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उपराष्ट्रपति पद की दौड़ में थावरचंद गहलोत और ओम माथुर सबसे आगे, चुनाव आयोग ने शुरू की तैयारी
Jagran Desk
देश के नए उपराष्ट्रपति के चुनाव को लेकर हलचल तेज़ हो गई है। उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के महज तीन दिन बाद चुनाव आयोग ने चुनावी प्रक्रिया की तैयारियां शुरू कर दी हैं। आयोग जल्द ही मतदान की तारीखों का ऐलान करेगा।
इस बीच भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इस अहम संवैधानिक पद के लिए संभावित नामों पर विचार-विमर्श तेज़ कर दिया है। सूत्रों के अनुसार, कर्नाटक के वर्तमान राज्यपाल थावरचंद गहलोत और सिक्किम के राज्यपाल ओम माथुर इस रेस में सबसे आगे हैं।
भाजपा चाहती है विचारधारा के अनुकूल उम्मीदवार
भाजपा की कोशिश है कि इस पद के लिए पार्टी के भीतर से ही ऐसा नाम सामने लाया जाए, जो विचारधारा से पूरी तरह जुड़ा हो और सहयोगी दलों को भी सहज स्वीकार्य लगे। पार्टी इस बार भी रणनीतिक रूप से जातीय और राजनीतिक संतुलन साधने की दिशा में काम कर रही है।
गहलोत: दलित चेहरा और अनुभवी नेता
77 वर्षीय थावरचंद गहलोत दलित समुदाय से आते हैं। वे लंबे समय तक राज्यसभा में नेता के रूप में कार्य कर चुके हैं और केंद्रीय मंत्री भी रह चुके हैं। वे भाजपा की सर्वोच्च निर्णयकारी संस्था—पार्लियामेंट्री बोर्ड—के सदस्य भी रह चुके हैं। उनका प्रशासनिक अनुभव और मध्य प्रदेश से संबंध उन्हें एक मजबूत दावेदार बनाते हैं।
माथुर: मोदी-शाह के करीबी, संघ से गहरा नाता
ओम माथुर, जो फिलहाल सिक्किम के राज्यपाल हैं, राजस्थान से ताल्लुक रखते हैं। वे पार्टी के वरिष्ठ रणनीतिकार माने जाते हैं और पीएम मोदी व गृहमंत्री अमित शाह के करीबी माने जाते हैं। वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में प्रचारक रह चुके हैं, जिससे उनकी विचारधारा पार्टी के मूल स्वरूप से मेल खाती है।
हरिवंश हो सकते हैं तीसरा विकल्प
यदि भाजपा को सहयोगी दलों के बीच इन नामों पर आम सहमति नहीं बनती, तो उपसभापति हरिवंश को उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया जा सकता है। वे जेडीयू से हैं लेकिन एनडीए की विचारधारा के काफी करीब माने जाते हैं।
विपक्ष भी देगा कड़ी टक्कर
भाजपा के वरिष्ठ नेता मानते हैं कि विपक्ष भी इस पद के लिए मजबूत चेहरा मैदान में उतार सकता है। ऐसे में एनडीए को जातीय संतुलन, राजनीतिक अनुभव और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को ध्यान में रखकर रणनीति बनानी होगी।
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इस बीच भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इस अहम संवैधानिक पद के लिए संभावित नामों पर विचार-विमर्श तेज़ कर दिया है। सूत्रों के अनुसार, कर्नाटक के वर्तमान राज्यपाल थावरचंद गहलोत और सिक्किम के राज्यपाल ओम माथुर इस रेस में सबसे आगे हैं।
भाजपा चाहती है विचारधारा के अनुकूल उम्मीदवार
भाजपा की कोशिश है कि इस पद के लिए पार्टी के भीतर से ही ऐसा नाम सामने लाया जाए, जो विचारधारा से पूरी तरह जुड़ा हो और सहयोगी दलों को भी सहज स्वीकार्य लगे। पार्टी इस बार भी रणनीतिक रूप से जातीय और राजनीतिक संतुलन साधने की दिशा में काम कर रही है।
गहलोत: दलित चेहरा और अनुभवी नेता
77 वर्षीय थावरचंद गहलोत दलित समुदाय से आते हैं। वे लंबे समय तक राज्यसभा में नेता के रूप में कार्य कर चुके हैं और केंद्रीय मंत्री भी रह चुके हैं। वे भाजपा की सर्वोच्च निर्णयकारी संस्था—पार्लियामेंट्री बोर्ड—के सदस्य भी रह चुके हैं। उनका प्रशासनिक अनुभव और मध्य प्रदेश से संबंध उन्हें एक मजबूत दावेदार बनाते हैं।
माथुर: मोदी-शाह के करीबी, संघ से गहरा नाता
ओम माथुर, जो फिलहाल सिक्किम के राज्यपाल हैं, राजस्थान से ताल्लुक रखते हैं। वे पार्टी के वरिष्ठ रणनीतिकार माने जाते हैं और पीएम मोदी व गृहमंत्री अमित शाह के करीबी माने जाते हैं। वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में प्रचारक रह चुके हैं, जिससे उनकी विचारधारा पार्टी के मूल स्वरूप से मेल खाती है।
हरिवंश हो सकते हैं तीसरा विकल्प
यदि भाजपा को सहयोगी दलों के बीच इन नामों पर आम सहमति नहीं बनती, तो उपसभापति हरिवंश को उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया जा सकता है। वे जेडीयू से हैं लेकिन एनडीए की विचारधारा के काफी करीब माने जाते हैं।
विपक्ष भी देगा कड़ी टक्कर
भाजपा के वरिष्ठ नेता मानते हैं कि विपक्ष भी इस पद के लिए मजबूत चेहरा मैदान में उतार सकता है। ऐसे में एनडीए को जातीय संतुलन, राजनीतिक अनुभव और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को ध्यान में रखकर रणनीति बनानी होगी।
