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अंकिता भंडारी हत्याकांड पर आया बड़ा फैसला: तीनों दोषियों को उम्रकैद, दो साल आठ महीने बाद मिला इंसाफ
JAGRAN DESK
कोटद्वार की अदालत ने सुनाया फैसला, पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता दोषी करार
उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में आखिरकार दो साल आठ महीने बाद 30 मई 2025 को कोटद्वार की अदालत ने फैसला सुना दिया। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने इस जघन्य हत्या के तीनों आरोपियों—पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता—को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। यह फैसला पूरे देश की निगाहों में था, और न्यायालय के इस निर्णय ने पीड़िता के परिवार और न्याय की उम्मीद में संघर्षरत जनसमुदाय को राहत दी है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला सितंबर 2022 का है, जब 19 वर्षीय अंकिता भंडारी की हत्या की खबर ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। अंकिता पौड़ी गढ़वाल के एक रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम करती थी। उसी रिजॉर्ट के मालिक पुलकित आर्य, मैनेजर सौरभ भास्कर और कर्मचारी अंकित गुप्ता ने मिलकर उसे नहर में धक्का देकर हत्या कर दी थी।
हत्या की वजह: अवैध मांग का विरोध
प्रॉसिक्यूशन रिपोर्ट और मीडिया सूत्रों के मुताबिक, अंकिता पर रिजॉर्ट में आने वाले वीआईपी ग्राहकों को “अवैध सेवाएं” देने का दबाव बनाया जा रहा था। अंकिता ने इस तरह की मांगों का विरोध किया, जिससे गुस्साए आरोपियों ने मिलकर उसकी हत्या कर दी।
जांच और न्यायिक प्रक्रिया:
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23 सितंबर 2022 को पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार किया।
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पूछताछ में तीनों ने अपराध स्वीकार किया था।
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मामले की गहन जांच के लिए SIT का गठन किया गया, जिसने 500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की।
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100 गवाहों की गवाही कोर्ट में दर्ज की गई।
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मामले की सुनवाई में कुल 2 साल 8 महीने का वक्त लगा।
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तीन बार सरकारी वकील बदले गए ताकि न्यायिक प्रक्रिया को गति मिल सके।
सामाजिक-राजनीतिक प्रभाव:
इस घटना के बाद पूरे देश में जनआक्रोश देखने को मिला। जगह-जगह प्रदर्शन, कैंडल मार्च, और सोशल मीडिया अभियानों के माध्यम से जनता ने अपनी आवाज बुलंद की।
घटना के बाद तत्कालीन भाजपा नेता और मुख्य आरोपी के पिता विनोद आर्य को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया।
उत्तराखंड सरकार की कार्रवाई:
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अंकिता के पिता और भाई को सरकारी नौकरी दी गई।
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परिवार को ₹25 लाख की आर्थिक सहायता भी दी गई।
न्याय की जीत
अदालत का यह फैसला ना सिर्फ अंकिता भंडारी को इंसाफ दिलाने वाला है, बल्कि यह एक सख्त संदेश भी देता है कि महिलाओं के खिलाफ अत्याचार करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
यह मामला भारतीय न्याय प्रणाली, मीडिया, और जनजागरूकता के उस समन्वय का उदाहरण है, जहां एक आम लड़की के लिए पूरा देश आवाज बना।
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अंकिता भंडारी हत्याकांड पर आया बड़ा फैसला: तीनों दोषियों को उम्रकैद, दो साल आठ महीने बाद मिला इंसाफ
JAGRAN DESK
उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में आखिरकार दो साल आठ महीने बाद 30 मई 2025 को कोटद्वार की अदालत ने फैसला सुना दिया। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने इस जघन्य हत्या के तीनों आरोपियों—पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता—को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। यह फैसला पूरे देश की निगाहों में था, और न्यायालय के इस निर्णय ने पीड़िता के परिवार और न्याय की उम्मीद में संघर्षरत जनसमुदाय को राहत दी है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला सितंबर 2022 का है, जब 19 वर्षीय अंकिता भंडारी की हत्या की खबर ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। अंकिता पौड़ी गढ़वाल के एक रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम करती थी। उसी रिजॉर्ट के मालिक पुलकित आर्य, मैनेजर सौरभ भास्कर और कर्मचारी अंकित गुप्ता ने मिलकर उसे नहर में धक्का देकर हत्या कर दी थी।
हत्या की वजह: अवैध मांग का विरोध
प्रॉसिक्यूशन रिपोर्ट और मीडिया सूत्रों के मुताबिक, अंकिता पर रिजॉर्ट में आने वाले वीआईपी ग्राहकों को “अवैध सेवाएं” देने का दबाव बनाया जा रहा था। अंकिता ने इस तरह की मांगों का विरोध किया, जिससे गुस्साए आरोपियों ने मिलकर उसकी हत्या कर दी।
जांच और न्यायिक प्रक्रिया:
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23 सितंबर 2022 को पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार किया।
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पूछताछ में तीनों ने अपराध स्वीकार किया था।
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मामले की गहन जांच के लिए SIT का गठन किया गया, जिसने 500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की।
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100 गवाहों की गवाही कोर्ट में दर्ज की गई।
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मामले की सुनवाई में कुल 2 साल 8 महीने का वक्त लगा।
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तीन बार सरकारी वकील बदले गए ताकि न्यायिक प्रक्रिया को गति मिल सके।
सामाजिक-राजनीतिक प्रभाव:
इस घटना के बाद पूरे देश में जनआक्रोश देखने को मिला। जगह-जगह प्रदर्शन, कैंडल मार्च, और सोशल मीडिया अभियानों के माध्यम से जनता ने अपनी आवाज बुलंद की।
घटना के बाद तत्कालीन भाजपा नेता और मुख्य आरोपी के पिता विनोद आर्य को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया।
उत्तराखंड सरकार की कार्रवाई:
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अंकिता के पिता और भाई को सरकारी नौकरी दी गई।
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परिवार को ₹25 लाख की आर्थिक सहायता भी दी गई।
न्याय की जीत
अदालत का यह फैसला ना सिर्फ अंकिता भंडारी को इंसाफ दिलाने वाला है, बल्कि यह एक सख्त संदेश भी देता है कि महिलाओं के खिलाफ अत्याचार करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
यह मामला भारतीय न्याय प्रणाली, मीडिया, और जनजागरूकता के उस समन्वय का उदाहरण है, जहां एक आम लड़की के लिए पूरा देश आवाज बना।
