. मिली जानकारी के मुताबिक, रेलवे ट्रैक पर काम कर रहे ट्रैकमैन शिवम मेहरा और अनिल राजपूत की नजर उस घायल बंदर पर पड़ी, जो दर्द से तड़प रहा था.
अदा किया इंसानियत का फ़र्ज़
दोनों ने मानवीयता दिखाते हुए उसे उठाया और बुधनी ले गए. जिसके बाद वहां से उसे पशु चिकित्सालय ले जाया गया, जहां डॉक्टर ने तुरंत इलाज किया और उसकी पट्टी की. इलाज के बाद बंदर को वन विभाग के कर्मचारियों को सौंप दिया गया, ताकि वह पूरी तरह ठीक होकर जंगल में लौट सके.'
आनन-फानन में बच पाई जान
बता दें कि जिस बंदर को करंट लगा, वो देखने में काफी नाज़ुक सा है. हादसे के बाद वह बुरी तरह घायल हो गया. जिसके बाद रेलवे कर्मचारियों की मदद के बाद ही उसकी जान बच पाई. अगर सही समय पर उसे मदद और इलाज नहीं मिलता तो शायद वो प्राण त्याग देता.
