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वक्फ बिल संसद में पेश, सरकार ने मुसलमानों को दिए ये 5 ‘भरोसे’
JAGRAN DESK
लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक 2025 पेश हो गया है. केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने विधेयक पेश करते हुए मुसलमानों को पांच प्रमुख आश्वासन दिए, जिसमें मस्जिदों पर कार्रवाई से इनकार और धार्मिक गतिविधियों में हस्तक्षेप न करने का वादा शामिल है. विपक्ष ने विधेयक पर चर्चा के लिए अधिक समय की मांग की और हंगामा किया. सरकार ने दावा किया कि यह विधेयक केवल वक्फ संपत्तियों से संबंधित है और धार्मिक स्थलों से इसका कोई लेना-देना नहीं है.
लोकसभा में बुधवार दोपहर वक्फ संशोधन विधेयक 2025 पेश किया गया. केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू प्रश्नकाल के बाद दोपहर इसे सदन में चर्चा के लिए पेश किया. इस बिल पर चर्चा के लिए 8 घंटे का समय तय किया गया है. संसद में बिल पेश करने के दौरान विपक्ष का जमकर हंगामा देखने को मिला. विपक्ष ने चर्चा का समय बढ़ाकर 12 घंटे करने की मांग भी की है. बिल पेश करने के दौरान सरकार ने मुसलमानों को 5 भरोसे दिए हैं.
किरेन रिजिजू ने कहा कि इस बिल को लेकर 9727772 याचिकाएं आई थी, आज तक कभी भी इससे ज्यादा संख्या में किसी भी बिल को लेकर याचिकाएं नहीं आई हैं. 284 डेलिगेशन ने अलग-अलग कमेटी के सामने अपनी बात रखी है. इस बिल का पॉजिटिव सोच के साथ विरोध करने वाले भी समर्थन करेंगे.
सरकार ने मुसलमानों को दिए ये 5 ‘भरोसे’
1. किरेन रिजिजू ने संसद में बिल पेश करने के दौरान मुसलमानों को भरोसा दिलाया कि किसी भी मस्जिद पर कोई कार्रवाई का प्रावधान इस बिल में नहीं है. ये सिर्फ संपत्ति का मामला है धार्मिक संस्थानों से इस बिल का कोई लेना देना नहीं है.
2. सरकार ने बताया कि वक्फ संशोधन बिल में किसी भी धार्मिक स्थल-मस्जिद की व्यवस्था में किसी भी तरह के हस्तक्षेप का कोई प्रावधान नहीं है. इसमें कोई बदलाव न ही कोई हस्तक्षेप किया जाएगा.
3. वक्फ संशोधन बिल में किसी भी धार्मिक कार्य कलाप में हस्तक्षेप का कोई प्रावधान नहीं है. हम किसी भी मस्जिद के संचालन में हस्तक्षेप करने नहीं जा रहे हैं.वक्फ बोर्ड कानून के दायरे में होगा, इसमें कुछ भी कानून के उलट नहीं किया जाएगा.
4. रिजिजू ने कहा कि कलेक्टर से ऊपर कोई भी अधिकारी सरकारी जमीन और किसी विवादित जमीन का विवाद देखेगा। जब वक्फ प्रॉपर्टी क्रिएट करेंगे तो किसी आदिवासी एरिया में जाकर नहीं कर सकते हैं. यह बदलाव अहम है. किसी भी मस्जिद को कोई कार्रवाई का प्रावधान नहीं है. सरकार ने बताया कि इस बिल में मस्जिद के मैनेजमेंट में दखलंदाजी का प्रावधान नहीं कर रहे हैं.
5. सरकार ने वादा किया कि Centre of council में कुल 22 सदस्यों में 4 सदस्य गैर-मुसलमानों से ज्यादा नहीं हो सकते हैं. पूर्व अधिकारियों सहित संसद के 3 सदस्य चुने जाएंगे. संसद के सदस्य किसी भी धर्म के हो सकते हैं.
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वक्फ बिल संसद में पेश, सरकार ने मुसलमानों को दिए ये 5 ‘भरोसे’
JAGRAN DESK
लोकसभा में बुधवार दोपहर वक्फ संशोधन विधेयक 2025 पेश किया गया. केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू प्रश्नकाल के बाद दोपहर इसे सदन में चर्चा के लिए पेश किया. इस बिल पर चर्चा के लिए 8 घंटे का समय तय किया गया है. संसद में बिल पेश करने के दौरान विपक्ष का जमकर हंगामा देखने को मिला. विपक्ष ने चर्चा का समय बढ़ाकर 12 घंटे करने की मांग भी की है. बिल पेश करने के दौरान सरकार ने मुसलमानों को 5 भरोसे दिए हैं.
किरेन रिजिजू ने कहा कि इस बिल को लेकर 9727772 याचिकाएं आई थी, आज तक कभी भी इससे ज्यादा संख्या में किसी भी बिल को लेकर याचिकाएं नहीं आई हैं. 284 डेलिगेशन ने अलग-अलग कमेटी के सामने अपनी बात रखी है. इस बिल का पॉजिटिव सोच के साथ विरोध करने वाले भी समर्थन करेंगे.
सरकार ने मुसलमानों को दिए ये 5 ‘भरोसे’
1. किरेन रिजिजू ने संसद में बिल पेश करने के दौरान मुसलमानों को भरोसा दिलाया कि किसी भी मस्जिद पर कोई कार्रवाई का प्रावधान इस बिल में नहीं है. ये सिर्फ संपत्ति का मामला है धार्मिक संस्थानों से इस बिल का कोई लेना देना नहीं है.
2. सरकार ने बताया कि वक्फ संशोधन बिल में किसी भी धार्मिक स्थल-मस्जिद की व्यवस्था में किसी भी तरह के हस्तक्षेप का कोई प्रावधान नहीं है. इसमें कोई बदलाव न ही कोई हस्तक्षेप किया जाएगा.
3. वक्फ संशोधन बिल में किसी भी धार्मिक कार्य कलाप में हस्तक्षेप का कोई प्रावधान नहीं है. हम किसी भी मस्जिद के संचालन में हस्तक्षेप करने नहीं जा रहे हैं.वक्फ बोर्ड कानून के दायरे में होगा, इसमें कुछ भी कानून के उलट नहीं किया जाएगा.
4. रिजिजू ने कहा कि कलेक्टर से ऊपर कोई भी अधिकारी सरकारी जमीन और किसी विवादित जमीन का विवाद देखेगा। जब वक्फ प्रॉपर्टी क्रिएट करेंगे तो किसी आदिवासी एरिया में जाकर नहीं कर सकते हैं. यह बदलाव अहम है. किसी भी मस्जिद को कोई कार्रवाई का प्रावधान नहीं है. सरकार ने बताया कि इस बिल में मस्जिद के मैनेजमेंट में दखलंदाजी का प्रावधान नहीं कर रहे हैं.
5. सरकार ने वादा किया कि Centre of council में कुल 22 सदस्यों में 4 सदस्य गैर-मुसलमानों से ज्यादा नहीं हो सकते हैं. पूर्व अधिकारियों सहित संसद के 3 सदस्य चुने जाएंगे. संसद के सदस्य किसी भी धर्म के हो सकते हैं.
