- Hindi News
- टॉप न्यूज़
- वेब3 कॉन्फ्रेंस में नीति निर्माताओं का जोर — भारत में वीडीए के लिए स्व-नियामन बने मजबूत आधार
वेब3 कॉन्फ्रेंस में नीति निर्माताओं का जोर — भारत में वीडीए के लिए स्व-नियामन बने मजबूत आधार
Jagran Desk
भारत वेब3 एसोसिएशन (BWA) और प्रौद्योगिकी नीति थिंक टैंक 'द डायलॉग' की साझेदारी में आयोजित वेब3 कॉन्फ्रेंस में भारत के वर्चुअल डिजिटल एसेट्स (VDA) परिदृश्य को लेकर सकारात्मक नीति संकेत सामने आए।
यह आयोजन क्रिप्टो क्षेत्र में 100 दिवसीय उपभोक्ता जागरूकता अभियान 'क्रिप्टो SAFE' के समापन के अवसर पर हुआ। इस दौरान नीति निर्माताओं, वेब3 लीडर्स और विशेषज्ञों ने वेब3 के भविष्य, जोखिम नियंत्रण और जिम्मेदार नवाचार पर विचार साझा किए।
कार्यक्रम के केंद्र में रहा—स्व-नियामक संगठन (SROs) का महत्व। पूर्व उपभोक्ता मामले सचिव और NCDRC सदस्य रोहित कुमार सिंह ने अपने संबोधन में कहा, “कर लगाना समाधान नहीं, बल्कि प्रभावी विनियमन ही रास्ता है।” उन्होंने ASCI जैसे मॉडलों की मिसाल देते हुए, SROs को औपचारिक रेगुलेशन की नींव करार दिया।
वित्त मंत्रालय की FATF सेल की संयुक्त निदेशक कनिका वाधवान ने मनी लॉन्ड्रिंग से निपटने और अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन करने की आवश्यकता पर बल दिया। वहीं, पूर्व वरिष्ठ निदेशक राकेश माहेश्वरी ने कहा कि साइबर सुरक्षा प्लेटफॉर्म की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने CERT-In गाइडलाइनों के पालन और यूजर डेटा की गोपनीयता पर विशेष ज़ोर दिया।
आईआईएम बैंगलोर से डॉ. ए. दामोदरन ने कहा कि भारत अब सिर्फ टेक्नोलॉजी यूज़र नहीं रह सकता — हमें वेब3 नीति निर्माण में अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए। पैनल चर्चा का संचालन जागरण न्यू मीडिया की एजीएम उर्वशी कपूर ने किया।
बीडब्ल्यूए अध्यक्ष दिलीप चेनॉय ने भारत के वेब3 क्षेत्र की विकास दर को साझा करते हुए बताया कि 2024 में 564 मिलियन डॉलर की फंडिंग के साथ यह क्षेत्र 109% की छलांग लगा चुका है। उन्होंने नियामक स्पष्टता और स्थिर नीति ढांचे की मांग दोहराते हुए कहा, "हमें पूरी छूट नहीं चाहिए, लेकिन भरोसेमंद नियम ज़रूरी हैं।"
उन्होंने यह भी बताया कि भारत अब अमेरिका को पीछे छोड़ते हुए वेब3 डेवलपर्स की संख्या में अग्रणी बन गया है। 1,200 से ज्यादा स्टार्टअप, 63% टैक्स ग्रोथ और बढ़ती वैश्विक भागीदारी ने भारत को इस क्षेत्र में मजबूती से स्थापित कर दिया है।
कॉन्फ्रेंस के मुख्य बिंदु:
-
शिक्षा सबसे बड़ी सुरक्षा: स्कूल स्तर से वेब3 और वित्तीय शिक्षा की शुरुआत होनी चाहिए, खासकर स्थानीय भाषाओं में।
-
स्व-नियामन की भूमिका अहम: SROs नवाचार और निगरानी के बीच पुल का काम कर सकते हैं।
-
नियामक संतुलन जरूरी: कठोर नियमों के बजाय सहभागी और लचीला ढांचा जरूरी है, जिससे उपभोक्ता संरक्षण और टेक्नोलॉजी विकास एकसाथ चल सकें।
वेब3 की दिशा में भारत का अगला कदम यह सुनिश्चित करना होगा कि वह विकास और शासन दोनों में संतुलन बनाए रखे — ताकि एक सुरक्षित, जवाबदेह और समावेशी डिजिटल भविष्य तैयार हो सके।
..........................................................................................................................................................
वाहट्सएप्प चैनल से जुड़ने के लिए लिंक पर
क्लिक करके फॉलो कीजिये,
या फिर QR कोड स्कैन कर जुड़िये।।
https://whatsapp.com/channel/0029VbATlF0KQuJB6tvUrN3V
-----------------
हमारे आधिकारिक प्लेटफॉर्म्स से जुड़ें –
🔴 व्हाट्सएप चैनल: https://whatsapp.com/channel/0029VbATlF0KQuJB6tvUrN3V
🔴 फेसबुक: Dainik Jagran MP/CG Official
🟣 इंस्टाग्राम: @dainikjagranmp.cg
🔴 यूट्यूब: Dainik Jagran MPCG Digital
📲 सोशल मीडिया पर जुड़ें और बने जागरूक पाठक।
👉 आज ही जुड़िए
वेब3 कॉन्फ्रेंस में नीति निर्माताओं का जोर — भारत में वीडीए के लिए स्व-नियामन बने मजबूत आधार
Jagran Desk
यह आयोजन क्रिप्टो क्षेत्र में 100 दिवसीय उपभोक्ता जागरूकता अभियान 'क्रिप्टो SAFE' के समापन के अवसर पर हुआ। इस दौरान नीति निर्माताओं, वेब3 लीडर्स और विशेषज्ञों ने वेब3 के भविष्य, जोखिम नियंत्रण और जिम्मेदार नवाचार पर विचार साझा किए।
कार्यक्रम के केंद्र में रहा—स्व-नियामक संगठन (SROs) का महत्व। पूर्व उपभोक्ता मामले सचिव और NCDRC सदस्य रोहित कुमार सिंह ने अपने संबोधन में कहा, “कर लगाना समाधान नहीं, बल्कि प्रभावी विनियमन ही रास्ता है।” उन्होंने ASCI जैसे मॉडलों की मिसाल देते हुए, SROs को औपचारिक रेगुलेशन की नींव करार दिया।
वित्त मंत्रालय की FATF सेल की संयुक्त निदेशक कनिका वाधवान ने मनी लॉन्ड्रिंग से निपटने और अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन करने की आवश्यकता पर बल दिया। वहीं, पूर्व वरिष्ठ निदेशक राकेश माहेश्वरी ने कहा कि साइबर सुरक्षा प्लेटफॉर्म की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने CERT-In गाइडलाइनों के पालन और यूजर डेटा की गोपनीयता पर विशेष ज़ोर दिया।
आईआईएम बैंगलोर से डॉ. ए. दामोदरन ने कहा कि भारत अब सिर्फ टेक्नोलॉजी यूज़र नहीं रह सकता — हमें वेब3 नीति निर्माण में अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए। पैनल चर्चा का संचालन जागरण न्यू मीडिया की एजीएम उर्वशी कपूर ने किया।
बीडब्ल्यूए अध्यक्ष दिलीप चेनॉय ने भारत के वेब3 क्षेत्र की विकास दर को साझा करते हुए बताया कि 2024 में 564 मिलियन डॉलर की फंडिंग के साथ यह क्षेत्र 109% की छलांग लगा चुका है। उन्होंने नियामक स्पष्टता और स्थिर नीति ढांचे की मांग दोहराते हुए कहा, "हमें पूरी छूट नहीं चाहिए, लेकिन भरोसेमंद नियम ज़रूरी हैं।"
उन्होंने यह भी बताया कि भारत अब अमेरिका को पीछे छोड़ते हुए वेब3 डेवलपर्स की संख्या में अग्रणी बन गया है। 1,200 से ज्यादा स्टार्टअप, 63% टैक्स ग्रोथ और बढ़ती वैश्विक भागीदारी ने भारत को इस क्षेत्र में मजबूती से स्थापित कर दिया है।
कॉन्फ्रेंस के मुख्य बिंदु:
-
शिक्षा सबसे बड़ी सुरक्षा: स्कूल स्तर से वेब3 और वित्तीय शिक्षा की शुरुआत होनी चाहिए, खासकर स्थानीय भाषाओं में।
-
स्व-नियामन की भूमिका अहम: SROs नवाचार और निगरानी के बीच पुल का काम कर सकते हैं।
-
नियामक संतुलन जरूरी: कठोर नियमों के बजाय सहभागी और लचीला ढांचा जरूरी है, जिससे उपभोक्ता संरक्षण और टेक्नोलॉजी विकास एकसाथ चल सकें।
वेब3 की दिशा में भारत का अगला कदम यह सुनिश्चित करना होगा कि वह विकास और शासन दोनों में संतुलन बनाए रखे — ताकि एक सुरक्षित, जवाबदेह और समावेशी डिजिटल भविष्य तैयार हो सके।
..........................................................................................................................................................
वाहट्सएप्प चैनल से जुड़ने के लिए लिंक पर
क्लिक करके फॉलो कीजिये,
या फिर QR कोड स्कैन कर जुड़िये।।
https://whatsapp.com/channel/0029VbATlF0KQuJB6tvUrN3V
