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दिल्ली में सरकारी और सार्वजनिक इमारतों की होगी जांच, स्ट्रक्चरल ऑडिट अनिवार्य करने की तैयारी
भारत
सीएम रेखा गुप्ता ने कहा- लोगों की सुरक्षा के लिए पब्लिक यूज बिल्डिंग्स की मजबूती की नियमित समीक्षा जरूरी
दिल्ली में सरकारी और सार्वजनिक उपयोग वाली इमारतों की सुरक्षा को लेकर सरकार बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर रही है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा है कि लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सभी पब्लिक यूज बिल्डिंग्स का स्ट्रक्चरल ऑडिट अनिवार्य किया जाना चाहिए। इस पहल का उद्देश्य ऐसी इमारतों की पहचान करना है, जिनमें निर्माण संबंधी कमजोरी, पुरानी संरचना या लंबे समय से रखरखाव नहीं होने के कारण सुरक्षा का खतरा पैदा हो सकता है।
सार्वजनिक उपयोग वाली इमारतों में सरकारी कार्यालयों के अलावा स्कूल, अस्पताल, सामुदायिक केंद्र, सार्वजनिक संस्थान और अन्य भवन शामिल हैं, जहां रोजाना बड़ी संख्या में लोग आते-जाते हैं। इन इमारतों की मजबूती की नियमित जांच से संभावित हादसों को रोकने में मदद मिल सकती है।
मुख्यमंत्री ने भवन सुरक्षा को लेकर अधिकारियों को गंभीरता से काम करने के निर्देश दिए हैं। स्ट्रक्चरल ऑडिट के दौरान विशेषज्ञ इमारत की नींव, कॉलम, बीम, छत, भार क्षमता और निर्माण की वर्तमान स्थिति की जांच करते हैं। दिल्ली में बड़ी संख्या में ऐसी इमारतें हैं जो कई दशक पुरानी हैं। बढ़ती आबादी और लगातार बढ़ते इस्तेमाल के कारण इन भवनों की समय-समय पर तकनीकी जांच की जरूरत महसूस की जाती रही है।
सरकार का मानना है कि केवल नई इमारतों का निर्माण करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि पुराने भवनों की स्थिति पर भी लगातार नजर रखना जरूरी है। ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर जरूरत पड़ने पर मरम्मत, मजबूती बढ़ाने या अन्य सुरक्षा उपायों पर फैसला लिया जा सकता है।
भवन सुरक्षा को लेकर देश के कई शहरों में पहले भी सवाल उठते रहे हैं। कमजोर संरचनाओं, अवैध निर्माण और रखरखाव की कमी के कारण कई बार दुर्घटनाओं की स्थिति सामने आई है। ऐसे में नियमित स्ट्रक्चरल ऑडिट को एक निवारक कदम के तौर पर देखा जा रहा है।
दिल्ली सरकार की ओर से इस योजना को लागू करने के लिए विस्तृत प्रक्रिया, ऑडिट की समय सीमा और जिम्मेदार विभागों से जुड़ी जानकारी आगे साझा की जा सकती है। अधिकारियों की ओर से यह भी तय किया जाएगा कि किन श्रेणी की इमारतों को पहले चरण में शामिल किया जाएगा।
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