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जेट फ्यूल महंगा होने से एअर इंडिया ने बढ़ाया किराया, घरेलू उड़ानों पर 399 फ्यूल सरचार्ज
बिजनेस न्यूज
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और तेल कीमतों में उछाल का असर एविएशन सेक्टर पर; इंटरनेशनल फ्लाइट्स के किराए में करीब 15% बढ़ोतरी, कई एयरलाइंस ने भी टिकट दरें बढ़ाईं।
भारत की प्रमुख एयरलाइन एअर इंडिया ने बढ़ती परिचालन लागत के बीच घरेलू उड़ानों के टिकटों पर ₹399 का फ्यूल सरचार्ज लगाने का फैसला किया है। नई दरें 12 मार्च से लागू होंगी। वहीं अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के किराए में भी लगभग 15 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की गई है। एयरलाइन का कहना है कि जेट फ्यूल की कीमतों में तेज उछाल के कारण यह कदम उठाना पड़ा है।
घरेलू और अंतरराष्ट्रीय किराए पर असर
एअर इंडिया के अनुसार घरेलू उड़ानों के टिकट खरीदने वाले यात्रियों को अब किराए के अलावा ₹399 अतिरिक्त फ्यूल सरचार्ज देना होगा। यह बदलाव 12 मार्च से प्रभावी होगा।
इसी के साथ अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के किराए में भी करीब 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। उद्योग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि यदि जेट फ्यूल की कीमतों में तेजी जारी रहती है तो आने वाले समय में किराए में और इजाफा संभव है।
जेट फ्यूल की कीमतों में तेज उछाल
एविएशन उद्योग पर दबाव का मुख्य कारण जेट फ्यूल यानी एयर टरबाइन फ्यूल (ATF) की बढ़ती कीमतें हैं। हाल के दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला है।
विशेषज्ञों के अनुसार मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाली तेल आपूर्ति में बाधा की आशंका के कारण कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। जेट फ्यूल की कीमतें कुछ बाजारों में लगभग दोगुनी तक पहुंच गई हैं।
तेल बाजार के आंकड़ों के मुताबिक ब्रेंट क्रूड की कीमत हाल के दिनों में 90 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चली गई, जबकि कुछ समय पहले यह इससे काफी कम थी।
एयरलाइंस की लागत में फ्यूल की बड़ी हिस्सेदारी
एविएशन सेक्टर के विशेषज्ञ बताते हैं कि एयरलाइंस के कुल ऑपरेटिंग खर्च में जेट फ्यूल की हिस्सेदारी लगभग 30 से 40 प्रतिशत तक होती है। ऐसे में ईंधन की कीमतों में थोड़ी बढ़ोतरी भी कंपनियों की लागत पर बड़ा असर डालती है।
इसी वजह से एयरलाइंस कंपनियां अक्सर बढ़े हुए खर्च का बोझ किराए के रूप में यात्रियों पर डालने के लिए मजबूर हो जाती हैं। उद्योग से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में लागत को संतुलित रखने के लिए किराए में समायोजन जरूरी हो गया है।
वैश्विक एविएशन सेक्टर पर असर
तेल कीमतों में उछाल का असर केवल भारत तक सीमित नहीं है। दुनिया की कई प्रमुख एयरलाइंस ने भी टिकट दरों में बढ़ोतरी की घोषणा की है। कुछ कंपनियों ने अपने वित्तीय अनुमान भी वापस ले लिए हैं, क्योंकि बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है।
एविएशन विश्लेषकों के अनुसार यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं तो कई एयरलाइंस अपनी उड़ानों की संख्या घटा सकती हैं या कुछ विमानों को अस्थायी रूप से ग्राउंड भी कर सकती हैं।
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