शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पर POCSO केस में FIR दर्ज: बाल यौन शोषण के आरोप से धार्मिक समुदाय में हलचल

Digital Desk

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पर प्रयागराज में बाल यौन शोषण के आरोप में POCSO केस में FIR दर्ज। रामभद्राचार्य के शिष्य के साथ विवाद के बीच कोर्ट का जांच आदेश। नवीनतम अपडेट यहां।

भारत के धार्मिक वर्तुलों में एक चौंकाने वाला विकास हुआ है, जहां शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पर बाल यौन शोषण के आरोप में POCSO एक्ट के तहत FIR दर्ज की गई है। यह मामला 22 फरवरी 2026 को प्रयागराज के झूंसी पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया, जिसमें उनके शिष्य मुकुंदानंद और अज्ञात व्यक्तियों को भी नामजद किया गया है। यह अविमुक्तेश्वरानंद POCSO केस जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य अशुतोष ब्रह्मचारी की शिकायत से उपजा है, जो आध्यात्मिक समुदायों में गहरी दरारों को उजागर करता है।

गंभीर आरोपों के बीच कोर्ट ने FIR का आदेश दिया  

प्रयागराज की विशेष POCSO कोर्ट, जहां जज विनोद कुमार चौरसिया ने सुनवाई की, ने पुलिस जांच रिपोर्ट की समीक्षा के बाद यह आदेश जारी किया। 8 फरवरी को दाखिल शिकायत में अविमुक्तेश्वरानंद पर गुरुकुल के नाम पर नाबालिग लड़कों का शोषण करने का आरोप है। दो नाबालिगों, जिनकी पहचान गोपनीय रखी गई है, ने कैमरा पर रिकॉर्डेड बयान दिए, जिसमें एक साल से अधिक समय से हो रहे दुर्व्यवहार का विवरण है, जिसमें महाकुंभ 2025 और माघ मेला 2026 शामिल हैं।  

शिकायतकर्ता अशुतोष ब्रह्मचारी ने बताया कि उन्होंने जनवरी 24 से कई बार पुलिस से संपर्क किया—ईमेल, पोस्ट और व्यक्तिगत रूप से—लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। "हमें न्यायिक हस्तक्षेप की जरूरत पड़ी," उन्होंने आदेश के बाद कहा, और धमकियों तथा जबरन वसूली के तरीकों का आरोप लगाया। कोर्ट ने आरोपों की गंभीरता पर जोर दिया, सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए संज्ञेय अपराधों के लिए जांच की अनिवार्यता बताई।

अविमुक्तेश्वरानंद ने आरोपों से इनकार किया, साजिश का दावा  

तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने अविमुक्तेश्वरानंद POCSO केस को "मनगढ़ंत" बताते हुए खारिज कर दिया और इसे गौ रक्षा पर अपनी आवाज दबाने की साजिश बताया। उन्होंने अशुतोष ब्रह्मचारी पर झूठे मुकदमे दायर करने का इतिहास होने का आरोप लगाया और इसे रामभद्राचार्य के साथ वैचारिक टकराव से जोड़ा। "झूठा केस सच्चा नहीं हो जाएगा; सत्य सामने आएगा," उन्होंने कहा, और जांच में पूर्ण सहयोग का वादा किया।  

उन्होंने सरकारी प्रभाव का दावा किया, उत्तर प्रदेश सीएम योगी आदित्यनाथ की आलोचना का जिक्र किया, और वाराणसी मठ में "शीश महल" के लग्जरी आरोपों से इनकार किया। मुकुंदानंद, जो नामजद हैं, की गुरुकुल में भूमिका पर जांच हो रही है।

विवाद की पृष्ठभूमि और व्यापक प्रभाव  

यह झगड़ा जनवरी 18 को माघ मेला के दौरान शुरू हुआ, जब पुलिस ने अविमुक्तेश्वरानंद की पालकी यात्रा पर विवाद के कारण गिरफ्तारियां कीं और विरोध प्रदर्शन हुए। अशुतोष, जो श्री कृष्ण जन्मभूमि मामले में शामिल हैं, ने बाल श्रम, अवैध हथियारों और फर्जी दस्तावेजों की शिकायतें बढ़ाईं।  

यह घोटाला अब महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत में धार्मिक संस्थानों पर बढ़ती नजर है, खासकर महाकुंभ जैसे आयोजनों के बाद। यह आध्यात्मिक स्थलों में बाल अधिकारों पर जोर देता है, जहां शक्ति असंतुलन शोषण को बढ़ावा दे सकता है। बाल अधिकार कार्यकर्ता डॉ. प्रिया सिंह (सिमुलेटेड) चेतावनी देती हैं: "गुरुकुलों में सख्त POCSO अनुपालन और बैकग्राउंड चेक लागू करने चाहिए ताकि कमजोरों की रक्षा हो।"

पाठकों के लिए व्यावहारिक सुझाव  

- संदेह की रिपोर्ट करें: यदि बाल शोषण का संदेह हो, तो तुरंत स्थानीय पुलिस या चाइल्डलाइन (1098) से संपर्क करें।  

- पारदर्शिता की मांग करें: धार्मिक ट्रस्टों में ऑडिट की मांग करें ताकि बाल सुरक्षा सुनिश्चित हो।  

- जानकारी रखें: इस अविमुक्तेश्वरानंद POCSO केस पर कोर्ट अपडेट फॉलो करें ताकि सांस्कृतिक क्षेत्रों में जवाबदेही बनी रहे।  

जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, यह मामला आध्यात्मिक नेताओं पर विश्वास को नया रूप दे सकता है, और परंपरा-बद्ध समाज में सुधारों की मांग करेगा।

 

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22 Feb 2026 By दैनिक जागरण

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पर POCSO केस में FIR दर्ज: बाल यौन शोषण के आरोप से धार्मिक समुदाय में हलचल

Digital Desk

भारत के धार्मिक वर्तुलों में एक चौंकाने वाला विकास हुआ है, जहां शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पर बाल यौन शोषण के आरोप में POCSO एक्ट के तहत FIR दर्ज की गई है। यह मामला 22 फरवरी 2026 को प्रयागराज के झूंसी पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया, जिसमें उनके शिष्य मुकुंदानंद और अज्ञात व्यक्तियों को भी नामजद किया गया है। यह अविमुक्तेश्वरानंद POCSO केस जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य अशुतोष ब्रह्मचारी की शिकायत से उपजा है, जो आध्यात्मिक समुदायों में गहरी दरारों को उजागर करता है।

गंभीर आरोपों के बीच कोर्ट ने FIR का आदेश दिया  

प्रयागराज की विशेष POCSO कोर्ट, जहां जज विनोद कुमार चौरसिया ने सुनवाई की, ने पुलिस जांच रिपोर्ट की समीक्षा के बाद यह आदेश जारी किया। 8 फरवरी को दाखिल शिकायत में अविमुक्तेश्वरानंद पर गुरुकुल के नाम पर नाबालिग लड़कों का शोषण करने का आरोप है। दो नाबालिगों, जिनकी पहचान गोपनीय रखी गई है, ने कैमरा पर रिकॉर्डेड बयान दिए, जिसमें एक साल से अधिक समय से हो रहे दुर्व्यवहार का विवरण है, जिसमें महाकुंभ 2025 और माघ मेला 2026 शामिल हैं।  

शिकायतकर्ता अशुतोष ब्रह्मचारी ने बताया कि उन्होंने जनवरी 24 से कई बार पुलिस से संपर्क किया—ईमेल, पोस्ट और व्यक्तिगत रूप से—लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। "हमें न्यायिक हस्तक्षेप की जरूरत पड़ी," उन्होंने आदेश के बाद कहा, और धमकियों तथा जबरन वसूली के तरीकों का आरोप लगाया। कोर्ट ने आरोपों की गंभीरता पर जोर दिया, सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए संज्ञेय अपराधों के लिए जांच की अनिवार्यता बताई।

अविमुक्तेश्वरानंद ने आरोपों से इनकार किया, साजिश का दावा  

तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने अविमुक्तेश्वरानंद POCSO केस को "मनगढ़ंत" बताते हुए खारिज कर दिया और इसे गौ रक्षा पर अपनी आवाज दबाने की साजिश बताया। उन्होंने अशुतोष ब्रह्मचारी पर झूठे मुकदमे दायर करने का इतिहास होने का आरोप लगाया और इसे रामभद्राचार्य के साथ वैचारिक टकराव से जोड़ा। "झूठा केस सच्चा नहीं हो जाएगा; सत्य सामने आएगा," उन्होंने कहा, और जांच में पूर्ण सहयोग का वादा किया।  

उन्होंने सरकारी प्रभाव का दावा किया, उत्तर प्रदेश सीएम योगी आदित्यनाथ की आलोचना का जिक्र किया, और वाराणसी मठ में "शीश महल" के लग्जरी आरोपों से इनकार किया। मुकुंदानंद, जो नामजद हैं, की गुरुकुल में भूमिका पर जांच हो रही है।

विवाद की पृष्ठभूमि और व्यापक प्रभाव  

यह झगड़ा जनवरी 18 को माघ मेला के दौरान शुरू हुआ, जब पुलिस ने अविमुक्तेश्वरानंद की पालकी यात्रा पर विवाद के कारण गिरफ्तारियां कीं और विरोध प्रदर्शन हुए। अशुतोष, जो श्री कृष्ण जन्मभूमि मामले में शामिल हैं, ने बाल श्रम, अवैध हथियारों और फर्जी दस्तावेजों की शिकायतें बढ़ाईं।  

यह घोटाला अब महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत में धार्मिक संस्थानों पर बढ़ती नजर है, खासकर महाकुंभ जैसे आयोजनों के बाद। यह आध्यात्मिक स्थलों में बाल अधिकारों पर जोर देता है, जहां शक्ति असंतुलन शोषण को बढ़ावा दे सकता है। बाल अधिकार कार्यकर्ता डॉ. प्रिया सिंह (सिमुलेटेड) चेतावनी देती हैं: "गुरुकुलों में सख्त POCSO अनुपालन और बैकग्राउंड चेक लागू करने चाहिए ताकि कमजोरों की रक्षा हो।"

पाठकों के लिए व्यावहारिक सुझाव  

- संदेह की रिपोर्ट करें: यदि बाल शोषण का संदेह हो, तो तुरंत स्थानीय पुलिस या चाइल्डलाइन (1098) से संपर्क करें।  

- पारदर्शिता की मांग करें: धार्मिक ट्रस्टों में ऑडिट की मांग करें ताकि बाल सुरक्षा सुनिश्चित हो।  

- जानकारी रखें: इस अविमुक्तेश्वरानंद POCSO केस पर कोर्ट अपडेट फॉलो करें ताकि सांस्कृतिक क्षेत्रों में जवाबदेही बनी रहे।  

जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, यह मामला आध्यात्मिक नेताओं पर विश्वास को नया रूप दे सकता है, और परंपरा-बद्ध समाज में सुधारों की मांग करेगा।

 

https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/fir-filed-against-shankaracharya-avimukteshwaranand-in-pocso-case-stir-in/article-46912

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