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उमरिया में बाघ के हमले से हुई महिला की मौत, 21 दिन में तीसरी मौत, गुस्साए ग्रामीणों का किया हंगामा
उमरिया (म.प्र.)
उमरिया में बाघ के हमले में महिला की मौत के बाद ग्रामीण भड़क गए। वन विभाग की टीम पर हमला, CM मोहन यादव ने 25 लाख सहायता की घोषणा की।
मध्य प्रदेश के उमरिया जिले में फिर से एक बाघ के हमले ने लोगों के बीच डर और गुस्सा पैदा कर दिया है। रविवार तड़के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के पनपथा क्षेत्र में खेरवा मोहल्ले में, एक बाघ ने घर के आंगन में सो रहे परिवार पर हमला कर दिया। इस हमले में 48 वर्षीय फूलबाई की मौके पर ही मौत हो गई, और उन्हें बचाने के दौरान उनके पति और ससुर गंभीर रूप से घायल हो गए। बताया गया है कि ये घटना सुबह करीब तीन बजे हुई। आसपास के लोगों ने अचानक चीखने-चिल्लाने की आवाज सुनी, जिससे गांव में अफरा-तफरी मच गई।
मौके पर मौजूद लोगों का कहना है कि बाघ ने महिला को पकड़ने के बाद काफी देर तक घर के बाहर घूमता रहा। लोग डर के मारे अपने घरों से बाहर नहीं आ सके। कुछ ग्रामीण शोर मचाने की कोशिश करते रहे, लेकिन बाघ लगातार दहाड़ता रहा और बाद में वह घर में जाकर छिप गया। वन विभाग और बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व की टीम को सूचना मिलने के बाद मौके पर भेजा गया। उन्होंने इलाके को घेरकर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया, लेकिन तब तक गांव का माहौल बेहद तनावपूर्ण हो चुका था। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, पिछले कुछ दिनों से इस इलाके में बाघ की गतिविधियाँ लगातार देखी जा रही थीं। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार बाघ के संबंध में सुरक्षा उपायों की शिकायत की, लेकिन ठोस कार्रवाइयाँ नहीं की गईं।
महिला की मौत से नाराज ग्रामीणों ने वन विभाग की टीम पर अपना गुस्सा निकालना शुरू कर दिया। मौके पर पहुंचे अधिकारियों के साथ धक्का-मुक्की और मारपीट की गई, जिसमें पनपथा रेंजर प्रतीक श्रीवास्तव को सिर में चोट आई है, जबकि एक अन्य अधिकारी अंजू वर्मा के साथ भी बदसलूकी की गई। हालात बिगड़ने पर पुलिस बल को बुलाना पड़ा। गांव में सुबह तक तनाव बना रहा, और कई ग्रामीण यह आरोप लगाते रहे कि वन विभाग केवल कागजों पर निगरानी करता है, जबकि ग्रामीणों की जान खतरे में है। कुछ लोगों का कहना था कि अब उन्हें रात में घर के बाहर सोने में डर लगने लगा है।
उमरिया में मई महीने में बाघ के हमले से यह तीसरी मौत है। पहले 3 मई को एक व्यक्ति की जान गई थी, और 16 मई को तेंदूपत्ता तोड़ने गई एक महिला पर बाघ ने हमला किया था। लगातार हो रहे इन हमलों के बाद ग्रामीणों में दहशत साफ देखी जा रही है। वन विभाग की टीम फिलहाल इलाके में निगरानी बढ़ाने और बाघ को पकड़ने की कोशिश कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि हालात पर ध्यान रखा जा रहा है और प्रभावित गांवों में अलर्ट जारी किया गया है।
घटना पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने मृत महिला के परिजनों को 25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। प्रशासन के द्वारा घायलों के इलाज की व्यवस्था भी कराई गई है। हालांकि, गांव के लोगों का कहना है कि मुआवजे से ज्यादा जरूरी उनकी सुरक्षा है। इलाके में अब भी डर का माहौल बना हुआ है और लोग रात के वक्त घरों से बाहर निकलने से बच रहे हैं।
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उमरिया में बाघ के हमले से हुई महिला की मौत, 21 दिन में तीसरी मौत, गुस्साए ग्रामीणों का किया हंगामा
उमरिया (म.प्र.)
मध्य प्रदेश के उमरिया जिले में फिर से एक बाघ के हमले ने लोगों के बीच डर और गुस्सा पैदा कर दिया है। रविवार तड़के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के पनपथा क्षेत्र में खेरवा मोहल्ले में, एक बाघ ने घर के आंगन में सो रहे परिवार पर हमला कर दिया। इस हमले में 48 वर्षीय फूलबाई की मौके पर ही मौत हो गई, और उन्हें बचाने के दौरान उनके पति और ससुर गंभीर रूप से घायल हो गए। बताया गया है कि ये घटना सुबह करीब तीन बजे हुई। आसपास के लोगों ने अचानक चीखने-चिल्लाने की आवाज सुनी, जिससे गांव में अफरा-तफरी मच गई।
मौके पर मौजूद लोगों का कहना है कि बाघ ने महिला को पकड़ने के बाद काफी देर तक घर के बाहर घूमता रहा। लोग डर के मारे अपने घरों से बाहर नहीं आ सके। कुछ ग्रामीण शोर मचाने की कोशिश करते रहे, लेकिन बाघ लगातार दहाड़ता रहा और बाद में वह घर में जाकर छिप गया। वन विभाग और बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व की टीम को सूचना मिलने के बाद मौके पर भेजा गया। उन्होंने इलाके को घेरकर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया, लेकिन तब तक गांव का माहौल बेहद तनावपूर्ण हो चुका था। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, पिछले कुछ दिनों से इस इलाके में बाघ की गतिविधियाँ लगातार देखी जा रही थीं। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार बाघ के संबंध में सुरक्षा उपायों की शिकायत की, लेकिन ठोस कार्रवाइयाँ नहीं की गईं।
महिला की मौत से नाराज ग्रामीणों ने वन विभाग की टीम पर अपना गुस्सा निकालना शुरू कर दिया। मौके पर पहुंचे अधिकारियों के साथ धक्का-मुक्की और मारपीट की गई, जिसमें पनपथा रेंजर प्रतीक श्रीवास्तव को सिर में चोट आई है, जबकि एक अन्य अधिकारी अंजू वर्मा के साथ भी बदसलूकी की गई। हालात बिगड़ने पर पुलिस बल को बुलाना पड़ा। गांव में सुबह तक तनाव बना रहा, और कई ग्रामीण यह आरोप लगाते रहे कि वन विभाग केवल कागजों पर निगरानी करता है, जबकि ग्रामीणों की जान खतरे में है। कुछ लोगों का कहना था कि अब उन्हें रात में घर के बाहर सोने में डर लगने लगा है।
उमरिया में मई महीने में बाघ के हमले से यह तीसरी मौत है। पहले 3 मई को एक व्यक्ति की जान गई थी, और 16 मई को तेंदूपत्ता तोड़ने गई एक महिला पर बाघ ने हमला किया था। लगातार हो रहे इन हमलों के बाद ग्रामीणों में दहशत साफ देखी जा रही है। वन विभाग की टीम फिलहाल इलाके में निगरानी बढ़ाने और बाघ को पकड़ने की कोशिश कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि हालात पर ध्यान रखा जा रहा है और प्रभावित गांवों में अलर्ट जारी किया गया है।
घटना पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने मृत महिला के परिजनों को 25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। प्रशासन के द्वारा घायलों के इलाज की व्यवस्था भी कराई गई है। हालांकि, गांव के लोगों का कहना है कि मुआवजे से ज्यादा जरूरी उनकी सुरक्षा है। इलाके में अब भी डर का माहौल बना हुआ है और लोग रात के वक्त घरों से बाहर निकलने से बच रहे हैं।
