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भागवत बोले – निर्भरता कभी मजबूरी न बने, सुरक्षा और सतर्कता जरूरी
Digital Desk
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने नागपुर में विजयादशमी के मौके पर RSS के शताब्दी समारोह में संबोधन देते हुए कहा कि पहलगाम हमले ने हमें यह सिखाया कि दोस्त और दुश्मन की पहचान करना आवश्यक है।
आतंकियों ने धर्म पूछकर निर्दोषों की हत्या की, और हमारी सेना तथा सरकार ने इसका जवाब दिया।
भागवत ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय रिश्तों में समझदारी और सतर्कता दोनों जरूरी हैं। “हमें सभी के साथ दोस्ती का भाव रखना चाहिए, लेकिन अपनी सुरक्षा और ताकत के प्रति सजग रहना जरूरी है।” उन्होंने समाज में आ रहे बदलाव, पड़ोसी देशों की स्थिति और वैश्विक आर्थिक चुनौतियों का भी जिक्र किया।
पूर्व राष्ट्रपति डॉ. रामनाथ कोविंद मुख्य अतिथि रहे। कार्यक्रम में RSS के संस्थापक डॉ. हेडगेवार को श्रद्धांजलि दी गई और शस्त्र पूजन भी हुआ।
भागवत के भाषण की 4 प्रमुख बातें
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भारत पर पूरी दुनिया की नजर: भागवत ने कहा कि अराजकता के इस दौर में दुनिया भारत की ओर देख रही है। युवाओं में देश और संस्कृति के प्रति जागरूकता बढ़ी है। समाज स्वयं समस्याओं के समाधान की कोशिश कर रहा है।
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आत्मनिर्भरता जरूरी, निर्भरता मजबूरी न बने: अमेरिका की नई टैरिफ नीति से प्रभावित वैश्विक हालात में, हमें आपसी संबंध बनाने होंगे। भागवत ने कहा कि निर्भरता कभी मजबूरी नहीं बननी चाहिए।
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हिंसा समाधान नहीं: प्राकृतिक और राजनीतिक उथल-पुथल के बीच हिंसा कोई समाधान नहीं है। लोकतांत्रिक तरीके से ही बदलाव संभव हैं।
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हिंसक बदलाव से अराजकता: हिंसक परिवर्तनों से उद्देश्य नहीं मिलता, बल्कि अराजकता पैदा होती है। ऐसे हालात पड़ोसी देशों के लिए भी चिंता का विषय हैं और बाहर की ताकतों को खेल-खेलने का मौका देते हैं।
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भागवत बोले – निर्भरता कभी मजबूरी न बने, सुरक्षा और सतर्कता जरूरी
Digital Desk
आतंकियों ने धर्म पूछकर निर्दोषों की हत्या की, और हमारी सेना तथा सरकार ने इसका जवाब दिया।
भागवत ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय रिश्तों में समझदारी और सतर्कता दोनों जरूरी हैं। “हमें सभी के साथ दोस्ती का भाव रखना चाहिए, लेकिन अपनी सुरक्षा और ताकत के प्रति सजग रहना जरूरी है।” उन्होंने समाज में आ रहे बदलाव, पड़ोसी देशों की स्थिति और वैश्विक आर्थिक चुनौतियों का भी जिक्र किया।
पूर्व राष्ट्रपति डॉ. रामनाथ कोविंद मुख्य अतिथि रहे। कार्यक्रम में RSS के संस्थापक डॉ. हेडगेवार को श्रद्धांजलि दी गई और शस्त्र पूजन भी हुआ।
भागवत के भाषण की 4 प्रमुख बातें
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भारत पर पूरी दुनिया की नजर: भागवत ने कहा कि अराजकता के इस दौर में दुनिया भारत की ओर देख रही है। युवाओं में देश और संस्कृति के प्रति जागरूकता बढ़ी है। समाज स्वयं समस्याओं के समाधान की कोशिश कर रहा है।
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आत्मनिर्भरता जरूरी, निर्भरता मजबूरी न बने: अमेरिका की नई टैरिफ नीति से प्रभावित वैश्विक हालात में, हमें आपसी संबंध बनाने होंगे। भागवत ने कहा कि निर्भरता कभी मजबूरी नहीं बननी चाहिए।
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हिंसा समाधान नहीं: प्राकृतिक और राजनीतिक उथल-पुथल के बीच हिंसा कोई समाधान नहीं है। लोकतांत्रिक तरीके से ही बदलाव संभव हैं।
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हिंसक बदलाव से अराजकता: हिंसक परिवर्तनों से उद्देश्य नहीं मिलता, बल्कि अराजकता पैदा होती है। ऐसे हालात पड़ोसी देशों के लिए भी चिंता का विषय हैं और बाहर की ताकतों को खेल-खेलने का मौका देते हैं।
