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"जो भी करना है, हमें ही करना है..." अमित शाह ने आपदा प्रबंधन बिल को लेकर दिया जवाब
JAGRAN DESK
गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में आपदा प्रबंधन संशोधन विधेयक को लेकर बड़ी बात कही है। उन्होंने कांग्रेस पर बड़े आरोप लगाए हैं और कहा है कि जो भी करना है हमें ही करना है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में आपदा प्रबंधन (संशोधन) विधेयक, 2024 पर बहस का जवाब दिया। उन्होंने कहा, "आपदा प्रबंधन अधिनियम पहली बार 2005 में लागू किया गया था। इसके तहत NDMA, SDMA और DDMA का गठन किया गया। अब चिंता जताई जा रही है कि पावर का केंद्रीकरण हो जाएगा। अगर आप पूरे विधेयक को ध्यान से पढ़ेंगे तो क्रियान्वयन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी जिला आपदा प्रबंधन की है, जो राज्य सरकार के अधीन है इसलिए संघीय ढांचे को कहीं भी नुकसान पहुंचाने की संभावना नहीं है। कुछ सदस्यों ने सवाल उठाया कि संशोधन की क्या जरूरत है। मैं उन्हें बताना चाहता हूं कि अगर समय के साथ किसी इमारत की मरम्मत नहीं की जाती है तो वो ढह जाती है। उन्हें लगता है कि शायद वे आकर इसे बदल देंगे लेकिन अगले 15-20 साल तक किसी की बारी नहीं आएगी। जो भी करना है, हमें ही करना है..." बता दें कि आपदा प्रबंधन अधिनियम पहली बार 2005 में लागू किया गया था। इसके तहत एनडीएमए, एसडीएमए और डीडीएमए का गठन किया गया था।
अमित शाह ने कश्मीर को लेकर कही बड़ी बात
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को कहा कि जम्मू-कश्मीर में अलगाववाद अब इतिहास बन चुका है। उन्होंने हुर्रियत से जुड़े दो संगठनों द्वारा अलगाववाद से नाता तोड़ने का हवाला दिया। शाह ने इसे राष्ट्रीय एकता की दिशा में एक कदम बताया और सभी समूहों से अलगाववाद को खारिज करने का आग्रह किया, उन्होंने कहा कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शांतिपूर्ण और एकीकृत भारत के दृष्टिकोण को दर्शाता है।
अमित शाह ने कहा, "मैं भारत की एकता को मजबूत करने की दिशा में इस कदम का स्वागत करता हूं और ऐसे सभी समूहों से आगे आकर अलगाववाद को हमेशा के लिए खत्म करने का आग्रह करता हूं। यह प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी के विकसित, शांतिपूर्ण और एकीकृत भारत के निर्माण के दृष्टिकोण की एक बड़ी जीत है।"
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"जो भी करना है, हमें ही करना है..." अमित शाह ने आपदा प्रबंधन बिल को लेकर दिया जवाब
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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में आपदा प्रबंधन (संशोधन) विधेयक, 2024 पर बहस का जवाब दिया। उन्होंने कहा, "आपदा प्रबंधन अधिनियम पहली बार 2005 में लागू किया गया था। इसके तहत NDMA, SDMA और DDMA का गठन किया गया। अब चिंता जताई जा रही है कि पावर का केंद्रीकरण हो जाएगा। अगर आप पूरे विधेयक को ध्यान से पढ़ेंगे तो क्रियान्वयन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी जिला आपदा प्रबंधन की है, जो राज्य सरकार के अधीन है इसलिए संघीय ढांचे को कहीं भी नुकसान पहुंचाने की संभावना नहीं है। कुछ सदस्यों ने सवाल उठाया कि संशोधन की क्या जरूरत है। मैं उन्हें बताना चाहता हूं कि अगर समय के साथ किसी इमारत की मरम्मत नहीं की जाती है तो वो ढह जाती है। उन्हें लगता है कि शायद वे आकर इसे बदल देंगे लेकिन अगले 15-20 साल तक किसी की बारी नहीं आएगी। जो भी करना है, हमें ही करना है..." बता दें कि आपदा प्रबंधन अधिनियम पहली बार 2005 में लागू किया गया था। इसके तहत एनडीएमए, एसडीएमए और डीडीएमए का गठन किया गया था।
अमित शाह ने कश्मीर को लेकर कही बड़ी बात
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को कहा कि जम्मू-कश्मीर में अलगाववाद अब इतिहास बन चुका है। उन्होंने हुर्रियत से जुड़े दो संगठनों द्वारा अलगाववाद से नाता तोड़ने का हवाला दिया। शाह ने इसे राष्ट्रीय एकता की दिशा में एक कदम बताया और सभी समूहों से अलगाववाद को खारिज करने का आग्रह किया, उन्होंने कहा कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शांतिपूर्ण और एकीकृत भारत के दृष्टिकोण को दर्शाता है।
अमित शाह ने कहा, "मैं भारत की एकता को मजबूत करने की दिशा में इस कदम का स्वागत करता हूं और ऐसे सभी समूहों से आगे आकर अलगाववाद को हमेशा के लिए खत्म करने का आग्रह करता हूं। यह प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी के विकसित, शांतिपूर्ण और एकीकृत भारत के निर्माण के दृष्टिकोण की एक बड़ी जीत है।"
