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SCO शिखर सम्मेलन: मोदी, शी और पुतिन एक मंच पर, आतंकवाद से निपटने के लिए सुरक्षा केंद्र को मंजूरी
Digital Desk
किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में SCO शिखर सम्मेलन में भारत, चीन और रूस समेत सदस्य देशों के नेताओं ने क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद और आर्थिक सहयोग पर चर्चा की। सम्मेलन में आतंकवाद, उग्रवाद, संगठित अपराध और अन्य सीमा-पार खतरों से निपटने के लिए सुरक्षा सहयोग बढ़ाने वाले प्रावधानों को मंजूरी दी गई।
किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के 26वें शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन एक ही मंच पर नजर आए। सम्मेलन में सदस्य देशों ने क्षेत्रीय सुरक्षा और आतंकवाद से मुकाबले के साथ व्यापार, कनेक्टिविटी और तकनीकी सहयोग को आगे बढ़ाने पर जोर दिया।
शिखर सम्मेलन का एक प्रमुख परिणाम SCO सदस्य देशों की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने से जुड़ा रहा। नेताओं ने SCO सदस्य देशों की सुरक्षा के सामने आने वाली चुनौतियों और खतरों से निपटने के लिए यूनिवर्सल सेंटर से जुड़े नियमों को मंजूरी दी। यह तंत्र आतंकवाद, उग्रवाद, संगठित अपराध और अन्य सीमा-पार सुरक्षा चुनौतियों पर सहयोग और सूचनाओं के आदान-प्रदान को मजबूत करने के उद्देश्य से बनाया गया है।
आतंकवाद पर मोदी का कड़ा संदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने SCO मंच से आतंकवाद के खिलाफ सामूहिक और निर्णायक कार्रवाई की जरूरत बताई। उन्होंने आतंकवाद के पूरे नेटवर्क और उसके समर्थन तंत्र को खत्म करने पर जोर दिया। भारत लंबे समय से SCO के भीतर आतंकवाद और सीमा-पार आतंकवाद के खिलाफ मजबूत सहयोग की मांग करता रहा है।
मोदी ने सुरक्षा के साथ-साथ कनेक्टिविटी और आर्थिक अवसरों को भी SCO सहयोग के महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में सामने रखा। उनका संदेश था कि क्षेत्र में शांति और स्थिरता के बिना दीर्घकालिक विकास और आर्थिक सहयोग को आगे बढ़ाना मुश्किल होगा।
मोदी-शी-पुतिन की मुलाकात ने खींचा ध्यान
SCO सम्मेलन के दौरान मोदी, शी जिनपिंग और पुतिन की मौजूदगी ने भी कूटनीतिक स्तर पर ध्यान आकर्षित किया। तीनों नेताओं के बीच संक्षिप्त बातचीत और अभिवादन हुआ। भारत, रूस और चीन के बीच इस तरह की बातचीत को क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर संवाद के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हालांकि, इन मुलाकातों को किसी नए औपचारिक गठबंधन के रूप में देखना जल्दबाजी होगी। भारत अपनी स्वतंत्र विदेश नीति और रणनीतिक संतुलन को बनाए रखते हुए विभिन्न शक्तियों के साथ संवाद करता रहा है।
सुरक्षा से आगे आर्थिक एजेंडा
बिश्केक सम्मेलन में SCO के एजेंडे में केवल सुरक्षा ही नहीं, बल्कि व्यापार, डिजिटल तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी भी शामिल रहे। सम्मेलन से जुड़े दस्तावेजों में संगठन के भीतर सहयोग को इन क्षेत्रों में आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया।
SCO के मौजूदा सदस्य देशों में भारत, चीन, रूस, पाकिस्तान, ईरान, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान और बेलारूस शामिल हैं। संगठन ऐसे समय में बैठक कर रहा है जब पश्चिम एशिया में संघर्ष और रूस-यूक्रेन युद्ध समेत कई बड़े भू-राजनीतिक संकट जारी हैं।
भारत के लिए क्यों अहम?
भारत के लिए SCO मध्य एशिया और व्यापक यूरेशियाई क्षेत्र के साथ सुरक्षा, आर्थिक और कूटनीतिक संबंध मजबूत करने का महत्वपूर्ण मंच है। आतंकवाद के खिलाफ सहयोग को संस्थागत रूप देने का प्रयास भारत की सुरक्षा प्राथमिकताओं से सीधे जुड़ता है। बिश्केक सम्मेलन में भारत ने एक तरफ आतंकवाद पर अपना कड़ा रुख दोहराया, वहीं चीन और रूस जैसे प्रमुख साझेदारों के साथ संवाद भी बनाए रखा। यही संतुलन SCO में भारत की रणनीतिक भूमिका को महत्वपूर्ण बनाता है।
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