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CINTAA में घमासान, 8 सदस्यों के इस्तीफे पर पूनम ढिल्लों का जवाब
बालीवुड न्यूज़
पद के दुरुपयोग और एकतरफा फैसलों के आरोपों को अध्यक्ष ने खारिज किया, कहा- शिकायतों की भाषा बेहद आपत्तिजनक
सिने एंड टीवी आर्टिस्ट्स एसोसिएशन यानी CINTAA में इन दिनों अंदरूनी विवाद खुलकर सामने आ गया है। संगठन की एग्जीक्यूटिव कमेटी के 8 निर्वाचित सदस्यों ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इस्तीफा देने वाले सदस्यों ने मौजूदा कामकाज के तरीके पर सवाल उठाते हुए नेतृत्व पर भरोसा नहीं होने की बात कही और नए चुनाव कराने की मांग रखी। इस पूरे विवाद के बीच CINTAA की अध्यक्ष पूनम ढिल्लों ने पहली बार खुलकर अपना पक्ष रखा है। उन्होंने अपने और वरिष्ठ उपाध्यक्ष पद्मिनी कोल्हापुरे पर लगाए गए आरोपों को खारिज करते हुए उनकी भाषा को बेहद आपत्तिजनक बताया। पूनम ने कहा कि संगठन के लिए काम करते हुए उन्होंने और पद्मिनी ने अपनी तरफ से काफी मेहनत की है।
उनका कहना है कि विवाद के पीछे कुछ ऐसे लोग हैं जो अपनी पसंद के मुताबिक चीजें नहीं होने से नाराज हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस्तीफा देने वालों में हेमंत पांडे, मुकेश ऋषि, साहिला चड्ढा, हेतल परमार, पुनीत इस्सर, विंदू दारा सिंह, विकास वर्मा और दीपक पाराशर शामिल हैं। इन सदस्यों ने संयुक्त इस्तीफे में आरोप लगाया कि एग्जीक्यूटिव कमेटी की पूरी जानकारी या सहमति के बिना कई अहम फैसले लिए गए। उनका दावा है कि CINTAA में सामूहिक चर्चा और संवैधानिक प्रक्रिया का पालन पहले जैसा नहीं रह गया है।
कुछ सदस्यों ने यह भी आरोप लगाया कि संगठन का संचालन सीमित लोगों के हाथ में सिमटता जा रहा है। इस्तीफा देने वालों ने नेतृत्व में भरोसे की कमी बताते हुए नए चुनाव की मांग की है। यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब CINTAA में अध्यक्ष के तौर पर पूनम ढिल्लों का कार्यकाल चल रहा है। पूनम मई 2024 में अध्यक्ष चुनी गई थीं और उनका कार्यकाल 2027 तक बताया गया है। विवाद के बाद संगठन के भीतर फैसले लेने की प्रक्रिया, कमेटी की भूमिका और पदाधिकारियों के अधिकार को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
इस्तीफा देने वाले सदस्यों की शिकायतों में मुख्य मुद्दा निर्णय लेने का तरीका बताया गया है। उनके मुताबिक कुछ महत्वपूर्ण मामलों में एग्जीक्यूटिव कमेटी से पर्याप्त सलाह या मंजूरी नहीं ली गई। शिकायत में सरकारी विभागों, इंडस्ट्री संगठनों और दूसरी संस्थाओं के साथ CINTAA की तरफ से किए गए संवाद का भी जिक्र किया गया है। सदस्यों का आरोप है कि कई मौकों पर संगठन की ओर से जवाब या प्रतिनिधित्व सामूहिक सहमति के बजाय व्यक्तिगत स्तर पर किया गया। उन्होंने इसे संस्था के सामूहिक दायित्व और तय नियमों के खिलाफ बताया।
कुछ आरोपों में यह भी कहा गया कि पदाधिकारियों ने निजी तौर पर नियुक्त वकीलों के साथ सरकारी दफ्तरों का दौरा किया। CINTAA की महासचिव उपासना सिंह ने इस्तीफों की पुष्टि करते हुए बताया कि कुल 11 सदस्यों ने इस्तीफा दिया है, जिनमें एग्जीक्यूटिव कमेटी के 8 निर्वाचित सदस्य शामिल हैं। हालांकि संगठन के कानूनी सलाहकार की ओर से यह स्पष्ट किया गया कि सिर्फ इन इस्तीफों से एग्जीक्यूटिव कमेटी भंग नहीं हुई है। यानी संगठन का मौजूदा ढांचा तत्काल खत्म नहीं हुआ है और अंदरूनी विवाद के बीच उसकी कार्यप्रणाली जारी है। दूसरी तरफ पूनम ढिल्लों ने आरोपों पर नाराजगी जताते हुए कहा कि उन पर और पद्मिनी कोल्हापुरे पर लगाए गए आरोप सामान्य असहमति से कहीं आगे की बात हैं।
उन्होंने कहा कि आरोपों की भाषा इतनी आपत्तिजनक थी कि मानहानि की कानूनी कार्रवाई पर भी विचार किया जा सकता था। पूनम के मुताबिक, कुछ लोगों की इच्छा थी कि संगठन में फैसले उनके हिसाब से हों। उन्होंने CAWT यानी Cine Artistes Welfare Trust का भी जिक्र किया और आरोप लगाया कि कुछ लोग इसके जरिए CINTAA के सदस्यों पर प्रभाव बनाए रखना चाहते थे। पूनम का कहना है कि जब यह कोशिश सफल नहीं हुई तो उनके और पद्मिनी के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए गए। उन्होंने यह भी कहा कि वह और पद्मिनी संगठन की भलाई के लिए लगातार काम कर रही हैं।
इस पूरे मामले में एक तरफ इस्तीफा देने वाले सदस्य संगठन में नए चुनाव और कामकाज में ज्यादा पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं, वहीं मौजूदा नेतृत्व आरोपों को गलत और आपत्तिजनक बता रहा है। इस्तीफा पत्र में जिन मुद्दों को उठाया गया है उनमें एग्जीक्यूटिव कमेटी की भूमिका, फैसलों में सलाह-मशवरे की कमी और संगठन के नियमों के पालन जैसे सवाल शामिल हैं। दूसरी तरफ पूनम ढिल्लों का कहना है कि उन पर लगाए गए आरोपों के पीछे निजी मतभेद हैं और उनके काम को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है।
CINTAA महासचिव उपासना सिंह ने भी शिकायतों का जिक्र किया है और कहा है कि इस्तीफा देने वाले सदस्यों ने अपनी आपत्तियां लिखित रूप में दी हैं। संगठन के भीतर यह मतभेद अब सार्वजनिक हो चुका है और इसे लेकर आगे की प्रक्रिया पर नजर बनी हुई है। इस बीच 11 सदस्यों के इस्तीफे की जानकारी और 8 निर्वाचित सदस्यों के संयुक्त इस्तीफे ने विवाद को और गंभीर बना दिया है। CINTAA में आगे कमेटी की बैठक, चुनाव की मांग और नेतृत्व के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर क्या प्रक्रिया अपनाई जाती है, इसे लेकर अब सदस्यों की नजर संगठन के अगले कदम पर है।
CINTAA में घमासान, 8 सदस्यों के इस्तीफे पर पूनम ढिल्लों का जवाब
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सिने एंड टीवी आर्टिस्ट्स एसोसिएशन यानी CINTAA में इन दिनों अंदरूनी विवाद खुलकर सामने आ गया है। संगठन की एग्जीक्यूटिव कमेटी के 8 निर्वाचित सदस्यों ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इस्तीफा देने वाले सदस्यों ने मौजूदा कामकाज के तरीके पर सवाल उठाते हुए नेतृत्व पर भरोसा नहीं होने की बात कही और नए चुनाव कराने की मांग रखी। इस पूरे विवाद के बीच CINTAA की अध्यक्ष पूनम ढिल्लों ने पहली बार खुलकर अपना पक्ष रखा है। उन्होंने अपने और वरिष्ठ उपाध्यक्ष पद्मिनी कोल्हापुरे पर लगाए गए आरोपों को खारिज करते हुए उनकी भाषा को बेहद आपत्तिजनक बताया। पूनम ने कहा कि संगठन के लिए काम करते हुए उन्होंने और पद्मिनी ने अपनी तरफ से काफी मेहनत की है।
उनका कहना है कि विवाद के पीछे कुछ ऐसे लोग हैं जो अपनी पसंद के मुताबिक चीजें नहीं होने से नाराज हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस्तीफा देने वालों में हेमंत पांडे, मुकेश ऋषि, साहिला चड्ढा, हेतल परमार, पुनीत इस्सर, विंदू दारा सिंह, विकास वर्मा और दीपक पाराशर शामिल हैं। इन सदस्यों ने संयुक्त इस्तीफे में आरोप लगाया कि एग्जीक्यूटिव कमेटी की पूरी जानकारी या सहमति के बिना कई अहम फैसले लिए गए। उनका दावा है कि CINTAA में सामूहिक चर्चा और संवैधानिक प्रक्रिया का पालन पहले जैसा नहीं रह गया है।
कुछ सदस्यों ने यह भी आरोप लगाया कि संगठन का संचालन सीमित लोगों के हाथ में सिमटता जा रहा है। इस्तीफा देने वालों ने नेतृत्व में भरोसे की कमी बताते हुए नए चुनाव की मांग की है। यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब CINTAA में अध्यक्ष के तौर पर पूनम ढिल्लों का कार्यकाल चल रहा है। पूनम मई 2024 में अध्यक्ष चुनी गई थीं और उनका कार्यकाल 2027 तक बताया गया है। विवाद के बाद संगठन के भीतर फैसले लेने की प्रक्रिया, कमेटी की भूमिका और पदाधिकारियों के अधिकार को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
इस्तीफा देने वाले सदस्यों की शिकायतों में मुख्य मुद्दा निर्णय लेने का तरीका बताया गया है। उनके मुताबिक कुछ महत्वपूर्ण मामलों में एग्जीक्यूटिव कमेटी से पर्याप्त सलाह या मंजूरी नहीं ली गई। शिकायत में सरकारी विभागों, इंडस्ट्री संगठनों और दूसरी संस्थाओं के साथ CINTAA की तरफ से किए गए संवाद का भी जिक्र किया गया है। सदस्यों का आरोप है कि कई मौकों पर संगठन की ओर से जवाब या प्रतिनिधित्व सामूहिक सहमति के बजाय व्यक्तिगत स्तर पर किया गया। उन्होंने इसे संस्था के सामूहिक दायित्व और तय नियमों के खिलाफ बताया।
कुछ आरोपों में यह भी कहा गया कि पदाधिकारियों ने निजी तौर पर नियुक्त वकीलों के साथ सरकारी दफ्तरों का दौरा किया। CINTAA की महासचिव उपासना सिंह ने इस्तीफों की पुष्टि करते हुए बताया कि कुल 11 सदस्यों ने इस्तीफा दिया है, जिनमें एग्जीक्यूटिव कमेटी के 8 निर्वाचित सदस्य शामिल हैं। हालांकि संगठन के कानूनी सलाहकार की ओर से यह स्पष्ट किया गया कि सिर्फ इन इस्तीफों से एग्जीक्यूटिव कमेटी भंग नहीं हुई है। यानी संगठन का मौजूदा ढांचा तत्काल खत्म नहीं हुआ है और अंदरूनी विवाद के बीच उसकी कार्यप्रणाली जारी है। दूसरी तरफ पूनम ढिल्लों ने आरोपों पर नाराजगी जताते हुए कहा कि उन पर और पद्मिनी कोल्हापुरे पर लगाए गए आरोप सामान्य असहमति से कहीं आगे की बात हैं।
उन्होंने कहा कि आरोपों की भाषा इतनी आपत्तिजनक थी कि मानहानि की कानूनी कार्रवाई पर भी विचार किया जा सकता था। पूनम के मुताबिक, कुछ लोगों की इच्छा थी कि संगठन में फैसले उनके हिसाब से हों। उन्होंने CAWT यानी Cine Artistes Welfare Trust का भी जिक्र किया और आरोप लगाया कि कुछ लोग इसके जरिए CINTAA के सदस्यों पर प्रभाव बनाए रखना चाहते थे। पूनम का कहना है कि जब यह कोशिश सफल नहीं हुई तो उनके और पद्मिनी के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए गए। उन्होंने यह भी कहा कि वह और पद्मिनी संगठन की भलाई के लिए लगातार काम कर रही हैं।
इस पूरे मामले में एक तरफ इस्तीफा देने वाले सदस्य संगठन में नए चुनाव और कामकाज में ज्यादा पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं, वहीं मौजूदा नेतृत्व आरोपों को गलत और आपत्तिजनक बता रहा है। इस्तीफा पत्र में जिन मुद्दों को उठाया गया है उनमें एग्जीक्यूटिव कमेटी की भूमिका, फैसलों में सलाह-मशवरे की कमी और संगठन के नियमों के पालन जैसे सवाल शामिल हैं। दूसरी तरफ पूनम ढिल्लों का कहना है कि उन पर लगाए गए आरोपों के पीछे निजी मतभेद हैं और उनके काम को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है।
CINTAA महासचिव उपासना सिंह ने भी शिकायतों का जिक्र किया है और कहा है कि इस्तीफा देने वाले सदस्यों ने अपनी आपत्तियां लिखित रूप में दी हैं। संगठन के भीतर यह मतभेद अब सार्वजनिक हो चुका है और इसे लेकर आगे की प्रक्रिया पर नजर बनी हुई है। इस बीच 11 सदस्यों के इस्तीफे की जानकारी और 8 निर्वाचित सदस्यों के संयुक्त इस्तीफे ने विवाद को और गंभीर बना दिया है। CINTAA में आगे कमेटी की बैठक, चुनाव की मांग और नेतृत्व के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर क्या प्रक्रिया अपनाई जाती है, इसे लेकर अब सदस्यों की नजर संगठन के अगले कदम पर है।
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