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जंतर-मंतर में CJP के प्रदर्शन को JCCJ का समर्थन, अमित जोगी बोले- देश को चाहिए तीसरा राजनीतिक विकल्प
रायपुर,(छ.ग.)
राष्ट्रीय परीक्षा अनियमितताओं के मुद्दे पर आयोजित प्रदर्शन में शामिल होगी जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे), छात्रों के सवालों पर जवाबदेही की मांग तेज।
नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर शनिवार को होने वाले कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन को अब राजनीतिक समर्थन भी मिलने लगा है। जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) ने घोषणा की है कि उसके प्रतिनिधि और कार्यकर्ता इस प्रदर्शन में शामिल होंगे। पार्टी का दावा है कि वह देश की पहली मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टी है जिसने खुलकर इस आंदोलन का समर्थन किया है। यह प्रदर्शन राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी और प्रवेश परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर आयोजित किया जा रहा है, जिसमें केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी प्रमुख रूप से उठाई जा रही है। इस घोषणा के बाद जंतर-मंतर का कार्यक्रम केवल एक छात्र आंदोलन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसे राजनीतिक समर्थन मिलने से इसकी चर्चा और बढ़ गई है।
जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) ने साफ किया है कि उसका समर्थन किसी राजनीतिक गठबंधन के तहत नहीं बल्कि छात्रों और युवाओं के हितों से जुड़े मुद्दों के आधार पर है। पार्टी का कहना है कि परीक्षा प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना समय की जरूरत है। हाल के वर्षों में विभिन्न राष्ट्रीय परीक्षाओं को लेकर उठे विवादों ने लाखों छात्रों और अभिभावकों की चिंताओं को बढ़ाया है। ऐसे में यदि युवा सड़कों पर उतरकर अपनी आवाज उठा रहे हैं तो लोकतांत्रिक व्यवस्था में उनकी बात सुनी जानी चाहिए।
पार्टी अध्यक्ष अमित जोगी ने इस मौके पर कई राजनीतिक टिप्पणियां भी की हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों में केवल किसी विचारधारा से जुड़े रहना पर्याप्त नहीं है, बल्कि जनता के मुद्दों से लगातार जुड़े रहना भी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि राजनीति में बने रहने और संघर्ष करने के लिए जिजीविषा की जरूरत होती है। इसी संदर्भ में उन्होंने कॉकरोच जनता पार्टी के नाम का उल्लेख करते हुए कहा कि राजनीति में टिके रहने के लिए उसी तरह की संघर्ष क्षमता चाहिए, जैसी कठिन परिस्थितियों में जीवित रहने वाले जीवों में दिखाई देती है।
अमित जोगी ने छत्तीसगढ़ी भाषा का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य में कॉकरोच को स्थानीय तौर पर "झेंगुरा" कहा जाता है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी के कार्यकर्ता जंतर-मंतर पर कॉकरोच बनकर नहीं बल्कि गर्व के साथ झेंगुरा बनकर पहुंचेंगे। उनका यह बयान राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। समर्थक इसे प्रतीकात्मक संदेश बता रहे हैं, जबकि विरोधी दल इस पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।
दिलचस्प बात यह है कि जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ ने फिलहाल अपने समर्थन को केवल छात्रों और परीक्षा अनियमितताओं के मुद्दे तक सीमित बताया है। हालांकि पार्टी नेताओं ने यह भी संकेत दिया है कि भविष्य में समान सोच रखने वाले संगठनों और समूहों के साथ सहयोग की संभावनाओं से इनकार नहीं किया जा सकता। इससे यह चर्चा शुरू हो गई है कि क्या आने वाले समय में छात्र आंदोलनों और छोटे राजनीतिक संगठनों के बीच नए प्रकार के राजनीतिक समीकरण बन सकते हैं।
देश में युवाओं के बीच रोजगार, शिक्षा और परीक्षा प्रणाली से जुड़े मुद्दे लगातार महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं। ऐसे में यदि कोई आंदोलन इन विषयों को लेकर व्यापक जनसमर्थन हासिल करता है तो उसका प्रभाव राजनीतिक विमर्श पर भी पड़ सकता है। जंतर-मंतर का यह प्रदर्शन भी इसी संदर्भ में देखा जा रहा है। सोशल मीडिया से शुरू हुआ अभियान अब वास्तविक धरातल पर लोगों को जोड़ने की कोशिश कर रहा है और विभिन्न राज्यों से युवाओं के इसमें शामिल होने की खबरें सामने आ रही हैं।
अमित जोगी ने अपने बयान में यह भी कहा कि देश में भाजपा और कांग्रेस के अलावा एक मजबूत तीसरे राजनीतिक विकल्प की मांग लगातार बढ़ रही है। उनके अनुसार बड़ी राजनीतिक पार्टियों को भी यह समझने की जरूरत है कि युवाओं और आम नागरिकों की अपेक्षाएं बदल रही हैं। उन्होंने कहा कि जन आंदोलनों को केवल विरोध के रूप में नहीं बल्कि आत्ममंथन के अवसर के रूप में भी देखा जाना चाहिए। कई बार ऐसे आंदोलन राजनीतिक दलों को उनकी कमियों का एहसास कराते हैं और सुधार की दिशा में सोचने के लिए मजबूर करते हैं। जंतर-मंतर लंबे समय से देश के विभिन्न जन आंदोलनों और विरोध प्रदर्शनों का केंद्र रहा है। यहां समय-समय पर सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक मुद्दों को लेकर लोग अपनी आवाज उठाते रहे हैं। अब CJP के प्रदर्शन में एक मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल की भागीदारी ने इस कार्यक्रम को अतिरिक्त महत्व दे दिया है। इससे यह सवाल भी उठने लगा है कि क्या यह आंदोलन भविष्य में एक बड़े सामाजिक या राजनीतिक अभियान का रूप ले सकता है।
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जंतर-मंतर में CJP के प्रदर्शन को JCCJ का समर्थन, अमित जोगी बोले- देश को चाहिए तीसरा राजनीतिक विकल्प
रायपुर,(छ.ग.)
नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर शनिवार को होने वाले कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन को अब राजनीतिक समर्थन भी मिलने लगा है। जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) ने घोषणा की है कि उसके प्रतिनिधि और कार्यकर्ता इस प्रदर्शन में शामिल होंगे। पार्टी का दावा है कि वह देश की पहली मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टी है जिसने खुलकर इस आंदोलन का समर्थन किया है। यह प्रदर्शन राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी और प्रवेश परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर आयोजित किया जा रहा है, जिसमें केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी प्रमुख रूप से उठाई जा रही है। इस घोषणा के बाद जंतर-मंतर का कार्यक्रम केवल एक छात्र आंदोलन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसे राजनीतिक समर्थन मिलने से इसकी चर्चा और बढ़ गई है।
जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) ने साफ किया है कि उसका समर्थन किसी राजनीतिक गठबंधन के तहत नहीं बल्कि छात्रों और युवाओं के हितों से जुड़े मुद्दों के आधार पर है। पार्टी का कहना है कि परीक्षा प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना समय की जरूरत है। हाल के वर्षों में विभिन्न राष्ट्रीय परीक्षाओं को लेकर उठे विवादों ने लाखों छात्रों और अभिभावकों की चिंताओं को बढ़ाया है। ऐसे में यदि युवा सड़कों पर उतरकर अपनी आवाज उठा रहे हैं तो लोकतांत्रिक व्यवस्था में उनकी बात सुनी जानी चाहिए।
पार्टी अध्यक्ष अमित जोगी ने इस मौके पर कई राजनीतिक टिप्पणियां भी की हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों में केवल किसी विचारधारा से जुड़े रहना पर्याप्त नहीं है, बल्कि जनता के मुद्दों से लगातार जुड़े रहना भी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि राजनीति में बने रहने और संघर्ष करने के लिए जिजीविषा की जरूरत होती है। इसी संदर्भ में उन्होंने कॉकरोच जनता पार्टी के नाम का उल्लेख करते हुए कहा कि राजनीति में टिके रहने के लिए उसी तरह की संघर्ष क्षमता चाहिए, जैसी कठिन परिस्थितियों में जीवित रहने वाले जीवों में दिखाई देती है।
अमित जोगी ने छत्तीसगढ़ी भाषा का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य में कॉकरोच को स्थानीय तौर पर "झेंगुरा" कहा जाता है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी के कार्यकर्ता जंतर-मंतर पर कॉकरोच बनकर नहीं बल्कि गर्व के साथ झेंगुरा बनकर पहुंचेंगे। उनका यह बयान राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। समर्थक इसे प्रतीकात्मक संदेश बता रहे हैं, जबकि विरोधी दल इस पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।
दिलचस्प बात यह है कि जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ ने फिलहाल अपने समर्थन को केवल छात्रों और परीक्षा अनियमितताओं के मुद्दे तक सीमित बताया है। हालांकि पार्टी नेताओं ने यह भी संकेत दिया है कि भविष्य में समान सोच रखने वाले संगठनों और समूहों के साथ सहयोग की संभावनाओं से इनकार नहीं किया जा सकता। इससे यह चर्चा शुरू हो गई है कि क्या आने वाले समय में छात्र आंदोलनों और छोटे राजनीतिक संगठनों के बीच नए प्रकार के राजनीतिक समीकरण बन सकते हैं।
देश में युवाओं के बीच रोजगार, शिक्षा और परीक्षा प्रणाली से जुड़े मुद्दे लगातार महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं। ऐसे में यदि कोई आंदोलन इन विषयों को लेकर व्यापक जनसमर्थन हासिल करता है तो उसका प्रभाव राजनीतिक विमर्श पर भी पड़ सकता है। जंतर-मंतर का यह प्रदर्शन भी इसी संदर्भ में देखा जा रहा है। सोशल मीडिया से शुरू हुआ अभियान अब वास्तविक धरातल पर लोगों को जोड़ने की कोशिश कर रहा है और विभिन्न राज्यों से युवाओं के इसमें शामिल होने की खबरें सामने आ रही हैं।
अमित जोगी ने अपने बयान में यह भी कहा कि देश में भाजपा और कांग्रेस के अलावा एक मजबूत तीसरे राजनीतिक विकल्प की मांग लगातार बढ़ रही है। उनके अनुसार बड़ी राजनीतिक पार्टियों को भी यह समझने की जरूरत है कि युवाओं और आम नागरिकों की अपेक्षाएं बदल रही हैं। उन्होंने कहा कि जन आंदोलनों को केवल विरोध के रूप में नहीं बल्कि आत्ममंथन के अवसर के रूप में भी देखा जाना चाहिए। कई बार ऐसे आंदोलन राजनीतिक दलों को उनकी कमियों का एहसास कराते हैं और सुधार की दिशा में सोचने के लिए मजबूर करते हैं। जंतर-मंतर लंबे समय से देश के विभिन्न जन आंदोलनों और विरोध प्रदर्शनों का केंद्र रहा है। यहां समय-समय पर सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक मुद्दों को लेकर लोग अपनी आवाज उठाते रहे हैं। अब CJP के प्रदर्शन में एक मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल की भागीदारी ने इस कार्यक्रम को अतिरिक्त महत्व दे दिया है। इससे यह सवाल भी उठने लगा है कि क्या यह आंदोलन भविष्य में एक बड़े सामाजिक या राजनीतिक अभियान का रूप ले सकता है।
