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शुभांशु शुक्ला बोले – स्पेस स्टेशन जाना सिर्फ मेरा नहीं, पूरे देश का मिशन था
Jagran Desk
इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) से लौटे भारतीय एस्ट्रोनॉट ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने गुरुवार को दिल्ली में मीडिया से बातचीत की।
उन्होंने कहा कि “कितनी भी ट्रेनिंग कर लो, लेकिन असली अनुभव अंतरिक्ष में जाकर ही मिलता है। ये मिशन सिर्फ मेरा नहीं, बल्कि पूरे देश का सपना था।”
शुभांशु शुक्ला एक्सियम मिशन के तहत दो हफ्ते ISS में रहे और इस दौरान वे मिशन पायलट और सिस्टम कमांडर की भूमिका में थे। उन्होंने वहां कई वैज्ञानिक प्रयोग किए और तस्वीरें भी लीं।
गगनयान होगा अगला बड़ा कदम
शुभांशु ने कहा कि अब उनकी अगली तैयारी गगनयान मिशन के लिए होगी। इसरो का यह मिशन भारत का पहला मानवयुक्त अंतरिक्ष अभियान है। 2027 में इसमें वायुसेना के तीन पायलटों को 400 किमी ऊंचाई पर स्पेसक्राफ्ट से भेजा जाएगा। तीन दिन ऑर्बिट में रहने के बाद उनकी लैंडिंग हिंद महासागर में होगी।
गगनयान की लागत लगभग 20,193 करोड़ रुपए है और इसकी सफलता के साथ भारत, रूस-अमेरिका-चीन के बाद अंतरिक्ष में इंसान भेजने वाला चौथा देश बनेगा।
भारत को क्या मिलेगा गगनयान से?
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भारत को वैश्विक स्पेस इंडस्ट्री में बड़ा हिस्सा मिलेगा, जो 2035 तक 154 लाख करोड़ रुपए की हो सकती है।
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रिसर्च और डेवलपमेंट के नए अवसर और रोजगार पैदा होंगे।
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भारत का अपना स्पेस स्टेशन बनाने का रास्ता खुलेगा।
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अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्पेस सहयोग और निवेश बढ़ेगा।
क्या-क्या तैयारी हो चुकी है?
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ISRO ने इंसान को स्पेस तक ले जाने वाला HLVM3 रॉकेट तैयार कर लिया है।
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वायुसेना के चार पायलट्स को चुना गया और रूस व भारत में उनकी ट्रेनिंग हो चुकी है।
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क्रू मॉड्यूल, सर्विस मॉड्यूल और क्रू एस्केप सिस्टम अंतिम चरण में हैं।
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अरब सागर में स्प्लैशडाउन की रिकवरी टेस्टिंग भी की जा चुकी है।
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मानव रहित मिशन के लिए ‘व्योममित्र’ रोबोट भी तैयार है।
हालांकि, अभी भी करीब 2300 टेस्ट बाकी हैं और 2025 तक पहला मानव रहित मिशन लॉन्च होने की उम्मीद है।
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शुभांशु शुक्ला बोले – स्पेस स्टेशन जाना सिर्फ मेरा नहीं, पूरे देश का मिशन था
Jagran Desk
उन्होंने कहा कि “कितनी भी ट्रेनिंग कर लो, लेकिन असली अनुभव अंतरिक्ष में जाकर ही मिलता है। ये मिशन सिर्फ मेरा नहीं, बल्कि पूरे देश का सपना था।”
शुभांशु शुक्ला एक्सियम मिशन के तहत दो हफ्ते ISS में रहे और इस दौरान वे मिशन पायलट और सिस्टम कमांडर की भूमिका में थे। उन्होंने वहां कई वैज्ञानिक प्रयोग किए और तस्वीरें भी लीं।
गगनयान होगा अगला बड़ा कदम
शुभांशु ने कहा कि अब उनकी अगली तैयारी गगनयान मिशन के लिए होगी। इसरो का यह मिशन भारत का पहला मानवयुक्त अंतरिक्ष अभियान है। 2027 में इसमें वायुसेना के तीन पायलटों को 400 किमी ऊंचाई पर स्पेसक्राफ्ट से भेजा जाएगा। तीन दिन ऑर्बिट में रहने के बाद उनकी लैंडिंग हिंद महासागर में होगी।
गगनयान की लागत लगभग 20,193 करोड़ रुपए है और इसकी सफलता के साथ भारत, रूस-अमेरिका-चीन के बाद अंतरिक्ष में इंसान भेजने वाला चौथा देश बनेगा।
भारत को क्या मिलेगा गगनयान से?
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भारत को वैश्विक स्पेस इंडस्ट्री में बड़ा हिस्सा मिलेगा, जो 2035 तक 154 लाख करोड़ रुपए की हो सकती है।
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रिसर्च और डेवलपमेंट के नए अवसर और रोजगार पैदा होंगे।
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भारत का अपना स्पेस स्टेशन बनाने का रास्ता खुलेगा।
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अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्पेस सहयोग और निवेश बढ़ेगा।
क्या-क्या तैयारी हो चुकी है?
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ISRO ने इंसान को स्पेस तक ले जाने वाला HLVM3 रॉकेट तैयार कर लिया है।
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वायुसेना के चार पायलट्स को चुना गया और रूस व भारत में उनकी ट्रेनिंग हो चुकी है।
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क्रू मॉड्यूल, सर्विस मॉड्यूल और क्रू एस्केप सिस्टम अंतिम चरण में हैं।
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अरब सागर में स्प्लैशडाउन की रिकवरी टेस्टिंग भी की जा चुकी है।
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मानव रहित मिशन के लिए ‘व्योममित्र’ रोबोट भी तैयार है।
हालांकि, अभी भी करीब 2300 टेस्ट बाकी हैं और 2025 तक पहला मानव रहित मिशन लॉन्च होने की उम्मीद है।
