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समोसे बेचने वाले पिता की बेटी बनी सिंगिंग स्टार, 38 की हुईं नेहा कक्कड़
बालीवुड डेस्क
चार साल की उम्र में जगरातों से शुरू हुआ सफर, गरीबी, संघर्ष, विवाद और सफलता के बीच नेहा कक्कड़ ने बनाई अपनी अलग पहचान।
भारतीय संगीत जगत की लोकप्रिय गायिका नेहा कक्कड़ आज अपना 38वां जन्मदिन मना रही हैं। लाखों दिलों की धड़कन बन चुकी नेहा की कहानी सिर्फ एक सफल सिंगर की कहानी नहीं है, बल्कि संघर्ष, मेहनत और सपनों को सच करने की मिसाल भी है। आज जिस नेहा कक्कड़ के गाने रिलीज होते ही करोड़ों व्यूज हासिल कर लेते हैं, कभी वही नेहा बेहद साधारण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवार में पली-बढ़ी थीं। उनका बचपन कठिनाइयों से भरा रहा, लेकिन उन्होंने हालात को अपनी मंजिल के रास्ते की बाधा नहीं बनने दिया।
उत्तराखंड के ऋषिकेश में जन्मी नेहा कक्कड़ तीन भाई-बहनों में सबसे छोटी हैं। उनके बड़े भाई टोनी कक्कड़ और बहन सोनू कक्कड़ भी संगीत जगत से जुड़े हुए हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर थी कि पूरा परिवार एक छोटे से किराए के कमरे में रहता था। उस कमरे में अलग से रसोई तक नहीं थी। माता-पिता और तीनों बच्चे उसी एक कमरे में अपना जीवन गुजारते थे। परिवार की आर्थिक परेशानियां इतनी थीं कि रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना भी मुश्किल हो जाता था।
जब नेहा छोटी थीं, तब उनके पिता परिवार की बेहतर आजीविका की तलाश में दिल्ली आ गए। यहां उन्होंने एक स्कूल के बाहर समोसे बेचने का काम शुरू किया। इसी बीच परिवार की मदद करने के लिए बड़ी बहन सोनू कक्कड़ ने जगरातों में भजन गाना शुरू किया। बाद में भाई टोनी और फिर चार साल की उम्र में नेहा भी इस सफर का हिस्सा बन गईं। छोटी सी उम्र में रातभर चलने वाले जगरातों में गाना उनके जीवन का हिस्सा बन गया।
नेहा कई बार अपने इंटरव्यू में बता चुकी हैं कि बचपन में उन्हें घंटों मंच पर गाना पड़ता था। कई बार पूरी रात कार्यक्रम चलता था और अगली सुबह स्कूल जाना संभव नहीं हो पाता था। बावजूद इसके उन्होंने संगीत के प्रति अपना जुनून नहीं छोड़ा। परिवार को मिलने वाली छोटी-सी रकम ही उनके जीवन का सहारा थी। धीरे-धीरे उनकी आवाज लोगों के बीच पहचान बनाने लगी। महज पांच साल की उम्र में नेहा ने एक स्थानीय संगीत प्रतियोगिता में हिस्सा लिया और बड़े प्रतिभागियों को पीछे छोड़ते हुए जीत हासिल की। यह उनके आत्मविश्वास को बढ़ाने वाला पहला बड़ा पड़ाव था। इसके बाद उन्होंने शादियों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और धार्मिक आयोजनों में भी प्रस्तुति देना शुरू कर दिया। संगीत उनके जीवन का आधार बन चुका था।
साल 2003 में उनकी बड़ी बहन सोनू कक्कड़ को एक रियलिटी शो के जरिए पहचान मिली और परिवार का मुंबई से जुड़ाव शुरू हुआ। कुछ वर्षों बाद नेहा भी अपने सपनों को पूरा करने के लिए मुंबई पहुंचीं। उस समय उनकी उम्र करीब 16 साल थी। संघर्ष आसान नहीं था। ऑडिशन दर ऑडिशन देना, रिजेक्शन झेलना और खुद को साबित करना उनकी दिनचर्या बन गई थी। नेहा को पहली बड़ी पहचान तब मिली जब उनका चयन लोकप्रिय सिंगिंग रियलिटी शो इंडियन आइडल सीजन-2 में हुआ। हालांकि वह प्रतियोगिता नहीं जीत सकीं, लेकिन इस मंच ने उन्हें देशभर में पहचान दिला दी। शो से बाहर होने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार मेहनत करती रहीं। धीरे-धीरे उन्होंने म्यूजिक एल्बम और फिल्मों में गाने शुरू किए।
बॉलीवुड में उन्हें बड़ा ब्रेक फिल्म "कॉकटेल" के लोकप्रिय गीत "सेकंड हैंड जवानी" से मिला। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। एक के बाद एक कई सुपरहिट गाने उनके खाते में जुड़े और वह देश की सबसे चर्चित महिला गायिकाओं में शामिल हो गईं। उनकी ऊर्जावान आवाज और मंच परफॉर्मेंस ने उन्हें युवा दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय बना दिया।
सफलता के साथ विवाद भी उनके जीवन का हिस्सा बने। कई रीमिक्स गानों को लेकर उन्हें आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। सोशल मीडिया पर कई बार उन्हें ट्रोल भी किया गया। इंडियन आइडल में भावुक होने को लेकर भी वह चर्चा में रहीं। बावजूद इसके नेहा ने हर आलोचना का सामना किया और अपने काम पर फोकस बनाए रखा। उनकी निजी जिंदगी भी लंबे समय तक सुर्खियों में रही। अभिनेता हिमांश कोहली के साथ रिश्ते और फिर ब्रेकअप ने काफी चर्चा बटोरी। ब्रेकअप के बाद नेहा ने सार्वजनिक रूप से डिप्रेशन से जूझने की बात भी स्वीकार की थी। बाद में उन्होंने गायक रोहनप्रीत सिंह से शादी की और यह शादी भी लंबे समय तक मीडिया की सुर्खियों में रही।
हाल के वर्षों में परिवार से जुड़े कुछ विवाद और सोशल मीडिया पर फैली अफवाहें भी चर्चा का विषय बनीं, लेकिन नेहा लगातार अपने संगीत करियर पर ध्यान देती रहीं। आज वह न सिर्फ सफल गायिका हैं बल्कि कई युवा कलाकारों के लिए प्रेरणा भी हैं। चार साल की उम्र में जगरातों से शुरुआत करने वाली नेहा कक्कड़ आज भारतीय संगीत उद्योग का बड़ा नाम हैं। गरीबी, संघर्ष, असफलता, विवाद और चुनौतियों के बावजूद उन्होंने यह साबित किया कि मेहनत और जुनून के दम पर किसी भी मंजिल को हासिल किया जा सकता है। उनका जीवन उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने का साहस रखते हैं।
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समोसे बेचने वाले पिता की बेटी बनी सिंगिंग स्टार, 38 की हुईं नेहा कक्कड़
बालीवुड डेस्क
भारतीय संगीत जगत की लोकप्रिय गायिका नेहा कक्कड़ आज अपना 38वां जन्मदिन मना रही हैं। लाखों दिलों की धड़कन बन चुकी नेहा की कहानी सिर्फ एक सफल सिंगर की कहानी नहीं है, बल्कि संघर्ष, मेहनत और सपनों को सच करने की मिसाल भी है। आज जिस नेहा कक्कड़ के गाने रिलीज होते ही करोड़ों व्यूज हासिल कर लेते हैं, कभी वही नेहा बेहद साधारण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवार में पली-बढ़ी थीं। उनका बचपन कठिनाइयों से भरा रहा, लेकिन उन्होंने हालात को अपनी मंजिल के रास्ते की बाधा नहीं बनने दिया।
उत्तराखंड के ऋषिकेश में जन्मी नेहा कक्कड़ तीन भाई-बहनों में सबसे छोटी हैं। उनके बड़े भाई टोनी कक्कड़ और बहन सोनू कक्कड़ भी संगीत जगत से जुड़े हुए हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर थी कि पूरा परिवार एक छोटे से किराए के कमरे में रहता था। उस कमरे में अलग से रसोई तक नहीं थी। माता-पिता और तीनों बच्चे उसी एक कमरे में अपना जीवन गुजारते थे। परिवार की आर्थिक परेशानियां इतनी थीं कि रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना भी मुश्किल हो जाता था।
जब नेहा छोटी थीं, तब उनके पिता परिवार की बेहतर आजीविका की तलाश में दिल्ली आ गए। यहां उन्होंने एक स्कूल के बाहर समोसे बेचने का काम शुरू किया। इसी बीच परिवार की मदद करने के लिए बड़ी बहन सोनू कक्कड़ ने जगरातों में भजन गाना शुरू किया। बाद में भाई टोनी और फिर चार साल की उम्र में नेहा भी इस सफर का हिस्सा बन गईं। छोटी सी उम्र में रातभर चलने वाले जगरातों में गाना उनके जीवन का हिस्सा बन गया।
नेहा कई बार अपने इंटरव्यू में बता चुकी हैं कि बचपन में उन्हें घंटों मंच पर गाना पड़ता था। कई बार पूरी रात कार्यक्रम चलता था और अगली सुबह स्कूल जाना संभव नहीं हो पाता था। बावजूद इसके उन्होंने संगीत के प्रति अपना जुनून नहीं छोड़ा। परिवार को मिलने वाली छोटी-सी रकम ही उनके जीवन का सहारा थी। धीरे-धीरे उनकी आवाज लोगों के बीच पहचान बनाने लगी। महज पांच साल की उम्र में नेहा ने एक स्थानीय संगीत प्रतियोगिता में हिस्सा लिया और बड़े प्रतिभागियों को पीछे छोड़ते हुए जीत हासिल की। यह उनके आत्मविश्वास को बढ़ाने वाला पहला बड़ा पड़ाव था। इसके बाद उन्होंने शादियों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और धार्मिक आयोजनों में भी प्रस्तुति देना शुरू कर दिया। संगीत उनके जीवन का आधार बन चुका था।
साल 2003 में उनकी बड़ी बहन सोनू कक्कड़ को एक रियलिटी शो के जरिए पहचान मिली और परिवार का मुंबई से जुड़ाव शुरू हुआ। कुछ वर्षों बाद नेहा भी अपने सपनों को पूरा करने के लिए मुंबई पहुंचीं। उस समय उनकी उम्र करीब 16 साल थी। संघर्ष आसान नहीं था। ऑडिशन दर ऑडिशन देना, रिजेक्शन झेलना और खुद को साबित करना उनकी दिनचर्या बन गई थी। नेहा को पहली बड़ी पहचान तब मिली जब उनका चयन लोकप्रिय सिंगिंग रियलिटी शो इंडियन आइडल सीजन-2 में हुआ। हालांकि वह प्रतियोगिता नहीं जीत सकीं, लेकिन इस मंच ने उन्हें देशभर में पहचान दिला दी। शो से बाहर होने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार मेहनत करती रहीं। धीरे-धीरे उन्होंने म्यूजिक एल्बम और फिल्मों में गाने शुरू किए।
बॉलीवुड में उन्हें बड़ा ब्रेक फिल्म "कॉकटेल" के लोकप्रिय गीत "सेकंड हैंड जवानी" से मिला। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। एक के बाद एक कई सुपरहिट गाने उनके खाते में जुड़े और वह देश की सबसे चर्चित महिला गायिकाओं में शामिल हो गईं। उनकी ऊर्जावान आवाज और मंच परफॉर्मेंस ने उन्हें युवा दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय बना दिया।
सफलता के साथ विवाद भी उनके जीवन का हिस्सा बने। कई रीमिक्स गानों को लेकर उन्हें आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। सोशल मीडिया पर कई बार उन्हें ट्रोल भी किया गया। इंडियन आइडल में भावुक होने को लेकर भी वह चर्चा में रहीं। बावजूद इसके नेहा ने हर आलोचना का सामना किया और अपने काम पर फोकस बनाए रखा। उनकी निजी जिंदगी भी लंबे समय तक सुर्खियों में रही। अभिनेता हिमांश कोहली के साथ रिश्ते और फिर ब्रेकअप ने काफी चर्चा बटोरी। ब्रेकअप के बाद नेहा ने सार्वजनिक रूप से डिप्रेशन से जूझने की बात भी स्वीकार की थी। बाद में उन्होंने गायक रोहनप्रीत सिंह से शादी की और यह शादी भी लंबे समय तक मीडिया की सुर्खियों में रही।
हाल के वर्षों में परिवार से जुड़े कुछ विवाद और सोशल मीडिया पर फैली अफवाहें भी चर्चा का विषय बनीं, लेकिन नेहा लगातार अपने संगीत करियर पर ध्यान देती रहीं। आज वह न सिर्फ सफल गायिका हैं बल्कि कई युवा कलाकारों के लिए प्रेरणा भी हैं। चार साल की उम्र में जगरातों से शुरुआत करने वाली नेहा कक्कड़ आज भारतीय संगीत उद्योग का बड़ा नाम हैं। गरीबी, संघर्ष, असफलता, विवाद और चुनौतियों के बावजूद उन्होंने यह साबित किया कि मेहनत और जुनून के दम पर किसी भी मंजिल को हासिल किया जा सकता है। उनका जीवन उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने का साहस रखते हैं।
