उड़ चला रॉकेट सुनीता विलियम्स को लाने, कैसे होगी घरवापसी ?

JAGRAN DESK

वह घड़ी आने को है जिसकी पूरी दुनिया धड़कनें थामे इंतजार कर रही है. नौ महीने से स्पेस स्टेशन में फंसीं सुनीता विलियम्स और उनके साथी की घरवापसी के लिए नासा का क्रू 10 मिशन निकल पड़ा है.

नासा ने बताया था कि Falcon 9 rocket के ग्राउंड सपोर्ट क्लैम्प आर्म के हाइड्रॉलिक सिस्टम में दिक्कत आने के कारण लॉन्च को ऐन मौके पर टालना पड़ा. नासा की लॉन्च टीम दिक्कत का हल करने में जुटी थी. नासा ने एलान किया था कि नया लॉन्च भारतीय समय के मुताबिक शनिवार तड़के 4 बजकर 33 मिनट से पहले नहीं हो पाएगा. इसकी वजह है कि तेज हवाएं चलने वाली हैं और बारिश का भी पूर्वानुमान है. मिशन के टलते ही सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर की वापसी की राह देख रहे लोग मायूस हो थे. हालांकि उनकी ये मायूसी शनिवार सुबह दूर हो गई, जब स्पेस एक्स का फाल्कन 9 रॉकेट दनदनाता हुआ स्पेस स्टेशन की ओर उड़ चला. 

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5 जून 2024 को अंतरिक्ष में गए थे दोनों

दोनों ही अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष में लंबा समय गुजार चुके हैं जिसका असर उनकी सेहत पर भी पड़ रहा है. पिछले साल 5 जून, 2024 को अमेरिका के केप कैनेवेरल के कैनेडी स्पेस स्टेशन से इन दोनों अंतरिक्ष यात्रियों ने बोइंग के स्टारलाइनर स्पेसक्राफ्ट में एटलस वी रॉकेट के जरिए इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन के लिए उड़ान भरी थी. वो बोइंग के स्टारलाइन स्पेसक्राफ्ट की पहली टेस्ट फ्लाइट भी थी लेकिन वापसी की तैयारियों के दौरान स्टारलाइनर स्पेसक्राफ्ट के प्रोपल्शन सिस्टम में दिक्कत आ गई. 

स्टारलाइनर का मिशन रहा फेल

दोनों अंतरिक्ष यात्रियों को दस दिन बाद वापस लौटना था लेकिन स्टारलाइनर में तकनीकी दिक्कत होने के कारण उन्हें इसमें वापस लाना सुरक्षित नहीं समझा गया. इस दिक्कत को सुलझाने की कोशिश की गई. इसमें सितंबर तक का समय लग गया. तब भी दोनों को स्टारलाइनर से लाना सुरक्षित नहीं माना गया. पिछले साल पांच महीने बाद स्टारलाइनर एयरक्राफ्ट बिना अंतरिक्ष यात्रियों के वापस लौट आया. वैसे बुच विलमोर और सुनीता विलियम्स दोनों ही अनुभवी अंतरिक्ष यात्री हैं और अमेरिकी नेवी के टेस्ट पायलट हैं लेकिन उन्हें इतने लंबे समय तक अंतरिक्ष में रहने की तैयारी के साथ नहीं भेजा गया था लेकिन अपने पुराने अनुभव के आधार पर दोनों कामयाबी के साथ इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर टिके हुए हैं और पूरे समय वहां प्रयोगों और मेंटीनेंस के काम में जुटे रहे हैं.

इस बीच कई बार उनके वापस लौटने की तैयारी की गई लेकिन अलग अलग कारणों से ये सब टलता रहा. नासा ने स्पष्ट किया कि विलमोर और विलियम्स को तब तक इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर रहना होगा जब तक क्रू 10 वहां न पहुंच जाए ताकि स्टेशन पर मेंटीनेंस के लिए पर्याप्त अंतरिक्ष यात्री रहें. इस बीच सात मार्च को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के सामने व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में जब पत्रकारों ने ये मुद्दा उठाया तो ट्रंप ने कहा कि दोनों अंतरिक्ष यात्रियों को जल्द ही वापस लाया जाएगा. उन्होंने दोनों के स्पेस स्टेशन में अटके रहने के लिए पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन को दोषी ठहराया. ट्रंप ने कहा कि उन्होंने एलन मस्क से उन्हें वापस लाने के लिए पूछा है और उन्होंने हां की है.

जब मस्क ने बाइडन को कोसा 

इस बीच सुनीता विलियम्स को लेकर डोनल्ड ट्रंप के शब्दों पर भी सवाल उठे. जैसा कि कई बार वो कुछ ज्यादा ही बोल जाते हैं. उन्होंने सुनीता विलियम्स के बालों पर भी ऐसी ही टिप्पणी कर दी जो सोशल मीडिया में चर्चा की बड़ी वजह बन गई. हालांकि, ट्रंप के बयान के बाद एलन मस्क ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि अंतरिक्ष यात्रियों को आठ दिन के लिए ही जाना था लेकिन वो अब आठ महीने से वहां हैं. SpaceX एक और ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट भेजकर छह महीने पहले उन्हें वापस ला सकता था लेकिन बाइडेन के व्हाइट हाउस ने इसके लिए इजाजत नहीं दी. राष्ट्रपति ट्रंप ने उन्हें जल्द से जल्द वापस लाने को कहा है और हम ऐसा कर रहे हैं.

सुनीता विलियम्स ने अंतरिक्ष में बनाया रिकॉर्ड

हालांकि, मस्क के बयान में बाइडेन को वजह बताए जाने की काफी आलोचना भी हुई. खैर अब उम्मीद है कि जल्द ही सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर का इंतजार खत्म हो जाएगा. इस बीच दोनों ही इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन में तमाम प्रयोगों और रख रखाव के काम में जुट गए हैं. इस साल जनवरी में विलियम्स ने किसी भी महिला के लिए स्पेसवॉक का रिकॉर्ड तोड़ दिया. बुच विलमोर के साथ उन्होंने 62 घंटे और 6 मिनट की स्पेस वॉक की यानी इतना समय वो इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन से बाहर अंतरिक्ष में रहे या अंतरिक्ष में चले और मेंटीनेंस का काम करते रहे. इससे पहले 2012 में सुनीता विलियम्स जब पहली बार इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन में गईं तो अंतरिक्ष में ट्राइऐथलन पूरा करने वाली पहली व्यक्ति बनीं. इस दौरान उन्होंने तैराकी की कमी को पूरा करने के लिए एक वेट लिफ्टिंग मशीन का इस्तेमाल किया और एक स्ट्रैप से बंधी रहकर ट्रेडमिल पर दौड़ीं. सुनीता विलियम्स अभी तक कुल मिलाकर 600 से भी ज्यादा दिनों तक अंतरिक्ष में रह चुकी हैं.

NASA की अंतरिक्ष यात्री Anne McClain (दाएं) और Nichole Ayer

NASA की अंतरिक्ष यात्री Anne McClain (दाएं) और Nichole Ayer

धरती पर वापसी के बाद दोनों को होगी दिक्कत

लेकिन सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर की धरती पर जब वापसी होगी तो उनके सामने कुछ शारीरिक दिक्कतें भी आएंगी. दोनों ही लंबे समय से पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण से बाहर हैं और नीचे लौटने पर उन्हें पहले अपने शरीर को ग्रैविटी के हिसाब से ढालना होगा. नासा के एक पूर्व अंतरिक्ष यात्री Leroy Chiao के मुताबिक लंबे समय तक अंतरिक्ष में रहने के कारण अंतरिक्ष यात्रियों को बेबी फीट का अनुभव होता है. इसका मतलब ये है कि आप अपने पैर के तलुए की जो मोटी चमड़ी है उसे धीरे धीरे खो देते हैं. अंतरिक्ष में भारहीनता के कारण ऐसा होता है. इसके अलावा अंतरिक्ष यात्रियों को वापस धरती पर लौटने पर चक्कर आने या जी मिचलाने जैसे साइड इफेक्ट्स का भी सामना करना पड़ता है. ऐसा लगता है जैसे फ्लू हो गया हो. सामान्य होने में कई हफ्ते लग सकते हैं.

एक और अंतरिक्ष यात्री Terry Virts ने भी कहा कि फ्लू जैसा महसूस होता है. उन्होंने कहा मुझे बहुत ज्या्दा चक्कर आने जैसा महसूस हुआ. अंतरिक्ष से वापस लौटने में शरीर को नए सिरे से ढालने में कई हफ्ते लग जाते हैं. दरअसल, माइग्रोग्रैविटी में अंतरिक्ष यात्री चलते नहीं हैं बल्कि फ्लोट करते हैं यानी तैरते रहते हैं. स्पेसक्राफ्ट में हाथ से हैंडल पकड़ कर लगभग उड़ते हुए आगे पीछे बढ़ते हैं. खड़े रहने या चलने से पैरों पर जो दबाव पड़ता है उसका उन्हें अनुभव नहीं हो पाता. इससे उनकी एढ़ियों पर जो मोटी चमड़ी होती है वो समय के साथ साथ ढीली पड़ती जाती है. जब वो धरती पर लौटते हैं तो तुरंत गुरुत्वाकर्षण का अहसास होता है जिसे लेकर पैर काफी संवेदनशील होते हैं. कुछ ऐसा ही लगता है जैसे महीनों तक सॉफ्ट जूते पहनने के एकदम बाद अब सख्त जमीन पर नंगे पैर चलने लगें. इससे दिक्कत भी होती है और बैलेंस बनाए रखने में भी दिक्कत होती है. बेबी फीट के अलावा अंतरिक्षयात्रियों के शरीर में मांसपेशियां भी धीरे धीरे कमजोर पड़ती हैं. हालांकि, इसके लिए अंतरिक्ष में वो लगातार एक्सरसाइज करते हैं लेकिन मांसपेशियों उतनी मजबूत नहीं हो पाती. लौटने पर शरीर को संतुलन में रखने वाला सिस्टम भी गड़बड़ा जाता है. शरीर में बोन डेंसिटी लॉस भी होता है यानी हड्डियां भी कमजोर हो जाती हैं. इसीलिए अंतरिक्ष यात्रियों को धरती की ग्रैविटी के हिसाब से ढालने के लिए स्पेस एजेंसीज खास rehabilitation program बनाती हैं.

  • जमीन पर चलाने की शुरुआत धीरे धीरे की जाती है.
  • पहले नरम सतह पर चलाया जाता है.
  • पैरों को मजबूत बनाने के व्यायाम कराए जाते हैं.
  • बैलेंस यानी संतुलन बनाने का प्रशिक्षण दिया जाता है.
  • उसी हिसाब से खान-पान और जरूरी दवाएं भी तय होती हैं.
  • कई हफ़्तों तक rehabilitation किया जाता है. 
  • अंतरिक्ष यात्री लगातार नासा की मेडिकल टीम की निगरानी में रहते हैं.

पिछले ही साल 25 अक्टूबर को नासा के तीन अंतरिक्ष यात्री और एक रूसी अंतरिक्ष यात्री इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन में आठ महीने रहने के बाद वापस लौटे. उन्हें लेकर लौटा स्पेस एक्स कैप्सूल गल्फ ऑफ मैक्सिको में उतरा. इसके तुरंत बाद तीनों को फ्लोरिडा के अस्पताल ले जाया गया. इनके साथ रूस के भी एक अंतरिक्ष यात्री भी थे लेकिन तीनों अमेरकी अंतरिक्ष यात्रियों में से एक को किसी मेडिकल वजह से रात भर अस्पताल में रखा गया. मेडिकल गोपनीयता का हवाला देते हुए नासा ने ये नहीं बताया कि किस अंतरिक्ष यात्री को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा. तब एक अंतरिक्ष यात्री Michael Barratt ने कहा था कि स्पेसफ्लाइट ऐसी चीज है जिसे अभी हम ठीक से समझ नहीं पाए हैं. हमें ऐसी चीजें पता लग रही हैं जिनकी हमें कई बार उम्मीद नहीं होती. ये ऐसा ही एक समय था. हम अब भी चीजो को समझ ही रहे हैं. एक और अंतरिक्ष यात्री Jeanette Epps के मुताबिक हर व्यक्ति का अंतरिक्ष में अनुभव अलग होता है. इसका पहले से अनुमान नहीं लगाया जा सकता. हर दिन पहले दिन से बेहतर होता है. तीसरे अंतरिक्ष यात्री मैथ्यू डोमिनिक ने कहा कि अंतरिक्ष से लौटने के बाद एक सख़्त कुर्सी पर ठीक से बैठने में ही कई दिन लग जाते हैं. उन्होंने कहा कि मैं 235 दिन तक किसी सख़्त चीज़ पर बैठा ही नहीं. उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष में रहने के दौरान उन्होंने ट्रेडमिल का इस्तेमाल नहीं किया, ये देखने के लिए मंगल ग्रह तक लंबी यात्रा के दौरान कौन से उपकरणों को कम किया जा सकता है. मैं कैप्सूल से बाहर आने के बाद ही पहली बार चला.

सुनीता विलियम्स के बारे में अन्य अहम बातें

तो सुनीता विलियम्स के लौटने का इंतजार है और उम्मीद है कि वापस लौटने के बाद उन्हें दुरुस्त होने में ज्यादा समय नहीं लगेगा और अब सुनीता विलियम्स के बारे में कुछ और जानकारियां. अमेरिका के ओहायो में 1965 में पैदा हुईं सुनीता विलियम्स अमेरिकी नौसेना की एक रिटायर्ड अधिकारी हैं जिन्हें नासा ने 1998 में अंतरिक्ष यात्री के तौर पर चुना. वो फ्लोरिडा इंस्टिट्यूट ऑफ टैक्नॉलजी से इंजीनियरिंग मैनेजमेंट में एमएससी हैं. 30 प्रकार के अलग अलग एयरक्राफ्ट्स में उन्हें 3000 घंटे उड़ान का अनुभव है. ये सुनीता विलियम्स का इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन का तीसरा दौरा है.

उन्होंने पहली बार 9 दिसंबर 2006 को उड़ान भरी, 11 दिसंबर से लेकर 22 जून 2007 तक इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन में फ़्लाइट इंजीनियर के तौर पर रहीं. तब उन्होंने महिलाओं के लिए स्पेसवॉक में रिकॉर्ड बनाया. कुल चार स्पेस वॉक में 29 घंटे, 17 मिनट स्पेस स्टेशन से बाहर बिताए. सुनीता विलियम्स हिंदू धर्म को मानती हैं और खास बात ये है कि पहले अंतरिक्ष दौरे में वो अपने साथ भगवद गीता की एक प्रति लेकर गईं थीं.

करीब छह साल बाद वो फिर अंतरिक्ष में गईं. इस बार कजाकिस्तान के बाइकानोर कॉस्मोड्रोम में उन्होंने रूस और जापान के अंतरिक्ष यात्रियों के साथ 14 जुलाई, 2012 को उड़ान भरी. चार महीने इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर तमाम शोध किए, कुल 50 घंटे 40 मिनट की तीन स्पेसवॉक कीं, अंतरिक्ष स्टेशन की मरम्मत की. 127 दिन बाद वो 18 नवंबर, 2012 को क़ज़ाख़स्तान में उतरीं. दूसरे अंतरिक्ष दौरे में सुनीता विलियम्स अपने साथ ओम का निशान, भगवान शिव की एक पेंटिंग और उपनिषद की कॉपी लेकर गईं.

पिछले साल जून में वो तीसरी बार अंतरिक्ष गईं और नौ महीने से ज्यादा समय इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर बिता चुकी हैं. अपने शानदार करियर में सुनीता विलियम्स को कई सम्मानों से नवाजा जा चुका है. इनमें Defense Superior Service Medal , Legion of Merit, Navy Commendation Medal और Humanitarian Service Medal शामिल हैं.

उनके पति माइकल जे विलियम्स, टैक्सस में फेडरल मार्शल हैं और एक पूर्व हेलीकॉप्टर पायलट रह चुके हैं. फौज में रहने के दौरान 1987 में जब सुनीता विलियम्स हेलीकॉप्टर पायलट थीं तभी उनकी माइकल विलियम्स से मुलाकात हुई जो बाद में शादी में बदल गई. सुनीता विलियम्स के लौटने का इंतजार कर रहे माइकल विलियम्स शांत चित्त व्यक्ति हैं और सितंबर में उन्होंने सुनीता की काबिलियत पर विश्वास जताते हुए कहा था कि वो अंतरिक्ष में खुश हैं. दोनों का अपना कोई बच्चा नहीं है लेकिन अहमदाबाद से एक बच्ची को गोद लेने की इच्छा जाहिर कर चुकी हैं.

सुनीता विलियम्स जब अंतरिक्ष से लौटेंगी तो कुछ समय तक उन्हें रिहैबिलिटेशन सेंटर में रहना होगा लेकिन क्या आप जानते हैं कि जब आदमी सबसे पहली बार चांद पर उतरा तो धरती पर वापस लौटने के बाद अंतरिक्ष यात्रियों को क्वॉरंटीन में रखा गया. कोरोना महामारी के बाद से क्वॉरंटीन शब्द से लगभग हर व्यक्ति परिचित हो गया है. यानी किसी को अकेले ऐसी जगह रख दिया जाए जहां कोई और उसके संपर्क में न आ सके.

पहले अंतरिक्ष यात्रियों को किया जाता था क्वारंटीन

20 जुलाई 1969 को अपोलो 11 मिशन से चांद पर गए अंतरिक्ष यात्री नील आर्मस्ट्रॉन्ग पहले इंसान बने जिन्होंने चांद पर कदम रखा. उनके बाद एडविन एल्ड्रिन ने चांद पर कदम रखे. इस दौरान तीसरे अंतरिक्ष यात्री माइकल कोलिंस कमांड मॉड्यूल कोलंबिया में ही रहे और करीब 21 घंटे तक अकेले चांज का चक्कर लगाते रहे. 24 जुलाई, 1969 को जब अपोलो 11 स्पेसक्राफ्ट प्रशांत महासागर में उतरा तो तीनों ही अंतरिक्ष यात्रियों को सबसे पहले एक क्वारंटीन होम में ले जाया गया जहां उन्हें 21 दिन तक अलग रखा गया.

 

 

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15 Mar 2025 By दैनिक जागरण

उड़ चला रॉकेट सुनीता विलियम्स को लाने, कैसे होगी घरवापसी ?

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नासा ने बताया था कि Falcon 9 rocket के ग्राउंड सपोर्ट क्लैम्प आर्म के हाइड्रॉलिक सिस्टम में दिक्कत आने के कारण लॉन्च को ऐन मौके पर टालना पड़ा. नासा की लॉन्च टीम दिक्कत का हल करने में जुटी थी. नासा ने एलान किया था कि नया लॉन्च भारतीय समय के मुताबिक शनिवार तड़के 4 बजकर 33 मिनट से पहले नहीं हो पाएगा. इसकी वजह है कि तेज हवाएं चलने वाली हैं और बारिश का भी पूर्वानुमान है. मिशन के टलते ही सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर की वापसी की राह देख रहे लोग मायूस हो थे. हालांकि उनकी ये मायूसी शनिवार सुबह दूर हो गई, जब स्पेस एक्स का फाल्कन 9 रॉकेट दनदनाता हुआ स्पेस स्टेशन की ओर उड़ चला. 

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5 जून 2024 को अंतरिक्ष में गए थे दोनों

दोनों ही अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष में लंबा समय गुजार चुके हैं जिसका असर उनकी सेहत पर भी पड़ रहा है. पिछले साल 5 जून, 2024 को अमेरिका के केप कैनेवेरल के कैनेडी स्पेस स्टेशन से इन दोनों अंतरिक्ष यात्रियों ने बोइंग के स्टारलाइनर स्पेसक्राफ्ट में एटलस वी रॉकेट के जरिए इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन के लिए उड़ान भरी थी. वो बोइंग के स्टारलाइन स्पेसक्राफ्ट की पहली टेस्ट फ्लाइट भी थी लेकिन वापसी की तैयारियों के दौरान स्टारलाइनर स्पेसक्राफ्ट के प्रोपल्शन सिस्टम में दिक्कत आ गई. 

स्टारलाइनर का मिशन रहा फेल

दोनों अंतरिक्ष यात्रियों को दस दिन बाद वापस लौटना था लेकिन स्टारलाइनर में तकनीकी दिक्कत होने के कारण उन्हें इसमें वापस लाना सुरक्षित नहीं समझा गया. इस दिक्कत को सुलझाने की कोशिश की गई. इसमें सितंबर तक का समय लग गया. तब भी दोनों को स्टारलाइनर से लाना सुरक्षित नहीं माना गया. पिछले साल पांच महीने बाद स्टारलाइनर एयरक्राफ्ट बिना अंतरिक्ष यात्रियों के वापस लौट आया. वैसे बुच विलमोर और सुनीता विलियम्स दोनों ही अनुभवी अंतरिक्ष यात्री हैं और अमेरिकी नेवी के टेस्ट पायलट हैं लेकिन उन्हें इतने लंबे समय तक अंतरिक्ष में रहने की तैयारी के साथ नहीं भेजा गया था लेकिन अपने पुराने अनुभव के आधार पर दोनों कामयाबी के साथ इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर टिके हुए हैं और पूरे समय वहां प्रयोगों और मेंटीनेंस के काम में जुटे रहे हैं.

इस बीच कई बार उनके वापस लौटने की तैयारी की गई लेकिन अलग अलग कारणों से ये सब टलता रहा. नासा ने स्पष्ट किया कि विलमोर और विलियम्स को तब तक इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर रहना होगा जब तक क्रू 10 वहां न पहुंच जाए ताकि स्टेशन पर मेंटीनेंस के लिए पर्याप्त अंतरिक्ष यात्री रहें. इस बीच सात मार्च को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के सामने व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में जब पत्रकारों ने ये मुद्दा उठाया तो ट्रंप ने कहा कि दोनों अंतरिक्ष यात्रियों को जल्द ही वापस लाया जाएगा. उन्होंने दोनों के स्पेस स्टेशन में अटके रहने के लिए पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन को दोषी ठहराया. ट्रंप ने कहा कि उन्होंने एलन मस्क से उन्हें वापस लाने के लिए पूछा है और उन्होंने हां की है.

जब मस्क ने बाइडन को कोसा 

इस बीच सुनीता विलियम्स को लेकर डोनल्ड ट्रंप के शब्दों पर भी सवाल उठे. जैसा कि कई बार वो कुछ ज्यादा ही बोल जाते हैं. उन्होंने सुनीता विलियम्स के बालों पर भी ऐसी ही टिप्पणी कर दी जो सोशल मीडिया में चर्चा की बड़ी वजह बन गई. हालांकि, ट्रंप के बयान के बाद एलन मस्क ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि अंतरिक्ष यात्रियों को आठ दिन के लिए ही जाना था लेकिन वो अब आठ महीने से वहां हैं. SpaceX एक और ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट भेजकर छह महीने पहले उन्हें वापस ला सकता था लेकिन बाइडेन के व्हाइट हाउस ने इसके लिए इजाजत नहीं दी. राष्ट्रपति ट्रंप ने उन्हें जल्द से जल्द वापस लाने को कहा है और हम ऐसा कर रहे हैं.

सुनीता विलियम्स ने अंतरिक्ष में बनाया रिकॉर्ड

हालांकि, मस्क के बयान में बाइडेन को वजह बताए जाने की काफी आलोचना भी हुई. खैर अब उम्मीद है कि जल्द ही सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर का इंतजार खत्म हो जाएगा. इस बीच दोनों ही इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन में तमाम प्रयोगों और रख रखाव के काम में जुट गए हैं. इस साल जनवरी में विलियम्स ने किसी भी महिला के लिए स्पेसवॉक का रिकॉर्ड तोड़ दिया. बुच विलमोर के साथ उन्होंने 62 घंटे और 6 मिनट की स्पेस वॉक की यानी इतना समय वो इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन से बाहर अंतरिक्ष में रहे या अंतरिक्ष में चले और मेंटीनेंस का काम करते रहे. इससे पहले 2012 में सुनीता विलियम्स जब पहली बार इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन में गईं तो अंतरिक्ष में ट्राइऐथलन पूरा करने वाली पहली व्यक्ति बनीं. इस दौरान उन्होंने तैराकी की कमी को पूरा करने के लिए एक वेट लिफ्टिंग मशीन का इस्तेमाल किया और एक स्ट्रैप से बंधी रहकर ट्रेडमिल पर दौड़ीं. सुनीता विलियम्स अभी तक कुल मिलाकर 600 से भी ज्यादा दिनों तक अंतरिक्ष में रह चुकी हैं.

NASA की अंतरिक्ष यात्री Anne McClain (दाएं) और Nichole Ayer

NASA की अंतरिक्ष यात्री Anne McClain (दाएं) और Nichole Ayer

धरती पर वापसी के बाद दोनों को होगी दिक्कत

लेकिन सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर की धरती पर जब वापसी होगी तो उनके सामने कुछ शारीरिक दिक्कतें भी आएंगी. दोनों ही लंबे समय से पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण से बाहर हैं और नीचे लौटने पर उन्हें पहले अपने शरीर को ग्रैविटी के हिसाब से ढालना होगा. नासा के एक पूर्व अंतरिक्ष यात्री Leroy Chiao के मुताबिक लंबे समय तक अंतरिक्ष में रहने के कारण अंतरिक्ष यात्रियों को बेबी फीट का अनुभव होता है. इसका मतलब ये है कि आप अपने पैर के तलुए की जो मोटी चमड़ी है उसे धीरे धीरे खो देते हैं. अंतरिक्ष में भारहीनता के कारण ऐसा होता है. इसके अलावा अंतरिक्ष यात्रियों को वापस धरती पर लौटने पर चक्कर आने या जी मिचलाने जैसे साइड इफेक्ट्स का भी सामना करना पड़ता है. ऐसा लगता है जैसे फ्लू हो गया हो. सामान्य होने में कई हफ्ते लग सकते हैं.

एक और अंतरिक्ष यात्री Terry Virts ने भी कहा कि फ्लू जैसा महसूस होता है. उन्होंने कहा मुझे बहुत ज्या्दा चक्कर आने जैसा महसूस हुआ. अंतरिक्ष से वापस लौटने में शरीर को नए सिरे से ढालने में कई हफ्ते लग जाते हैं. दरअसल, माइग्रोग्रैविटी में अंतरिक्ष यात्री चलते नहीं हैं बल्कि फ्लोट करते हैं यानी तैरते रहते हैं. स्पेसक्राफ्ट में हाथ से हैंडल पकड़ कर लगभग उड़ते हुए आगे पीछे बढ़ते हैं. खड़े रहने या चलने से पैरों पर जो दबाव पड़ता है उसका उन्हें अनुभव नहीं हो पाता. इससे उनकी एढ़ियों पर जो मोटी चमड़ी होती है वो समय के साथ साथ ढीली पड़ती जाती है. जब वो धरती पर लौटते हैं तो तुरंत गुरुत्वाकर्षण का अहसास होता है जिसे लेकर पैर काफी संवेदनशील होते हैं. कुछ ऐसा ही लगता है जैसे महीनों तक सॉफ्ट जूते पहनने के एकदम बाद अब सख्त जमीन पर नंगे पैर चलने लगें. इससे दिक्कत भी होती है और बैलेंस बनाए रखने में भी दिक्कत होती है. बेबी फीट के अलावा अंतरिक्षयात्रियों के शरीर में मांसपेशियां भी धीरे धीरे कमजोर पड़ती हैं. हालांकि, इसके लिए अंतरिक्ष में वो लगातार एक्सरसाइज करते हैं लेकिन मांसपेशियों उतनी मजबूत नहीं हो पाती. लौटने पर शरीर को संतुलन में रखने वाला सिस्टम भी गड़बड़ा जाता है. शरीर में बोन डेंसिटी लॉस भी होता है यानी हड्डियां भी कमजोर हो जाती हैं. इसीलिए अंतरिक्ष यात्रियों को धरती की ग्रैविटी के हिसाब से ढालने के लिए स्पेस एजेंसीज खास rehabilitation program बनाती हैं.

  • जमीन पर चलाने की शुरुआत धीरे धीरे की जाती है.
  • पहले नरम सतह पर चलाया जाता है.
  • पैरों को मजबूत बनाने के व्यायाम कराए जाते हैं.
  • बैलेंस यानी संतुलन बनाने का प्रशिक्षण दिया जाता है.
  • उसी हिसाब से खान-पान और जरूरी दवाएं भी तय होती हैं.
  • कई हफ़्तों तक rehabilitation किया जाता है. 
  • अंतरिक्ष यात्री लगातार नासा की मेडिकल टीम की निगरानी में रहते हैं.

पिछले ही साल 25 अक्टूबर को नासा के तीन अंतरिक्ष यात्री और एक रूसी अंतरिक्ष यात्री इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन में आठ महीने रहने के बाद वापस लौटे. उन्हें लेकर लौटा स्पेस एक्स कैप्सूल गल्फ ऑफ मैक्सिको में उतरा. इसके तुरंत बाद तीनों को फ्लोरिडा के अस्पताल ले जाया गया. इनके साथ रूस के भी एक अंतरिक्ष यात्री भी थे लेकिन तीनों अमेरकी अंतरिक्ष यात्रियों में से एक को किसी मेडिकल वजह से रात भर अस्पताल में रखा गया. मेडिकल गोपनीयता का हवाला देते हुए नासा ने ये नहीं बताया कि किस अंतरिक्ष यात्री को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा. तब एक अंतरिक्ष यात्री Michael Barratt ने कहा था कि स्पेसफ्लाइट ऐसी चीज है जिसे अभी हम ठीक से समझ नहीं पाए हैं. हमें ऐसी चीजें पता लग रही हैं जिनकी हमें कई बार उम्मीद नहीं होती. ये ऐसा ही एक समय था. हम अब भी चीजो को समझ ही रहे हैं. एक और अंतरिक्ष यात्री Jeanette Epps के मुताबिक हर व्यक्ति का अंतरिक्ष में अनुभव अलग होता है. इसका पहले से अनुमान नहीं लगाया जा सकता. हर दिन पहले दिन से बेहतर होता है. तीसरे अंतरिक्ष यात्री मैथ्यू डोमिनिक ने कहा कि अंतरिक्ष से लौटने के बाद एक सख़्त कुर्सी पर ठीक से बैठने में ही कई दिन लग जाते हैं. उन्होंने कहा कि मैं 235 दिन तक किसी सख़्त चीज़ पर बैठा ही नहीं. उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष में रहने के दौरान उन्होंने ट्रेडमिल का इस्तेमाल नहीं किया, ये देखने के लिए मंगल ग्रह तक लंबी यात्रा के दौरान कौन से उपकरणों को कम किया जा सकता है. मैं कैप्सूल से बाहर आने के बाद ही पहली बार चला.

सुनीता विलियम्स के बारे में अन्य अहम बातें

तो सुनीता विलियम्स के लौटने का इंतजार है और उम्मीद है कि वापस लौटने के बाद उन्हें दुरुस्त होने में ज्यादा समय नहीं लगेगा और अब सुनीता विलियम्स के बारे में कुछ और जानकारियां. अमेरिका के ओहायो में 1965 में पैदा हुईं सुनीता विलियम्स अमेरिकी नौसेना की एक रिटायर्ड अधिकारी हैं जिन्हें नासा ने 1998 में अंतरिक्ष यात्री के तौर पर चुना. वो फ्लोरिडा इंस्टिट्यूट ऑफ टैक्नॉलजी से इंजीनियरिंग मैनेजमेंट में एमएससी हैं. 30 प्रकार के अलग अलग एयरक्राफ्ट्स में उन्हें 3000 घंटे उड़ान का अनुभव है. ये सुनीता विलियम्स का इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन का तीसरा दौरा है.

उन्होंने पहली बार 9 दिसंबर 2006 को उड़ान भरी, 11 दिसंबर से लेकर 22 जून 2007 तक इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन में फ़्लाइट इंजीनियर के तौर पर रहीं. तब उन्होंने महिलाओं के लिए स्पेसवॉक में रिकॉर्ड बनाया. कुल चार स्पेस वॉक में 29 घंटे, 17 मिनट स्पेस स्टेशन से बाहर बिताए. सुनीता विलियम्स हिंदू धर्म को मानती हैं और खास बात ये है कि पहले अंतरिक्ष दौरे में वो अपने साथ भगवद गीता की एक प्रति लेकर गईं थीं.

करीब छह साल बाद वो फिर अंतरिक्ष में गईं. इस बार कजाकिस्तान के बाइकानोर कॉस्मोड्रोम में उन्होंने रूस और जापान के अंतरिक्ष यात्रियों के साथ 14 जुलाई, 2012 को उड़ान भरी. चार महीने इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर तमाम शोध किए, कुल 50 घंटे 40 मिनट की तीन स्पेसवॉक कीं, अंतरिक्ष स्टेशन की मरम्मत की. 127 दिन बाद वो 18 नवंबर, 2012 को क़ज़ाख़स्तान में उतरीं. दूसरे अंतरिक्ष दौरे में सुनीता विलियम्स अपने साथ ओम का निशान, भगवान शिव की एक पेंटिंग और उपनिषद की कॉपी लेकर गईं.

पिछले साल जून में वो तीसरी बार अंतरिक्ष गईं और नौ महीने से ज्यादा समय इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर बिता चुकी हैं. अपने शानदार करियर में सुनीता विलियम्स को कई सम्मानों से नवाजा जा चुका है. इनमें Defense Superior Service Medal , Legion of Merit, Navy Commendation Medal और Humanitarian Service Medal शामिल हैं.

उनके पति माइकल जे विलियम्स, टैक्सस में फेडरल मार्शल हैं और एक पूर्व हेलीकॉप्टर पायलट रह चुके हैं. फौज में रहने के दौरान 1987 में जब सुनीता विलियम्स हेलीकॉप्टर पायलट थीं तभी उनकी माइकल विलियम्स से मुलाकात हुई जो बाद में शादी में बदल गई. सुनीता विलियम्स के लौटने का इंतजार कर रहे माइकल विलियम्स शांत चित्त व्यक्ति हैं और सितंबर में उन्होंने सुनीता की काबिलियत पर विश्वास जताते हुए कहा था कि वो अंतरिक्ष में खुश हैं. दोनों का अपना कोई बच्चा नहीं है लेकिन अहमदाबाद से एक बच्ची को गोद लेने की इच्छा जाहिर कर चुकी हैं.

सुनीता विलियम्स जब अंतरिक्ष से लौटेंगी तो कुछ समय तक उन्हें रिहैबिलिटेशन सेंटर में रहना होगा लेकिन क्या आप जानते हैं कि जब आदमी सबसे पहली बार चांद पर उतरा तो धरती पर वापस लौटने के बाद अंतरिक्ष यात्रियों को क्वॉरंटीन में रखा गया. कोरोना महामारी के बाद से क्वॉरंटीन शब्द से लगभग हर व्यक्ति परिचित हो गया है. यानी किसी को अकेले ऐसी जगह रख दिया जाए जहां कोई और उसके संपर्क में न आ सके.

पहले अंतरिक्ष यात्रियों को किया जाता था क्वारंटीन

20 जुलाई 1969 को अपोलो 11 मिशन से चांद पर गए अंतरिक्ष यात्री नील आर्मस्ट्रॉन्ग पहले इंसान बने जिन्होंने चांद पर कदम रखा. उनके बाद एडविन एल्ड्रिन ने चांद पर कदम रखे. इस दौरान तीसरे अंतरिक्ष यात्री माइकल कोलिंस कमांड मॉड्यूल कोलंबिया में ही रहे और करीब 21 घंटे तक अकेले चांज का चक्कर लगाते रहे. 24 जुलाई, 1969 को जब अपोलो 11 स्पेसक्राफ्ट प्रशांत महासागर में उतरा तो तीनों ही अंतरिक्ष यात्रियों को सबसे पहले एक क्वारंटीन होम में ले जाया गया जहां उन्हें 21 दिन तक अलग रखा गया.

 

 
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