RBI के फैसले के बाद भी बाजार में बिकवाली, सेंसेक्स-निफ्टी लाल निशान में बंद

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हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव के बाद गिरावट देखने को मिली। निवेशकों की नजरें पूरे दिन भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति और रेपो रेट फैसले पर टिकी रहीं, लेकिन RBI द्वारा रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखने के बावजूद बाजार में मजबूती कायम नहीं रह सकी। कारोबार खत्म होने तक सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लाल निशान में बंद हुए। शुरुआती बढ़त के बावजूद दिन के दूसरे हिस्से में बिकवाली बढ़ी और बाजार दबाव में आ गया।

कारोबार समाप्त होने पर बीएसई सेंसेक्स 116.67 अंक टूटकर 74,243.34 पर बंद हुआ। वहीं एनएसई निफ्टी भी 49.85 अंक की गिरावट के साथ 23,366.70 के स्तर पर पहुंच गया। दिन की शुरुआत हालांकि सकारात्मक रही थी और शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 300 अंकों से ज्यादा ऊपर चला गया था। निफ्टी भी 23,500 के स्तर को पार करता दिखाई दिया, लेकिन यह बढ़त ज्यादा देर टिक नहीं सकी।

विश्लेषकों का कहना है कि बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह मुनाफावसूली रही। जैसे-जैसे शेयरों के दाम ऊपर गए, कई निवेशकों ने मुनाफा निकालना शुरू कर दिया। इसका असर सबसे पहले बड़े शेयरों पर दिखाई दिया और धीरे-धीरे व्यापक बाजार पर दबाव बढ़ता गया। दिनभर बाजार में अस्थिरता बनी रही और निवेशकों के बीच सतर्कता का माहौल दिखाई दिया।

सेक्टोरल प्रदर्शन की बात करें तो आईटी और मेटल शेयरों में सबसे ज्यादा कमजोरी देखने को मिली। हिंदाल्को, विप्रो, ट्रेंट, कोल इंडिया और TCS जैसे शेयरों में बिकवाली का असर प्रमुख सूचकांकों पर पड़ा। दूसरी ओर कुछ बैंकिंग और वित्तीय शेयरों ने गिरावट को सीमित करने की कोशिश की। अडानी एंटरप्राइजेज, हिंदुस्तान यूनिलीवर, अडानी पोर्ट्स, बजाज फाइनेंस और एक्सिस बैंक जैसे शेयरों में खरीदारी देखने को मिली, जिससे बाजार में बड़ी गिरावट नहीं आई।

बाजार पर दबाव बढ़ने की दूसरी बड़ी वजह RBI द्वारा महंगाई अनुमान बढ़ाना भी माना जा रहा है। केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए महंगाई का अनुमान पहले के मुकाबले बढ़ाया है। बढ़ती ऊर्जा कीमतों और ईंधन लागत को लेकर जताई गई चिंताओं ने निवेशकों की सोच को प्रभावित किया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अगर महंगाई उम्मीद से ज्यादा रहती है तो आगे ब्याज दरों और आर्थिक गतिविधियों पर असर पड़ सकता है।

इसके अलावा आर्थिक विकास दर के अनुमान में कटौती ने भी निवेशकों का भरोसा कुछ कमजोर किया। RBI ने GDP वृद्धि अनुमान को पहले की तुलना में कम किया है, जिसके बाद बाजार में यह चिंता बढ़ी कि आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार आने वाले समय में कुछ धीमी पड़ सकती है। यही वजह रही कि रेपो रेट स्थिर रहने जैसी सकारात्मक खबर भी निवेशकों में उत्साह पैदा नहीं कर सकी।

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05 Jun 2026 By दैनिक जागरण

RBI के फैसले के बाद भी बाजार में बिकवाली, सेंसेक्स-निफ्टी लाल निशान में बंद

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हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव के बाद गिरावट देखने को मिली। निवेशकों की नजरें पूरे दिन भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति और रेपो रेट फैसले पर टिकी रहीं, लेकिन RBI द्वारा रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखने के बावजूद बाजार में मजबूती कायम नहीं रह सकी। कारोबार खत्म होने तक सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लाल निशान में बंद हुए। शुरुआती बढ़त के बावजूद दिन के दूसरे हिस्से में बिकवाली बढ़ी और बाजार दबाव में आ गया।

कारोबार समाप्त होने पर बीएसई सेंसेक्स 116.67 अंक टूटकर 74,243.34 पर बंद हुआ। वहीं एनएसई निफ्टी भी 49.85 अंक की गिरावट के साथ 23,366.70 के स्तर पर पहुंच गया। दिन की शुरुआत हालांकि सकारात्मक रही थी और शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 300 अंकों से ज्यादा ऊपर चला गया था। निफ्टी भी 23,500 के स्तर को पार करता दिखाई दिया, लेकिन यह बढ़त ज्यादा देर टिक नहीं सकी।

विश्लेषकों का कहना है कि बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह मुनाफावसूली रही। जैसे-जैसे शेयरों के दाम ऊपर गए, कई निवेशकों ने मुनाफा निकालना शुरू कर दिया। इसका असर सबसे पहले बड़े शेयरों पर दिखाई दिया और धीरे-धीरे व्यापक बाजार पर दबाव बढ़ता गया। दिनभर बाजार में अस्थिरता बनी रही और निवेशकों के बीच सतर्कता का माहौल दिखाई दिया।

सेक्टोरल प्रदर्शन की बात करें तो आईटी और मेटल शेयरों में सबसे ज्यादा कमजोरी देखने को मिली। हिंदाल्को, विप्रो, ट्रेंट, कोल इंडिया और TCS जैसे शेयरों में बिकवाली का असर प्रमुख सूचकांकों पर पड़ा। दूसरी ओर कुछ बैंकिंग और वित्तीय शेयरों ने गिरावट को सीमित करने की कोशिश की। अडानी एंटरप्राइजेज, हिंदुस्तान यूनिलीवर, अडानी पोर्ट्स, बजाज फाइनेंस और एक्सिस बैंक जैसे शेयरों में खरीदारी देखने को मिली, जिससे बाजार में बड़ी गिरावट नहीं आई।

बाजार पर दबाव बढ़ने की दूसरी बड़ी वजह RBI द्वारा महंगाई अनुमान बढ़ाना भी माना जा रहा है। केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए महंगाई का अनुमान पहले के मुकाबले बढ़ाया है। बढ़ती ऊर्जा कीमतों और ईंधन लागत को लेकर जताई गई चिंताओं ने निवेशकों की सोच को प्रभावित किया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अगर महंगाई उम्मीद से ज्यादा रहती है तो आगे ब्याज दरों और आर्थिक गतिविधियों पर असर पड़ सकता है।

इसके अलावा आर्थिक विकास दर के अनुमान में कटौती ने भी निवेशकों का भरोसा कुछ कमजोर किया। RBI ने GDP वृद्धि अनुमान को पहले की तुलना में कम किया है, जिसके बाद बाजार में यह चिंता बढ़ी कि आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार आने वाले समय में कुछ धीमी पड़ सकती है। यही वजह रही कि रेपो रेट स्थिर रहने जैसी सकारात्मक खबर भी निवेशकों में उत्साह पैदा नहीं कर सकी।

https://www.dainikjagranmpcg.com/business/even-after-rbis-decision-there-is-selling-in-the-market/article-55047

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