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SC का फैसला: पकड़े गए सामान्य कुत्तों को नसबंदी के बाद छोड़ा जाएगा, खूंखार को कैद में रखा जाएगा
Jagran Desk
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को आवारा कुत्तों के मुद्दे पर अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जिन कुत्तों को पकड़ा गया है, उन्हें नसबंदी और टीकाकरण के बाद ही छोड़ा जाएगा।
केवल वही कुत्ते कैद में रखे जाएंगे जिनमें रेबीज संक्रमण है या जिनका व्यवहार आक्रामक है।
सुप्रीम कोर्ट ने 11 अगस्त के उस निर्देश पर रोक लगा दी जिसमें कहा गया था कि पकड़े गए आवारा कुत्तों को छोड़ा नहीं जाएगा। 14 अगस्त को जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की स्पेशल बेंच ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रखा था।
नेशनल लेवल नीति की जरूरत
जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा कि आवारा कुत्तों के मामले में देशव्यापी नीति की आवश्यकता है। सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को इस मामले में पक्षकार बनाया गया है। कोर्ट ने यह भी कहा कि जहां भी हाईकोर्ट में इस विषय पर मामले लंबित हैं, उन्हें सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर किया जाए। अगली सुनवाई अक्टूबर 2025 में निर्धारित की गई है।
जुर्माना और पालन
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि यदि कोई व्यक्ति कुत्तों को पकड़ने से रोकता है, तो उस पर दो लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
इस फैसले से कुत्तों के प्रबंधन और सुरक्षा को लेकर स्पष्ट दिशा मिली है। अब सामान्य कुत्तों को नसबंदी और टीकाकरण के बाद छोड़ा जाएगा, वहीं खूंखार और संक्रमित कुत्तों को कैद में रखा जाएगा।
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SC का फैसला: पकड़े गए सामान्य कुत्तों को नसबंदी के बाद छोड़ा जाएगा, खूंखार को कैद में रखा जाएगा
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केवल वही कुत्ते कैद में रखे जाएंगे जिनमें रेबीज संक्रमण है या जिनका व्यवहार आक्रामक है।
सुप्रीम कोर्ट ने 11 अगस्त के उस निर्देश पर रोक लगा दी जिसमें कहा गया था कि पकड़े गए आवारा कुत्तों को छोड़ा नहीं जाएगा। 14 अगस्त को जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की स्पेशल बेंच ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रखा था।
नेशनल लेवल नीति की जरूरत
जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा कि आवारा कुत्तों के मामले में देशव्यापी नीति की आवश्यकता है। सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को इस मामले में पक्षकार बनाया गया है। कोर्ट ने यह भी कहा कि जहां भी हाईकोर्ट में इस विषय पर मामले लंबित हैं, उन्हें सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर किया जाए। अगली सुनवाई अक्टूबर 2025 में निर्धारित की गई है।
जुर्माना और पालन
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि यदि कोई व्यक्ति कुत्तों को पकड़ने से रोकता है, तो उस पर दो लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
इस फैसले से कुत्तों के प्रबंधन और सुरक्षा को लेकर स्पष्ट दिशा मिली है। अब सामान्य कुत्तों को नसबंदी और टीकाकरण के बाद छोड़ा जाएगा, वहीं खूंखार और संक्रमित कुत्तों को कैद में रखा जाएगा।
