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अफगानिस्तान–पाकिस्तान सीमा पर टकराव तेज, दोनों देशों के दावों में बड़ा अंतर
अंतराष्ट्रीय न्यूज
सीमा पार हमले और जवाबी एयरस्ट्राइक के बाद तनाव चरम पर; क्षेत्रीय स्थिरता पर असर की आशंका, ईरान ने मध्यस्थता की पेशकश की
अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच सीमा क्षेत्र में सैन्य टकराव के बाद हालात गंभीर हो गए हैं। अफगान पक्ष ने दावा किया कि उसके हमले में 55 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए, जबकि पाकिस्तान ने जवाबी कार्रवाई में 133 तालिबान लड़ाकों के मारे जाने की बात कही है। घटनाक्रम गुरुवार देर रात शुरू हुआ और शुक्रवार तक कई सीमावर्ती इलाकों में तनाव बना रहा।
पाकिस्तानी सरकार के अनुसार, अफगान क्षेत्र से हमले के बाद उसने ‘गजब लिल हक’ नामक सैन्य अभियान चलाया। पाकिस्तान वायुसेना ने काबुल और नंगरहार समेत कई स्थानों पर एयरस्ट्राइक की। वहीं अफगान प्रशासन का कहना है कि पाकिस्तान के सैन्य ठिकानों और चौकियों को निशाना बनाया गया। दोनों देशों ने अलग-अलग सैन्य सफलता के दावे किए हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
यह टकराव 22 फरवरी को अफगान क्षेत्र में हुई पाकिस्तानी एयरस्ट्राइक के बाद बढ़ा। पाकिस्तान ने उन हमलों को आतंकी ठिकानों के खिलाफ कार्रवाई बताया था, जबकि अफगान पक्ष ने इसे संप्रभुता का उल्लंघन करार दिया। सीमा विवाद और आतंकवाद के आरोपों को लेकर दोनों देशों के बीच लंबे समय से तनाव बना हुआ है। रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने हालात को “खुला युद्ध” जैसी स्थिति बताया, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा चिंताएं बढ़ गई हैं।
सीमावर्ती प्रांतों में संघर्ष के बीच नागरिकों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई जा रही है। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक कई इलाकों में विस्थापन और आपात सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है। पाकिस्तान का आरोप है कि उसकी सीमा के भीतर हाल के आतंकी हमलों के पीछे अफगान भूमि का इस्तेमाल हुआ, जबकि अफगान प्रशासन इन आरोपों से इनकार करता रहा है।
इस बीच, ईरान ने दोनों देशों से संयम बरतने और संवाद के जरिए समाधान निकालने की अपील की है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तनाव कम नहीं हुआ तो इसका असर पूरे दक्षिण एशिया की स्थिरता और व्यापारिक मार्गों पर पड़ सकता है। यह घटनाक्रम वैश्विक कूटनीति और सुरक्षा नीति से जुड़े पब्लिक इंटरेस्ट स्टोरी के रूप में भी देखा जा रहा है।
आगे की स्थिति पर नजर रखते हुए दोनों देशों की सैन्य गतिविधियों और राजनयिक संपर्कों पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निगाहें टिकी हैं। फिलहाल सीमा पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है और उच्च स्तरीय वार्ता की संभावना से इनकार नहीं किया गया है।
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