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इन आरती के बिना अधूरी है दिवाली पर मां लक्ष्मी- गणेश जी की पूजा!
Dharm Desk
दिवाली का त्योहार मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा के बिना अधूरा है. इनकी आरती करने से घर में सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है. आइए जानते हैं दिवाली के दिन कौन सी आरती करना जरूरी होता है.
दिवाली की पूजा का विशेष महत्व है क्योंकि यह अच्छाई की बुराई पर विजय, ज्ञान की अज्ञानता पर विजय और प्रकाश की अंधकार पर विजय का प्रतीक है. इस दिन मुख्य रूप से मां लक्ष्मी, भगवान गणेश और भगवान कुबेर की पूजा की जाती है ताकि घर में समृद्धि, सुख-शांति और वैभव का आगमन हो. दिवाली में मुख्य रूप से मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की आरती की जाती है. इनके अलावा, कुछ लोग अन्य देवी-देवताओं की भी आरती करते हैं.
ऐसा माना जाता है कि आरती करने से देवी-देवता प्रसन्न होते हैं और अपनी कृपा से साधकों को धन, समृद्धि और सुख-शांति का आशीर्वाद देते हैं. दिवाली पर मां लक्ष्मी और गणेश जी की पूजा में आरती का विशेष महत्व होता है. आइए दिवाली के शुभ मौके पर जानते हैं कि दिवाली पूजा के बाद कौन सी आरती पढ़नी चाहिए जो पूजा को पूर्ण और शुभ बनाती हैं.
ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता
तुमको निशदिन सेवत, मैया जी को निशदिन
सेवत हरि विष्णु विधाता
ॐ जय लक्ष्मी माता
उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता
सूर्य-चन्द्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता
ॐ जय लक्ष्मी माता
दुर्गा रूप निरंजनी, सुख सम्पत्ति दाता
जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता
ॐ जय लक्ष्मी माता
तुम पाताल-निवासिनि, तुम ही शुभदाता
कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी, भवनिधि की त्राता
ॐ जय लक्ष्मी माता
जिस घर में तुम रहतीं, सब सद्गुण आता
सब सम्भव हो जाता, मन नहीं घबराता
ॐ जय लक्ष्मी माता
तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता
खान-पान का वैभव, सब तुमसे आता
ॐ जय लक्ष्मी माता
शुभ-गुण मन्दिर सुन्दर, क्षीरोदधि-जाता
रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता
ॐ जय लक्ष्मी माता
महालक्ष्मी जी की आरती, जो कोई नर गाता
उर आनन्द समाता, पाप उतर जाता
ॐ जय लक्ष्मी माता
ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता
तुमको निशदिन सेवत,
मैया जी को निशदिन सेवत हरि विष्णु विधाता
ॐ जय लक्ष्मी माता
गणेश जी की आरती
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा. माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा..
एकदंत, दयावन्त, चार भुजाधारी, माथे सिन्दूर सोहे, मूस की सवारी. पान चढ़े, फूल चढ़े और चढ़े मेवा, लड्डुअन का भोग लगे, सन्त करें सेवा ..
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश, देवा. माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा..
अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया, बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया. ‘सूर’ श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा..
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा .. माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा.
दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी. कामना को पूर्ण करो जय बलिहारी.
पूजा के दौरान इन बातों का रखें ध्यान
आरती करने से पहले दीपक जलाएं और थोड़ी देर ध्यान लगाएं. हर आरती के बाद ताली बजाते हुए “जय लक्ष्मी माता” या “जय गणेश देवा” का उच्चारण करें. आरती के बाद प्रसाद बांटे और परिवार के सभी सदस्य आरती का श्रवण करें. मान्यता के अनुसार, इन आरतियों को पूजा में शामिल करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि का वास होता है.
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है. Dainik Jagran इसकी पुष्टि नहीं करता है.
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इन आरती के बिना अधूरी है दिवाली पर मां लक्ष्मी- गणेश जी की पूजा!
Dharm Desk
दिवाली की पूजा का विशेष महत्व है क्योंकि यह अच्छाई की बुराई पर विजय, ज्ञान की अज्ञानता पर विजय और प्रकाश की अंधकार पर विजय का प्रतीक है. इस दिन मुख्य रूप से मां लक्ष्मी, भगवान गणेश और भगवान कुबेर की पूजा की जाती है ताकि घर में समृद्धि, सुख-शांति और वैभव का आगमन हो. दिवाली में मुख्य रूप से मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की आरती की जाती है. इनके अलावा, कुछ लोग अन्य देवी-देवताओं की भी आरती करते हैं.
ऐसा माना जाता है कि आरती करने से देवी-देवता प्रसन्न होते हैं और अपनी कृपा से साधकों को धन, समृद्धि और सुख-शांति का आशीर्वाद देते हैं. दिवाली पर मां लक्ष्मी और गणेश जी की पूजा में आरती का विशेष महत्व होता है. आइए दिवाली के शुभ मौके पर जानते हैं कि दिवाली पूजा के बाद कौन सी आरती पढ़नी चाहिए जो पूजा को पूर्ण और शुभ बनाती हैं.
ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता
तुमको निशदिन सेवत, मैया जी को निशदिन
सेवत हरि विष्णु विधाता
ॐ जय लक्ष्मी माता
उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता
सूर्य-चन्द्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता
ॐ जय लक्ष्मी माता
दुर्गा रूप निरंजनी, सुख सम्पत्ति दाता
जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता
ॐ जय लक्ष्मी माता
तुम पाताल-निवासिनि, तुम ही शुभदाता
कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी, भवनिधि की त्राता
ॐ जय लक्ष्मी माता
जिस घर में तुम रहतीं, सब सद्गुण आता
सब सम्भव हो जाता, मन नहीं घबराता
ॐ जय लक्ष्मी माता
तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता
खान-पान का वैभव, सब तुमसे आता
ॐ जय लक्ष्मी माता
शुभ-गुण मन्दिर सुन्दर, क्षीरोदधि-जाता
रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता
ॐ जय लक्ष्मी माता
महालक्ष्मी जी की आरती, जो कोई नर गाता
उर आनन्द समाता, पाप उतर जाता
ॐ जय लक्ष्मी माता
ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता
तुमको निशदिन सेवत,
मैया जी को निशदिन सेवत हरि विष्णु विधाता
ॐ जय लक्ष्मी माता
गणेश जी की आरती
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा. माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा..
एकदंत, दयावन्त, चार भुजाधारी, माथे सिन्दूर सोहे, मूस की सवारी. पान चढ़े, फूल चढ़े और चढ़े मेवा, लड्डुअन का भोग लगे, सन्त करें सेवा ..
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश, देवा. माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा..
अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया, बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया. ‘सूर’ श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा..
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा .. माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा.
दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी. कामना को पूर्ण करो जय बलिहारी.
पूजा के दौरान इन बातों का रखें ध्यान
आरती करने से पहले दीपक जलाएं और थोड़ी देर ध्यान लगाएं. हर आरती के बाद ताली बजाते हुए “जय लक्ष्मी माता” या “जय गणेश देवा” का उच्चारण करें. आरती के बाद प्रसाद बांटे और परिवार के सभी सदस्य आरती का श्रवण करें. मान्यता के अनुसार, इन आरतियों को पूजा में शामिल करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि का वास होता है.
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है. Dainik Jagran इसकी पुष्टि नहीं करता है.
