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भोपाल में ब्रिक्स सम्मेलन का तीसरा दिन आज, संस्कृति मंत्रियों का आगमन; शाम को वैश्विक सांस्कृतिक महोत्सव
भोपाल (म.प्र.)
मिंटो हॉल में संगीत और संस्कृति का संगम, मध्य प्रदेश की विरासत से रूबरू होंगे विदेशी प्रतिनिधि; शनिवार को होगी ब्रिक्स संस्कृति मंत्रियों की अहम बैठक
राजधानी भोपाल में आयोजित ब्रिक्स सांस्कृतिक सम्मेलन 2026 शुक्रवार को अपने तीसरे दिन में प्रवेश कर गया है। आज का दिन सम्मेलन के लिहाज से सबसे अहम माना जा रहा है, क्योंकि ब्रिक्स सदस्य देशों और भागीदार देशों के संस्कृति मंत्री शहर पहुंचेंगे। दिनभर आधिकारिक कार्यक्रमों के बाद शाम को कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर (मिंटो हॉल) में भव्य ब्रिक्स सांस्कृतिक महोत्सव 2026 आयोजित किया जाएगा। इस आयोजन में भारत समेत कई देशों के प्रसिद्ध कलाकार एक ही मंच पर अपनी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देंगे। सम्मेलन के कारण राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था पहले से ही कड़ी कर दी गई है और आयोजन स्थल के आसपास विशेष इंतजाम किए गए हैं। शहर में अलग-अलग देशों के प्रतिनिधिमंडलों की मौजूदगी के चलते अंतरराष्ट्रीय माहौल भी देखने को मिल रहा है।
कार्यक्रम की शुरुआत भारतीय दर्शन के संदेश ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ के साथ होगी। इसके बाद भारतीय शास्त्रीय संगीत की विविध परंपराओं को एक साथ प्रस्तुत करने वाली विशेष संगीतमय प्रस्तुति आयोजित की जाएगी, जिसमें हिंदुस्तानी और कर्नाटक संगीत की झलक देखने को मिलेगी। आयोजकों के मुताबिक इसका उद्देश्य भारत की समृद्ध संगीत विरासत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करना है। शाम के कार्यक्रम का सबसे प्रमुख आकर्षण ‘ब्रिक्स पीस सॉन्ग – पीस इज द लैंग्वेज ऑफ द लैंड’ रहेगा। इस प्रस्तुति के माध्यम से ब्रिक्स देशों की सांस्कृतिक विविधता और आपसी सहयोग का संदेश संगीत के जरिए दिया जाएगा। बताया जा रहा है कि इसमें शामिल कलाकार अलग-अलग देशों की पारंपरिक संगीत शैलियों को एक सूत्र में पिरोकर मंच पर पेश करेंगे।
सांस्कृतिक महोत्सव में बेलारूस, ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात की सांस्कृतिक झलक भी दिखाई जाएगी। विभिन्न देशों के कलाकार अपनी पारंपरिक संगीत विधाओं और लोकधुनों के जरिए अपनी सांस्कृतिक पहचान प्रस्तुत करेंगे। इसके अलावा ऑर्केस्ट्रा आधारित विशेष प्रस्तुतियां भी कार्यक्रम का हिस्सा रहेंगी, जिनमें वैश्विक शांति, सहयोग और सांस्कृतिक एकता का संदेश प्रमुख रूप से उभरेगा। अधिकारियों के अनुसार इन प्रस्तुतियों की तैयारी पिछले कई दिनों से चल रही थी और कलाकारों ने संयुक्त रिहर्सल भी की है।
शाम को मध्य प्रदेश संस्कृति विभाग की ओर से विशेष नृत्य-नाट्य प्रस्तुति ‘अमृतस्य मध्य प्रदेश – एक अलौकिक सांस्कृतिक महायात्रा’ भी मंचित की जाएगी। प्रसिद्ध कोरियोग्राफर मैत्रेयी पहाड़ी के निर्देशन में तैयार इस प्रस्तुति में 125 से अधिक कलाकार हिस्सा लेंगे। प्रस्तुति के जरिए मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक, धार्मिक और ऐतिहासिक विरासत को नृत्य, संगीत और दृश्य प्रभावों के माध्यम से जीवंत रूप में दिखाया जाएगा। कार्यक्रम की शुरुआत ओंकार की अनुगूंज से होगी और इसके बाद प्रदेश की विभिन्न सांस्कृतिक धरोहरों की झलक मंच पर दिखाई जाएगी।
इस सांस्कृतिक यात्रा में भीमबेटका की प्राचीन शैलचित्र परंपरा, सांची के बौद्ध स्मारक, खजुराहो के विश्व प्रसिद्ध मंदिर समूह और चित्रकूट से जुड़े रामायण प्रसंगों को कलात्मक रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। उज्जैन स्थित संदीपनि आश्रम और भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े प्रसंग भी प्रस्तुति का हिस्सा रहेंगे। इसके साथ ही ग्वालियर, ओरछा और मांडू की ऐतिहासिक विरासत, महेश्वरी और चंदेरी वस्त्र परंपरा तथा बैगा, मटकी और बधाई जैसे जनजातीय लोकनृत्यों को भी मंच पर स्थान दिया गया है। प्रस्तुति के दौरान प्रदेश की प्राकृतिक सुंदरता, धार्मिक स्थलों और सांस्कृतिक विविधता को आधुनिक तकनीक और पारंपरिक कला के मेल से दर्शाने की तैयारी की गई है।
आयोजकों के अनुसार विदेशी प्रतिनिधियों को मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान से परिचित कराने के लिए इस विशेष कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की गई है। इसमें भोपाल की बड़ी झील, उज्जैन के महाकाल मंदिर, ओंकारेश्वर धाम और मां नर्मदा की आरती जैसे प्रमुख धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों की झलक भी दिखाई जाएगी। इसी क्रम में आगामी सिंहस्थ महाकुंभ 2028 की सांस्कृतिक पहचान से भी मेहमानों को परिचित कराया जाएगा। देर शाम राज्य सरकार की ओर से सभी विदेशी प्रतिनिधियों और अतिथियों के सम्मान में रात्रिभोज का आयोजन भी प्रस्तावित है।
शनिवार को सम्मेलन के चौथे दिन भारत की अध्यक्षता में तीसरी ब्रिक्स संस्कृति मंत्रियों की बैठक आयोजित होगी। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक बैठक में सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, संग्रहालयों के विकास, रचनात्मक अर्थव्यवस्था, सांस्कृतिक आदान-प्रदान, क्षमता निर्माण और लोगों के बीच सांस्कृतिक संबंध मजबूत करने जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा होगी। विभिन्न देशों के मंत्री अपने अनुभव साझा करेंगे और भविष्य में साझा परियोजनाओं पर भी विचार किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि बैठक के अंत में एक संयुक्त घोषणा पत्र जारी किया जाएगा, जिसमें सदस्य और भागीदार देशों के बीच सांस्कृतिक सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए साझा दृष्टि और भविष्य की कार्ययोजना शामिल होगी। बैठक के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव विदेशी प्रतिनिधियों के सम्मान में दोपहर के भोजन की मेजबानी करेंगे।
इसके बाद सभी विदेशी मंत्री और प्रतिनिधिमंडल रायसेन जिले स्थित यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल सांची का दौरा करेंगे। यहां प्रतिनिधियों को बौद्ध विरासत और भारतीय स्थापत्य कला से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दी जाएंगी। कार्यक्रम के तहत बुद्ध जंबूदीप परिसर का भ्रमण, विश्व प्रसिद्ध सांची स्तूप का विशेष गाइडेड टूर, चेतियागिरी मंदिर में दर्शन और योग-ध्यान सत्र भी प्रस्तावित हैं। शाम के समय बौद्ध इतिहास और संस्कृति पर आधारित थ्री-डी प्रोजेक्शन मैपिंग तथा लाइट एंड साउंड शो भी आयोजित किया जाएगा, जिसके जरिए भारत की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक तकनीक के साथ प्रस्तुत किया जाएगा।
ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान विदेशी मेहमानों के लिए खानपान का भी विशेष इंतजाम किया गया है। लंच और डिनर में मध्य प्रदेश के पारंपरिक व्यंजनों को प्रमुखता दी गई है। मेन्यू में दाल-बाफला, निमोना, रिकमच, गुइया की सब्जी, चंबल क्षेत्र का पारंपरिक थोपा, चंदिया, बड़ा और मोटे अनाज से तैयार कोदो-कुटकी जैसे व्यंजन शामिल किए गए हैं। साथ ही अलग-अलग देशों से आए प्रतिनिधियों की पसंद को ध्यान में रखते हुए पश्चिमी और ओरिएंटल व्यंजनों की भी अलग श्रृंखला तैयार की गई है, ताकि सभी मेहमान अपनी पसंद के अनुसार भोजन का आनंद ले सकें।
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भोपाल में ब्रिक्स सम्मेलन का तीसरा दिन आज, संस्कृति मंत्रियों का आगमन; शाम को वैश्विक सांस्कृतिक महोत्सव
भोपाल (म.प्र.)
राजधानी भोपाल में आयोजित ब्रिक्स सांस्कृतिक सम्मेलन 2026 शुक्रवार को अपने तीसरे दिन में प्रवेश कर गया है। आज का दिन सम्मेलन के लिहाज से सबसे अहम माना जा रहा है, क्योंकि ब्रिक्स सदस्य देशों और भागीदार देशों के संस्कृति मंत्री शहर पहुंचेंगे। दिनभर आधिकारिक कार्यक्रमों के बाद शाम को कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर (मिंटो हॉल) में भव्य ब्रिक्स सांस्कृतिक महोत्सव 2026 आयोजित किया जाएगा। इस आयोजन में भारत समेत कई देशों के प्रसिद्ध कलाकार एक ही मंच पर अपनी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देंगे। सम्मेलन के कारण राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था पहले से ही कड़ी कर दी गई है और आयोजन स्थल के आसपास विशेष इंतजाम किए गए हैं। शहर में अलग-अलग देशों के प्रतिनिधिमंडलों की मौजूदगी के चलते अंतरराष्ट्रीय माहौल भी देखने को मिल रहा है।
कार्यक्रम की शुरुआत भारतीय दर्शन के संदेश ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ के साथ होगी। इसके बाद भारतीय शास्त्रीय संगीत की विविध परंपराओं को एक साथ प्रस्तुत करने वाली विशेष संगीतमय प्रस्तुति आयोजित की जाएगी, जिसमें हिंदुस्तानी और कर्नाटक संगीत की झलक देखने को मिलेगी। आयोजकों के मुताबिक इसका उद्देश्य भारत की समृद्ध संगीत विरासत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करना है। शाम के कार्यक्रम का सबसे प्रमुख आकर्षण ‘ब्रिक्स पीस सॉन्ग – पीस इज द लैंग्वेज ऑफ द लैंड’ रहेगा। इस प्रस्तुति के माध्यम से ब्रिक्स देशों की सांस्कृतिक विविधता और आपसी सहयोग का संदेश संगीत के जरिए दिया जाएगा। बताया जा रहा है कि इसमें शामिल कलाकार अलग-अलग देशों की पारंपरिक संगीत शैलियों को एक सूत्र में पिरोकर मंच पर पेश करेंगे।
सांस्कृतिक महोत्सव में बेलारूस, ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात की सांस्कृतिक झलक भी दिखाई जाएगी। विभिन्न देशों के कलाकार अपनी पारंपरिक संगीत विधाओं और लोकधुनों के जरिए अपनी सांस्कृतिक पहचान प्रस्तुत करेंगे। इसके अलावा ऑर्केस्ट्रा आधारित विशेष प्रस्तुतियां भी कार्यक्रम का हिस्सा रहेंगी, जिनमें वैश्विक शांति, सहयोग और सांस्कृतिक एकता का संदेश प्रमुख रूप से उभरेगा। अधिकारियों के अनुसार इन प्रस्तुतियों की तैयारी पिछले कई दिनों से चल रही थी और कलाकारों ने संयुक्त रिहर्सल भी की है।
शाम को मध्य प्रदेश संस्कृति विभाग की ओर से विशेष नृत्य-नाट्य प्रस्तुति ‘अमृतस्य मध्य प्रदेश – एक अलौकिक सांस्कृतिक महायात्रा’ भी मंचित की जाएगी। प्रसिद्ध कोरियोग्राफर मैत्रेयी पहाड़ी के निर्देशन में तैयार इस प्रस्तुति में 125 से अधिक कलाकार हिस्सा लेंगे। प्रस्तुति के जरिए मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक, धार्मिक और ऐतिहासिक विरासत को नृत्य, संगीत और दृश्य प्रभावों के माध्यम से जीवंत रूप में दिखाया जाएगा। कार्यक्रम की शुरुआत ओंकार की अनुगूंज से होगी और इसके बाद प्रदेश की विभिन्न सांस्कृतिक धरोहरों की झलक मंच पर दिखाई जाएगी।
इस सांस्कृतिक यात्रा में भीमबेटका की प्राचीन शैलचित्र परंपरा, सांची के बौद्ध स्मारक, खजुराहो के विश्व प्रसिद्ध मंदिर समूह और चित्रकूट से जुड़े रामायण प्रसंगों को कलात्मक रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। उज्जैन स्थित संदीपनि आश्रम और भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े प्रसंग भी प्रस्तुति का हिस्सा रहेंगे। इसके साथ ही ग्वालियर, ओरछा और मांडू की ऐतिहासिक विरासत, महेश्वरी और चंदेरी वस्त्र परंपरा तथा बैगा, मटकी और बधाई जैसे जनजातीय लोकनृत्यों को भी मंच पर स्थान दिया गया है। प्रस्तुति के दौरान प्रदेश की प्राकृतिक सुंदरता, धार्मिक स्थलों और सांस्कृतिक विविधता को आधुनिक तकनीक और पारंपरिक कला के मेल से दर्शाने की तैयारी की गई है।
आयोजकों के अनुसार विदेशी प्रतिनिधियों को मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान से परिचित कराने के लिए इस विशेष कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की गई है। इसमें भोपाल की बड़ी झील, उज्जैन के महाकाल मंदिर, ओंकारेश्वर धाम और मां नर्मदा की आरती जैसे प्रमुख धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों की झलक भी दिखाई जाएगी। इसी क्रम में आगामी सिंहस्थ महाकुंभ 2028 की सांस्कृतिक पहचान से भी मेहमानों को परिचित कराया जाएगा। देर शाम राज्य सरकार की ओर से सभी विदेशी प्रतिनिधियों और अतिथियों के सम्मान में रात्रिभोज का आयोजन भी प्रस्तावित है।
शनिवार को सम्मेलन के चौथे दिन भारत की अध्यक्षता में तीसरी ब्रिक्स संस्कृति मंत्रियों की बैठक आयोजित होगी। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक बैठक में सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, संग्रहालयों के विकास, रचनात्मक अर्थव्यवस्था, सांस्कृतिक आदान-प्रदान, क्षमता निर्माण और लोगों के बीच सांस्कृतिक संबंध मजबूत करने जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा होगी। विभिन्न देशों के मंत्री अपने अनुभव साझा करेंगे और भविष्य में साझा परियोजनाओं पर भी विचार किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि बैठक के अंत में एक संयुक्त घोषणा पत्र जारी किया जाएगा, जिसमें सदस्य और भागीदार देशों के बीच सांस्कृतिक सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए साझा दृष्टि और भविष्य की कार्ययोजना शामिल होगी। बैठक के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव विदेशी प्रतिनिधियों के सम्मान में दोपहर के भोजन की मेजबानी करेंगे।
इसके बाद सभी विदेशी मंत्री और प्रतिनिधिमंडल रायसेन जिले स्थित यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल सांची का दौरा करेंगे। यहां प्रतिनिधियों को बौद्ध विरासत और भारतीय स्थापत्य कला से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दी जाएंगी। कार्यक्रम के तहत बुद्ध जंबूदीप परिसर का भ्रमण, विश्व प्रसिद्ध सांची स्तूप का विशेष गाइडेड टूर, चेतियागिरी मंदिर में दर्शन और योग-ध्यान सत्र भी प्रस्तावित हैं। शाम के समय बौद्ध इतिहास और संस्कृति पर आधारित थ्री-डी प्रोजेक्शन मैपिंग तथा लाइट एंड साउंड शो भी आयोजित किया जाएगा, जिसके जरिए भारत की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक तकनीक के साथ प्रस्तुत किया जाएगा।
ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान विदेशी मेहमानों के लिए खानपान का भी विशेष इंतजाम किया गया है। लंच और डिनर में मध्य प्रदेश के पारंपरिक व्यंजनों को प्रमुखता दी गई है। मेन्यू में दाल-बाफला, निमोना, रिकमच, गुइया की सब्जी, चंबल क्षेत्र का पारंपरिक थोपा, चंदिया, बड़ा और मोटे अनाज से तैयार कोदो-कुटकी जैसे व्यंजन शामिल किए गए हैं। साथ ही अलग-अलग देशों से आए प्रतिनिधियों की पसंद को ध्यान में रखते हुए पश्चिमी और ओरिएंटल व्यंजनों की भी अलग श्रृंखला तैयार की गई है, ताकि सभी मेहमान अपनी पसंद के अनुसार भोजन का आनंद ले सकें।
