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AAP को बड़ा झटका, 7 सांसदों के BJP में विलय को मंजूरी
नेशनल न्यूज
राज्यसभा में भाजपा की ताकत बढ़कर 113 हुई, AAP घटकर 3 सांसदों तक सिमटी
राज्यसभा में आज बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया, जब सभापति CP Radhakrishnan ने आम आदमी पार्टी (AAP) के सात सांसदों के भारतीय जनता पार्टी (BJP) में विलय को मंजूरी दे दी। इस फैसले के बाद राज्यसभा में AAP की संख्या घटकर 3 रह गई, जबकि भाजपा की ताकत बढ़कर 113 सांसदों तक पहुंच गई।इस घटनाक्रम ने संसद के ऊपरी सदन में राजनीतिक संतुलन को बदल दिया है और विपक्षी खेमे में हलचल तेज कर दी है।
कौन-कौन हुए शामिल
जिन सात सांसदों के विलय को मंजूरी मिली है, उनमें Raghav Chadha, Swati Maliwal, संदीप पाठक, अशोक मित्तल, विक्रमजीत साहनी और राजेंद्र गुप्ता शामिल हैं। इन सभी ने हाल ही में भाजपा नेतृत्व से मुलाकात के बाद पार्टी में शामिल होने का निर्णय लिया था। बता दें, इन सांसदों ने सभापति को आवेदन देकर खुद को भाजपा सांसद के रूप में मान्यता देने की मांग की थी, जिसे अब स्वीकार कर लिया गया है।
क्या है पूरा मामला
यह घटनाक्रम 24 अप्रैल को शुरू हुआ, जब राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल ने भाजपा नेतृत्व से मुलाकात के बाद पार्टी में शामिल होने की घोषणा की थी। बाद में अन्य सांसदों ने भी इसी राह को अपनाया।इन सांसदों ने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी अपने मूल सिद्धांतों से भटक गई है और आंतरिक कार्यप्रणाली में पारदर्शिता की कमी है।
यह निर्णय संसद भवन, नई दिल्ली में राज्यसभा सभापति द्वारा आज सोमवार को लिया गया। इसके बाद राज्यसभा की आधिकारिक वेबसाइट पर भी इन सांसदों को भाजपा के सदस्य के रूप में अपडेट कर दिया गया।
इस पूरे घटनाक्रम ने दलबदल कानून की वैधानिकता और व्याख्या को लेकर नई बहस छेड़ दी है। आम आदमी पार्टी ने इसे संविधान की 10वीं अनुसूची का उल्लंघन बताया है और आरोप लगाया है कि यह लोकतांत्रिक सिद्धांतों के खिलाफ है।पार्टी के वरिष्ठ नेता Sanjay Singh ने सभापति को पत्र लिखकर सभी सात सांसदों की सदस्यता रद्द करने की मांग की है।
कैसे बदला राजनीतिक समीकरण
इस विलय के बाद राज्यसभा में भाजपा की ताकत 106 से बढ़कर 113 हो गई है, जिससे उसे सदन में और मजबूत स्थिति मिली है। वहीं आम आदमी पार्टी अब केवल 3 सांसदों तक सीमित रह गई है, जिससे उसका संसदीय प्रभाव काफी कम हो गया है।
राघव चड्ढा ने पहले कहा था कि वे खुद को “गलत पार्टी में सही व्यक्ति” महसूस कर रहे थे। वहीं स्वाति मालीवाल ने पार्टी नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाए थे और कहा था कि उनके साथ पार्टी में दुर्व्यवहार हुआ।दूसरी ओर, AAP का कहना है कि यह राजनीतिक दबाव और रणनीतिक हस्तक्षेप का परिणाम है।फिलहाल यह मामला संसद से लेकर राजनीतिक गलियारों तक चर्चा का केंद्र बना हुआ है, और आगे इसकी कानूनी जांच और राजनीतिक प्रतिक्रिया पर सभी की नजरें टिकी हैं।
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AAP को बड़ा झटका, 7 सांसदों के BJP में विलय को मंजूरी
नेशनल न्यूज
राज्यसभा में आज बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया, जब सभापति CP Radhakrishnan ने आम आदमी पार्टी (AAP) के सात सांसदों के भारतीय जनता पार्टी (BJP) में विलय को मंजूरी दे दी। इस फैसले के बाद राज्यसभा में AAP की संख्या घटकर 3 रह गई, जबकि भाजपा की ताकत बढ़कर 113 सांसदों तक पहुंच गई।इस घटनाक्रम ने संसद के ऊपरी सदन में राजनीतिक संतुलन को बदल दिया है और विपक्षी खेमे में हलचल तेज कर दी है।
कौन-कौन हुए शामिल
जिन सात सांसदों के विलय को मंजूरी मिली है, उनमें Raghav Chadha, Swati Maliwal, संदीप पाठक, अशोक मित्तल, विक्रमजीत साहनी और राजेंद्र गुप्ता शामिल हैं। इन सभी ने हाल ही में भाजपा नेतृत्व से मुलाकात के बाद पार्टी में शामिल होने का निर्णय लिया था। बता दें, इन सांसदों ने सभापति को आवेदन देकर खुद को भाजपा सांसद के रूप में मान्यता देने की मांग की थी, जिसे अब स्वीकार कर लिया गया है।
क्या है पूरा मामला
यह घटनाक्रम 24 अप्रैल को शुरू हुआ, जब राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल ने भाजपा नेतृत्व से मुलाकात के बाद पार्टी में शामिल होने की घोषणा की थी। बाद में अन्य सांसदों ने भी इसी राह को अपनाया।इन सांसदों ने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी अपने मूल सिद्धांतों से भटक गई है और आंतरिक कार्यप्रणाली में पारदर्शिता की कमी है।
यह निर्णय संसद भवन, नई दिल्ली में राज्यसभा सभापति द्वारा आज सोमवार को लिया गया। इसके बाद राज्यसभा की आधिकारिक वेबसाइट पर भी इन सांसदों को भाजपा के सदस्य के रूप में अपडेट कर दिया गया।
इस पूरे घटनाक्रम ने दलबदल कानून की वैधानिकता और व्याख्या को लेकर नई बहस छेड़ दी है। आम आदमी पार्टी ने इसे संविधान की 10वीं अनुसूची का उल्लंघन बताया है और आरोप लगाया है कि यह लोकतांत्रिक सिद्धांतों के खिलाफ है।पार्टी के वरिष्ठ नेता Sanjay Singh ने सभापति को पत्र लिखकर सभी सात सांसदों की सदस्यता रद्द करने की मांग की है।
कैसे बदला राजनीतिक समीकरण
इस विलय के बाद राज्यसभा में भाजपा की ताकत 106 से बढ़कर 113 हो गई है, जिससे उसे सदन में और मजबूत स्थिति मिली है। वहीं आम आदमी पार्टी अब केवल 3 सांसदों तक सीमित रह गई है, जिससे उसका संसदीय प्रभाव काफी कम हो गया है।
राघव चड्ढा ने पहले कहा था कि वे खुद को “गलत पार्टी में सही व्यक्ति” महसूस कर रहे थे। वहीं स्वाति मालीवाल ने पार्टी नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाए थे और कहा था कि उनके साथ पार्टी में दुर्व्यवहार हुआ।दूसरी ओर, AAP का कहना है कि यह राजनीतिक दबाव और रणनीतिक हस्तक्षेप का परिणाम है।फिलहाल यह मामला संसद से लेकर राजनीतिक गलियारों तक चर्चा का केंद्र बना हुआ है, और आगे इसकी कानूनी जांच और राजनीतिक प्रतिक्रिया पर सभी की नजरें टिकी हैं।
