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शिवराज सिंह चौहान बोले- ‘जिसका खेत, उसकी रेत’: जम्मू के बाढ़ग्रस्त इलाकों में किसानों से की मुलाकात
Digital Desk
केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर के बाढ़ प्रभावित इलाकों के दौरे पर पहुंचे।
उन्होंने आरएसपुरा के ग्राम बडयाल ब्राह्मण में किसानों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं और राहत उपायों की घोषणाएं कीं।
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में किसानों को इस आपदा से उबारेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि राजनीति से ऊपर उठकर सबसे पहले किसानों और गरीबों को संकट से बाहर निकालना प्राथमिकता है।
किसानों को खेत की रेत बेचने की अनुमति देने की वकालत
कृषि मंत्री ने कहा कि बाढ़ से कई किसानों के खेतों में रेत जमा हो गई है। ऐसे में राज्य सरकार को यह व्यवस्था करनी चाहिए कि “जिसका खेत, उसकी रेत” यानी किसान अपने खेत की रेत खुद बेच सकें। इसके लिए सामान्य खनन नियम लागू न किए जाएं।
एनडीआरएफ के प्रावधानों के तहत सहायता
शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि एनडीआरएफ नियमों के तहत मौत की स्थिति में 4 लाख, विकलांग होने पर 74 हजार और गाद निकालने पर 18 हजार रुपए प्रति हेक्टेयर देने का प्रावधान है। पहाड़ खिसकने से फसल का नुकसान होने पर सीमांत किसानों को 47 हजार रुपए मिलेंगे। सब्जी व बागवानी फसलों के लिए 17 हजार रुपए प्रति हेक्टेयर और कृषि वानिकी के लिए 22,500 रुपए तक की सहायता मिलेगी।
पशुधन और मकान क्षति पर मदद
पशुधन के नुकसान पर भी मुआवजा देने का प्रावधान है—दुधारू पशु पर 37,500, घोड़ा और बैल पर 32 हजार तथा बछड़ा, टट्टू और खच्चर पर 20 हजार रुपए। मकानों के टूटने की स्थिति में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 1.30 लाख रुपए, शौचालय के लिए अलग से राशि और मनरेगा मजदूरी के रूप में 40 हजार रुपए दिए जाएंगे।
अतिरिक्त मांग और सहायता की घोषणाएं
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मनरेगा के अंतर्गत मजदूरी 100 दिन से बढ़ाकर 150 दिन करने की मांग केंद्र द्वारा उठाई जाएगी।
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जिन किसानों के पास स्वामित्व प्रमाण नहीं है, यदि राज्य सरकार सत्यापन कर दे तो उन्हें प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का लाभ मिलेगा।
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जम्मू-कश्मीर के किसानों के खातों में पीएम किसान सम्मान निधि की अगली किश्त जल्द ही जमा की जाएगी।
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शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में किसानों को इस आपदा से उबारेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि राजनीति से ऊपर उठकर सबसे पहले किसानों और गरीबों को संकट से बाहर निकालना प्राथमिकता है।
किसानों को खेत की रेत बेचने की अनुमति देने की वकालत
कृषि मंत्री ने कहा कि बाढ़ से कई किसानों के खेतों में रेत जमा हो गई है। ऐसे में राज्य सरकार को यह व्यवस्था करनी चाहिए कि “जिसका खेत, उसकी रेत” यानी किसान अपने खेत की रेत खुद बेच सकें। इसके लिए सामान्य खनन नियम लागू न किए जाएं।
एनडीआरएफ के प्रावधानों के तहत सहायता
शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि एनडीआरएफ नियमों के तहत मौत की स्थिति में 4 लाख, विकलांग होने पर 74 हजार और गाद निकालने पर 18 हजार रुपए प्रति हेक्टेयर देने का प्रावधान है। पहाड़ खिसकने से फसल का नुकसान होने पर सीमांत किसानों को 47 हजार रुपए मिलेंगे। सब्जी व बागवानी फसलों के लिए 17 हजार रुपए प्रति हेक्टेयर और कृषि वानिकी के लिए 22,500 रुपए तक की सहायता मिलेगी।
पशुधन और मकान क्षति पर मदद
पशुधन के नुकसान पर भी मुआवजा देने का प्रावधान है—दुधारू पशु पर 37,500, घोड़ा और बैल पर 32 हजार तथा बछड़ा, टट्टू और खच्चर पर 20 हजार रुपए। मकानों के टूटने की स्थिति में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 1.30 लाख रुपए, शौचालय के लिए अलग से राशि और मनरेगा मजदूरी के रूप में 40 हजार रुपए दिए जाएंगे।
अतिरिक्त मांग और सहायता की घोषणाएं
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मनरेगा के अंतर्गत मजदूरी 100 दिन से बढ़ाकर 150 दिन करने की मांग केंद्र द्वारा उठाई जाएगी।
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जिन किसानों के पास स्वामित्व प्रमाण नहीं है, यदि राज्य सरकार सत्यापन कर दे तो उन्हें प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का लाभ मिलेगा।
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